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Friday, 31 May 2013

कुछ जश्न मना रहे थे,वो मर रहा था,

रायपुर। नक्सलियो ने 'सलवा जुडूम' के संस्थापक महेंद्र कर्मा को गोलियों से भूनने के बाद जमकर नाच गाना किया। नक्सली अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए महेंद्र कर्मा के मरने के बाद भी उन्हें बन्दूक की बटो से मार रहे थे, साथ ही मृत शरीर में लगातार गोलियां उतार रहे थे। 

महेंद्र कर्मा 'सलवा जुडूम' के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आदवासी इलाकों में ग्रामीणों के बीच जनजागरण आभियान चला रहे थे। यही बात नक्सली संगठनो को नागवार गुजर रही थी| 2005 में जब महेंद्र कर्मा ने सलवा जुडूम की शुरुआत की तब किसी को ये खबर नहीं थी कि एक नेता और अगुवाकी सोच देश में मजबूती से अपनी जड़े जमा चुकी माओ समस्या के नेताओं को इतनी नागवार गुजरेगी कि वो उस नेता को ख़त्म करने के लिए हमला दर हमला करेंगे और अंत में उसे मारने के बाद जश्न भी मनायेंगे ।

दहशत का आलम ये था कि संगीनों के साए में रहने वाले बड़े बड़े नेता उन्ही संगीनों से डरे हुए थे। चारों तरफ सिर्फ गोलियां चल रही थी और देश प्रदेश की जनता की अगुवाई करने वाले नेता गाड़ियों में अपनी जान बचाने के लिए सीटों के नीचे छुपे हुए थे लेकिन 'बस्तर का शेर' कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा ने अपना नाम लेने पर ना सिर्फ उन्हें ललकारा बल्कि खुद ही मोर्चा लेने की कोशिश करने लगे| महेंद्र कर्मा के सामने आते ही नक्सलियों ने न सिर्फ उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया बल्कि नाच गाकर अपना महेंद्र कर्मा के प्रति मन में बैठा आक्रोश भी निकाल दिया। 

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बीते शनिवार की शाम हुए नक्सलियों के भीषण हमले में मारे गए महेंद्र कर्मा प्रदेश को नक्सल समस्या से मुक्त कराना चाहते थे। छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाकों में नक्सलियों का सामना करने के लिए 'सलवा जुडूम' की शुरुआत की गई। 'सलवा जुडूम' का अर्थ है ‘शांति मार्च’| छोटे स्तर से शुरु हुए आदिवासियों के इस मूवमेंट को बाद में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने भी अपना समर्थन देना शुरु कर दिया। 'सलवा जुडूम' के कार्यकर्ताओं को नक्सलियों से सामना करने के लिए हथियार दिए गए। असल में 'सलवा जुडूम' की शुरुआत साल 2005 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर इलाके से हुई। धीरे-धीरे बड़ी तादाद में आदिवासी इस मूवमेंट से जुड़ते गए। 

नक्सली हमले में मारे गए महेंद्र कर्मा छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेता थे। वो 2003 से 2008 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। वर्ष 2005 में उन्होंने नक्सलवादियों से निपटने के लिए 'सलवा जुडूम' की स्थापना की। तब उनके इस कदम की मुख्यमंत्री रमन सिंह ने काफी सराहना की थी। सरकार ने 'सलवा जुडूम' को अपना समर्थन दिया था। 

महेंद्र कर्मा ने नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए जनजागरण एवं 'सलवा जुडूम' अभियान में खुलकर हिस्सा लिया था। तभी से नक्सली उनके जान के दुश्मन बन गए थे। इससे पहले भी नक्सली तीन बार महेंद्र कर्मा पर हमला कर चुके हैं, जिसमें वह बाल-बाल बचे थे। महेंद्र कर्मा पर नक्सलियों ने यह चौथी बार हमला किया।

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