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Tuesday, 25 March 2014

Namo से हर हर मोदी तक

 काशी एक धर्मनगरी होने और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जानी जाने वाली सांस्कृतिक नगरी है। काशी को मोक्षदायनी नगरी भी कहा जाता है। काशी को घाटों का शहर भी कहा जाता है| अस्सी घाट से लेकर वरूणा के मध्य स्थिति काशी क्षेत्र का अपना एक अलग महत्व है। काशी में एक बात और सामान है जो यहाँ के सभी हिन्दू साम्प्रदाय में विश्वास रखने वाले घरों में बोला जाता है वो धार्मिक वाक्य है "हर हर महादेव" आजकल इस धार्मिक भावनाओ से ओतप्रोत होकर बोले जाने वाले इस धार्मिक नारे को मोदी के अंध भक्त उनके नाम के आगे लगाकर "हर हर मोदी" बोल रहे है। 

हर हर महादेव को हर हर मोदी बोले जाने को लेकर वाराणसी के साधू संतो में ख़ासा रोष है। जहां पहले काशी के स्थानीय संत ने हर हर मोदी नारे का विरोध किया अब शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भी हर हर मोदी नारे पर ऐतराज जता दिया है। शंकराचार्य के इस नारे के विपक्ष में बयान देने से ये मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है आजकल वाराणसी संसदीय क्षेत्र दो वजहों से सभी की नज़रों में आ गई है पहली वजह भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी के चुनाव लड़ने और दूसरी वजह हर हर महादेव की जगह हर हर मोदी ने इसकी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू करा दी है। शंकराचार्य और काशी के विद्द्वानों ने इस बात को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के समक्ष रखा है। 

वैसे भाजपा और मोदी खेमा किसी भी तरह से बनारस के चुनाव को हलके में नहीं ले रहा है तभी आजकल भाजपा खेमे में इस बात की चर्चा भी जोरो पर है कि मोदी बनारस में बड़े अंतर से चुनाव तभी जीतेंगे जब यहाँ से कोई बड़ा मुस्लिम चेहरा उतरेगा| भाजपा में इस बात की चर्चा भी है कि 2009 लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे मुख्तार अंसारी को स्थानीय निवासी और भाजपाई मोदी के सामने खड़े देखना चाहते है। भाजपाइयों का ये भी मानना है अगर मोदी के सामने मुख्तार आते है तो मोदी यहां से चुनाव जीतेंगे ही, लेकिन मुख्तार अंसारी लड़े तो साम्प्रदायिक आधार पर मतों के ध्रुवीकरण के चलते मोदी की भारी मतों से जीत होगी यही वजह है कि धार्मिक भावनाओ को भी इन चुनावों से जोड़कर हर हर महादेव की जगह हर हर मोदी का नारा दिया गया है। 

वाराणसी संसदीय क्षेत्र में रोहनिया, वाराणसी दक्षिणी, वाराणसी उत्तरी, कैन्ट, सेवापुरी विधान सभायें आती है जिनमें से 3 पर भाजपा व एक-एक पर अपना दल व सपा का कब्जा है। वाराणसी उत्तरी से भाजपा के रविन्द्र जायसवाल, दक्षिणी से श्याम देव राय चौधरी उर्फ दादा, कैन्ट से श्रीमती ज्योत्सना श्रीवास्तव, सेवापुरी के सपा के सुरेन्द्र पटेल व रोहनिया से अपना दल की अनुप्रिया पटेल विधायक हैं। भाजपा ने मतों के ध्रुवीकरण के लिए नरेन्द्र मोदी को वाराणसी से अपना उम्मीदवार बनाया है जिसका उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों के साथ-साथ बिहार, झारखण्ड, मध्यप्रदेश की कई लोक सभा क्षेत्र प्रभावित होंगे। 

सपा ने इस बार अपना प्रत्याशी बदलते हुए अजय राय की जगह कैलाश चौरसिया को अपना उम्मीदवार बनाया है| बसपा ने पिछले चुनाव में अपना दल से लड़े विजय प्रकाश जायसवाल को अपना उम्मीदवार बनाया। कौमी एकता मंच ने मुख्तार अंसारी की पत्नी को उम्मीदवार घोषित किया है लेकिन कयास यह लगाया जा रहा है कि घोषी के साथ-साथ मुख्तार अंसारी वाराणसी से भी लड़ेंगे। कांग्रेस ने अभी अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। स्थानीय दावेदारों ने पूर्व सांसद डाॅ0 राजेश मिश्रा, पिन्डरा से चार बार चुनाव जीत रहें अजय राज का नाम प्रमुख है। परन्तु इधर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी नाम चर्चा में है। 

वाराणसी संसदीय क्षेत्र से 1996, 98 व 99 में भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल को विजय हासिल हुई थी। 2004 में कांग्रेस के डाॅ0 राकेश मिश्रा को जीत मिली थी। 2009 के चुनाव में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ0 मुरली मनोहर जोशी के सिर जीत का सेहरा बंधा था। डाॅ0 जोशी को 203122 निकटस्थ प्रतिद्वन्ती बसपा के मुख्तार अंसारी को 185911, सपा के अजय राय को 123874, कांग्रेस के डाॅ0 राजेश मिश्रा को 66386 और अपना दल के विजय प्रकाश जायसवाल को 65912 मत मिला था। वाराणसी संसदीय क्षेत्र में विभिन्न जाति धर्म व सम्प्रदाय के मतदाता रहते हैं। 

जातिगत आधार पर यदि मतदाताओं की संख्या पर नजर दौड़ाई जाय तो ब्राह्मण-191027, राजपूत-86217, यादव-95273, निषाद (बिन्द, मल्लाह, केवट)-172928, दलित-132442, भूमिहार -42416, राजभर-27401, चैहान-22931, कुशवाहा/मौर्य-74283, कुर्मी-152217, वैश्य-159102, मुस्लिम-252462, पाल-32241, कायस्थ-29945, प्रजापति-31466, बंगाली-44307, विश्वकर्मा-32634, चौरसिया -21016, सोनार-12613, नाई-9042 आदि सम्मिलित है। 

डाॅ0 मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी से कानपुर भेजे जाने के कारण ब्राह्मण समाज में नाराजगी है परन्तु समय के हिसाब से सब शान्त हो जायेगा। यही वजह है भाजपा वाराणसी सीट को हाट बनाये रखने के लिए लगातार वहां की अच्छी औरे बुरी बातों को मीडिया में हवा दे रही है। आजकल हर हर मोदी घर घर मोदी नारे ने सुर्खिया बटोर रखी है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी इस नारे की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर दिए है वही विपक्ष भी इस नारे को लेकर लगातार भाजपा पर हमलावर है लेकिन बनारस के मस्त लोग अपनी मस्ती में अभी भी हर हर मोदी के नारे लगा रहे है देखना है आगे ये नारा भाजपा को क्या रास्ता दिखाता है।

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