नई दिल्ली। गाय-भैंस- बकरी, जमीन, सोना, चांदी पर तो आपने निवेश कराते या करते सुना होगा लेकिन 'घी' पर निवेश कराकर रकम दुगुना करने वाली एक कंपनी प्रकाश में आई है। आज एक ऐसी कम्पनी का खुलासा करने जा रहे है जो 'घी' से रकम दुगुना करने का दावा करती है।
HBN डेयरी एंड एलायड लिमिटेड नामक कंपनी पशुओ और 'घी' पर पैसा लगवा कर अपनी पूँजी स्कीम के माध्यम से 31 मार्च 2011 तक 745 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। कंपनी निवेशको को उनके द्वारा जमा किये गए पैसे का रिटर्न पशुओ की बिक्री और उन पशुओ से उत्पादित घी को बेचकर करेगी।
कंपनी की वेबसाईट पर दावा किया गया है कि दिल्ली में स्थापित ये कंपनी 90 के दशक से दूध व्यवसाय में लगी हुई है। इसका काम अन्य राज्य हरियाणा में भी फैला हुआ है। हरियाणा के समालखा और गन्नौर में कई कई एकड़ में फैले डेयरी फार्म है।
कंपनी ने ये दावा किया है कि निवेशक जिस समय अपनी रकम निकलना चाहेगा उसी समय उन्हें पशुओ और घी की अनुमानित कीमत के हिसाब से रिटर्न दे दिया जायेगा। स्कीम के तहत एक महीने से नौ साल तक कि अवधि के लिए निवेश के विकल्प दिए जा रहे है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से बिना मंजूरी लिए चलाई जा रही इस योजना और सामूहिक निवेश योजना की जांच शुरू हो गई है। निवेशको ने सेबी से इस तरह के निवेश की शिकायत कि थी। नियामक ने जब इसकी जांच शुरू कि तो निवेशको कि शिकायत सही पाई गई।
सेबी की जांच शुरू होते ही कंपनी ने पहले तो अपने को रजिस्टर्ड कराने की कोशिश कि लेकिन सेबी द्वारा विस्तृत जानकारी माँगने पर कंपनी ने अपना कार्यालय ही बदल दिया। नियामक की तरफ से कंपनी को कई बार नोटिस दी गई जिसे कंपनी ने रिसीव नहीं किया।
सेबी ने बीते महीने ही इस मामले को लेकर कंपनी को एक और समन भेजा वही HBN में निवेश कराने वाले निदेशकों को मई महीने के आखिर में सेबी के सामने पेश होने को कहा लेकिन ये समन भी कंपनी ने रिसीव नहीं किया।
सेबी अब कंपनी पर अपना शिकंजा कसने जा रही है, लेकिन एक बात जो इस मुद्दे में सामने आई सरकार और सेबी आम आदमी कि गाढ़ी कमाई बचाने के लिए जितने भी प्रयास कर ले रोजाना कोई ना कोई कंपनी का खुलासा हो रहा है जो आम आदमियों से इस तरह का निवेश करा उनके पैसे को डकार रही है।
बीते वर्ष भी सेबी ने एक कंपनी बीटल लाइव स्टाक एंड फ़ार्म लिमिटेड को नोटिस जारी किया था, इस कंपनी ने बकरी पालन का हवाल देकर निवेशको से रकम जमा कराई थी इस कंपनी की स्कीम में निवेशक कुछ हज़ार रुपये जमा करके बकरी का मालिक बन सकता था।
इन बकरियों के पालन और उनके देखरेख की जिम्मेदारी खुद कंपनी उठा रही थी। हर निवेशक से ये कहा जाता था कि कंपनी द्वारा पाली जा रही बकरी हर साल चार बच्चे देती है जिसके मालिक वो खुद होंते है इन्ही बकरी के बच्चो को निवेशक के पैसे दुगुना तिगुना करके वापस किये जायेंगे।
इन स्कीमो को चलाने में राजधानी दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हज़ारो कंपनिया कुकुरमुत्ते की तरह उग गई। जो पशुओ पर पैसे लगाकर रकम दुगुना करती थी।
समृद्धा जीवन फूड्स लिमिटेड, सक्षम डेयरी इंडिया लिमिटेड नामक कंपनिया छोटे छोटे व्यवसाय करके अपना काम किया करती थी लेकिन फर्जी चिट फंड कंपनी खोलकर जब इन्होने छोटे व्यवासाइयों को अपने पशुओ और व्यवसाय को बढ़ावा देने का लालच दिया तो करीब आधा दर्जन राज्यों के पशु व्यवसाई और कम लागत लगाकर ज्यादा पाने की चाहत रखने वाले आम आदमियों ने अपनी जमा पूंजी भी गंवा दी।
समृद्धा जीवन फूड्स लिमिटेड नामक कंपनी चिट फंड में आने से पहले खुद डेयरी व्यवसाय का काम करती थी| गुरुकृपा डेयरी के नाम से काम करने वाली इस कंपनी ने 29 अप्रैल 2002 को सक्षम डेयरी इंडिया लिमिटेड के नाम से पुणे के कंपनी रजिस्ट्रार के आफिस से रजिस्ट्रेशन कराकर चिट फंड की दुनिया में कदम रखा और बीते 10 सालों में इसने करीब अरबों का व्यवसाय कर डाला| आज इस कंपनी के पास करीब 35 हज़ार कस्टमर है जिनके पैसे डूबने के कगार पर है।
समृद्धा जीवन फूड्स लिमिटेड प्राइवेट लिमिटेड के व्यवसाय का तरीका और कंपनियों से काफी अलग है। इस कंपनी के पास अपने करीब 30 हज़ार भैसे हैं, साथ ही 1 हज़ार बकरियां जिन पर कंपनी ने बाकायदा स्कीम निकाल कर लोगो से पैसे जमा कराये। कंपनी आम लोगो के बीच अपने फार्म हाउसेज में पाली गई भैंसों और बकरियों को किलो के हिसाब से लोगो के नाम कर देती थी|
स्कीम के तहत एक कांट्रेक्ट पेपर साइन किया जाता था जिसमें इन्वेस्टर हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम जमा कराता था, समय पूरा होने पर या तो इन्वेस्टर अपनी भैंस या बकरी को कंपनी से ले ले या फिर अपने द्वारा जमा किये गए पैसे को वापस मय ब्याज ले ले। इस कांट्रेक्ट का एक निश्चित समय निर्धारित था लेकिन इस अवधि के बीच दुधारू भैंस का दूध कंपनी खुद बेचकर मुनाफ़ा कमाती रहती थी। कंपनी ने अपनी इस स्कीम के तहत एक एक दुधारू भैंस और बकरियों को कई-कई इन्वेस्टर को कांट्रेक्ट के मुताबिक एलाट किया।
इसी प्रकार सक्षम डेयरी लिमिटेड ने भी 21 दिसंबर 2000 को हरियाणा और दिल्ली में काम करने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की बगैर अनुमति के आम जनता से धन उगाही में जुटी गैर बैंकिंग कंपनियों तथा सक्षम कार्यालय में बगैर पंजीयन के रियल स्टेट के कारोबार के नाम से आम जनता से धन बटोर रही इन कंपनियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने पूर्व में भी सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस में प्रकरण दर्ज कराए थे।
समृद्धा जीवन फूड्स लिमिटेड, सक्षम डेयरी इंडिया लिमिटेड नामक कंपनिया छोटे छोटे व्यवसाय करके अपना काम किया करती थी लेकिन फर्जी चिट फंड कंपनी खोलकर जब इन्होने छोटे व्यवासाइयों को अपने पशुओ और व्यवसाय को बढ़ावा देने का लालच दिया तो करीब आधा दर्जन राज्यों के पशु व्यवसाई और कम लागत लगाकर ज्यादा पाने की चाहत रखने वाले आम आदमियों ने अपनी जमा पूंजी भी गंवा दी।
समृद्धा जीवन फूड्स लिमिटेड नामक कंपनी चिट फंड में आने से पहले खुद डेयरी व्यवसाय का काम करती थी| गुरुकृपा डेयरी के नाम से काम करने वाली इस कंपनी ने 29 अप्रैल 2002 को सक्षम डेयरी इंडिया लिमिटेड के नाम से पुणे के कंपनी रजिस्ट्रार के आफिस से रजिस्ट्रेशन कराकर चिट फंड की दुनिया में कदम रखा और बीते 10 सालों में इसने करीब अरबों का व्यवसाय कर डाला| आज इस कंपनी के पास करीब 35 हज़ार कस्टमर है जिनके पैसे डूबने के कगार पर है।
समृद्धा जीवन फूड्स लिमिटेड प्राइवेट लिमिटेड के व्यवसाय का तरीका और कंपनियों से काफी अलग है। इस कंपनी के पास अपने करीब 30 हज़ार भैसे हैं, साथ ही 1 हज़ार बकरियां जिन पर कंपनी ने बाकायदा स्कीम निकाल कर लोगो से पैसे जमा कराये। कंपनी आम लोगो के बीच अपने फार्म हाउसेज में पाली गई भैंसों और बकरियों को किलो के हिसाब से लोगो के नाम कर देती थी|
स्कीम के तहत एक कांट्रेक्ट पेपर साइन किया जाता था जिसमें इन्वेस्टर हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम जमा कराता था, समय पूरा होने पर या तो इन्वेस्टर अपनी भैंस या बकरी को कंपनी से ले ले या फिर अपने द्वारा जमा किये गए पैसे को वापस मय ब्याज ले ले। इस कांट्रेक्ट का एक निश्चित समय निर्धारित था लेकिन इस अवधि के बीच दुधारू भैंस का दूध कंपनी खुद बेचकर मुनाफ़ा कमाती रहती थी। कंपनी ने अपनी इस स्कीम के तहत एक एक दुधारू भैंस और बकरियों को कई-कई इन्वेस्टर को कांट्रेक्ट के मुताबिक एलाट किया।
इसी प्रकार सक्षम डेयरी लिमिटेड ने भी 21 दिसंबर 2000 को हरियाणा और दिल्ली में काम करने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की बगैर अनुमति के आम जनता से धन उगाही में जुटी गैर बैंकिंग कंपनियों तथा सक्षम कार्यालय में बगैर पंजीयन के रियल स्टेट के कारोबार के नाम से आम जनता से धन बटोर रही इन कंपनियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने पूर्व में भी सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस में प्रकरण दर्ज कराए थे।

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