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Friday, 21 June 2013

आहत है आडवाणी जी


भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी मोदी को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने से काफी आहत हैं। राजग से जदयू के अलगाव की घटना को पीछे छोड़ भाजपा भले ही आगे बढ़ चुकी हो,  पार्टी के स्तम्भ लालकृष्ण आडवाणी मौका मिलते ही पार्टी में चल रहे अस्थिरता को याद दिलाना नहीं भूलते।  डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 61वें बलिदान दिवस पर यहां आयोजित एक समारोह के दौरान आडवाणी ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को हटाने की दूरदृष्टि ही थी कि जनसंघ की पहली बैठक में वह दूसरे दल के लोगों को लेकर आए थे।


शुक्रवार को श्याम प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी को उनकी सामूहिक नेतृत्व की कार्यशैली की याद दिलाई। ऐसा कर उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी और संघ के तमाम विरोधों के बावजूद वह अभी भी सामूहिक नेतृत्व के तहत एनडीए का कुनबा बढ़ाने के हिमायती हैं लेकिन आडवाणी अब भी पार्टी के नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एकला चलो रणनीति के खिलाफ हैं।

ससे यह भी साफ हो गया है कि आडवाणी के मोदी विरोधी रुख में फिलहाल कोई नरमी नहीं आई है। आडवाणी ने पार्टी के दिग्गजों को मुखर्जी की सामूहिक नेतृत्व के प्रति आस्था की याद दिलाई। इस कार्यक्रम में भाषण देने के दौरान आडवाणी की आंखें छलछला गई। देश के प्रति श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान को याद करते हुए आडवाणी भावुक हो गए और लगभग दो मिनट तक उनकी आंखें डबडबाई रही और गला रुंध गया। बाद में उन्होंने खुद को काबू किया और मुखर्जी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। 

गौरतलब है कि मोदी को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने के विरोध में आडवाणी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा श्यामाप्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधारा से भटक गई है। 10 जून को इस्तीफा देने के बाद आडवाणी का यह पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था, जिसमें उन्होंने राजनाथ सिंह के साथ मंच साझा किया। 

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