दाल रोटी के साथ गरीब की थाली में स्वाद बढाने वाला प्याज अब विशिष्ट हो चला है। गरीब के लिये प्याज का मतलब अब मटन चिकन और पनीर के बराबर हो गया है। प्याज अब शादी ब्याह में दिख जाये तो लोग अपनी कस्मत पर रक्श कर सकते है। पहले प्याज काटने पर आंसू निकलते थे अब प्याज का दाम और उसकी बढ़त सुनकर आंसू तो नहीं निकलते दिल की धड़कने जरुर बढ़ जाती है। लोगो की सब्जी की टोकरियों से प्याज गायब होता जा रहा हैं| वहीँ, अब प्याज शब्द सुनते ही केंद्र में बैठी मनमोहन सरकार को दो चार अतिविशिष्ट शब्दों से भी नवाजने में लोग गुरेज नहीं कर रहे है।
मई 1998 के बाद भारत की जनता के लिए प्याज VVIP हुई थी,तब लोगो के बीच एक गाना काफी लोकप्रिय हुआ था, अटल बिहारी वाजपेई की दुसरे टर्म की सरकार चल रही थी, गाना अटल जी को तंज करते हुये बना था गाने के बोल थे "का हो अटल चाचा पियजिया अनार हो गईल" इस गाने में अटल जी के ऊपर फिकरा कसते हुए गायक ने प्याज क तुलना उस अनार से की थी जो सिर्फ अमीरों के डाइनिंग टेबल की शोभा बढाता था और उन्ही की पहुँच में था ऐसा ही हाल प्याज के साथ हुआ था। उस साल प्याज 80 रुपये किलों बिका जिसकी वजह थी अटल बिहारी वाजपेई सरकार द्वारा पोखरण के रेगिस्तान में 5 परमाणु परिक्षण करना जिसमें टन के हिसाब से प्याज का इस्तेमाल होना बताया गया।
आज प्याज की कीमत 100 रुपये के पार जाने की तैयारी में है जो इन त्योहारों के मौसम में पार भी कर जायेगी। अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में प्याज के दाम बढ़ने की जो वजह सामने आई वो देश हित में थी लेकिन मनमोहन सिंह सरकार के समय बीते 6 महीनो से आम आदमी को तरसाने वाली प्याज के दाम क्यों बढ़ रहे है इसका कोई ठोस जवाब सरकार का कोई नुमाईंदा नहीं दे रहा है। अब सरकार की तरफ से जो बयान आया वो बेहद चौकाने वाला है, केंद्र सरकार ने माना है कि जमाखोरों की वजह से प्याज के दाम बढ़ रहे हैं। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि देश में प्याज का काफी भंडार है। जमाखोरी के कारण प्याज की कृत्रिम रूप से कमी हो गई है। राज्य सरकारें ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
पटना में प्याज की कीमतें सौ रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच केंद्र सरकार ने इसकी जमाखोरी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का राज्य सरकारों से आग्रह करते हुए कहा कि कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से जरूरत पड़ने पर इसका आयात किया जा सकता है। राजधानी दिल्ली सहित देश के अधिकांश हिस्से में प्याज की कीमत औसतन 90 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच चुकी है। पिछले चार महीने में प्याज की कीमतें चार गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति बहुत चिंता का विषय है। लेकिन इसमें खाद्य पदार्थों और सब्जियों की वजह से बढ़ोतरी होती है। हालांकि उन्होंने इस बढ़ोतरी को अस्थाई बताते हुए कहा कि यह सीजनल मामला है और यह नीचे आ जाएगा।
प्याज आज आम आदमी की पहुँच से दूर हो गया है, आज प्याज से सस्ता सेब बिक रहा है, लेकिन सभी खाद्य पदार्थो का स्वाद बढाने वाला प्याज आज लोगो की थालियों से रूठ चुका है सरकार का मानना है कि प्याज के दाम अभी दो महीने और नीचे नहीं आयेंगे| अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर देश में त्योहारों के मौसम के तौर पर जाना जाता है। बड़े से लेकर छोटा व्यवसायी इस मौके का बखूबी लाभ उठाना चाहता है| जो वो उठा भी रहा है। सरकार बेबस जनता लाचार और प्याज के काला बाजारी अपनी प्याज से होने वाले मुनाफे को लेकर मस्त। आज हालात ऐसे हैं कि लोग एक दूसरे से मज़ाक में कहने लगे है, भैया प्याज खाये कितने दिन हो गये है।
ये तो हो गई मजाक की बात लेकिन आज जनता थाली से गायब हो चुके खाद्य पदार्थों की सबसे जरुरी चीज से धीरे धीरे उनक पहुँच से दूर होती जा रही है। सरकार आज प्याज को लेकर बेबस हो चुकी सरकार के पास सारी मशीनरी होते हुये भी प्याज की कीमतों पर अंकुश नहीं लगा पा रही है।
मई 1998 के बाद भारत की जनता के लिए प्याज VVIP हुई थी,तब लोगो के बीच एक गाना काफी लोकप्रिय हुआ था, अटल बिहारी वाजपेई की दुसरे टर्म की सरकार चल रही थी, गाना अटल जी को तंज करते हुये बना था गाने के बोल थे "का हो अटल चाचा पियजिया अनार हो गईल" इस गाने में अटल जी के ऊपर फिकरा कसते हुए गायक ने प्याज क तुलना उस अनार से की थी जो सिर्फ अमीरों के डाइनिंग टेबल की शोभा बढाता था और उन्ही की पहुँच में था ऐसा ही हाल प्याज के साथ हुआ था। उस साल प्याज 80 रुपये किलों बिका जिसकी वजह थी अटल बिहारी वाजपेई सरकार द्वारा पोखरण के रेगिस्तान में 5 परमाणु परिक्षण करना जिसमें टन के हिसाब से प्याज का इस्तेमाल होना बताया गया।
आज प्याज की कीमत 100 रुपये के पार जाने की तैयारी में है जो इन त्योहारों के मौसम में पार भी कर जायेगी। अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में प्याज के दाम बढ़ने की जो वजह सामने आई वो देश हित में थी लेकिन मनमोहन सिंह सरकार के समय बीते 6 महीनो से आम आदमी को तरसाने वाली प्याज के दाम क्यों बढ़ रहे है इसका कोई ठोस जवाब सरकार का कोई नुमाईंदा नहीं दे रहा है। अब सरकार की तरफ से जो बयान आया वो बेहद चौकाने वाला है, केंद्र सरकार ने माना है कि जमाखोरों की वजह से प्याज के दाम बढ़ रहे हैं। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि देश में प्याज का काफी भंडार है। जमाखोरी के कारण प्याज की कृत्रिम रूप से कमी हो गई है। राज्य सरकारें ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
पटना में प्याज की कीमतें सौ रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच केंद्र सरकार ने इसकी जमाखोरी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का राज्य सरकारों से आग्रह करते हुए कहा कि कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से जरूरत पड़ने पर इसका आयात किया जा सकता है। राजधानी दिल्ली सहित देश के अधिकांश हिस्से में प्याज की कीमत औसतन 90 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच चुकी है। पिछले चार महीने में प्याज की कीमतें चार गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति बहुत चिंता का विषय है। लेकिन इसमें खाद्य पदार्थों और सब्जियों की वजह से बढ़ोतरी होती है। हालांकि उन्होंने इस बढ़ोतरी को अस्थाई बताते हुए कहा कि यह सीजनल मामला है और यह नीचे आ जाएगा।
प्याज आज आम आदमी की पहुँच से दूर हो गया है, आज प्याज से सस्ता सेब बिक रहा है, लेकिन सभी खाद्य पदार्थो का स्वाद बढाने वाला प्याज आज लोगो की थालियों से रूठ चुका है सरकार का मानना है कि प्याज के दाम अभी दो महीने और नीचे नहीं आयेंगे| अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर देश में त्योहारों के मौसम के तौर पर जाना जाता है। बड़े से लेकर छोटा व्यवसायी इस मौके का बखूबी लाभ उठाना चाहता है| जो वो उठा भी रहा है। सरकार बेबस जनता लाचार और प्याज के काला बाजारी अपनी प्याज से होने वाले मुनाफे को लेकर मस्त। आज हालात ऐसे हैं कि लोग एक दूसरे से मज़ाक में कहने लगे है, भैया प्याज खाये कितने दिन हो गये है।
ये तो हो गई मजाक की बात लेकिन आज जनता थाली से गायब हो चुके खाद्य पदार्थों की सबसे जरुरी चीज से धीरे धीरे उनक पहुँच से दूर होती जा रही है। सरकार आज प्याज को लेकर बेबस हो चुकी सरकार के पास सारी मशीनरी होते हुये भी प्याज की कीमतों पर अंकुश नहीं लगा पा रही है।
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