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Tuesday, 13 August 2013

उत्तर प्रदेश की मीडिया में कितने प्रतिशत ठग है

दुर्गा शक्ति नागपाल मामले में चारो तरफ से घिर चुकी उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार के बचाव में अब मंत्री भी आ गए है, दुर्गा शक्ति मामले में जिस तरह से मीडिया ने अखिलेश यादव सरकार और खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की लानत मलानत की है उससे अब सरकार के वरिष्ठ मंत्री भी अपना आपा खोने लगे है। 

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन दुर्गा प्रकरण पर जहा पत्रकारों को आड़े हाथों ले रहे है, वही पत्रकारों को ठग भी कह रहे है। दुर्गा शक्ति प्रकरण में सरकार की जिस तरह खिंचाई प्रदेश की मीडिया ने की, उससे खफा सरकार अब पत्रकारों और मीडिया पर ही वार कर रही है। 

स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने मीडिया पर आरोप लगाते हुये कहा की लखनऊ की मीडिया में बैठे 100% पत्रकारों में से 95% सही तो 5% ठग है जो ट्रांसफर पोस्टिंग के धंधे में लगे हुये है। मंत्री ने इन पांच प्रतिशत पत्रकारों को "काली भेड़ो" की संज्ञा से भी नवाजा।

मंत्री ने कहा इन "काली भेड़ो" को सुधारने का वक़्त आ गया है, ये कुछ ज्यादा ही गड़बड़ कर रहे है, इन्हें अब सुधारने की जरुरत है। दुर्गा शक्ति प्रकरण में सरकार द्वारा मीडिया पर किये गए इस नये हमले ने मंत्री के साथ मीडिया के चरित्र को भी उजागर कर दिया।

Tuesday, 6 August 2013

दुर्गा बेदाग़ है वक्फ भी कह रहा है

इसे सरकारी चूक कहें या स्थानीय अभिसूचना इकाई की नाकामी| मस्जिद की दीवार गिरने की खबर दी थी उपजिलाधिकारी जेवर ने जबकि सरकार के कानो में नाम सुनाई दिया दुर्गा शक्ति नागपाल का| प्रदेश की अखिलेश सरकार अपनी कौन सी चूक को छिपाना चाहती है, ये समझ से परे है| रोजाना प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जिस एलआईयू रिपोर्ट को आगे कर दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को सही ठहरा रहे है वही रिपोर्ट आज सरकार के गले की हड्डी बन गई है| 

अब इसे स्थानीय अभिसूचना इकाई के उस अधिकारी की कार्यशैली समझे या उसके बुद्धि की बलिहारी या उस अधिकारी की लापरवाही जिसने गौतमबुद्ध नगर के कादलपुर गाँव में मस्जिद की दिवार गिराने की रिपोर्ट में एसडीएम जेवर का नाम भेजा लेकिन सरकार के कानो तक सिर्फ एक नाम पहुंचा वो था जीबी नगर की उपजिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल का| वजह साफ़ थी सरकार को उनके उस इलाके के नेता इस नाम को इतनी बार सुना चुके थे कि सरकार इस नाम को ही उस इलाके से हटाने की पूरी तैयारी कर चुकी थी और उसने वह किया भी| 

आज सरकार अपने ही एक आदेश को लेकर उलझ गई है, प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अदूरदर्शिता का आलम ये है कि उन्होंने गौतमबुद्धनगर से भेजी गई एलआईयू की रिपोर्ट जिसमें साफ़ लिखा गया था कि मस्जिद के निर्माण की सूचना सीओ, उपजिलाधिकारी जेवर व थाना अध्यक्ष द्वारा 27 जुलाई को 1 बजे मौके पर पहुंचकर निर्माणाधीन दीवार को गिरवा दिया गया| स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस मस्जिद के निर्माण की सूचना न होने की वजह से इस निर्माण को गिरवाया गया| 

प्रदेश सरकार के लिए ये मामला अब ना उगलते बन रहा है ना ही निगलते| इधर वक्फ बोर्ड दनकौर के सदस्य कादिर खान जायसवाल कई साल से भू-माफिया से लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि इस माफिया ने वक्फ बोर्ड की करोड़ों की जमीन हड़प रखी है। उनकी शिकायत पर ही दुर्गाशक्ति कार्रवाई कर रही थी, जिसकी सजा उन्हें भुगतनी पड़ी।

हजरत सैयर भूरेशाह कमिटी के सेक्रेटरी कादिर खान ने बताया कि उन्होंने गांव का दौरा किया और काफी सारे लोगों व बुजुर्गों से बात की। उन्होंने बताया, 'गांव के कुछ लोग कमिटी से जुड़े हैं। हमें पता चला है कि दुर्गा सिर्फ स्थिति की समीक्षा करने के लिए गई थीं। निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार ढहाए जाने से उनका कोई लेना-देना नहीं है।' 

यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड से जुड़ी एक कमिटी ने गांव का दौरा करने के बाद कहा है कि दीवार गिराने में आईएएस अधिकारी दुर्गा की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने गांव वालों को सिर्फ सही प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी थी। कमिटी ने उल्टे दुर्गा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने तो वक्फ बोर्ड की कब्जा कर ली गईं जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया था, जिसकी वजह से भू और रेत माफिया ने उन्हें सस्पेंड करा दिया।

जापान मौन है

6 अगस्त, 1945 की सुबह अमरीकी वायु सेना ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम लिटिल ब्वॉय बम गिराया था। आज से 68 वर्ष पहले अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इसमें लाखों की तादात में लोग मारे गए थे। यह 20वीं सदी की सबसे बड़ी बड़ी घटना थी।जापान के लोगो ने उस काले दिन को याद करने के लिए पीस मैमोरियल पार्क में एकत्रित होकर इस हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

परमाणु बम गिराये जाने के इस मौके पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो ने पीस मैमोरियल पार्क में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा वो घटना आज तक सबसे दुखद घटना थी। इस हमले की 68 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में हजारों लोगों ने भाग लिया।

तीन दिनों बाद अमरीका ने नागासाकी शहर पर फैट मैन परमाणु बम गिराया। यह मानव-जाति के इतिहास में परमाणु हथियारों का सबसे पहला प्रयोग था। यह परमाणु बम सैन्य दस्तों और सैन्य अड्डों पर ही नहीं बल्कि रिहायशी कस्बों पर भी गिराए गए थे। इस घटना के काफी वर्ष बाद तक भी यहां पर परमाणु बम के धमाके का असर देखा जाता रहा।

परमाणु हमले के दो से चार माह के अंदर ही करीब 90,000 से 1,60,000 तक हिरोशिमा में और 60,000 से 90,000 तक नागासाकी में लोगों की मौत हो गई। इनमें से आधे से अधिक तो पहले ही दिन काल की गाल में समा गए। हिरोशिमा की हेल्थ विभाग का आंकलन है कि साठ फीसद तो केवल बमबारी की वजह से आग की लपटों में जल गए।

सचिन बने आकर्षण के केंद्र

क्रिकेट के मैदान से सियासी मैदान पर चौके छक्के लगाने आज मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मानसून सत्र के पहले दिन उच्च सदन राज्य सभा पहुंचे। सचिन तेंदुलकर संसदीय राज्यमंत्री राजीव शुक्ला के साथ संसद सत्र में शामील होने उच्च सदन पहुंचे थे। 

संसद पहुंचकर सचिन तेंदुलकर सीधे अपनी सीट नंबर 103 पर जाकर बैठ गए, उनके बगल में राज्यसभा सांसद जावेद अख्तर बैठे हुए थे, जिनका अभिवादन करने के बाद सचिन तेंदुलकर अपनी सीट पर बैठे। राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी के सदन में आने के बाद सचिन तेंदुलकर ने उनका अभिवादन किया। 

हामिद अंसारी के भारतीय टीम के चैम्पियंस ट्राफी जीतने पर सदन की तरफ से टीम को बधाई दी गई, सचिन तेंदुलकर ने राज्यसभा के सभापति द्वरा भारतीय टीम को बधाई दिए जाने पर मेज थपथपा कर अभिवादन किया। 

बीते वर्ष सचिन तेंदुलकर को फिल्म अभिनेत्री रेखा और उद्योग जगत की बड़ी हस्ती अनु आगा के साथ उच्च सदन में मनोनित किया गया था। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सदन की करवाई की पत्रावली को पढ़कर सचिन तेंदुलकर ने सदन में होने वाली कार्यवाही के बारे में जानकारी ली। 

सचिन तेंदुलकर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आने के बाद उनका भी अभिवादन किया, संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने सचिन तेंदुलकर को प्रधानमंत्री से मिलवाया। सचिन के सदन में मौजूद रहने के दौरान उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर सदन के दर्शक दीर्घा में मौजूद रही।

सौ करोड़ी क्लब में शामिल हुई "मिल्खा"

भाग मिल्खा भाग फिल्म भी सौ करोड़ क्लब में शामिल हो गईं। इस क्लब में शामिल होने वाली यह भारत की 21वीं फिल्म है। 12 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म ने 24वें दिन यह उपलब्धि हासिल कर ली है। 

राकेश ओम प्रकाश मेहरा की एथलीट मिल्खा सिंह की जीवन पर बनाई गई फरहान अख्तर स्टारर फिल्म भाग मिल्खा भाग कमाई के मामले में बॉलीवुड के 100 करोड़ क्लब में शामिल हो गई है| फिल्म ने रविवार तक 104 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है|

खास बात यह है कि ‘भाग मिल्खा भाग’ सौ करोड़ क्लब में शामिल होने वाली एकमात्र ऐसी फिल्म है जिसमें कोई स्टार नहीं है और शानदार कंटेंट के कारण इस फिल्म ने यह सफलता हासिल की है।

"भाग मिल्खा भाग" अभी भी बॉक्स ऑफिस पर ट्रेन की तरह दौड रही है। "भाग मिल्खा भाग" को महज चार सप्ताह हुए कि 100 करोड के क्लब में शामिल होने की दस्तक दे चूंकी है। "भाग मिल्खा" भाग ने चौथे सप्ताह में 1 करोड का कारोबार किया। 

फरहान अख्तर की फिल्म भी अब 100 करोड के क्लब में शामिल हो जाएंगी। "भाग मिल्खा भाग" ने चार सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर लम्बी छंलाग लगाई है। इससे पहले 3 इडियट्स ही कारनामा कर पाई है।

IAS, IPS को वापस बुला ले केंद्र

दुर्गा शक्ति नागपाल मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार अपने अपने अधिकारों को लेकर आमने सामने आ गई है। दुर्गा के निलंबन पर दोनों सरकारों में तनातनी इतनी बढ़ चुकी है की आज समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव ने तल्खी भरे शब्दों में कहा कि केंद्र चाहे तो अपने सभी IAS, IPS को वापस बुला लें हम प्रांतीय सेवा के अधिकारियों से राज्य के सरकारी काम चला लेंगे| 

केंद्र की दखल के बाद सपा सूत्रों से आ रही ख़बरों के मुताबिक सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव कांग्रेस नेतृत्व और सोनिया गांधी के इस मामले में दखल से खासे नाराज है। वहीँ, आज उत्तर प्रदेश सरकार ने दुर्गा शक्ति नागपाल से कुछ मुद्दों पर कारन जानने के लिए चार्जशीट थमा दी है। 

चार्जशीट में यूपी सरकार आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन वापस लेने को तैयार नहीं है| अखिलेश सरकार ने दुर्गा को चार्जशीट सौंप दी है और उनसे पूछा है कि धार्मिक स्थल की दीवार गिराने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया| दुर्गा को 45 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया है। यूपी सरकार ने चार्जशीट की एक कॉपी केंद्र को भी भेजी है। चार्जशीट में दुर्गा की प्रशासनिक क्षमता खमता पर सवाल उठाये गए हैं और कहा गया है कि उन्होंने निर्माण गिराने में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

गौतमबुद्ध नगर की एसडीएम दुर्गाशक्ति नागपाल को 27 जुलाई को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार गिराने का आदेश देने के लिए निलंबित कर दिया गया था। दुर्गा को निलंबित किये जाने के बाद यूपी कार्रवाई का सार्वजनिक तौर पर काफी विरोध हो रहा है लेकिन यूपी के सीएम अखिलेश यादव उन्हें सस्पेंड करने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। 

प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि राज्य में जो भी गलती करेगा उसे सज़ा जरुर मिलेगी, कुछ मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वही केन्द्रीय कार्मिक मंत्री नारायण स्वामी ने दुर्गा की तरफ से शिकायत मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 

दुर्गा शक्ति मामले पर विपक्ष अपनी राजनीति भी खूब चमका रहा है। कभी मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी रहे और मुलायम सरकार के दौरान अफसरों के आका अमर सिंह ने दुर्गा नागपाल पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि सरकार की मंशा इस मामले में साफ़ नही है नहीं तो जिस प्रदेश में अब तक दो दर्जन से ज्यादा दंगे हुये, अधिकारियों की कौन कहे एक सिपाही को भी निलंबित नहीं किया गया।

दुर्गा मामले में प्रदेश और केंद्र सरकार की तल्खी का आलम ये है कि जहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईस मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दे रहे है वहीँ केंद्र के रूख की वजह से प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी के नेताओं ने अब धमकियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। 

रामगोपाल यादव की ताज़ा धमकी कि केंद्र अपने सभी अधिकारीयों को वापस बुला ले ये एक संघ के राज्य होने के नाते उत्तर प्रदेश के लिए सही नही है। संघीय व्यवस्था के अनुसार कार्यपालिका उतनी ही जरुरी है जितनी न्यायपालिका, विधायिका और व्यवस्थापिका। 

रामगोपाल यादव प्रदेश के सरकारी कामकाज को अपने प्रांतीय सेवा के अधिकारियों के माध्यम से करवाने की धमकी दे रहे है जबकि कागजी तौर पर ये व्यवहारिक नहीं है। बहरहाल इस मुद्दे पर फैसला जो हो लेकिन देश का नेतृत्व और देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में एक अफसर को लेकर छिड़ी तनातनी ने राजनीति और सरकारी कामकाज की कार्यशैली को उजागर कर दिया है।

टिकट चाहिये मुझसे नहीं छोटे भाई से मिले


छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी इन दिनों टिकट के दावेदारों से बेहद परेशान हैं। उन्होंने अपने बंगले के गेट पर एक नोटिस बोर्ड ही लगवा दिया, जिस पर लिखा है| टिकट के लिए मुझ से नहीं, मेरे छोटे भाई (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत) से संपर्क करें। 

विदित हो कि जोगी के आदिवासी मुहिम के बावजूद उनके राजनीतिक विरोधी व केंद्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत को पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाकर आलाकमान ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है और महंत को फ्रीहैंड भी दे दिया है। महंत ने भी अध्यक्ष बनने के बाद जोगी को अपना बड़ा भाई बताया है। इन दिनों जोगी व महंत एक दूसरे पर भाई-भाई कहकर निशाना भी साध रहे हैं। 

एक बार फिर जोगी ने यह बोर्ड लगाकर यह जताने की कोशिश की है कि वे अपने कथित छोटे भाई के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि पार्टी में गुटबाजी को रोकी जा सके और प्रदेश की सत्ता पर कांग्रेस काबिज हो सके। इस बात का भरोसा जोगी ने पार्टी हाईकमान को भी दिलाया है।

जोगी के बंगले के करीबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन द्वारा अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहे जोगी ने शुक्रवार को अपने बेटे अमित जोगी को स्पष्ट निर्देश दिया था कि बंगले में एक नोटिस बोर्ड लगाकर टिकट के दावेदारों को उनसे नहीं, बल्कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महंत से मिलने के लिए कहा जाए। 

दो दिन पूर्व दिल्ली से लौटने पर समर्थकों ने जोगी का जोरदार स्वागत किया था। टिकट के दावेदारों को उम्मीद थी कि हर बार की तरह इस बार भी जोगी ही उनकी नैया पार लगाएंगे, पर अनुग्रह बंगले में जोगी के तेवर देखकर समर्थकों को खासी निराशा हुई। बंगले के गेट पर लगे सूचना बोर्ड को देखकर उनके कट्टर समर्थक विधायक भी पसोपेश में हैं। 

गौरतलब है कि जोगी पखवाड़े भर से दिल्ली में ही आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष की मुहिम को आगे बढ़ाने में लगे थे। इस दौरान उनकी आलाकमान से दो बार मुलाकात हुई। इस बीच उन्हें गुजरात का राज्यपाल बनाने के प्रस्ताव की चर्चा है।