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Friday, 25 October 2013

I AM MALALA

नोबल शांति पुरस्कार की दौड़ में शामिल हुई पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्ष करने वाली मलाला युसुफजई आजकल पूरे विश्व में चर्चा का विषय बनी हुई है। कभी संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण देकर तो कभी अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात को लेकर, पर इन दिनों मलाला की सुर्ख़ियों में रहने की वजह बनी हैं उनकी अपनी किताब I AM MALALA | मलाल इस किताब को लेकर सुर्खियाँ बटोर रही है। 

अमेरिका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी ने मलाला की किताब I AM MALALA को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने का ऐलान किया है। पाकिस्तान की यह किशोरी दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई है, जिसे देखते हुए यूनिवर्सिटी उसके संस्मरण को लेने का फैसला किया है।

एक साल पहले स्कूल जाते हुए तालिबान के हमले का शिकार हुई मलाला युसुफजई ने सिर में गोली लगने के बावजूद मौत को पीछे छोड़ दिया मलाला ने हिम्मत नहीं हारी और इसके बाद भी अपने देश और आतंक प्रभावित इलाकों की लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों में लगी रही। इस किताब से मलाला के इन्हीं प्रयासों के बारे में जाना जा सकता है।

यूनिवर्सिटी के ग्लोबल वीमेन इंस्टिट्यूट (GWI) की निदेशक इल्सबर्ग ने कहा कि सिलेबस में यह लेशन ना सिर्फ छात्रों को शिक्षित करेगी, बल्कि मलाला जिन मुद्दों के लिए आवाज उठा रही है, उसे भी बढ़ावा देगी।हाल में ही मलाला ने कहा था कि मैं पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनना चाहती हूं और तब हर लड़की को स्कूल भेजूंगी। मेरी दुनिया भले ही बदल गई है, लेकिन मेरे इरादे अब भी नहीं बदले हैं। उन्होंने ये भी कहा मुझे कई बार भूतों से डर लगता है, लेकिन तालिबान से नहीं। मलाला ने कहा कि कट्टरपंथी नहीं चाहते कि लड़कियां स्कूल जाएं, क्योंकि वे डरते हैं।

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