राजनीति में कब कौन सा सुर कौन सा राजनीतिज्ञ पकड़ ले और कौन सा राग अलापने लगे ये कह नहीं सकते। देश की राजनीति और प्रदेशो में राजनीति करने वाले सभी दल अपना एक अलग वोट बैंक बनाना चाहते है । देश की राजनीति पर नज़र डाली जाये तो राष्ट्रीय स्तर से लेकर क्षेत्रीय स्तर पर अभी छोटे बड़े दलों का अपना अपना वोट बैंक है जो जातिगत और क्षेत्र के हिसाब से बने हुये है। यही वजह है अपना वोट बैंक बढाने के लिए राजनीतिज्ञ और जातिगत राजनीति करने वाले नेता समय समय पर ऐसे बयान देते है जो उनका वोट बैंक तो बढ़ाता ही है साथ ही उन्हें सुर्ख़ियों में ला देता है।
वर्ष 84 में राजनीति की जमीन तलाश कर रहे पंजाब के रहने वाले बसपा के संस्थापक कांशीराम के भाई दलबारा सिंह ने एक बयान देकर बसपा कैडर और उसकी विरोधी पार्टियों को सकते में डाल दिया है, अब इस बयान को दलबारा सिंह का कोई राजनीतिक पैंतरा समझा जाये या लोकसभा चुनाव से पहले दरबारा सिंह के पीछे खड़ी किसी राजनीतिक पार्टी की चाल। दरबारा सिंह ने ये कह कर उत्तर प्रदेश के साथ केंद्र में राजनीति करने वाली पार्टियों और बहुजन समाज पार्टी में हलचल पैदा कर दी की कांशीराम वर्तमान बसपा अध्यक्ष मायावती को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनाने के खिलाफ थे।
बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और दलबारा सिंह के भाई कांशीराम ने मायावती को दूसरे दलों का सहारा लेकर सरकार न बनाने की सलाह दी थी लेकिन मायावती ने सत्ता को पास आता देखकर भाजपा के सहयोग से उत्तर प्रदेश में 3 जून 1995 को बसपा की सरकार बना ली थी जो अक्टूबर में गिर गई थी जिसका हश्र सबके सामने आया। दलबारा ने मायावती के ऊपर बहुजन समाज से धोखा करने का आरोप भी लगाया।
खुद की राजनीतिक जमीन तलाश रहे दलबारा सिंह ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी उतारने का भी एलान किया। उन्होंने कहा पार्टी उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज को धोखा देने वाली मायावती को सबक सिखाने के लिए 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी साथ ही बहुजन समाज को कांशीराम के सपने और मायावती के धोखे से अवगत करायेगी।
वर्ष 84 में राजनीति की जमीन तलाश कर रहे पंजाब के रहने वाले बसपा के संस्थापक कांशीराम के भाई दलबारा सिंह ने एक बयान देकर बसपा कैडर और उसकी विरोधी पार्टियों को सकते में डाल दिया है, अब इस बयान को दलबारा सिंह का कोई राजनीतिक पैंतरा समझा जाये या लोकसभा चुनाव से पहले दरबारा सिंह के पीछे खड़ी किसी राजनीतिक पार्टी की चाल। दरबारा सिंह ने ये कह कर उत्तर प्रदेश के साथ केंद्र में राजनीति करने वाली पार्टियों और बहुजन समाज पार्टी में हलचल पैदा कर दी की कांशीराम वर्तमान बसपा अध्यक्ष मायावती को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनाने के खिलाफ थे।
बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और दलबारा सिंह के भाई कांशीराम ने मायावती को दूसरे दलों का सहारा लेकर सरकार न बनाने की सलाह दी थी लेकिन मायावती ने सत्ता को पास आता देखकर भाजपा के सहयोग से उत्तर प्रदेश में 3 जून 1995 को बसपा की सरकार बना ली थी जो अक्टूबर में गिर गई थी जिसका हश्र सबके सामने आया। दलबारा ने मायावती के ऊपर बहुजन समाज से धोखा करने का आरोप भी लगाया।
खुद की राजनीतिक जमीन तलाश रहे दलबारा सिंह ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी उतारने का भी एलान किया। उन्होंने कहा पार्टी उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज को धोखा देने वाली मायावती को सबक सिखाने के लिए 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी साथ ही बहुजन समाज को कांशीराम के सपने और मायावती के धोखे से अवगत करायेगी।
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