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Saturday, 29 June 2013

दलाओ को रोको नहीं तो खराब होगी छवि

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश और सबसे बड़ी जनसँख्या का पोषक| यहाँ की पुलिस का रुतबा भी अन्य प्रदेशों की पुलिस से अलग|वजह यहाँ की पुलिस हर घंटे कोई न कोई मामला निपटाती रहती है लेकिन अगर प्रदेश पुलिस के मुखिया देवराज नागर के एक बयान पर ध्यान दें तो यूपी पुलिस को दलाल चला रहे है| पुलिस मुखिया देवराज नागर ने मेरठ में अपने मातहतो को समझाते हुये कहा कि आपकी कार्यशैली जनता के रक्षक की होनी चाहिये ना कि उनके आका की आज आम जनता थानों में अकेले आने में डरती है इसके लिए वो दलाल का सहारा लेती है| 

DGP देवराज नागर की बात में अगर थोड़ी भी सच्चाई है तो ये स्थिति प्रदेश के पुलिस, गृह विभाग और सरकार के लिए चिंताजनक बात है| DGP द्वारा दिए गए इस बयान कि प्रदेश सरकार को समीक्षा करानी चाहिये ताकि इस सच्चाई का पता लगाकर थानों को दलाओ से मुक्त कराया जा सके साथ ही उन अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जा सके जो ऐसे दलालों को संरक्षण देते है| 

पूर्व में भी सपा सरकारों के दौरान ऐसे मामले सामने आते रहे जब थानों को दलालों द्वारा चलाये जाने कि बात सामने आती रही है| हमारा सवाल ये है कि क्या पुलिस सीधे जनता से संवाद स्थापित नहीं कर सकती या अपनी छवि उस दोस्त के जैसे नहीं बना सकती जिससे प्रदेश कि जनता अपनी बात आसानी से कह सके| प्रदेश कि जनता अपने बहुमूल्य वोट से सरकार चुनती है तो उसकी इतनी अपेक्षा तो हो सकती है कि अगर वो फ़रियाद लेकर थाने में जाये तो सामने वर्दी पहने बैठा व्यक्ति उससे ठीक से पेश आये|

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