इसे सरकारी चूक कहें या स्थानीय अभिसूचना इकाई की नाकामी| मस्जिद की दीवार गिरने की खबर दी थी उपजिलाधिकारी जेवर ने जबकि सरकार के कानो में नाम सुनाई दिया दुर्गा शक्ति नागपाल का| प्रदेश की अखिलेश सरकार अपनी कौन सी चूक को छिपाना चाहती है, ये समझ से परे है| रोजाना प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जिस एलआईयू रिपोर्ट को आगे कर दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को सही ठहरा रहे है वही रिपोर्ट आज सरकार के गले की हड्डी बन गई है|
अब इसे स्थानीय अभिसूचना इकाई के उस अधिकारी की कार्यशैली समझे या उसके बुद्धि की बलिहारी या उस अधिकारी की लापरवाही जिसने गौतमबुद्ध नगर के कादलपुर गाँव में मस्जिद की दिवार गिराने की रिपोर्ट में एसडीएम जेवर का नाम भेजा लेकिन सरकार के कानो तक सिर्फ एक नाम पहुंचा वो था जीबी नगर की उपजिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल का| वजह साफ़ थी सरकार को उनके उस इलाके के नेता इस नाम को इतनी बार सुना चुके थे कि सरकार इस नाम को ही उस इलाके से हटाने की पूरी तैयारी कर चुकी थी और उसने वह किया भी|
आज सरकार अपने ही एक आदेश को लेकर उलझ गई है, प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अदूरदर्शिता का आलम ये है कि उन्होंने गौतमबुद्धनगर से भेजी गई एलआईयू की रिपोर्ट जिसमें साफ़ लिखा गया था कि मस्जिद के निर्माण की सूचना सीओ, उपजिलाधिकारी जेवर व थाना अध्यक्ष द्वारा 27 जुलाई को 1 बजे मौके पर पहुंचकर निर्माणाधीन दीवार को गिरवा दिया गया| स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस मस्जिद के निर्माण की सूचना न होने की वजह से इस निर्माण को गिरवाया गया|
प्रदेश सरकार के लिए ये मामला अब ना उगलते बन रहा है ना ही निगलते| इधर वक्फ बोर्ड दनकौर के सदस्य कादिर खान जायसवाल कई साल से भू-माफिया से लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि इस माफिया ने वक्फ बोर्ड की करोड़ों की जमीन हड़प रखी है। उनकी शिकायत पर ही दुर्गाशक्ति कार्रवाई कर रही थी, जिसकी सजा उन्हें भुगतनी पड़ी।
हजरत सैयर भूरेशाह कमिटी के सेक्रेटरी कादिर खान ने बताया कि उन्होंने गांव का दौरा किया और काफी सारे लोगों व बुजुर्गों से बात की। उन्होंने बताया, 'गांव के कुछ लोग कमिटी से जुड़े हैं। हमें पता चला है कि दुर्गा सिर्फ स्थिति की समीक्षा करने के लिए गई थीं। निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार ढहाए जाने से उनका कोई लेना-देना नहीं है।'
यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड से जुड़ी एक कमिटी ने गांव का दौरा करने के बाद कहा है कि दीवार गिराने में आईएएस अधिकारी दुर्गा की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने गांव वालों को सिर्फ सही प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी थी। कमिटी ने उल्टे दुर्गा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने तो वक्फ बोर्ड की कब्जा कर ली गईं जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया था, जिसकी वजह से भू और रेत माफिया ने उन्हें सस्पेंड करा दिया।
अब इसे स्थानीय अभिसूचना इकाई के उस अधिकारी की कार्यशैली समझे या उसके बुद्धि की बलिहारी या उस अधिकारी की लापरवाही जिसने गौतमबुद्ध नगर के कादलपुर गाँव में मस्जिद की दिवार गिराने की रिपोर्ट में एसडीएम जेवर का नाम भेजा लेकिन सरकार के कानो तक सिर्फ एक नाम पहुंचा वो था जीबी नगर की उपजिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल का| वजह साफ़ थी सरकार को उनके उस इलाके के नेता इस नाम को इतनी बार सुना चुके थे कि सरकार इस नाम को ही उस इलाके से हटाने की पूरी तैयारी कर चुकी थी और उसने वह किया भी|
आज सरकार अपने ही एक आदेश को लेकर उलझ गई है, प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अदूरदर्शिता का आलम ये है कि उन्होंने गौतमबुद्धनगर से भेजी गई एलआईयू की रिपोर्ट जिसमें साफ़ लिखा गया था कि मस्जिद के निर्माण की सूचना सीओ, उपजिलाधिकारी जेवर व थाना अध्यक्ष द्वारा 27 जुलाई को 1 बजे मौके पर पहुंचकर निर्माणाधीन दीवार को गिरवा दिया गया| स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस मस्जिद के निर्माण की सूचना न होने की वजह से इस निर्माण को गिरवाया गया|
प्रदेश सरकार के लिए ये मामला अब ना उगलते बन रहा है ना ही निगलते| इधर वक्फ बोर्ड दनकौर के सदस्य कादिर खान जायसवाल कई साल से भू-माफिया से लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि इस माफिया ने वक्फ बोर्ड की करोड़ों की जमीन हड़प रखी है। उनकी शिकायत पर ही दुर्गाशक्ति कार्रवाई कर रही थी, जिसकी सजा उन्हें भुगतनी पड़ी।
हजरत सैयर भूरेशाह कमिटी के सेक्रेटरी कादिर खान ने बताया कि उन्होंने गांव का दौरा किया और काफी सारे लोगों व बुजुर्गों से बात की। उन्होंने बताया, 'गांव के कुछ लोग कमिटी से जुड़े हैं। हमें पता चला है कि दुर्गा सिर्फ स्थिति की समीक्षा करने के लिए गई थीं। निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार ढहाए जाने से उनका कोई लेना-देना नहीं है।'
यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड से जुड़ी एक कमिटी ने गांव का दौरा करने के बाद कहा है कि दीवार गिराने में आईएएस अधिकारी दुर्गा की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने गांव वालों को सिर्फ सही प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी थी। कमिटी ने उल्टे दुर्गा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने तो वक्फ बोर्ड की कब्जा कर ली गईं जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया था, जिसकी वजह से भू और रेत माफिया ने उन्हें सस्पेंड करा दिया।

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