जैसा कि आपको पता है दवा कारोबारी सौरभ जैन की पत्नी रजनी जैन को भी सीबीआई ने एनआरएचएम घोटाले के एक मामले में आरोपी बना रखा है उसे सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने भगौड़ा घोषित कर दिया है। रजनी के खिलाफ 15 मई को कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किए थे। सीबीआई रजनी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल कर चुकी है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 जून को होगी।
15 मई को सौरभ जैन ने सीबीआई कर्मी को दी गालियाँ कहा करा दूंगा ट्रांसफर
फिलहाल सौरभ उसकी पत्नी रजनी और भाई विवेक जैन पर क़ानूनी शिकंजा कस चुका है लेकिन इनकी अकड़ है की जाती ही नहीं| हाल ही में सौरभ ने एक सीबीआई कर्मी के साथ गाली गलौज की है|
सीबीआई हेडकांस्टेबल वीर सिंह ने कोर्ट को बताया कि वो जब रजनी के विरुद्ध जमानती वारंट लेकर मुरादाबाद गया था उसे घर पर सौरभ जैन मिला| सौरभ ने रजनी के ना होने की बात कही और इसके बाद अपने वकील अरविंद मोहन को बुला लिया| उसके बाद सौरभ और अरविंद ने उसके साथ गाली गलौज की और कोर्ट के लिए भी अपशब्द प्रयोग किये| हेडकांस्टेबल ने कोर्ट को बताया कि सौरभ ने धमकी दी है कि कोर्ट के पीठासीन अधिकारी का तीन से चार हफ़्तों में ट्रांसफर करा देगा।
वीर सिंह की शिकायत को न्यायमूर्ति ने गंभीरता से लेकर जहाँ सौरभ और उसके वकील को लताड़ा, वहीँ दूसरी ओर रजनी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि 29 मई तक रजनी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए।
आपको बता दें रजनी के खिलाफ सीबीआई ने अप्रैल में चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद से रजनी एक बार भी कोर्ट में तारीख पर नहीं पहुंची। 2 मई को कोर्ट ने रजनी के जमानती वारंट जारी किए थे। एनआरएचएम घोटाले में सौरभ उसकी पत्नी रजनी और भाई विवेक जैन आरोपी हैं। इनमें से विवेक जेल में है और सौरभ को जमानत मिल चुकी है।
सौरभ के काले कारोबार में बराबर की हिस्सेदार है रजनी जैन
सौरभ जैन की पत्नी रजनी की फर्म सिद्धि ट्रेडर्स, मुरादाबाद को यूपी स्माल स्केल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन (यूपीएसआईसी) ने 14 सितंबर 2010 को ठेका दिया था। इस फर्म पर यूपीएसआईसी की इतनी ज्यादा मेहरबान थी कि इसे 13.69 करोड़ का ठेका देने के साथ ही तीन करोड़ रुपए एडवांस दे दिए गये। यह सारा पैसा फर्म के पास रखे सामानों के लिए बगैर किसी बैंक गारंटी लिए ही दे दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सारा काम यूपीएसआईसी और परिवार कल्याण महानिदेशालय के बीच हुए करार में तय दाम से बहुत ज्यादा रेट पर किया गया।
यह भी जानकारी मिली है कि काम आधा-अधूरा हुआ लेकिन पैसा पूरा वसूल लिया गया। उदहारण के तौर पर उसे स्वास्थ्य उपकेन्द्रों पर 105 रुपए की दर से 20621 स्थानों पर वाल पेंटिंग करनी थी, लेकिन उसने केवल 10825 वाल पेंटिंग की और 200 रुपए की दर से पैसा लिया। यही नहीं उसकी फर्म को जिला अस्पतालों पर 804 स्थानों पर वाल पेंटिंग 700 रुपए की दर से करनी थी। उसने काम तो 450 स्थानों पर किया और 700 की जगह 1250 रुपए की दर से पैसा वसूला। इस फर्म ने होर्डिंग, वाल पेटिंग, बैनर, फ्लैक्स, ग्लोसाइन बोर्ड लगाने का सारा ठेका लिया पर किसी भी जिले में पूरा काम नहीं किया। आधा-अधूरा काम और दोगुना दाम वसूलने से 4.32 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च कर दिए गये।
आपको बता दें की इतना तो कुछ भी नहीं था, सौरभ जैन की फर्म गुरु कृपा इंटरप्राइजेज का मूल काम रजिस्टर बनाना, स्टेशनरी की आपूर्ति और फर्नीचर की आपूर्ति थी। इसका वाणिज्य कर विभाग में वैट पंजीकरण इसी धंधे के रूप में है, लेकिन उसे 4.75 करोड़ का ठेका एमवीए सीरिंज, आईयूडी किट और सर्जिकल बाथरूम स्केल सप्लाई करने के लिए दे दिया गया। जैन की ही दूसरी फर्म कपिल मेडिकल एजेंसी को नसबंदी किट, आवोडोफर साल्यूशन, सर्जिकल ग्लब्स, हैण्ड वाश साल्यूशन, साल्ट टेस्टिंग किट, ग्लूटेटिहाइड साल्यूशन सप्लाई का ठेका दिया गया। यह सारा ठेका 5.93 करोड़ का था। यूपीएसआईसी ने बगैर किसी बैंक गारंटी के 4.42 करोड़ सौरभ जैन की फर्म को दे दिया गया|

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