भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी इन दिनों अपनी एक पुरानी फोटो को पाने के लिये बेचैन है। आडवाणी की ये फोटो 1951-52 के समय की है जब वो खुद और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने कोटा रेलवे स्टेशन पर भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अगुवाई की थी।
करीब साठ साल पुरानी इस फोटो में आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेई की उम्र करीब 25 से 30 साल की रही होगी। दुबले पतले आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेई दक्षिण पंथ के युवा अगुवा नेता के तौर पर उभर रहे थे। जनसंघ के संस्थापक डॉ मुखर्जी के नाक कान कहे जाने वाले ये दोनों युवा नेता भारतीय राजनीति की वो कड़ी थे जो अपने राजनीतिक जीवन में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाते रहे।
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी इन दोनों नेताओं के हाथ में जनसंघ का भविष्य सुरक्षित देखते थे। जिसे 1957 में अटल बिहारी वाजपेई ने मात्र 33 साल की उम्र में सही साबित कर दिखाया और दूसरी लोकसभा में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से चुनकर पहुँच गए। अटल बिहारी वाजपेई की जीत पर तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था ये युवक और लोकसभा में प्रभावी विपक्षी सदस्य की भूमिका निभाने वाला सदस्य एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।
ऐसे ही दुर्लभ वक्तव्यों और स्मृतियों को अपनी किताब "माई कंट्री, माई लाइफ" में समेटने वाले लाल कृष्ण आडवाणी आज अपनी उस तस्वीर को पाने के लिए बेक़रार है जो उनके साथी और राजनीतिक गुरु डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कोटा रेलवे स्टेशन पर खिची गई थी।
आडवाणी ने एक तरह से अपने को भाजपा की राजनीति से अलग कर लिया है, आडवाणी आज अपनी पुरानी यादो को समेटने में लगे है, इस तस्वीर के बाबत आडवाणी के पास फोन भी आया लेकिन वो दुर्लभ तस्वीर नहीं आई आडवाणी का कहना है उस 'तस्वीर का इंतज़ार मै आगे भी करूंगा वो मुझे मिल जाये तो मुझे अच्छा लगेगा'।
करीब साठ साल पुरानी इस फोटो में आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेई की उम्र करीब 25 से 30 साल की रही होगी। दुबले पतले आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेई दक्षिण पंथ के युवा अगुवा नेता के तौर पर उभर रहे थे। जनसंघ के संस्थापक डॉ मुखर्जी के नाक कान कहे जाने वाले ये दोनों युवा नेता भारतीय राजनीति की वो कड़ी थे जो अपने राजनीतिक जीवन में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाते रहे।
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी इन दोनों नेताओं के हाथ में जनसंघ का भविष्य सुरक्षित देखते थे। जिसे 1957 में अटल बिहारी वाजपेई ने मात्र 33 साल की उम्र में सही साबित कर दिखाया और दूसरी लोकसभा में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से चुनकर पहुँच गए। अटल बिहारी वाजपेई की जीत पर तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था ये युवक और लोकसभा में प्रभावी विपक्षी सदस्य की भूमिका निभाने वाला सदस्य एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।
ऐसे ही दुर्लभ वक्तव्यों और स्मृतियों को अपनी किताब "माई कंट्री, माई लाइफ" में समेटने वाले लाल कृष्ण आडवाणी आज अपनी उस तस्वीर को पाने के लिए बेक़रार है जो उनके साथी और राजनीतिक गुरु डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कोटा रेलवे स्टेशन पर खिची गई थी।
आडवाणी ने एक तरह से अपने को भाजपा की राजनीति से अलग कर लिया है, आडवाणी आज अपनी पुरानी यादो को समेटने में लगे है, इस तस्वीर के बाबत आडवाणी के पास फोन भी आया लेकिन वो दुर्लभ तस्वीर नहीं आई आडवाणी का कहना है उस 'तस्वीर का इंतज़ार मै आगे भी करूंगा वो मुझे मिल जाये तो मुझे अच्छा लगेगा'।

No comments:
Post a Comment