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Friday, 28 June 2013

CAT की परीक्षा भी धांधली से अछूती नहीं

दाखिले के लिए होने वाले परीक्षाओं में धांधली आम बात होती जा रही है। चाहे वो बड़े संस्थानों के लिए हो या फिर प्राइवेट संस्थानों के लिए। ऐसी ही धांधली का पता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) व अन्य प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में दाखिले के लिए आयोजित कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के रिजल्ट में पाया गया। इस टेस्ट के रिजल्ट में छेड़छाड़ कर 80 अभ्यर्थियों का परसेंटाइल बढ़ा दिया गया। इस धांधली का खेल कैट की वेबसाइट www.catiim.in को मेंटेन करने वाली लखनऊ की वेब वेवर्स ने किया है।

मामला पकड़े जाने पर इस बार कैट का आयोजन करने वाले केरल के आईआईएम कोझिकोड़ ने इस कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। सभी 80 अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। कैट में इस बार 2,14,068 अभ्यर्थी बैठे थे। परीक्षा लखनऊ समेत देशभर के 36 शहरों में हुई थी।

कैट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में पहली बार हुई इस सेंधमारी से सभी हैरान और परेशान हैं। आईआईएम कोझिकोड के लिए पब्लिक रिलेशन का जिम्मा संभालने वाली अधिकारी मेघना चंद्रा ने बताया कि लखनऊ की वेब वेवर्स कंपनी कैट की वेबसाइट का मेंटेनेंस करती है। आईआईएम कोझिकोड़ ने कैट के रिजल्ट के डाटा की जो सीडी वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए वेब वेवर्स को सौंपी उसमें इसने टेंपरिंग कर 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ा दिए गए। 

शिकायत पर आईआइएम कोझिकोड़ ने मास्टर डाटा सीडी से मिलान किया तो वेब वेवर्स की गड़बड़ी पकड़ी गई। जांच में उजागर हुआ कि सारी कारस्तानी वेब वेवर्स की है आईआईएम कोझिकोड़ इसके लिए कहीं से भी जिम्मेदार नहीं है क्योंकि उसने प्रोमेटिक कंपनी से रिजल्ट का डाटा तैयार कराने के बाद वेब वेवर्स को वेवसाइट पर अपलोड करने के लिए दे दिया था। जिन 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ाए गए थे उन्हें कई आईआईएम व बिजनेस स्कूलों में दाखिले मिल गए थे और इसके कारण अन्य छात्रों को नुकसान उठा पड़ा है।

मामला पकड़े जाने के बाद सभी दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। उनकी जगह जो अभ्यर्थी बेहतर परसेंटाइल लाए थे उन्हें दाखिला दिया जा रहा है। वेब वेवर्स के खिलाफ आईआईएम कोझिकोड ने बीती 15 जून को ही रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वेब वेवर्स का ऑफिस लखनऊ में है। मेघना चंद्रा कहती हैं कि इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर इन अभ्यर्थियों को वेब वेवर्स ने किस नीयत से लाभ पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वेब वेवर्स ने पूरा खेल धन के लालच में किया हो। पूरा मामला तो पुलिस की पड़ताल और मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

इन सभी 80 अभियार्थों के नाम और टेस्टिंग आईआईएम आईडी नंबर सभी 13 आईआईएम प्रबंध संस्थानों को भेज दिए गए हैं जो आईआईएम केर स्कोर का प्रयोग करते हैं ताकि आगे किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका न रहे। गौरतलब है कि आईआईएम में दाखिले के लिए पिछले साल 11 अक्तूबर से लेकर 6 नवम्बर तक कैट के ठाट कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट लिए गए थे। इसके परिणाम बीती 9 जनवरी को घोषित किया गया था और सभी आईआईएम में कैट स्कोर के अनुसार, जीडीआई के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया गया था और जून में दाखिले की प्रक्रिया पूरी कर ली। 

गौरतलब है कि कैट की वेबसाइट www.catiim.in का मेंटेनेंस का काम वेब वेवर्स तीन वर्षों से कर रही है। आईआईएम कोझिकोड की पीआर अधिकारी मेघना कहती हैं कि यह ठेका उसे वर्ष दो साल पहले तब मिला था जब आईआईएम लखनऊ ने कैट आयोजित कराया था। आईआईएम कलकत्ता ने भी जब कैट का आयोजन करवाया तो वेबसाइट को मेंटेन करने का पूरा काम इसी से करवाया। बीते दो बार कैट में कोई गड़बड़ी न मिलने के कारण ही इस बार हमने भी फैसला किया कि इसी से वेबसाइट का मेंटेनेंस का काम करवाएंगे।

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