कोलकाता। IPL सीजन 6 खत्म हो गया है लेकिन आईपीएल की शुरुआत 2008 में एक व्यवसाई के दिमाग से निकली चमक दमक भरी दुनिया की ऐसी कल्पना थी, जिसे साकार भी वही व्यक्ति कर सकता था जिसके दिमाग की ये उपज थी। इस व्यक्ति का नाम था ललित मोदी जिसने क्रिकेट को ऐसा व्यवसाई रूप दे दिया जिसके पीछे आज दुनिया के वो सभी देश पागल है जो क्रिकेट खेलते है और वो भी जो क्रिकेट नहीं खेलते।
आईपीएल कमिश्नर के तौर पर अपने सपने को 2008 में क्रिकेट के चकाचौंध मैदान पर उतारने वाले ललित मोदी ने क्रिकेट के 20 ट्वेंटी फार्मेट को वो चमकीली दुनिया बना दिया जिसने क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा के साथ पैसा, ग्लैमर और परदे के पीछे सट्टेबाजी की दुनिया को ऐसे आबाद किया जैसे आईपीएल के भारत और विश्व के सभी क्रिकेट देखने वाले देशों की दुनिया ही यही हो।
ललित मोदी की सोच के पीछे पैसा ही था लेकिन उन्होंने इस पैसे को और बड़ा बनाने के लिए ग्लैमर की दुनिया को भी इस दुनिया में शामिल कर लिया। बालीवुड और क्रिकेट का मेल हो जाए तो लोग अपने आप जुड़ जाते है और वैसे भी बालीवुड और क्रिकेट का साथ काफी पुराना रहा है। ललित मोदी ने भारत के विश्व प्रसिद्द खिलाड़ियों की बोली लगवाई और उन्हें फिल्मी दुनिया और भारत के कार्पोरेट घरानों के हाथों बिकवा दिया।
देश विदेश के खिलाड़ी इस नीलामी में शामिल हुए| सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ , रिकी पोंटिंग जैसे प्लेयर बिक कर खुश थे| उन्हें करोड़ों में खरीदा गया था, साथ ही करोड़ों का करार भी मिला। आईपीएल में एक बात सही थी जिन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अपने प्रदेशों की टीम में खेलने का मौका नहीं मिला था, वो खिलाड़ी भी आईपीएल की बोली में लाखों में बिक गए।
बहरहाल, कहते है जहाँ पैसा होता है वहा करप्शन, धोखा, धांधली ना हो, ये हो नहीं सकता। आईपीएल के साथ भी कुछ ऐसा ही था। ललित मोदी की इस चमकीली दुनिया को एक सीजन बाद ही ग्रहण लगना शुरू हो गया। खुद ललित मोदी भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष करते रहे लेकिन पूंजीपतियों और क्रिकेट प्रशासकों के आगे हार गए| 2008-10 के बीच आईपीएल के कमिश्नर रहने वाले ललित कुमार मोदी के ऊपर करप्शन के ही चार्ज लगे, साथ ही उन्हें प्रसारण अधिकार बेचने और खिलाड़ियों की नीलामी में कमीशन का आरोप भी लगाया गया।
आईपीएल में मोदी युग का अंत हो गया| 2010 में भारत और विश्व भर के खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम सौगात छोड़कर मोदी बेइज्जत होकर आईपीएल से बाहर कर दिए गए। आईपीएल पर कांग्रेस का वर्चस्व हो गया, आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ल बनाये गए। आईपीएल होते रहे, करप्शन व फिक्सिंग की ख़बरें आती रही। ललित मोदी के जाने के बाद दो आईपीएल सीजन निकले, जिसमें क्रिकेट बोर्ड अध्यक्ष बोर्ड की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने लगातार चार सालों तक बेहतर प्रदर्शन करते हुए दो बार खिताब जीता और दो बार रनर अप रही।
इन सबके बीच आईपीएल 6 में स्पॉट फिक्सिंग का भी भूत सामने आया, जिसने आईपीएल की पोल खोल कर रख दी| साथ ही उन पहलुओ पर भी ध्यान देने की ओर इशारा कर दिया जिस पर किसी का ध्यान नहीं था। वो था लगातार चेन्नई सुपर किंग्स का फाइनल खेलना और दो बार विजेता बन जाना। चेन्नई सुपर किंग्स बीसीसीआई अध्यक्ष नारायणस्वामी श्रीनिवासन की खुद की टीम है जिसके मालिक श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन है।
गुरुनाथ मयप्पन को आईपीएल के फाइनल मैच से पहले पुलिस ने सट्टेबाजों से सम्बन्ध रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। मयप्पन की गिरफ्तारी ने एक बात और साफ़ कर दी कि आईपीएल में सब कुछ ठीक नहीं है। गुरुनाथ की टीम चेन्नई सुपर किंग्स लगातार 2010 से फाइनल खेल रही थी जबकि उससे पहले चेन्नई की टीम ललित मोदी के जमाने में एक बार फाइनल में पहुंची और उसी ललित मोदी की टीम से मैच हार गई जिसने आईपीएल की संरचना की थी यानी कि आईपीएल के मैनेजमेंट पर जिसका राज उसी की टीम आईपीएल चैम्पियन।
26 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन मैदान में चेन्नई एक बार फिर फाइनल में थी लेकिन उस टीम का मालिक पुलिस की गिरफ्त में आईपीएल देखने वाले दर्शकों की भावनाओं का हिसाब दे रहा था। मैच शुरू हुआ, मुम्बई इंडियन ने खेल शुरू किया| उससे पहले बीसीसीआई के अध्यक्ष अपना खेल शुरू कर चुके थे। बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन ने कहा कि मयप्पन चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक नहीं है लेकिन उनके खेल को राजीव शुक्ला के एक मेल ने फेल कर दिया। भारी दबाव और सट्टेबाजी के जाल में फंसी चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल का फाइनल हार गई।
श्रीनिवासन साहब की टीम और उनके दामाद का खेल दुनिया के सामने आ चुका था। चेन्नई की हार ने एक बात साबित कर दी कि उससे बेहतर टीम मुम्बई इंडियन ने अपने दम पर ट्राफी जीत ली, चेन्नई की पूर्व के आईपीएल में दर्ज की गई जीत सवालों के घेरे में है। यहाँ सवाल ये उठता है कि जिस आईपीएल टीम का मालिक खुद सट्टेबाजी के आरोप में पुलिस के सवालों के जवाब दे रहा है। क्या उसकी टीम ने 2010 के बाद हुए सभी आईपीएल मुकाबले अपने दम पर जीते? 2010-11 में चेन्नई ने जो आईपीएल का खिताब जीता, कहीं वो भी फिक्स तो नहीं था? चेन्नई चार बार फाइनल में पहुंची, कहीं वो भी फिक्स तो नहीं था?
इन सब सवालों के बीच एक सवाल और खडा हुआ कि आईपीएल ख़त्म होने के बाद टीमों को उनके खेल के आधार पर फेयर प्ले ट्राफी दी जाती है। जब से आईपीएल शुरू हुआ सिर्फ 2012 को छोड़ दिया जाए तो फेयर प्ले की प्रतिष्ठित ट्राफी चेन्नई सुपर किंग्स को मिली यानी छह सीजन में पांच बार।अब सवाल ये है कि जिस टीम का मालिक खुद फेयर ना हो उस टीम को ये ट्राफी किसी करार के तहत तो नहीं मिली या बीसीसीआई के आका नारायणस्वामी श्रीनिवासन को खुश करने के लिए ये ट्राफी प्रदान की गई हो। भले ही उनका ही दामाद अपनी टीम के खिलाड़ियों पर सट्टा लगा रहा हो।
बहरहाल, आईपीएल खत्म हो गया है और आईपीएल को नया चैम्पियन भी मिल गया है। सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे प्लेयर अपनी इज्जत बचा के इस चकाचौंध भरी दुनिया को अलविदा कह चुके हैं लेकिन अभी भी दिल्ली, मुम्बई पुलिस के हाथ में कुछ ऐसे पत्ते है जिनकी फेंटाई चल रही है। देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस की इस फेंटाई में से कौन-कौन सी बात खुलकर सामने आती है और किस-किस की कुर्सी ललित मोदी की तरह जाती है।
वैसे ये आईपीएल की दुनिया है बड़ी मजेदार, इसका मज़ा सब लेना चाहते है लेकिन उस मज़ा के सज़ा का अंदाजा किसी को नहीं होता| वैसे इस समय जो मज़ा श्रीसंत, अजित चंदीला, अंकित चव्हाण, विन्दु और बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन ले रहे है, वो उनका मन ही जानता है। पुलिस की पूछताछ, उनकी लहराती लाठियां, पुलिसिया भाषा उन्हें उन आईपीएल चीयर लीडर्स की याद जरुर दिलाती होंगी जो चौकों, छक्को और विकेट गिरने पर डांस करने लगती थी।
Report By - Shitanshu Pati Tripathi
आईपीएल कमिश्नर के तौर पर अपने सपने को 2008 में क्रिकेट के चकाचौंध मैदान पर उतारने वाले ललित मोदी ने क्रिकेट के 20 ट्वेंटी फार्मेट को वो चमकीली दुनिया बना दिया जिसने क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा के साथ पैसा, ग्लैमर और परदे के पीछे सट्टेबाजी की दुनिया को ऐसे आबाद किया जैसे आईपीएल के भारत और विश्व के सभी क्रिकेट देखने वाले देशों की दुनिया ही यही हो।
ललित मोदी की सोच के पीछे पैसा ही था लेकिन उन्होंने इस पैसे को और बड़ा बनाने के लिए ग्लैमर की दुनिया को भी इस दुनिया में शामिल कर लिया। बालीवुड और क्रिकेट का मेल हो जाए तो लोग अपने आप जुड़ जाते है और वैसे भी बालीवुड और क्रिकेट का साथ काफी पुराना रहा है। ललित मोदी ने भारत के विश्व प्रसिद्द खिलाड़ियों की बोली लगवाई और उन्हें फिल्मी दुनिया और भारत के कार्पोरेट घरानों के हाथों बिकवा दिया।
देश विदेश के खिलाड़ी इस नीलामी में शामिल हुए| सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ , रिकी पोंटिंग जैसे प्लेयर बिक कर खुश थे| उन्हें करोड़ों में खरीदा गया था, साथ ही करोड़ों का करार भी मिला। आईपीएल में एक बात सही थी जिन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अपने प्रदेशों की टीम में खेलने का मौका नहीं मिला था, वो खिलाड़ी भी आईपीएल की बोली में लाखों में बिक गए।
बहरहाल, कहते है जहाँ पैसा होता है वहा करप्शन, धोखा, धांधली ना हो, ये हो नहीं सकता। आईपीएल के साथ भी कुछ ऐसा ही था। ललित मोदी की इस चमकीली दुनिया को एक सीजन बाद ही ग्रहण लगना शुरू हो गया। खुद ललित मोदी भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष करते रहे लेकिन पूंजीपतियों और क्रिकेट प्रशासकों के आगे हार गए| 2008-10 के बीच आईपीएल के कमिश्नर रहने वाले ललित कुमार मोदी के ऊपर करप्शन के ही चार्ज लगे, साथ ही उन्हें प्रसारण अधिकार बेचने और खिलाड़ियों की नीलामी में कमीशन का आरोप भी लगाया गया।
आईपीएल में मोदी युग का अंत हो गया| 2010 में भारत और विश्व भर के खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम सौगात छोड़कर मोदी बेइज्जत होकर आईपीएल से बाहर कर दिए गए। आईपीएल पर कांग्रेस का वर्चस्व हो गया, आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ल बनाये गए। आईपीएल होते रहे, करप्शन व फिक्सिंग की ख़बरें आती रही। ललित मोदी के जाने के बाद दो आईपीएल सीजन निकले, जिसमें क्रिकेट बोर्ड अध्यक्ष बोर्ड की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने लगातार चार सालों तक बेहतर प्रदर्शन करते हुए दो बार खिताब जीता और दो बार रनर अप रही।
इन सबके बीच आईपीएल 6 में स्पॉट फिक्सिंग का भी भूत सामने आया, जिसने आईपीएल की पोल खोल कर रख दी| साथ ही उन पहलुओ पर भी ध्यान देने की ओर इशारा कर दिया जिस पर किसी का ध्यान नहीं था। वो था लगातार चेन्नई सुपर किंग्स का फाइनल खेलना और दो बार विजेता बन जाना। चेन्नई सुपर किंग्स बीसीसीआई अध्यक्ष नारायणस्वामी श्रीनिवासन की खुद की टीम है जिसके मालिक श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन है।
गुरुनाथ मयप्पन को आईपीएल के फाइनल मैच से पहले पुलिस ने सट्टेबाजों से सम्बन्ध रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। मयप्पन की गिरफ्तारी ने एक बात और साफ़ कर दी कि आईपीएल में सब कुछ ठीक नहीं है। गुरुनाथ की टीम चेन्नई सुपर किंग्स लगातार 2010 से फाइनल खेल रही थी जबकि उससे पहले चेन्नई की टीम ललित मोदी के जमाने में एक बार फाइनल में पहुंची और उसी ललित मोदी की टीम से मैच हार गई जिसने आईपीएल की संरचना की थी यानी कि आईपीएल के मैनेजमेंट पर जिसका राज उसी की टीम आईपीएल चैम्पियन।
26 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन मैदान में चेन्नई एक बार फिर फाइनल में थी लेकिन उस टीम का मालिक पुलिस की गिरफ्त में आईपीएल देखने वाले दर्शकों की भावनाओं का हिसाब दे रहा था। मैच शुरू हुआ, मुम्बई इंडियन ने खेल शुरू किया| उससे पहले बीसीसीआई के अध्यक्ष अपना खेल शुरू कर चुके थे। बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन ने कहा कि मयप्पन चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक नहीं है लेकिन उनके खेल को राजीव शुक्ला के एक मेल ने फेल कर दिया। भारी दबाव और सट्टेबाजी के जाल में फंसी चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल का फाइनल हार गई।
श्रीनिवासन साहब की टीम और उनके दामाद का खेल दुनिया के सामने आ चुका था। चेन्नई की हार ने एक बात साबित कर दी कि उससे बेहतर टीम मुम्बई इंडियन ने अपने दम पर ट्राफी जीत ली, चेन्नई की पूर्व के आईपीएल में दर्ज की गई जीत सवालों के घेरे में है। यहाँ सवाल ये उठता है कि जिस आईपीएल टीम का मालिक खुद सट्टेबाजी के आरोप में पुलिस के सवालों के जवाब दे रहा है। क्या उसकी टीम ने 2010 के बाद हुए सभी आईपीएल मुकाबले अपने दम पर जीते? 2010-11 में चेन्नई ने जो आईपीएल का खिताब जीता, कहीं वो भी फिक्स तो नहीं था? चेन्नई चार बार फाइनल में पहुंची, कहीं वो भी फिक्स तो नहीं था?
इन सब सवालों के बीच एक सवाल और खडा हुआ कि आईपीएल ख़त्म होने के बाद टीमों को उनके खेल के आधार पर फेयर प्ले ट्राफी दी जाती है। जब से आईपीएल शुरू हुआ सिर्फ 2012 को छोड़ दिया जाए तो फेयर प्ले की प्रतिष्ठित ट्राफी चेन्नई सुपर किंग्स को मिली यानी छह सीजन में पांच बार।अब सवाल ये है कि जिस टीम का मालिक खुद फेयर ना हो उस टीम को ये ट्राफी किसी करार के तहत तो नहीं मिली या बीसीसीआई के आका नारायणस्वामी श्रीनिवासन को खुश करने के लिए ये ट्राफी प्रदान की गई हो। भले ही उनका ही दामाद अपनी टीम के खिलाड़ियों पर सट्टा लगा रहा हो।
बहरहाल, आईपीएल खत्म हो गया है और आईपीएल को नया चैम्पियन भी मिल गया है। सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे प्लेयर अपनी इज्जत बचा के इस चकाचौंध भरी दुनिया को अलविदा कह चुके हैं लेकिन अभी भी दिल्ली, मुम्बई पुलिस के हाथ में कुछ ऐसे पत्ते है जिनकी फेंटाई चल रही है। देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस की इस फेंटाई में से कौन-कौन सी बात खुलकर सामने आती है और किस-किस की कुर्सी ललित मोदी की तरह जाती है।
वैसे ये आईपीएल की दुनिया है बड़ी मजेदार, इसका मज़ा सब लेना चाहते है लेकिन उस मज़ा के सज़ा का अंदाजा किसी को नहीं होता| वैसे इस समय जो मज़ा श्रीसंत, अजित चंदीला, अंकित चव्हाण, विन्दु और बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन ले रहे है, वो उनका मन ही जानता है। पुलिस की पूछताछ, उनकी लहराती लाठियां, पुलिसिया भाषा उन्हें उन आईपीएल चीयर लीडर्स की याद जरुर दिलाती होंगी जो चौकों, छक्को और विकेट गिरने पर डांस करने लगती थी।
Report By - Shitanshu Pati Tripathi

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