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Sunday, 20 October 2013

SSP मुझे जान से मरवा देगा

"मातहत हो मातहत बनकर रहो" ये हम नहीं कह रहे है बल्कि आजकल उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के अधिकारी अपने सब-आर्डीनेट से कह रहे है। समाजवादी पार्टी की सरकार में हालात इतने खराब हो चुके है कि कनिष्ठ अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर उन्हें जान से मारने का आरोप लगा रहे है। पुलिस विभाग अनुशासन के लिये जाना जाता है। लेकिन आजकल उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी अपना हित साधने के लिये अपने कनिष्ठ अधिकारियों को प्रताड़ित करने से भी बाज़ नहीं आ रहे है। 

ऐसा ही एक मामला इन दिनों पुलिस महकमे में गूंज रहा है जहाँ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जो भारतीय पुलिस सेवा से चयनित होकर आया है उसने अपने कनिष्ठ के साथ ऐसा क्या किया कि आज उसने पुलिस महकमे के आला अधिकारी को पत्र लिखकर अपनी जान का ख़तरा बताया है। 

मामला प्रदेश के वाराणसी जिले का है जहाँ पुलिस अधीक्षक यातायात और जिलें के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के बीच अघोषित जंग चल रही है। यातायात पुलिस अधीक्षक जीएन खन्ना ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लेकर एक शिकायती पत्र ADG को लिखा| इस पत्र में जीएन खन्ना ने अपनी जान का ख़तरा बताते हुये अपने अफसर को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। 

SP यातायात जीवन खन्ना ने ADG जीएल मीणा को लिखे पत्र में लिखा है की वाराणसी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय मिश्रा पुलिस मैनुअल और नियमो को दरकिनार कर अपनी सत्ता चला रहे है। SP यातायात ने आरोप लगाया कि एसएसपी ने दबाव डालकर उनके गाडी चालक, गनर और फालोवर को जबरिया अवकाश पर भेज दिया है। वही बगैर उनके अनुमोदन के यातायात पुलिस कर्मियों का स्थानान्तरण कर दिया। 

ADG जीएल मीणा ने इस पत्र को रेंज के DIG को भेजकर इस पूरे प्रकरण की जांच करने को कहा है। DIG रेंज वाराणसी ने SP यातायात के आरोपों को निराधार बताते हुये SP यातायात को ही कटघरे में खड़ा करने का काम किया है। DIG के एसएसपी के पक्ष में खड़ा होने से भारतीय पुलिस सेवा और प्रांतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के बीच की खाई उजागर हो गई। 

यातायात पुलिस अधीक्षक जीएन खन्ना ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय मिश्र पर जो आरोप लगाये है वो काफी संगीन है, मामले की शुरुवात नो एंट्री में बड़े वाहनों के प्रवेश पास जारी करने में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने बाद दोनों अधिकारियों के बीच दूरियाँ बढ़ गई। इस आरोप और दोनों अधिकारियों में बढे तनाव की जांच भ्रष्टचार निवारण संगठन कर रहा है। SP जीएन खन्ना ये भी आरोप लगाते है कि अपने पद का दुरुपयोग करते हुये एसएसपी उनका लगातार उत्पीड़न कर रहे है। 

इस पूरे प्रकरण से एक बात सामने आ गई कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अपने कनिष्ठ अधिकारियों को किस तरह से अपने अंगूठे के नीचे दबा कर रखते है, ये वाराणसी के प्रकरण से जनता और सरकार के सामने आ गया है| वैसे देखा ये गया है कि वरिष्ठ अधिकारी वो भी पुलिस महकमे के अपने मातहतों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते तो है लेकिन खुद नियमों को कैसे तोड़ते-मरोड़ते है ये वाराणसी की घटना ने साबित किया।

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