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Friday, 31 May 2013

कर्मा को मारने से पहले उनकी अंतिम इच्छा पूछी नक्सलियों ने

बस्तर। महेंद्र कर्मा को बस्तर का शेर कहा जाता था, कर्मा की मौत भी शेर की तरह हुई, महेंद्र कर्मा को मारने से पहले नक्सलियों ने उनसे उनकी अंतिम इच्छा भी पूछी और उनकी इच्छा को पूरा किया उसके बाद उन्हें गोली मारी लेकिन बस्तर का वो शेर गोली लगने के बाद भी गिरा नहीं तब उसकी टांगो को तोड़ा गया उसके बाद उसे चाकुओ से गोदकर मार दिया गया। 

पहली नज़र में ये लाइने किसी फिल्म के स्क्रिप्ट का हिस्सा सरीखी लग रही है लेकिन ये सच है। महेंद्र कर्मा को मारने के लिए नक्सलियों ने एक पूरी पटकथा तैयार की थी। नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा को घेरने के लिए पहले उनकी रेकी कि उसके बाद दरभा घाटी में कांग्रेस परिवर्तन यात्रा में उन्हें घेर लिया। 

महेंद्र कर्मा की शिनाख्त करने के बाद नक्सली उन्हें एक किनारे ले गए और उनका हाथ पीछे की तरफ बाँध दिया। नक्सली जिन्होंने परिवर्तन रैली पर हमला किया उनमे दस से बाढ़ की संख्या में हार्ड कोर्ड महिला नक्सली भी थी जो अलग अलग जगहों से इस आपरेशन को अंजाम देने के लिए बुलाई गई थी। उन महिला नक्सलियों ने ही कर्मा को अपने कब्जे में लिया और उन्हें मारने से पहले उनकी अंतिम पूछी। 

नक्सलियों ने पूछा कि वो नए कपडे पहनना पसंद करेंगे या खाना खाना इतना पूछते ही एक महिला नक्सली ने महेंद्र कर्मा को पीछे से गोली मार दी कर्मा गोली लगने के बाद भी गिरे नहीं तब अपने इंतकाम की आग ठंडी करने के लिए महिला नक्सलियों ने कर्मा का पैर लकड़ी से मार कर तोड़ दिया। कर्मा गिर पड़े तब महिला नक्सलियों ने उन्हें चाकुओ से करीब 78 बार गोदा इसी में महेंद्र कर्मा की मौत हो गई। 

महेंद्र कर्मा पर जो बीती उसका आँखों देखा हाल बताया दो आदवासियों ने जो सीआरपीएफ के कोबरा पोस्ट कमांडोज के पास आये थे। आदिवासियों ने आँखोदेखी हाल बताते हुए कहा नक्सलियों ने हैवानियत की साडी हदे पार कर दी थी। सलवा जुडूम अभियान का बदला नक्सलियों ने महेन्द्र कर्मा से ऐसे लिया जैसे उन्होंने किसी फिल्म की पटकथा को लिखा था।

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