22 मई को उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा ने मायावती सरकार के दौरान बनाये गये स्मारकों, पार्को में हुये घोटाले की जांच रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। आज करीब सवा महीने बीतने के बाद भी प्रदेश की सपा सरकार और उसके मुखिया अखिलेश यादव ने कोई भी कार्रवाई किसी भी आरोप और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ नहीं की।
जस्टिस एन के मेहरोत्रा द्वारा सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में स्मारकों के निर्माण में 14.10 अरब के घोटाले के लिए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा सहित कुल 199 लोगों को दोषी ठहराते हुए उनसे रकम वसूलने की सिफारिश की है। इसके साथ ही उन्होंने 19 लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराकर मुकदमा चलाने की सिफारिश की।
बसपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अखिलेश सरकार पर मुसलमानों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाते हुये मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुये एक पत्र लिखा है जिसमें नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने साफ़ लिखा है अखिलेश सरकार मुसलमानों के साथ धोखा कर रही है जिसका सुबूत है मेरे खिलाफ लोकायुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर होने वाली संभावित कार्रवाई। सरकार लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट को हथियार बना कर उन्हें परेशान करना चाहती है और जेल भेजना चाहती है।
ये पत्र नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मुस्लिम धर्म के प्रचार प्रसार में लगे लोगो और मौलवी के साथ मस्जिदों के मुत्त्वलियों को भी भेजा है। सिद्दीकी के करीबी सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब मुस्लिम समाज को साथ लेकर अपना बचाव करना चाह रहे है।
लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा ने अपनी रिपोर्ट एक महीने पहले ही सरकार को सौंप दी थी, उसके बाद भी सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जबकि जस्टिस मेहरोत्रा ने सरकार को तत्काल मुक़दमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की संतुति की थी। ईधर कार्रवाई न होने की वजह से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मिले समय में उन्होंने इस प्रकरण और लोकायुक्त की रिपोर्ट का राजनीतिककरण करने का समय दे दिया और मौलवियों का सहारा लेकर अपने को बचाने का रास्ता खोजने का रास्ता भी दिखा दिया है।
अब समय और प्रदेश की राजनीति ही तय करेगी की प्रदेश की अखिलेश सरकार नसीमुद्दीन को जेल भेजती है या नसीमुद्दीन मुस्लिम वोट बैंक का सहारा लेकर खुद को बचा ले जाते है|
जस्टिस एन के मेहरोत्रा द्वारा सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में स्मारकों के निर्माण में 14.10 अरब के घोटाले के लिए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा सहित कुल 199 लोगों को दोषी ठहराते हुए उनसे रकम वसूलने की सिफारिश की है। इसके साथ ही उन्होंने 19 लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराकर मुकदमा चलाने की सिफारिश की।
बसपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अखिलेश सरकार पर मुसलमानों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाते हुये मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुये एक पत्र लिखा है जिसमें नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने साफ़ लिखा है अखिलेश सरकार मुसलमानों के साथ धोखा कर रही है जिसका सुबूत है मेरे खिलाफ लोकायुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर होने वाली संभावित कार्रवाई। सरकार लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट को हथियार बना कर उन्हें परेशान करना चाहती है और जेल भेजना चाहती है।
ये पत्र नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मुस्लिम धर्म के प्रचार प्रसार में लगे लोगो और मौलवी के साथ मस्जिदों के मुत्त्वलियों को भी भेजा है। सिद्दीकी के करीबी सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब मुस्लिम समाज को साथ लेकर अपना बचाव करना चाह रहे है।
लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा ने अपनी रिपोर्ट एक महीने पहले ही सरकार को सौंप दी थी, उसके बाद भी सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जबकि जस्टिस मेहरोत्रा ने सरकार को तत्काल मुक़दमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की संतुति की थी। ईधर कार्रवाई न होने की वजह से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मिले समय में उन्होंने इस प्रकरण और लोकायुक्त की रिपोर्ट का राजनीतिककरण करने का समय दे दिया और मौलवियों का सहारा लेकर अपने को बचाने का रास्ता खोजने का रास्ता भी दिखा दिया है।
अब समय और प्रदेश की राजनीति ही तय करेगी की प्रदेश की अखिलेश सरकार नसीमुद्दीन को जेल भेजती है या नसीमुद्दीन मुस्लिम वोट बैंक का सहारा लेकर खुद को बचा ले जाते है|

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