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Sunday, 20 October 2013

Election है भाई

राजा और रजवाड़े भले ही खत्म हो गए हों, लेकिन मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का टिकट पाकर विधायक बनने की आस में बुंदेलखंड में नाम के राजा और रानी, प्रजा के साथ कतार में लगे हैं। बुंदेलखंड में रियासतें गिनती की रही हैं। आजादी के बाद रियासतें भले ही खत्म हो गई हों, मगर इस इलाके में क्षत्रिय परिवार में जन्मे बालक के नाम के साथ आज भी राजा या जू लगाने की परंपरा बरकरार है। यही कारण है कि क्षत्रिय परिवार का शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जिसको राजा या जू कहकर न बुलाया जाता हो।

इस इलाके की विभिन्न रियासतों के वारिस अथवा क्षत्रिय परिवारों से नाता रखने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की चौखट पर दस्तक देने में लगे हैं। कोई पाला बदल रहा है तो कोई अपनी निष्ठा का हवाला देकर चुनाव में टिकट मांग रहा है। इनमें से कई तो अभी विधायक हैं और कई अपने लिए नई जमीन तलाश रहे हैं। बुंदेलखंड में वैसे तो मध्य प्रदेश में छह जिले -छतरपुर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, पन्ना और दतिया- आते हैं। इस इलाके के छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना में नाम के साथ राजा, रानी या जू लिखने की परंपरा अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं ज्यादा है। 

राज्य में नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा में टिकट वितरण की कवायद तेज हो चली है। अन्य लोगों के साथ नाम के राजा भी उम्मीदवार बनने के लिए जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं। छतरपुर जिले की छतरपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट पाने वाले डीलमणी सिंह उर्फ बब्बू राजा, राजनगर क्षेत्र से वर्तमान विधायक विक्रम सिंह उर्फ नाती राजा व पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह उर्फ मुन्ना राजा, महाराजपुर से भाजपा के विधायक मानवेंद्र सिंह उर्फ भंवर राजा, बिजावर से विधायक आशा रानी, भाजपा सांसद जितेंद्र सिंह बुंदेला उर्फ अन्नू राजा, टीकमगढ़ से कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह उर्फ जग्गू राजा, खरगापुर से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बेबी राजा टिकट पाने के लिए ताल ठोंक रहे हैं। इसी तरह पन्ना राजघराने की जीतेश्वरी देवी उर्फ युवरानी भाजपा से टिकट की दावेदार हैं।

एक तरफ जहां प्रजा के साथ राजा टिकटें मांग रहे हैं, वहीं एक राजा दूसरे राजा की टिकट कटवाने में भी पूरी तरह सक्रिय है। इन राजाओं की दोनों ही दलों में मजबूत पकड़ है, यही कारण है कि अधिकांश दावेदारों को मैदान में जोर आजमाइश करने का मौका मिल जाएगा। बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र व्यास कहते हैं कि इस इलाके की राजनीति ब्राह्मण और क्षत्रिय के बीच घूमती है। खासकर छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना जिलों में आरक्षित विधानसभा सीटों को छोड़कर शेष स्थानों से इन्हीं दो वर्गों के प्रतिनिधि जीतकर आते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये दोनों वर्ग धन और बाहुबल में अन्य से कहीं आगे हैं। 

राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर बुंदेलखंड क्षेत्र में टिकट के लिए कतार में खड़े कितने राजा और रानी टिकट पाने में सफल होते हैं, इस पर सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है।

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