वियाग्रा जिसने पूरी दुनिया के मर्दों को अपना दिवाना बना दिया लेकिन वो सिर्फ पैसे वालों के ही हाथ तक पहुंचती थी अब वो दवा पूरी दुनिया के आम से लेकर ख़ास लोगो के इस्तेमाल में आ सकती है| मर्दों के बीच मशहूर यौन स्फूर्ति बढाने वाली विश्वविख्यात जेनेरिक दवा वियाग्रा अब 800 रुपये की बजाय मात्र 85 पैसे में मिल सकती है। इस खबर से वो आम मर्द खुश हो सकते है जो इस दवा का नाम तो जानते थे लेकिन मंहगी होने कि वजह से खरीद नहीं सकते थे अब ये उनकी जेब कि पहुँच में आ गई है|
पूरी दुमिया के मर्दों के बीच चर्चा में रही विश्वविख्यात वियाग्रा दवा का फाइजर कंपनी ने ब्रिटेन में पेटेंट करा रखा था, कुछ ही समय में वो पेटेंट ख़त्म होने जा रहा है। पेटेंट ख़त्म होने के बाद कोई भी दवा बनाने वाली कंपनी इस दवा में इस्तेमाल किये जाने वाले केमिकल साल्ट का इस्तेमाल कर ये दवा बना सकती है। भारत में दवा बनाने वाली कंपनिया वैसे भी सस्ती दवा बनाने के लिए विश्व में प्रसिद्द है। वियाग्रा का पेटेंट ख़त्म होने से विश्व की नामी गिरामी और छोटी दवा कंपनिया भी वियाग्रा जैसी दवा मार्केट में 'शौकिनो' के लिए उतारने के लिए स्वतंत्र हो जाएँगी।
वियाग्रा बनाने वाली कंपनी फाइजर ने 1999 में ब्रिटेन में इस यौन स्फूर्ति को बढाने वाली दवा को लोगो के इस्तेमाल के लिए बाज़ार में उतारा था लेकिन मंहगी होने की वजह से ये दवा आम लोगो कि पहुँच से बाहर थी वजह साफ़ थी इस दवा का पेटेंट फाइजर कंपनी के पास था, इसलिए विश्व की कोई भी कंपनी इसके रासयनिक नाम का इस्तेमाल कर यह दवा नहीं बना सकती थी।
पूरी दुमिया के मर्दों के बीच चर्चा में रही विश्वविख्यात वियाग्रा दवा का फाइजर कंपनी ने ब्रिटेन में पेटेंट करा रखा था, कुछ ही समय में वो पेटेंट ख़त्म होने जा रहा है। पेटेंट ख़त्म होने के बाद कोई भी दवा बनाने वाली कंपनी इस दवा में इस्तेमाल किये जाने वाले केमिकल साल्ट का इस्तेमाल कर ये दवा बना सकती है। भारत में दवा बनाने वाली कंपनिया वैसे भी सस्ती दवा बनाने के लिए विश्व में प्रसिद्द है। वियाग्रा का पेटेंट ख़त्म होने से विश्व की नामी गिरामी और छोटी दवा कंपनिया भी वियाग्रा जैसी दवा मार्केट में 'शौकिनो' के लिए उतारने के लिए स्वतंत्र हो जाएँगी।
वियाग्रा बनाने वाली कंपनी फाइजर ने 1999 में ब्रिटेन में इस यौन स्फूर्ति को बढाने वाली दवा को लोगो के इस्तेमाल के लिए बाज़ार में उतारा था लेकिन मंहगी होने की वजह से ये दवा आम लोगो कि पहुँच से बाहर थी वजह साफ़ थी इस दवा का पेटेंट फाइजर कंपनी के पास था, इसलिए विश्व की कोई भी कंपनी इसके रासयनिक नाम का इस्तेमाल कर यह दवा नहीं बना सकती थी।

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