भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी आज उत्तर प्रदेश में शंख फूकेंगे। मोदी की शंखनाद रैली को लेकर प्रदेश भाजपा जीतनी उत्साहित है उतनी ही राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की नज़र इस रैली पर टिकी हुई है। नरेन्द्र मोदी को ये पता है प्रधानमंत्री पद तक पहुँचने के उत्तर प्रदेश जीतना ही होगा। मोदी की रैली पर विपक्ष खासकर उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी की ख़ास नज़र है।
मोदी अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा को बढ़त दिलाते है तो ये तय है कि समाजवादी पार्टी की बढ़त भी तय है। आज ही ये तय होगा की मोदी का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर कैसा पड़ता है। नरेन्द्र मोदी आज उत्तर प्रदेश से क्या हुंकार भरेंगे इस पर भी सभी राजनीतिक दलों के साथ मतदाताओं की भी नज़र है| नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम ये अच्छी तरह जानती है यूपी जीता तो देश जीता इसी एटार्न पर काम करते हुये मोदी की टीम आगे बढ़ रह है।
नरेन्द्र मोदी और भाजपा को अच्छी तरह से पता है कि भाजपा की केंद्र में बनी सरकार में यूपी का बड़ा योगदान रहा है। अटल बिहारी वाजपेई की 13 दिन 13 महीने और 5 साल की सरकार को बनाने में उत्तर प्रदेश ने सर्वाधिक योगदान दिया था , भाजपा यहाँ से 50 से ऊपर सीटे जीतकर केंद्र में सत्ता पर जा बैठी थी। मोदी और उनकी टीम को इस बात का भान है अगर 272 के जादुई आंकड़े तक पहुंचना है तो यूपी को साधना पड़ेगा।
केन्द्रीय राजनीति में एक कहावत है जिसने उत्तर प्रदेश जीता उसने केंद्र जीत लिया क्योंकि केंद्र की सत्ता की चाभी उत्तर प्रदेश से होकर जाती है। जिसका नतीजा पूर्व के चुनावों में दिखा भी, जब 1996 के चुनाव में भाजपा ने अप्रत्याशित सफलता हासिल करते हुए 54 सीटें जीतकर केंद्र से कांग्रेस से मुक्त कराया था। भाजपा ने तीन बार इसी प्रदेश की सीटों के दम पर केन्द्रीय सत्ता को अपने कब्जे में किया। 2004 में स्थिति बदल गई और 2009 ने तो भाजपा को उन्ही सीटों पर सीमित कर दिया जिन सीटों पर भाजपा के चेहरे माने जाने वाले नेता चुनाव लड़ रहे थे।
उत्तर प्रदेश में कहावत मशहूर है दो कोस पर बोली बदले चार कोस पर पानी, ऐसी ही कहानी यहाँ की राजनीति की भी है। 80 लोकसभा सीटों का प्रतिनिधीत्व करने वाले उत्तर प्रदेश में ब्राहमण, ठाकुर बनिया, दलित, पिछड़े, और मुस्लिम समुदाय के लिए अलग-अलग पार्टियां राजनीति करती है सभी जाति और धर्मो को अपनी तरफ खीचती हैं । यहाँ की राजनीतिक पार्टियों के बड़े दिग्गजों में से मुलायम सिंह यादव , मायावती, अजीत सिंह जैसे नेता है जो अपनी शर्तों पर केंद्र को समर्थन देते है लेकिन इन तीनो को भाजपा से परहेज है। साथ ही ये तीनो नेता अपने को सबसे बड़ा सेकुल्यर मानते है।
मोदी को इसी मिथक को तोड़ना है, आज की रैली मतदाताओं के रुझान को भी तय कर देगी कि जो बयार मोदी के लिये ग्रामीण मतदाताओं के बीच चल रही है वो वोट में बदलेगी की नहीं। नरेन्द्र मोदी ने अपनी रैली की जगह का चुनाव कांग्रेस का गढ़ बन चुके उस कानपुर से की है जहाँ से केन्द्रीय मंत्री और तीन बार से सांसद श्री प्रकाश जायसवाल चुनाव लड़ते है। मोदी कांग्रेस के गढ़ में हुंकार भरेंगे जिसकी गूंज मुलायम सिंह यादव के गृह जनपद इटावा तक जायेगी। कानपुर के आस पास के सपा प्रभाव वाले जिलों में भी मोदी की गूंज पहुंचेगी साथ ही इस पहली रैली के माध्यम से मोदी पूरे उत्तर प्रदेश को कोई खास सन्देश भी देंगे।
नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी केंद्र में सत्ता में आने का ख्वाब देख रहे है इनका ये ख्वाब उत्तर प्रदेश में भारी सफलता के बाद ही पूरा हो सकता है। पार्टी के बड़े नेता और चिंतक ये अच्छी तरह जानते है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के पक्ष में वोट डलवाना वैसा ही है जैसे किसी हिंसक पशु के मुंह से खाना छीन लेना। करीब 20 करोड़ की आबादी वाले इस प्रदेश की राजनीति जीतनी उलझी है उतनी शायद कही नही है । प्रदेश में सभी जातियों की अपनी अपनी पार्टियां है सबकी उन पार्टियों में हिस्सेदारी है जो साफ़ दिखती भी है।
भाजपा की राह उत्तर प्रदेश में मुश्किल है भाजपा को उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक फैक्टर फायदा है वो है केंद्र से आम जनता की नाराजगी। नरेन्द्र मोदी और उनके रणनीतिकार अच्छी तरह जानते है कि उत्तर प्रदेश जीता तो केंद्र जीता लेकिन जीत अभी दूर की कौड़ी नज़र आती है। नरेन्द्र मोदी विकास की बात कहते है, लेकिन जहां की जनता के आँखों पर जातिवाद की पट्टी बंधी हो वहां, वहां जनता को विकास की बात कितनी समझ में आती हैं यह कहना मुश्किल है।
आज की मोदी की जनसभा में केंद्र पर कुठाराघात होगा तो भाजपा के कार्यकर्ताओं को मोदी चुनाव जीतने के गुण भी सिखायेंगे साथ उन्हें अनुशासन में रहने का पाठ भी पढ़ायेंगे । मोदी की आज की रैली से उत्तर प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक दिशा और दशा तय होगी की भाजपा नरेन्द्र मोदी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उत्तर प्रदेश फतह के पाती है या नही ।
मोदी अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा को बढ़त दिलाते है तो ये तय है कि समाजवादी पार्टी की बढ़त भी तय है। आज ही ये तय होगा की मोदी का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर कैसा पड़ता है। नरेन्द्र मोदी आज उत्तर प्रदेश से क्या हुंकार भरेंगे इस पर भी सभी राजनीतिक दलों के साथ मतदाताओं की भी नज़र है| नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम ये अच्छी तरह जानती है यूपी जीता तो देश जीता इसी एटार्न पर काम करते हुये मोदी की टीम आगे बढ़ रह है।
नरेन्द्र मोदी और भाजपा को अच्छी तरह से पता है कि भाजपा की केंद्र में बनी सरकार में यूपी का बड़ा योगदान रहा है। अटल बिहारी वाजपेई की 13 दिन 13 महीने और 5 साल की सरकार को बनाने में उत्तर प्रदेश ने सर्वाधिक योगदान दिया था , भाजपा यहाँ से 50 से ऊपर सीटे जीतकर केंद्र में सत्ता पर जा बैठी थी। मोदी और उनकी टीम को इस बात का भान है अगर 272 के जादुई आंकड़े तक पहुंचना है तो यूपी को साधना पड़ेगा।
केन्द्रीय राजनीति में एक कहावत है जिसने उत्तर प्रदेश जीता उसने केंद्र जीत लिया क्योंकि केंद्र की सत्ता की चाभी उत्तर प्रदेश से होकर जाती है। जिसका नतीजा पूर्व के चुनावों में दिखा भी, जब 1996 के चुनाव में भाजपा ने अप्रत्याशित सफलता हासिल करते हुए 54 सीटें जीतकर केंद्र से कांग्रेस से मुक्त कराया था। भाजपा ने तीन बार इसी प्रदेश की सीटों के दम पर केन्द्रीय सत्ता को अपने कब्जे में किया। 2004 में स्थिति बदल गई और 2009 ने तो भाजपा को उन्ही सीटों पर सीमित कर दिया जिन सीटों पर भाजपा के चेहरे माने जाने वाले नेता चुनाव लड़ रहे थे।
उत्तर प्रदेश में कहावत मशहूर है दो कोस पर बोली बदले चार कोस पर पानी, ऐसी ही कहानी यहाँ की राजनीति की भी है। 80 लोकसभा सीटों का प्रतिनिधीत्व करने वाले उत्तर प्रदेश में ब्राहमण, ठाकुर बनिया, दलित, पिछड़े, और मुस्लिम समुदाय के लिए अलग-अलग पार्टियां राजनीति करती है सभी जाति और धर्मो को अपनी तरफ खीचती हैं । यहाँ की राजनीतिक पार्टियों के बड़े दिग्गजों में से मुलायम सिंह यादव , मायावती, अजीत सिंह जैसे नेता है जो अपनी शर्तों पर केंद्र को समर्थन देते है लेकिन इन तीनो को भाजपा से परहेज है। साथ ही ये तीनो नेता अपने को सबसे बड़ा सेकुल्यर मानते है।
मोदी को इसी मिथक को तोड़ना है, आज की रैली मतदाताओं के रुझान को भी तय कर देगी कि जो बयार मोदी के लिये ग्रामीण मतदाताओं के बीच चल रही है वो वोट में बदलेगी की नहीं। नरेन्द्र मोदी ने अपनी रैली की जगह का चुनाव कांग्रेस का गढ़ बन चुके उस कानपुर से की है जहाँ से केन्द्रीय मंत्री और तीन बार से सांसद श्री प्रकाश जायसवाल चुनाव लड़ते है। मोदी कांग्रेस के गढ़ में हुंकार भरेंगे जिसकी गूंज मुलायम सिंह यादव के गृह जनपद इटावा तक जायेगी। कानपुर के आस पास के सपा प्रभाव वाले जिलों में भी मोदी की गूंज पहुंचेगी साथ ही इस पहली रैली के माध्यम से मोदी पूरे उत्तर प्रदेश को कोई खास सन्देश भी देंगे।
नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी केंद्र में सत्ता में आने का ख्वाब देख रहे है इनका ये ख्वाब उत्तर प्रदेश में भारी सफलता के बाद ही पूरा हो सकता है। पार्टी के बड़े नेता और चिंतक ये अच्छी तरह जानते है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के पक्ष में वोट डलवाना वैसा ही है जैसे किसी हिंसक पशु के मुंह से खाना छीन लेना। करीब 20 करोड़ की आबादी वाले इस प्रदेश की राजनीति जीतनी उलझी है उतनी शायद कही नही है । प्रदेश में सभी जातियों की अपनी अपनी पार्टियां है सबकी उन पार्टियों में हिस्सेदारी है जो साफ़ दिखती भी है।
भाजपा की राह उत्तर प्रदेश में मुश्किल है भाजपा को उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक फैक्टर फायदा है वो है केंद्र से आम जनता की नाराजगी। नरेन्द्र मोदी और उनके रणनीतिकार अच्छी तरह जानते है कि उत्तर प्रदेश जीता तो केंद्र जीता लेकिन जीत अभी दूर की कौड़ी नज़र आती है। नरेन्द्र मोदी विकास की बात कहते है, लेकिन जहां की जनता के आँखों पर जातिवाद की पट्टी बंधी हो वहां, वहां जनता को विकास की बात कितनी समझ में आती हैं यह कहना मुश्किल है।
आज की मोदी की जनसभा में केंद्र पर कुठाराघात होगा तो भाजपा के कार्यकर्ताओं को मोदी चुनाव जीतने के गुण भी सिखायेंगे साथ उन्हें अनुशासन में रहने का पाठ भी पढ़ायेंगे । मोदी की आज की रैली से उत्तर प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक दिशा और दशा तय होगी की भाजपा नरेन्द्र मोदी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उत्तर प्रदेश फतह के पाती है या नही ।
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