लखनऊ से मात्र 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उन्नाव जनपद का डोडिया खेड़ा गाँव आज कल पूरे विश्व की निगाहों में है। वजह एक साधू शोभन सरकार के सपने ने देश की सरकार को एक ऐसा आदेश देने पर मजबूर कर दिया जिसने सपने और हकीक़त में कोई फर्क नहीं छोड़ा। आज देश विदेश की मीडिया में कौतुहल का विषय बने इस सोने की खोज में भारत सरकार की दो ऐसी एजेंसिया लगी है जिन्हें ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की खोज करने में महारत हासिल है।
सोना मिलेगा या नहीं मिलेगा इस पर देश विदेश की मीडिया पर बहस का दौर भी चल निकला है। वही खुदाई और सोने की खोज को लेकर संत समाज भी दो भागो में बंट गया है। आज डोडियाखेड़ा में हालात ये है कि सोना मिलने में अभी कुछ समय है लेकिन उसे मिलने और न मिलने वाले सोने को पाने के दावेदारों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विश्वास और विज्ञान के बीच फसें लोग इस सोने के खजाने की चमक देखने के लिए ललायित है।
राजा राव राम बख्स सिंह के खजाने की खोज में लगी भारत सरकार ने एक साधू के सपने के आधार पर उन्नाव के इस गाँव में ऐसा बखेड़ा खड़ा कर दिया है जो हकीक़त में बदल जाए तो भारत की आर्थिक स्थिति सुधरती है और न बदले तो पूरे विश्व में भारत को अंधविश्वासी देश के तौर पर स्थापित होना पड़ सकता है। इस पूरे प्रकरण में भारत सरकार के साथ उन दो एजेंसियों पर भी सवाल खड़े हो रहे है जिन्हें पुरातात्विक महत्व की वस्तुये खोजने के लिये जाना जाता है। ASI यानि आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और GSI जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया जो भारत में गम हो चुकी सभ्यताओं को खोजने के लिए जाने जाते है।
ASI यानि आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और GSI जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया ने भारत में पहली बार किसी साधू के सपने के आधार पर जमीन में दबे खजाने की खोज करने का काम अपने हाथ में लिया है। उन्नाव के डोडिया खेड़ा गाँव में आज हालात ऐसे है जो भारत की छवि को पूरे विश्व में खराब करने वाले है। इस सोने के खजाने की खुदाई में अभी एक महीने का वक़्त लगने वाला है, लेकिन कौतुहल ऐसा जिसने 2010 में आई "पिपली लाइव" नामक फिल्म की याद दिला दी "पिपली लाइव" एक हास्यप्रधान और भारत में किसानो द्वारा की जा रही आत्महत्याओं को लेकर तंज करते हुये बनाई गई फिल्म थी।
पिपली लाईव में नत्था के आत्महत्या किये जाने की खबर ने नेतानगरी से लेकर मीडिया में कौतुहल पैदा करने का काम किया था। किसान के आत्महत्या की खबर को मीडिया और राजनीति के बीच ऐसा उलझा दिया गया की जिस वजह से उस फिल्म का निर्माण हुआ वो मूल वजह ही गायब हो गई और रह गया सिर्फ टीआरपी का खेल और अपनी राजनीति को चटकाने का प्रसंग। कुछ ऐसा ही चल रहा है उन्नाव के डोडियाखेड़ा गाँव में जहाँ मीडिया का रेला है तो राजनीति करने का बेहतर अवसर वही सोने के मिलने पर दावेदारों की बड़ी लिस्ट। सवाल ये है सोना मिलेगा या नहीं और खुदाई में क्या निकलेगा। अब सवाल ये खडा हो गया है क्या किसी साधू के सपने के आधार पर भारत सरकार को खुदाई करने के आदेश देने चाहिये।
केन्द्रीय मंत्री चरण दास महंत ने कहा डोडियाखेड़ा गाँव में मंदिर के नीचे और किले के पास करीब 1000 टन सोना मिलने का पत्र शोभन सरकार के शिष्य ओम महाराज ने मंत्रालय को लिखा था उसी पत्र के आधार पर जब भारत सरकार ने (GSI) जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया को इस पत्र के तथ्यों और उस जमीन के जांच के आदेश दिये गये (GSI) जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की प्रारंभिक जांच में जमीन के अन्दर मेटल होने के प्रमाण मिले उसी के बाद सरकार ने खुदाई के आदेश दिये। ASI यानि आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और GSI जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया ने डोडियाखेड़ा में खुदाई का काम विशेषज्ञों के नेतृत्व में शुरू कर दिया है।
इस पूरी खुदाई पर नज़र रख रही भारत सरकार के सामने प्रदेश सरकार ने नई चुनौती रख दी है और इस पूरे मामले का श्रेय लेने के लिये होड़ भी मच गई। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार का कहना है अगर वहां सोने का खजाना मिला तो उसमें एक हिस्सा प्रदेश सरकार को मिलना चाहिये। सेकेण्ड पिपली लाईव के इस शो में रोजाना नए नए तथ्य और बातें सामने आ रही है कुछ लोगो का कहना है राजा राव राम बख्स सिंह नहीं बल्कि 25 गांवों के जमीदार थे, 25 गांवो की जमींदारी करने वाले के पास इतना अकूत सोना कहाँ से आ सकता है। वही कुछ लोग ये भी कहते है राजा राव राम बख्स सिंह के बिठुर राज घराने से अच्छे और विश्वास के सम्बन्ध थे इन्ही संबंधो की वजह से जब अंग्रेजो की सेना ने बिठुर पर हमला किया तब तात्या टोपे ने बिठुर का खजाना नदी के रास्ते डोडियाखेड़ा भेज दिया था जिसे राजा राव राम बख्स सिंह ने जमीन में गड़वा दिया, आगे चलकर अंग्रेजों ने राजा राव राम बख्स सिंह को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया गया तभी से वो सोने का खजाना वहा दबा पड़ा, ये लोगो के मुंह से सुनी सुनाई बातें है।
डोडियाखेड़ा गाँव और बाबा शोभन सरकार के सपने ने देश के सभी प्रान्तों और हिस्सों में दो ही चर्चा है सोना मिलेगा या नहीं और मिला तो दावेदार कौन होगा इस बात ने देश क्या विदेश में भी भारत में चल रहे इस सोने की खोज को चर्चा में ला दिया है। आज देश में साधू संत और वैज्ञानिक इस बात पर अचरच रहे है कि क्या सपने सच होते है और अगर होते है तो अभी तक किसी ने दक्षिण में स्थित मंदिरों में दबे अकूत खजाने का सही आंकलन कर सरकार को क्यों नहीं बता दिया, अगर डोडिया खेड़ा गाँव में दबे 1000 टन सोने से देश की अर्थ व्यवस्था में सुधार होगा तो दक्षिण में मिलने वाले सोने से भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया के साथ विश्वगुरु भी बन सकता है साथ ही वो पांच पैसे, दस पैसे, बीस पैसे और चवन्नी-अठन्नी का जमाना वापस आ सकता है।
बहरहाल, डोडिया खेड़ा गाँव में पिपली लाईव का सिक्वल चल रहा है फर्क बस इतना है न कोई यहाँ नत्था है और न ही आत्महत्या होने वाली है बस एक उम्मीद है उस सोने की आस की जिसे एक नामी साधक ने सपने में देखा और जिए पाने के लिए सरकार और उसकी मशीनरी खुदाई कर रही है।
सोना मिलेगा या नहीं मिलेगा इस पर देश विदेश की मीडिया पर बहस का दौर भी चल निकला है। वही खुदाई और सोने की खोज को लेकर संत समाज भी दो भागो में बंट गया है। आज डोडियाखेड़ा में हालात ये है कि सोना मिलने में अभी कुछ समय है लेकिन उसे मिलने और न मिलने वाले सोने को पाने के दावेदारों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विश्वास और विज्ञान के बीच फसें लोग इस सोने के खजाने की चमक देखने के लिए ललायित है।
राजा राव राम बख्स सिंह के खजाने की खोज में लगी भारत सरकार ने एक साधू के सपने के आधार पर उन्नाव के इस गाँव में ऐसा बखेड़ा खड़ा कर दिया है जो हकीक़त में बदल जाए तो भारत की आर्थिक स्थिति सुधरती है और न बदले तो पूरे विश्व में भारत को अंधविश्वासी देश के तौर पर स्थापित होना पड़ सकता है। इस पूरे प्रकरण में भारत सरकार के साथ उन दो एजेंसियों पर भी सवाल खड़े हो रहे है जिन्हें पुरातात्विक महत्व की वस्तुये खोजने के लिये जाना जाता है। ASI यानि आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और GSI जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया जो भारत में गम हो चुकी सभ्यताओं को खोजने के लिए जाने जाते है।
ASI यानि आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और GSI जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया ने भारत में पहली बार किसी साधू के सपने के आधार पर जमीन में दबे खजाने की खोज करने का काम अपने हाथ में लिया है। उन्नाव के डोडिया खेड़ा गाँव में आज हालात ऐसे है जो भारत की छवि को पूरे विश्व में खराब करने वाले है। इस सोने के खजाने की खुदाई में अभी एक महीने का वक़्त लगने वाला है, लेकिन कौतुहल ऐसा जिसने 2010 में आई "पिपली लाइव" नामक फिल्म की याद दिला दी "पिपली लाइव" एक हास्यप्रधान और भारत में किसानो द्वारा की जा रही आत्महत्याओं को लेकर तंज करते हुये बनाई गई फिल्म थी।
पिपली लाईव में नत्था के आत्महत्या किये जाने की खबर ने नेतानगरी से लेकर मीडिया में कौतुहल पैदा करने का काम किया था। किसान के आत्महत्या की खबर को मीडिया और राजनीति के बीच ऐसा उलझा दिया गया की जिस वजह से उस फिल्म का निर्माण हुआ वो मूल वजह ही गायब हो गई और रह गया सिर्फ टीआरपी का खेल और अपनी राजनीति को चटकाने का प्रसंग। कुछ ऐसा ही चल रहा है उन्नाव के डोडियाखेड़ा गाँव में जहाँ मीडिया का रेला है तो राजनीति करने का बेहतर अवसर वही सोने के मिलने पर दावेदारों की बड़ी लिस्ट। सवाल ये है सोना मिलेगा या नहीं और खुदाई में क्या निकलेगा। अब सवाल ये खडा हो गया है क्या किसी साधू के सपने के आधार पर भारत सरकार को खुदाई करने के आदेश देने चाहिये।
केन्द्रीय मंत्री चरण दास महंत ने कहा डोडियाखेड़ा गाँव में मंदिर के नीचे और किले के पास करीब 1000 टन सोना मिलने का पत्र शोभन सरकार के शिष्य ओम महाराज ने मंत्रालय को लिखा था उसी पत्र के आधार पर जब भारत सरकार ने (GSI) जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया को इस पत्र के तथ्यों और उस जमीन के जांच के आदेश दिये गये (GSI) जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की प्रारंभिक जांच में जमीन के अन्दर मेटल होने के प्रमाण मिले उसी के बाद सरकार ने खुदाई के आदेश दिये। ASI यानि आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और GSI जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया ने डोडियाखेड़ा में खुदाई का काम विशेषज्ञों के नेतृत्व में शुरू कर दिया है।
इस पूरी खुदाई पर नज़र रख रही भारत सरकार के सामने प्रदेश सरकार ने नई चुनौती रख दी है और इस पूरे मामले का श्रेय लेने के लिये होड़ भी मच गई। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार का कहना है अगर वहां सोने का खजाना मिला तो उसमें एक हिस्सा प्रदेश सरकार को मिलना चाहिये। सेकेण्ड पिपली लाईव के इस शो में रोजाना नए नए तथ्य और बातें सामने आ रही है कुछ लोगो का कहना है राजा राव राम बख्स सिंह नहीं बल्कि 25 गांवों के जमीदार थे, 25 गांवो की जमींदारी करने वाले के पास इतना अकूत सोना कहाँ से आ सकता है। वही कुछ लोग ये भी कहते है राजा राव राम बख्स सिंह के बिठुर राज घराने से अच्छे और विश्वास के सम्बन्ध थे इन्ही संबंधो की वजह से जब अंग्रेजो की सेना ने बिठुर पर हमला किया तब तात्या टोपे ने बिठुर का खजाना नदी के रास्ते डोडियाखेड़ा भेज दिया था जिसे राजा राव राम बख्स सिंह ने जमीन में गड़वा दिया, आगे चलकर अंग्रेजों ने राजा राव राम बख्स सिंह को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया गया तभी से वो सोने का खजाना वहा दबा पड़ा, ये लोगो के मुंह से सुनी सुनाई बातें है।
डोडियाखेड़ा गाँव और बाबा शोभन सरकार के सपने ने देश के सभी प्रान्तों और हिस्सों में दो ही चर्चा है सोना मिलेगा या नहीं और मिला तो दावेदार कौन होगा इस बात ने देश क्या विदेश में भी भारत में चल रहे इस सोने की खोज को चर्चा में ला दिया है। आज देश में साधू संत और वैज्ञानिक इस बात पर अचरच रहे है कि क्या सपने सच होते है और अगर होते है तो अभी तक किसी ने दक्षिण में स्थित मंदिरों में दबे अकूत खजाने का सही आंकलन कर सरकार को क्यों नहीं बता दिया, अगर डोडिया खेड़ा गाँव में दबे 1000 टन सोने से देश की अर्थ व्यवस्था में सुधार होगा तो दक्षिण में मिलने वाले सोने से भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया के साथ विश्वगुरु भी बन सकता है साथ ही वो पांच पैसे, दस पैसे, बीस पैसे और चवन्नी-अठन्नी का जमाना वापस आ सकता है।
बहरहाल, डोडिया खेड़ा गाँव में पिपली लाईव का सिक्वल चल रहा है फर्क बस इतना है न कोई यहाँ नत्था है और न ही आत्महत्या होने वाली है बस एक उम्मीद है उस सोने की आस की जिसे एक नामी साधक ने सपने में देखा और जिए पाने के लिए सरकार और उसकी मशीनरी खुदाई कर रही है।
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