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Monday, 23 September 2013

महाभारत में शहीद होंगे बहुगुणा

उत्तराखंड में जून में आई आपदा ने इस पर्वतीय प्रदेश की सियासत को गर्म कर दिया था, आपदा इतनी भीषण थी की केंद्र सरकार और कांग्रेस नेतृत्व ने उत्तराखंड सरकार और वहां के मुख्यमंत्री को आपदा से निपटने के लिए पूरी छूट दे दी थी, पूरे देश ने इस आपदा से निपटने में वहां की सरकार का पूरा साथ दिया। लाखो लोग उत्तराखंड आपदा से प्रभावित हुये, चार धाम यात्रा भी पूरी तरह से रोक दी गई। उत्तराखंड में आई उस विनाशलीला में बाबा केदारनाथ का धाम और पूरी केदारघाटी तबाह हो गई। 

कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री वजय बहुगुणा को आर्थिक, सैन्य बल और सिस्टम सपोर्ट देकर आपदा प्रभावित लोगो को राहत पहुंचाने के लिए हर सम्भव मदद की थी इस बीच विजय बहुगुणा की सुस्ती और उनके काम करने के तरीके को लेकर भी सवालिया निशान लगने शुरू हो गए। वही बहुगुणा सरकार में शामिल उन्ही के सहयोगी उनके लिए गड्ढा खोदने का काम करने लगे। आपदा के समय मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की निष्क्रियता को लेकर स्थानीय कांग्रेसियों ने कांग्रेस नेतृत्व और आलाकमान सोनिया गांधी के सामने उनकी बखिया उधेड़ कर रख दी। 

विजय बहुगुणा के विरोधियों का नेतृत्व खुद केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत ने किया वजह साफ़ थी जिस तरह विधानसभा चुनावों के बाद विजय बहुगुणा ने अपने ब्राह्मण होने का फायदा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने के लिए उठाया था वो हरीश रावत को नागवार गुजरा था, विधानसभा चुनावों के बाद अगर विजय बहुगुणा कांग्रेस आलाकमान से अपनी नजदीकियों का फायदा उठाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुये थे उसने अन्दर ही अन्दर हरीश रावत गुट को आंदोलित कर दिया था। 

हरीश रावत इस आपदा के बहाने विजय बहुगुणा से मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनने की पूरी तैयारी कर चुके थे लेकिन सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने आपदा को प्राकृतिक आपदा मान कर उन्हें जीवनदान दे दिया था। विजय बहुगुणा भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए आपदा के राहत कार्य के साथ साथ पार्ट के अन्दर उठ रहे विरोध के स्वर को थामने पर भी लगे थे, इसी बीच उन्ही के मंत्रिमंडल के हरक सिंह रावत ने उत्तराखंड की राजनीति को अस्थिर करने के लिए नई राजनीतिक चाल चली जिसमें उन्होंने कांग्रेसी विधायको का मन टटोलने के लिए अपने आवास पर एक डिनर पार्टी आयोजित की थी जिसमें ऐसी घटना घटी जिसने हरक सिंह रावत की मुख्यमंत्री की कुर्सी हलाने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 

हरक सिंह रावत की इस डिनर पार्टी के दौरान हुई फायरिंग में दो लोगो के जख्मी हो गए| कांग्रेस के खानपुर विधायक और वन विकास निगम के अध्यक्ष कुंवर प्रणव सिंह के चैंपियन पर गैरकानूनी फायरिग करने का आरोप हैं| कृषि मंत्री ने के यहाँ आयोजित इस भोज में प्रदेश के कई बड़े-बड़े मंत्री और विधायक शिरकत करनें पहुंचे थे। करीब 9 बजे खानपुर विधायक और वन विकास निगम के अध्यक्ष कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन भी समारोह में सम्मलित होनें पहुंचे प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हरक सिंह रावत से मुलाकत करनें के बाद उन्होंने हवाई फायर किये| इसके बाद कुंवर सिंह चैंपियन नें डाइनिंग हॉल में जाकर भी हवाई फायरिंग का प्रदर्शन किया। इसी दौरान एक गोली छिटकर कांग्रेस नेता विवेकानंद खंडूरी के पाँव में जा लगी और दूसरी गोली हरिद्वार के नेता रवींद्र सैनी को लगी। 

हरक सिंह रावत की इस डिनर पार्टी में खुद मुख्यमंत्री भी शामिल होने वाले थे लेकन उसके पहले ही हुई इस फायरिंग ने बहुगुणा के कार्यक्रम को रद्द करा दिया साथ ही हरक सिंह की मुख्यमंत्री बनने के सपने को भी तोड़ दिया था। हरक सिंह रावत स पार्टी के बहाने अपनी ताकत दिखाना चाहते थे। दिल्ली दरबार से आ रही ख़बरों के मुताबिक लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेतृत्व उतराखंड में परिवर्तन के संकेत दे चुका है, विजय बहुगुणा इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे है वही उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और राजनीतिक विरोधी उनकी कुर्सी के पाये उखाड़ने पर लगे हुये है। 

विजय बहुगुणा के साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या से भी उनकी प्रदेश की अध्यक्षी वापस ली जा रह है कांग्रेस ने उनको हटाने के लिए एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले उतराखंड में भारी बदलाव देखने को मिलेगा कुछ नेता जोड़तोड़ भी करते मिलेंगे तो कुछ के सपने उनके द्वारा किये जा रहे गलत कामों की वजह से टूटेंगे। कांग्रेस नेतृत्व किस पर भरोसा दिखाती है साथ ही किसका भाग्य बाकी नेताओं पर भर पड़ता है ये उतराखंड की राजनीति में मची उथल पुथल के शांत होने के बाद ही सामने आयेगा। लेकन ये तो तय है कि विजय बहुगुणा के सर से ताज उतरने वाला है।

विधायकों की गिरफ्तारी सपा-भाजपा की राजनीति तो नहीं

18 सितम्बर को उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान जहाँ मुजफ्फरनगर दंगा पूरी तरह से सदन के अन्दर छाया रहा, शुक्रवार को भाजपा विधायक सुरेश राणा की लखनऊ के गोमतीनगर इलाके से हुई गिरफ्तारी के बाद पूरी प्रदेश की सियासत गर्म हो गई, वहीँ समाजवादी पार्टी और भाजपा इस गिरफ्तारी को लेकर आमने सामने आ गए। विधानसभा सत्र के आखिरी दिन सदन के अन्दर दोनों दलों के विधायकों ने अपने कुर्ते की बांह चढ़ाकर संसदीय गरिमा को तार-तार किया तो सरकार ने सदन के अन्दर हुए अपमान का बदला ले लिया। 

सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगो के आरोप में जारी किये गए वारंट के तामिल के लिए पुलिस अफसरों के चूले कसे तो अफसर भी विधानसभा सत्र के दौरान जिन आरोपी विधायकों को ढूंढ नहीं पा रहे थे वो उन्हें सड़क चलते मिल गए पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुरेश राणा को राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया और जज के सामने प्रस्तुत कर जेल भेजने की तैयारी कर ली उधर बाकी आरोपी विधायक राजधानी में सत्र समाप्त होते है सरकार और पुलिस की जानकारी में और उनकी आँखों के सामने अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुँच गए।

सरकार और पुलिस का समन्वय यहाँ समझ नहीं आया जो मुजफ्फरनगर एक छोटी सी घटना के बाद दो सप्ताह तक साम्प्रदायिक दंगो की आग में झुलसता रहा। प्रदेश की अखिलेश सरकार भाजपा के विधायको हुकुम सिंह, संगीत सोम, भारतेंदु सिंह, सतीश राणा और बसपा विधायक नूर सलीम राणा को इस दंगे का जिम्मेदार मानकर मुकादमा दर्ज कराती रही| पुलिस इन्हें खोजने के लिए वारंट लेकर इधर उधर दौडती रही| वो सभी माननीय लगातार चार दिनों तक प्रदेश की राजधानी के अति महत्वपूर्ण और अति सुरक्षित इलाकों में घुमते रहे| तब पुलिस ने सपा सरकार के इशारे पर गिरफ्तार नहीं किया लेकिन जैसे ही वो अपने क्षेत्र जो इस समय प्रदेश का सांप्रदायिक दंगो को लेकर संवेदनशील हो चुका है वहां पहुंचे पुलिस ने उन्हें उनके घरो से गिरफ्तार कर लिया। 

सरकार और पुलिस का ये नाटक समझ से परे है जो विधायक राजधानी लखनऊ में आसानी से गिरफ्तार किये जा सकते थे उन्हें उनके ही प्रभाव वाले क्षेत्र में उनके समर्थको के सामने गिरफ्तार करने के पीछे सरकार की मंशा क्या है? ये राजनीति की थोड़ी समझ रखने वाला व्यक्ति समझ जाएगा। मुजफ्फरनगर दंगो के पीछे किसका हाथ है ये जांच के बाद पता चलेगा लें पूर्व में आ रही खबरों और प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के तथाकथित फ़ोन करने की बात सामने आने के बाद इन दंगो की छुपी सच्चाई सामने आने लगी है। भाजपा विधायकों हुकुम सिंह, संगीत सोम और बसपा के नूर सलीम राणा की गिरफ्तारी कुछ और ही कहानी कह रही है। 

मुजफ्फरनगर में हुई इन गिरफ्तारियों के पीछे सपा-भाजपा की सोची समझी राजनीतिक चाल तो नहीं है? संगीत सोम ने अपनी गिरफ्तारी के समय कहा उनकी गिरफ्तारी पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी मंत्री और कद्दावर सपा नेता आज़म खान के इशारे पर हुई है, संगीत सोम का ये बयान अपने में बहुत कुछ कह रहा है। वहीँ सरकार और पुलिस ने इन गिरफ्तारियों को मुजफ्फरनगर में करके एक बार फिर उन जख्मो को कुरेद दिया है जो अभी दंगो के बाद हरे है। विधायको को गिरफ्तार करवा कर प्रदेश की अखिलेश सरकार कौन सा सन्देश मुजफ्फरनगर वासियों को देना चाहती है इसे समझना अभी बाकी है। 

भाजपा विधायकों की गिरफ्तारी के समय उनके समर्थको के आक्रोश था और वहा हुई नारेबाजी के बाद एक बात साफ़ हो गई कि सरकार ने दंगो की आग को सेना और अर्धसैनिक बल लगाकर दबा भले दिया हो लेकिन अन्दर ही अंदर चिंगारी सुलग रही है। सरकार और भाजपा की मंशा साफ़ नहीं है इन गिरफ्तारियों को जो लखनऊ में हो जानी चाहिए थी उसे मुजफ्फरनगर में कर के सरकार ने दबी चिंगारी को हवा देने का ही काम किया वो इन दोनों पार्टियों की मिली जुली राजनीति की तरफ ही इशारा कर रही है। 

जांच एजेंसियों की जांच में कितनी सामने आयेगी ये तो रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा लेकिन पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति को इन दोनों दलों ने 27 अगस्त को ही तय कर दिया जो भविष्य में अपना रंग दिखाएगी साथ ही लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं के फर्क को भी तय कर देगी की दोनों वर्ग किस तरफ जायेंगे।

माफ़ी से पिघले मुख्यमंत्री अखिलेश

मुजफ्फरनगर दंगो से पहले देश की मीडिया में छाई रहने वाली और सुर्खियाँ बटोरने वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल अब जल्द बहाल हो जायेंगी। मुख्यमंत्री सचिवालय से आ रही ख़बरों के मुताबिक, दुर्गा शक्ति नागपाल ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर उनसे माफ़ी मांगी ली है। दुर्गा शक्ति नागपाल अपने निलंबन से पहले नोएडा में उपजिलाधिकारी सदर के पद पर तैनात थी। 

दुर्गा शक्ति नागपाल को 27 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक निर्माणधीन धार्मिक स्थल की दीवार गिरवाने के आरोप में निलंबित कर दिया था। दुर्गा शक्ति पर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने का भी आरोप था। दुर्गा शक्ति के निलंबन को लेकर ये भी ख़बरें आई कि खनन माफियाओं पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय सपा नेताओं ने सरकार पर दबाव बनाया था। 

करीब एक महीने तक मीडिया की सुर्ख़ियों में रही दुर्गा शक्ति से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी नाराज थे, दुर्गा शक्ति को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था जिसका जवाब उन्होंने सरकार को दे दिया था। दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को लेकर अखिलेश यादव सरकार की काफी किरकिरी भी हुई थी। 

प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में दुर्गा शक्ति के निलंबन को लेकर विरोध हुआ। अखिलेश सरकार पर उगलियां उठाई जा रहीं थी। आरोप ये लगा कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा के कादलपुर गांव में बन रही एक मस्जिद के निर्माण को अवैध करार देकर उसकी दीवार को गिरा दिया। जिससे इलाके में धार्मिक सदभाव बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है।

दंगा हो रहा था मुख्यमंत्री सो रहे थे : जयराम रमेश

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने दंगो पर सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला बोला है। शनिवार को लखनऊ आये जयराम रमेश ने कहा मुजफ्फरनगर दंगे पूरी तरह से सपा- भाजपा द्वारा प्रायोजित थे, दोनों पार्टियों की मिलीभगत से एक छोटी सी घटना ने साम्प्रदायिक दंगो का रूप ले लिया। जयराम रमेश ने साफ़ कहा कि प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जिस तरह से अपने पद का इस्तेमाल करना चाहिए था उस समय वो मुख्यमंत्री आवास के अपने आलिशान शयनकक्ष में सो रहे थे। 

जयराम रमेश ने मुजफ्फरनगर दंगो पर बोलते हुये कहा कि ये दंगे भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की मिलीभगत के नतीजे के तौर पर सामने आये। उन्होंने ये भी कहा कि जिस तरह से 27 अगस्त के बाद धीरे धीरे एक छोटी सी चिंगारी ने बड़ा रूप ले लिया हैं उसमे सरकार के अगुवा की निष्क्रियता साफ़ झलकती है, वही भाजपा आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर ऐसे दंगो में अपने हाथ सेंक कर सियासी फायदा उठाना चाहती है। 

जयराम रमेश के प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर किये गए इस खुलेआम हमले ने प्रदेश सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है। जयराम रमेश से पहले भी खुद प्रदेश के राज्यपाल बनवारी लाल जोशी ने भी अखिलेश सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी, इस टिप्पणी में राज्यपाल ने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में साफ़ लिखा था कि प्रदेश की अखिलेश सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। 

जयराम रमेश की प्रदेश सरकार पर की गई इस तल्ख़ टिप्पणी का जवाब समाजवादी पार्टी किस रूप में देती है ये भविष्य में की जाने वाली राजनीति के बाद ही सामने आयेगा वैसे मुजफ्फरनगर दंगो को लेकर मोर्चा और रिपोर्ट सरकार को राज्यपाल बीएल जोशी ने भेजी थी, उसी रिपोर्ट को एक तरह से और तीखे अंदाज में जयराम रमेश ने आगे बढ़ा दिया है। 

इस बीच पुलिस ने मुजफ्फरनगर दंगो के लिए दोषी ठहराये जा रहे भाजपा के दो विधायकों सुरेश राणा और संगीत सिंह सोम को गिरफ्तार किया है| वहीं, बसपा के विधायक नूर सलीम को भी पुलिस ने गिरफ्त में लिया है। मुजफ्फरनगर दंगो के बाद कठघरे में खड़ी प्रदेश सरकार ने इन तीनो विधायकों की गिरफ्तारी कर अपने दामन पर लगे दागो को धोने की कोशिश की है। 

केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने मनरेगा घोटालों पर भी उत्तर प्रदेश की सपा सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किये है। रमेश ने साफ़ कहा कि मनरेगा घोटाले पर प्रदेश की अखिलेश सरकार गंभीर नहीं है, उन्होंने साफ़ कहा की इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराये जाने की आवश्यकता है। 

मुजफ्फरनगर दंगे और मनरेगा के बहाने ही केंद्र की सत्ता की अगुवाई कर रही कांग्रेस प्रदेश सरकार पर निशाना साध कर अपने उस वोट बैंक को बचाने की कवायद में लग गई है जो प्रदेश में सियासत कर रही सभी पार्टियां कांग्रेस के पाले से खिसका रही है। कांग्रेस अपनी 2009 की स्थिति को बचाने में लगी हुई है, देखना है उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस फिलहाल इन दो मुद्दों को उठाकर अखिलेश सरकार और अन्य पार्टियों को कितना दबा सकती है।

सियासत और मोदी

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी आम चुनावों को लेकर पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को घोषित कर कांग्रेस से मामले में बढ़त ले ली। नरेन्द्र मोदी की प्रधानमंत्री पद पर उम्मीदवारी घोषित होते ही ये तय हो गया कि भाजपा और सहयोगी पार्टियां आम चुनाव में बहुमत के लिए जरुरी 272 का जादुई आंकड़ा छूती है तो देश के अगले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही होंगे।

नरेन्द्र मोदी ने भी अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद भाजपा की केन्द्रीय चुनाव संचालन समिति के पद से इस्तीफा दे दिया। भाजपा की केन्द्रीय प्रचार टीम अब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेन्द्र मोदी के देश के अलग अलग हिस्सों में आयोजित होने वाली चुनावी जनसभाओ के कार्यक्रम को तैयार करने में जुट गई है। भाजपा ने नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को तय करने में जातिगत वोट बैंक, लोकसभा सीटों के हिसाब से प्रदेशो में होने वाले जनसभाओ की संख्या भी तय करना शुरू कर दिया है। 

भाजपा 2014 आम चुनावों में 1996 को दोहराना चाहती है। वजह भी साफ़ है 1996 में राममंदिर आन्दोलन और तात्कालिक प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की असफल कांग्रेस सरकार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में उतरी भाजपा ने 1991 से एक कदम आगे निकलते हुये 51 सीटों से एक सीट ज्यादा जीतकर 96 में प्रदेश में भाजपा का परचम 52 सीटों पर जीत दर्ज कर लहरा दिया था। यही वो साल था जब भाजपा ने पहली बार 13 दिन की सरकार बनाई और लोकसभा में बहुमत साबित न होने की वजह से अटल बिहारी वाजपेई की सरकार एक वोट से गिर गई थी।

जिस उत्तर प्रदेश ने भारतीय जनता पार्टी को केंद्र की सत्ता के करीब पहुंचाया आज वही उत्तर प्रदेश एक बार फिर भाजपा की प्रयोगशाला बनने जा रहा है, और इस प्रयोगशाला पर प्रयोग करने की कमान भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के कंधो पर डाली गई है भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने नरेन्द्र मोदी के उत्तर प्रदेश की आम जनता को लुभाने के लिए उनके कार्यक्रमों की एक लम्बी लिस्ट तैयार की है जो 15 अक्टूबर से जनसभाओ में तब्दील होने लगेगी| देखने वाली बात ये होगी गुजरात के नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश की आम जनता की आँखों में कैसे कैसे लुभावने सपने डालते है। 

मोदी शब्दों के बाज़ीगर कहे जाते है उनकी भाषण शैली जहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की याद दिलाती है वहीँ, वो भाजपा के जनप्रिय नेता अटल जी से एक कदम आगे आक्रामक शैली का भी प्रयोग करते है। नरेन्द्र मोदी को जमीनी राजनीति की हकीक़त पता है। जातियों में बनती उत्तर प्रदेश की राजनीति की नब्ज पकड़ना मोदी और भाजपा के लिए आसान नहीं है इस बात से वाकिफ भाजपा का थिंक टैंक और खुद मोदी भी इस प्रदेश की महत्वता समझते हुये फूंक फूंक कर कदम रख रहे है। 

नरेन्द्र मोदी की पहली जनसभा कानपुर में होने वाली है जहां से केन्द्रीय कोयला मंत्री और तीन बार से सांसद श्री प्रकाश जायसवाल संसंदीय क्षेत्र का नेतृत्व करते है| मोदी कांग्रेस पर पहली चोट कानपुर से ही करेंगे वही दूसरी जनसभा झाँसी में होगी जहां के सांसद आदित्य जैन है जो केंद्र सरकार में मंत्री है जबकि तीसरी जनसभा जनसंघ की प्रयोगशाला के तौर पर मशहूर बहराइच में होगी इस सीट से भी सोनिया गांधी के करीबी और राजीव गाँधी की सुरक्षा में तैनात रहे कमांडो कमल किशोर सांसद है। 

नरेंद्र मोदी और भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी पहली तीन जनसभाओ का एलान कर चुके है इसके अलावा भी मोदी की आगामी जनसभाओ का एलान जल्द होगा| मोदी और उनकी टीम उन सीटों को ही पहले निशाने पर ले चुकी है जहां से कांग्रेस ने 2009 के चुनावों में जीत हासिल की थी, मोदी और उनके सबसे करीबी अमित शाह की मंशा इन लोकसभा सीटो का चयन कर ये साफ़ कर चुकी है की मोदी की जनसभाओ में भीड़ जुटाकर केंद्र में बैठी यूपीए सरकार को ये सन्देश दे दिया जाये की कांग्रेस से जनता उब चुकी है। 

मोदी और भाजपा अच्छी तरह से जानते है अगर उत्तर प्रदेश जीत लिया तो केंद्र जीत लिया, इस बात को ध्यान में रखते हुए भाजपा की केन्द्रीय समिति ने अपनी कमर कस ली है। भाजपा नेतृत्व को अच्छी तरह पता है कि अगर भाजपा ने 1991, 1996 दोहरा दिया तो प्रदेश में भाजपा की स्वर्णिम उड़ान एक बार फिर शुरू हो जायेगी। जनसंघ की प्रयोगशाला के तौर पर जानी जाने वाली यूपी को लेकर भाजपा सतर्क हो गई है। भाजपा ने जातिगत आधार को भी ध्यान में रखकर नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को तय किया है। नरेन्द्र मोदी खुद पिछड़ी जाति से आते है। 

80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में चुनावी घमासान की आहट सुनाई पड़ने लगी है। मुलायम सिंह यादव खुद अपने कार्यकर्ताओं से 60 सीटे जीतकर देने की मांग कर चुके है। वहीँ, कांग्रेस भी अपनी उन 21 सीटों को बचाने की जुगत में लगी हुई है जो उसने अप्रत्याशित रूप से 2009 में जीती थी। भाजपा भी 2014 के आम चुनावों में व्यक्तिवादी सोच से आगे निकलकर पार्टी के सन्देश और मोदी के व्यक्तित्व को प्रदेश की जनता तक पहुंचाने में लगी हुई है। 

भाजपा ने 2004 और 2009 के चुनाव में 10-10 सीट जीती थी, जो स्थानीय भाजपा नेताओं के खुद के प्रभाव वाली सीटे थी। मोदी इन्ही 10 सीटो से आगे बढ़कर लोकसभा चुनाव में 50 सीट को जीत में तब्दील करना चाहते है। भाजपा ने प्रदेश में मोदी के प्रथम आगमन की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। मोदी को भाजपा ने जून महीने में ही केन्द्रीय चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष मनोनित किया था, तभी से कयास लगाये जा रहे थे की मोदी उत्तर प्रदेश का रूख कब करते है, पार्टी के अंदरुनी सूत्रों की माने तो मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद ही पार्टी चाहती थी कि मोदी उत्तर प्रदेश आये, अब भाजपा वही करने जा रही है। 

84 कोसी परिक्रमा, राममंदिर का राग और अब मुजफ्फरनगर दंगो ने प्रदेश की जनता में एक माहौल और डर पैदा करने का काम किया है। मुजफ्फरनगर दंगो के बाद प्रदेश की सियासत गर्म है प्रदेश सरकार और उनके कद्दावर मंत्री पर आलोचनाओं की झड़ी लग गई है। भाजपा, बसपा, कांग्रेस जैसी पार्टिया इन दंगो को भुनाने में लगी है वही समाजवादी पार्टी भी इन दंगो को कैश कराने के लिए तत्पर दिख रही है। मोदी मुजफ्फरनगर दंगो पर बोलेंगे कि नहीं ये 15 अक्तूबर को पता चलेगा लेकिन ये तय है की अब मोदी का कार्यक्रम आ जाने के बाद प्रदेश की राजनीति का पारा चढ़ने वाला है।

मुजफ्फरनगर दंगा रोकने के लिये "KSBL" योजना की मदद क्यों नहीं

1 अक्टूबर 2010 का दिन प्रदेश क्या देश की जनता नहीं भूल सकती जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में विवादित जमीन मामले और रामजन्म भूमि पर अपना फैसला दिया था। फैसला लखनऊ में आना था लेकिन इस फैसले को सुनने के लिए प्रदेश के साथ पूरा देश बेचैन था। वही प्रदेश की पुलिस इस बात को लेकर बेचैन थी कि फैसले के बाद जनता की प्रतिक्रिया क्या होगी। 

फैसले का समय करीब आ रहा था| फिल्ड में तैनात पुलिस हलचल में थी, सड़कों पर सन्नाटा फैला हुआ था, लेकिन दो ऐसे पुलिस अफसर भी थे जो डीजीपी आफिस में चाय की चुस्कियों के बीच उस फैसले का इंतज़ार कर रहे थे जिसने बीते 18 सालों से आम जनता को दो भागो में बांटा था और कई दंगो की वजह बन गया था। 

राजधानी लखनऊ के डीजीपी आफिस में मौजूद तात्कालिक डीजीपी कर्मवीर सिंह और उनके सहयोगी बृजलाल ने इस फैसले के बाद होने वाले तनाव से निपटने के लए तीन महीने पहले ही तैयारिया कर ली थी। पुलिस की तैनाती से ज्यादा आम जनता में इस बात का भरोसा पैदा करना इनका मकसद था की ये प्रदेश ये जमीन और समाज आपका है इसे आप खुद नुक्सान नहीं पहुंचा सकते। 

कर्मवीर सिंह और बृजलाल ने मिलकर एक योजना तैयार की थी| कर्मवीर सिंह बृजलाल योजना (KSBL) वैसे इस योजना को "कानून व्यवस्था जनसहयोग" नाम दिया गया, जिसमे आम जनता के सहयोग से संभावित टकराव को टालना मूल मंत्र था। योजना के तहत हर गाँव में पांच लोगो की समिति बनाना, ग्राम प्रधानो , ब्लाक प्रमुखों के मोबाइल नंबरो की डायरी बनाना, दंगा न करने और दंगा रोकने के लिए लोगो को सामूहिक रूप से पाबन्द किया गया। 

थानेदारो को आदेश था कि वो खुद ही लोगो का कुशलक्षेम जानेंगे, इस योजना में दंगा होने पर पूरे गाँव पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया, साथ ही पुलिस और थानेदारों के साथ एसपी को भी सख्त चेतावनी दी गई थी की क्षेत्र में दंगा हुआ तो उसके भुग्तभोगी वो खुद होंगे, साथ ही अफवाहों का खंडन वो खुद करेंगे। इस KSBL योजना को लागू कर बसपा सरकार और उसके अफसरों ने अयोध्या जैसे विवादित मुद्दे और फैसले के बाद होने वाले टकराव को टाल दिया था साथ ही आम जनता के मन में पुलिस और कानून का भय बैठकर उन्हें घरो में रहने पर मजबूर कर दिया।

आज प्रदेश के हालात बद से बद्दतर होते जा रहे है। प्रदेश में सपा सरकार के सत्ता में आते ही इस KSBL ढाँचे को तोड़ दिया गया। काबिल थानेदारो को हटा सपा नेताओं के पसंदीदा थानेदारो की तैनाती की गई। साथ ही बड़े अफसरों का सारोकार जनता से टूट गया वो अपनी कुर्सी बचाने में ही लगे रहे। जबकि कर्मवीर सिंह जैसे अफसर सीधे जनता का हाल पूछ लेते थे। KSBL योजना ने देहात क्षेत्रों में दोनों सम्प्रदायों में एक विश्वास पैदा कर दिया था|

आज इस KSBL योजना की फ़ाइल उन अफसरों के डीजीपी मुख्यालय से दूर होते ही आलमारी में कही धुल फांक रही है। जबकि इस योजना ने अक्टूबर 2010 में बारूद के ढेर पर बैठे इस प्रदेश को एक विश्वास दिया था की फैसला चाहे कुछ भी हो ये समाज हमारा है इसके फैसले हम करेंगे किसी बाहर वाले को दखल नहीं देने देंगे। 

आज मुजफ्फरनगर के जो हालात है वैसे हालात बसपा सरकार के दौरान कभी नहीं रहे| प्रदेश सरकार ने और पुलिस ने KSBL योजना पर संजीदगी से काम किया होता तो शायद पश्चिम उत्तर प्रदेश जहाँ दोनों सम्प्रदाय एक दूसरे के साथ रहकर सियासी ही नहीं ज़िन्दगी के हर मोर्चे पर लड़ते रहे है आपस में यूं लड़ने पर आमदा नहीं होते।

Monday, 9 September 2013

मुजफ्फरनगर दंगा : मुलायम ने संभाली कमान

मुजफ्फरनगर के जानसठ क्षेत्र के कवाल गाँव से उठी एक चिंगारी ने आज पूर्व प्रदेश को अपने आगोश में ले लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में मुजफ्फरनगर में फैले सांप्रदायिक तनाव की चर्चा है वही ये भी चर्चा है कि प्रदेश सरकार ने समय से कार्रवाई न कर दंगाइयों को पूरी छूट दे दी। जिसकी वजह से कवाल काण्ड से उठी चिंगारी से आग में बदल गई पूरे जिले को दंगो की आग में झोंक दिया।

मुजफ्फरनगर में फैले सांप्रदायिक तनाव को लेकर सरकार और प्रशासनिक अमले में बैचैनी का माहौल है। उत्तर प्रदेश सरकार की निष्क्रियता का आलम ये था कि मुजफ्फरनगर में सम्प्रादयिक तनाव दिनों दिन बढ़ता जा रहा था और सरकार अधिकारियों के हाथ बांधे उन्हें पत्थर खाने पर मजबूर कर रही थी| वजह भी साफ़ थी एक सम्प्रदाय के मामा भांजे की ह्त्या के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने ऐसा रूप लिया की मुजफ्फरनगर शहर से फैली आग गाँव-देहातों तक पहुँच गई। 

6 सितम्बर के महापंचायत के बाद हुई दोनों समुदायों की झडप ने शाम होते होते इतना विकराल रूप ले लिया की पूरे जिले में दोनों समुदाय के लोग आमने सामने आने लगे। 7 सितम्बर को इस साम्प्रदायिक हिंसा में दोनों तरफ से गोलियां चली और लाशे गिरी| इस हिंसा का शिकार मीडिया भी हुआ एक न्यूज़ चैनल और पुलिस द्वारा अनुबंधित एक फोटो पत्रकार की हत्या कर दी गई। 

मुजफ्फरनगर हिंसा प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार के हाथ से निकल गई। पुलिस और प्रशासन के ऊपर भी हमले होने लगे| हालात बद से बदतर होते देख इस मामले में केंद्र ने दखल दिया| वहीँ, प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अमले की कमान खुद सपा अध्यक्ष ने संभाल ली और मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को तलब किया। सपा सरकार बनने के बाद ये पहला मौका था की मुलायम सिंह यादव ने सरकार और प्रशासनिक अमले के सबसे बड़े अधिकारी के साथ मुख्यमंत्री को भी काण्ड पर काबू करने के लिए चर्चा के लिए बुलाया । 

उधर केंद्र सरकार ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध पर मुजफ्फरनगर में सेना उतार दी जिसने आते ही कमान संभाल ली वही जिलाधिकारी ने दंगाईयो को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए थे, लेकिन इन उपायों के बाद भी दंगाई जगह जगह एक दूसरे पर हमले करते रहे। शहर से निकल कर हिंसा देहात के इलाकों में फ़ैल गई| इस बीच जिले से आ रही ख़बरों में 30 लोगो के मरने की पुष्टि हुई| वहीँ, सैकड़ो घायल हो गए जिसमें 40 गंभीर तौर पर घायल है। 

केंद्र सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगो को लेकर सख्ती दिखाते हुए राज्यपाल बीएल जोशी को रिपोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निभाई गई भूमिका पर जवाब माँगा गया| राज्यपालों बीएल जोशी ने अपनी रिपोर्ट में साफ़ कहा प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने अपने सरकारी दायित्वों और कानून का ठीक से पालन नहीं किया| सरकार दंगो को सँभालने में बुरी तरह असफल रही। राज्यपाल की इस रिपोर्ट ने अखिलेश सरकार की निष्क्रियता की पोल खोल कर रख दी। 

वहीँ, बड़े पैमाने पर जान माल की हानि और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के कड़े तेवर के बाद जागी सरकार ने मुजफ्फरनगर और मेरठ जोन के बड़े अधिकारियों पर अपनी खीज और गुस्से की गाज गिराते हुए उन्हें वहां से हटा दिया। सहारनपुर के कमिश्नर और मेरठ जोन के आईजी भावेश कुमार हटा दिए गए| वही हिंसा के मद्देनजर जिले में 30 पुलिस अधीक्षकों, 18 वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, 23 पुलिस उपाधिक्षकों की तैनाती की गई है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा 119 निरीक्षकों एवं उपनिरीक्षकों तथा 300 पुलिसकर्मियों की तैनाती अलग-अलग जगहों पर की गई है। वहीँ रैपिड एक्शन फोर्स की आठ कंपनियां, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 17, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की चार कंपनियों को अलग-अलग जगाहों पर तैनात किया गया है। जिले के तीन थानाक्षेत्रों- सिविल लाइन, कोतवाली और नई मंडी में कर्फ्यू लगाया गया है।

इस बीच सरकार ने भाजपा को इस दंगे का दोषी ठहराते हुए महापंचायत बुलाने के लिए भाजपा नेता हुकुम देव नारायण सिंह पर मुकदमा कायम किया है| वहीँ, दंगे भड़काने के लिए भाजपा विधायक संगीत सोम, सुरेश रैना, भारतेंदु और कांग्रेस नेता हरिंदर मलिक के साथ भारतीय किसान यूनियन के नरेश टिकैत के साथ राकेश टिकैत को भी आरोपी बनाया गया है। 

प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अमला अब इस आग को प्रदेश के अन्य जिलों में फैलने से रोकने की कवायद में लगा हुआ है। वही सरकार इस कोशिश में भी है की इस आग में घी का काम करने वालों से सख्ती से निपटा जाए जिसके लिए खुद मुलायम सिंह यादव ने कमान संभाली है और मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ सपा नेताओं से स्थिति को सामान्य करने के लिए कहा है। मुलायम द्वारा कमान सँभालने के बाद अब देखना है कि ये आग कब तक ठंडी होती है।

मुजफ्फरनगर से उठी इस चिंगारी ने वैसे प्रदेश के उन जिलों में हलचल पैदा कर दी जो पूर्व में दंगाग्रस्त रहे है| साम्प्रदायिक आग ने मुजफ्फरनगर को ऐसे समय अपने आगोश में लिया है जब प्रदेश में लोकसभा चुनाव की हलचल धीरे धीरे सुनाई देने लगी है, कुछ राजनीतिक पार्टिया इस आग को ठंडा नहीं होने देना चाहती वही कुछ इस मौके की फिराक में है की आग भले दब जाए लेकिन अन्दर ही अन्दर सुलगती रहे ताकि आने वाले जाड़ो के बाद होने वाले आम चुनाव उनकी सियासी नैया पार लगा दें| 

Sunday, 8 September 2013

गुरु जी जेल गये तो कुनबे पर आई शामत

कहा जाता है कि जब बुरा वक्त आता है तो अपने भी साथ छोड़ने लगते हैं। इन दिनों ऐसा ही कुछ हो रहा है आध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू के साथ। एक किशोरी के यौन उत्पीड़न के आरोप में 'गुरु' जेल क्या गए, उनके कुनबे पर मुसीबतों का पहाड़ टूटने लगा है। आसाराम के बेटे नारायण साईं पर एक युवती को धोखा देकर शादी कराने का आरोप लगा है, तो ग्वालियर, इंदौर सहित अन्य स्थानों पर आश्रम की जमीन भी विवादों के घेरे में आने लगी है।

जोधपुर पुलिस ने आसाराम को इंदौर के आश्रम से ही गिरफ्तार किया था। आसाराम के जेल जाने के बाद से मध्य प्रदेश में ही उनसे जुड़े लोगों पर आरोपों की झड़ी लग गई है। इंदौर की एक युवती ने आसाराम के बेटे नारायण साईं पर धोखा देकर अपने शिष्य से शादी करवाने और अश्लील हरकत करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की मगर, कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद युवती ने इंदौर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। युवती की ओर से न्यायालय में दायर परिवाद में कहा गया है कि नारायण साईं ने अपने शिष्य ईश्वर वाधवानी से यह कहकर शादी कराई कि वह तलाकशुदा है, मगर बाद में पता चला कि उसकी पहली पत्नी ने उसे तलाक नहीं दिया है।

युवती का यह भी आरोप है कि गर्भवती होने पर गर्भपात करने का दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, प्रलोभन देकर नारायण साईं ने भी उसके साथ अश्लील हरकत करने की कोशिश की। दूसरी तरफ इंदौर आश्रम के लिए जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगने के बाद प्रशासन ने नाप-जोख शुरू कर दी है। नाप-जोख में बेजा कब्जे की बात सामने आने पर आसाराम की मुश्किलें बढ़नी तय है।

इसी तरह ग्वालियर व सागर में जमीन पर कब्जा करने के आरोपों ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। ग्वालियर के जिलाधिकारी पी. नरहरि ने भी जिले के जमीन संबंधी दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है। वे पुराने रिकार्ड के जरिए पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जिस जमीन पर आश्रम है, वह कहीं बेजा कब्जा तो नहीं है! वहीं सागर के गोराखुर्द में तो लोगों ने प्रदर्शन का दौर शुरू कर दिया है।

आसाराम का छिंदवाड़ा आश्रम तो लंबे अरसे से विवादों में रहा है। इस आश्रम के लिए जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने के अलावा आश्रम परिसर में 'अनैतिक कार्य' होने के आरोप लगते रहे हैं। बच्चों की मौत के कारण भी यह आश्रम विवादों में आ चुका है।

आसाराम की गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े लोग भी अब उनके बचाव में सामने आने से कतरा रहे हैं। जोधपुर में आसाराम पर प्रकरण दर्ज होने पर जो नेता उनके बचाव में सामने आए थे, वे भी अब आसाराम आश्रम से अपनी दूरी बढ़ाने लगे हैं।

वहीं, प्रशासन की भी आसाराम के आश्रमों के लिए कब्जाई गई जमीन पर नजर तिरछी हो चली है। इससे इतना तो तय है कि राज्य में आसाराम के कुनबे के लिए आने वाले दिन अच्छे रहने वाले नहीं हैं।

नीरज को मिलेगा इन्साफ

मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर मेडिकल कालेज कि छात्रा नीरज भडाना हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौपने के करीब डेढ़ महीने के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर इस हत्याकांड की जाँच शुरु कर दी। दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में इस मामले की तफ्तीश क्राइम शाखा को सौंपी गई। गौरतलब है इस सनसनीखेज मौत की खबर प्रकाशित करने पर पर्दाफाश ने पहले ही तीर्थंकर महावीर मेडिकल कालेज और उसके प्रबंधकीय पर सवाल खड़े किये। 

पर्दाफाश डाट काम ने अपनी 12 जुलाई की रिपोर्ट "मेडिकल छात्रा की हत्या को आत्महत्या बता रहा तीर्थंकर विश्वविद्यालय, मुलायम करायेंगे जांच" में साफ़ लिखा था कि विश्वविध्यालय प्रशासन मेडिकल छात्रा नीरज भडाना की ह्त्या को आत्महत्या बताकर अपना पल्ला झाड़ना चाहता है। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था की नीरज भड़ाना की गला दबा कर ह्त्या की गई थी साथ ही दुष्कर्म की आशंका भी व्यक्त की गई थी। 

नीरज भड़ाना केस में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कालेज ह्त्या किये जाने क बात से लगातार इंकार कर रहा था। वही उके परिजन लगातार स मामले की जाँच सीबीआई से कराये जाने की मांग कर रहे थे। वही नीरज भड़ाना के परिजनों के साथ मुरादाबाद में हुई इस घटना को लेकर स्थानीय सामाजिक संगठनों ने छात्रों के साथ मिलकर प्रदेश की सत्तारूढ़ सपा के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के दिल्ली स्थित आवास का घेराव किया। मुलायम सिंह यादव ने भी मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है और तीन-चार दिन का वक्त मांगा था। 

र्तीथकर महावीर मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्रा नीरज भड़ाना की मौत 6 जुलाई को हुई थी। छात्रा के पिता फरीदाबाद निवासी रामकिशोर भड़ाना ने यह दावा किया था कि यह मौत नहीं, बल्कि साजिशन हत्या की गई थी और मेरी बेटी की ह्त्या में कॉलेज प्रशासन भी संलिप्त है। बीते 24 जुलाई को प्रदेश क सपा सरकार ने इस संदिग्द मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। वही प्रदेश सरकार ने पहले इस जांच को सीबीसीआईडी ने किया बरेली सेक्टर की टीम इस जांच को कर रह थी, प्रदेश सरकार द्वारा जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद स्थानीय सीबीसीआईडी 
टीम ने अभी दस्तावेज सीबीआई अधिकारीयों के सुपुर्द कर दिये। 

सीबीसीआईडी के एडीजी जगमोहन यादव का कहना है कि अभी तक स्थानीय स्तर पर हुई जांच में बयानों के आधार पर और पड़ताल में साफ़ हुआ है कि नीरज की ह्त्या की गई और साक्ष्यो को मिटाने के लिए नीरज के शव को छात्रावास से बाहर फेंक दिया गया था। सीबीआई अब इस ह्त्या के मामले की जांच उन फारेंसिक रिपोर्टो के आधार पर शुरू करेगी जो ह्त्या के बाद जांच में सामने आये। नीरज की ह्त्या के बाद उसके शरीर की कोई हड्डी का न टूटना भी संदेह पैदा कर रहा था यही वजह है की सरकार ने इस संदेहास्पद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। 

डेढ़ महीने पहले सौंपी गई इस जांच में अब सीबीआई आगे की जांच करेगी साथ ही नीरज के पिता रामकिशोर भड़ाना की मांग पर कालेज प्रशासन की भी जांच करेगी जिसपर शुरू से ही संदेह किया जा रहा था। दो महीने पहले हुये इस हत्याकांड में मेडिकल कालेज प्रशासन का सच भी सामने आयेगा जो अभी तक दुनिया से छुपा हुआ है। बहरहाल नीरज के परिजनों के साथ उन सामाजिक संगठनो का प्रयास भी रंग लाया है अब सीबीआई इस मामले की तह तक कब तक पहुंचती है ये उसकी फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने पर ही पता चलेगा।

प्रधानमंत्री पद के ख्वाहिशमंद नहीं

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री पद के ख्वाहिशमंद नहीं हैं। जियो न्यूज के मुताबिक जरदारी ने कहा कि राष्ट्रपति का पद किसी भी राजनेता के लिए एक आदर्श स्थिति होनी चाहिए। 

जरदारी का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल रविवार को पूरा हो रहा है। कराची में जन्में 58 वर्षीय जरदारी ने नौ सितंबर 2008 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था। उनकी जगह ममनून हुसैन पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति होंगे।

जरदारी ने शनिवार को कहा कि उनके लिए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के लिए काम करना और पार्टी को मजबूत बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण कोई काम नहीं है। पांच महीने पहले न्यायालय के आदेश पर उन्हें पीपीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

यह पूछे जाने पर कि अपने कारावास के दौरान उन्होंने क्या सीखा, जरदारी ने कहा, मैंने 11 वर्ष के एकांत कारावास में धीरज रखना सीखा, कारावास के पहले दो साल के बाद आपकी भावनाओं की असली परीक्षा शुरू होती है।

विश्व रिकार्ड बनाने वाली परीक्षा

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड विश्व रिकार्ड बनाने वाली परीक्षा कराने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश पुलिस प्रदेश में सीधी भर्ती के तहत करीब 42 हज़ार सिपाहियों की भर्ती करने जा रही है। सिपाहियों भर्ती के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा में अभी तक 22 लाख 21 हज़ार आवेदन आ चूके है। 

भर्ती बोर्ड ने इस परीक्षा को 27 अक्टूबर को कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। भर्ती बोर्ड और शासन इस प्रतियोगी परीक्षा को कराने के लिए कटिबद्ध है। सरकार ने अगर इस परीक्षा को करा दिया तो ये विश्व रिकार्ड बन जायेगा। 

शासन ने परीक्षा की तैयारियों के लिये प्रदेश के सभी जिलों के ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधिक्षको को पत्र भेजा है। साथ ही ये भी निर्देश दिये है की सभी जिलों में जहा ये परीक्षा आयोजित होनी है वहा के स्कूलों के साथ डिग्री कालेजो, फार्मेसी कालेजों आदि में सीटों की उपलब्धता देख ली जाये। 

सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि अगर अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा हुई तो सरकार प्रदेश से सटे राज्यों की भी मदद जरुरत पड़ने पर ले सकती है। सरकार को अभी तक करीब 10. 50 लाख आवेदन पत्र आफलाईन और करीब 11. 77 लाख आनलाईन आवेदन पत्र प्राप्त हुए है। 

शासन इस परीक्षा को कराने के लिए बोर्ड के अधिकारीयों को निर्देश दिया है कि सभी अभ्यर्थियों को समय से एडमिट कार्ड पहुँच जाये साथ ही उनके सेंटर का आवंटन भी जल्द से जल्द कर दिया जाए। 

शासन अगर अपने तय समय पर इस परीक्षा को कराने में कामयाब हुआ तो विश्व में आयोजित होने वाली ये अपनी तरह की सबसे बड़ी परीक्षा होगी जिसमें करीब 22 लाख अभ्यर्थी एक साथ परीक्षा देंगे।

नोएडा नहीं, वहा पत्रकार रहते है : अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव देश के सबसे मंहगे क्षेत्रों में शुमार नोएडा नही जाना चाहते। अखिलेश यादव ने एक बार फिर नोएडा जाने से कन्नी काट ली, प्रदेश में ये प्रचलित है जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है उसकी सत्ता जाती है और वो दुबारा मुख्यमंत्री नही बन पाता यही वजह है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नोएडा जाने से बचते है। 

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नोएडा में बनाया गए नैसकाम के मुख्यालय का उद्घाटन दिल्ली में बैठकर कर दिया। मुख्यमंत्री के दिल्ली के सटे महज कुछ किलोमीटर पर स्थित नोएडा शहर से अपनी दूरी बनाये रखी। पत्रकारों ने जब इस बाबत उनसे पूछा तो उनका जवाब क्या था। 

मुख्यमंत्री ने अपनी चिर परिचित मुस्कुराहट में कहा "वहा पत्रकार बैठते है इस लिए वो नोएडा नहीं जाना चाहते"। मुख्यमंत्री ने भले ही ये बात मज़ाक में कही हो लेकिन उन्होंने अपने अंध विश्वास और नोएडा से उनकी दूरी के साथ उनके डर को भी उजागर कर दिया।

मुख्यमंत्री ने पत्रकार बिरादरी पर भी चुटकी लेते हुये तंज़ कस दिया और उनके वहा होने की बात कह कर नोएडा के बारे में उनके मन में बैठे डर को भी मज़ाक में उड़ा दिया। मुख्यमंत्री के अन्धविश्वासी होने की बात कहकर कांग्रेस ने उनकी चुटकी भी ली। 

गौरतलब है उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में ऐसा टोटका प्रचलित है कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाता है वह दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाता है। गौरतलब है कि अखिलेश ने साफ्टवेयर निर्यातक कंपनियों के राष्ट्रीय संगठन नैसकाम के मुख्यालय(नोएडा) का शिलान्यास नोएडा जाकर वहां करने के बजाय दिल्ली के होटल से करने का निर्णय लिया।

मोदी "परफेक्ट बैचलर" : मल्लिका शेरावत

 'द बैचलरेट इंडिया मेरे ख्यालों की मल्लिका' कार्यक्रम लेकर आ रही फिल्म अभिनेत्री मल्लिका शेरावत ने गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र मोदी को परफेक्ट बैचलर की उपाधि दी है। मल्लिका अपने कार्यक्रम के शूट के लिए उदयपुर पहुंची तो उन्होंने मोदी को देश का सबसे 'एलिजिबिल बैचलर' कहते हुये सबको चौंका दिया। 

62 वर्षीय नरेन्द्र मोदी के बारे में बोलते हुये मल्लिका शेरावत ने परफेक्ट बताते हुये कहा उनका व्यक्तित्व खिंचाव से भरा है, वो ऊर्जा से भरे है, साथ ही देश में लोकप्रिय भी। एक निजी चैनल पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम के लिए उदयपुर में मौजूद मल्लिका के इस रियलिटी शो में सनी लियोन भी दिखाई देंगी। 

इस शो और सनी लियोन की सहायता से मल्लिका अपने लिए 'परफेक्ट बैचलर' खोजेंगी लेकिन मल्लिका ने मोदी के ऊपर बयान देकर सबका ध्यान अपने इस शो की तरफ खींच लिया है। मल्लिका के इस बयान पर देश क राजनीति के हाट फेवरेट बने नरेन्द्र मोदी भले ध्यान न दें लेकिन भाजपाइयों के साथ कांग्रेसियों को भी मल्लिका ने मोदी पर बोलने का मौक़ा दे दिया है

Friday, 6 September 2013

"सेक्स सम्मोहन" और "ध्यान की कुटिया"

नाबालिग लड़की से यौन उत्पीडन के आरोप में जेल जाने वाले आसाराम बापू पर अश्लील सीडी बनाने का आरोप भी लग गया है| आसाराम की मुश्किलें उन्ही के विश्वासपात्र बढ़ा रहे है। प्रवचन के नाम पर अपने अंध भक्तों को बरगलाने वाले आसाराम उन्ही भक्तों की नाबालिग बच्चियों और सुन्दर सुशिक्षित महिलाओं को अंगीकार कर उनकी अंधभक्ति को घोखा दे रहा था| पुलिस सूत्रों के अनुसार आसाराम के अन्तरंग पलों को उन्ही का विश्वसनीय और उनके ध्यान की कुटिया का राज जानने वाला सेवादार शिवा खोल रहा है। 

आसाराम के दो और विश्वसनीय लोगो को पुलिस तलाश कर रही है उनके मिलने पर आसाराम के झूठ और आडम्बर से भरे इस सेक्स संसार की और बाते भी सामने आयेंगी। आसाराम के ऊपर ये भी आरोप लग रहे है कि वो पसंद आने वाली लड़कियों को सम्मोहन विद्या से फंसाकर सेक्स के राह पर डाल देता था जिसमें उसकी मदद उसकी विश्वसनीय शिल्पी किया करती थी। शिल्पी के सम्बन्ध आसाराम से काफी पुराने है। 

शिल्पी के बारे में कहा जा रहा है कि वो छिंदवाड़ा और जोधपुर आश्रम का काम देखती थी और आसाराम की उन जरूरतों को पूरा करती थी जो इस ढोंगी संत ने दुनिया से छुपा रखा था। शिल्पी आसाराम के पास उन बच्चियों और महिलाओं को लेकर जाती थी जिसे आसाराम पसंद करता था। आसाराम ने पसंद की गई महिलाओं और बच्चियों को अपने पास लाने के लिये कोड बना रखा था जो बहुत कम लोग और आसाराम के करीबी ही जानते थे। 

आसाराम पसंद की गई बच्चियों को अपनी कोड भाषा में ध्यान की कुटिया बोलता था। इसका मतलब आसाराम के द्वारा पसंद की गयी महिला या बच्ची को आसाराम के ध्यान की कुतिया में विशेष आसान के लिये ले जाया जाता था| आसाराम की इच्छा को शिल्पी पूरा करती थी और उनका ख़ास सेवादार शिवा उन बच्चियों को आसाराम तक पहुंचाता था। 

पुलिस की पकड़ में आये सेवादार शिवा ने और कई राज बताये जो रात के अँधेरे में आसाराम द्वारा किये जा रहे कुकृत्यों और उन राजों को खोलते थे जो आसाराम अपनी मंडली के साथ मिलकर अंजाम देता था। शिवा ने पुलिस को आसाराम की कुछ अश्लील सीडीज के बारे में भी जानकारी दी इन सीडीज में आसाराम को कुछ लड़कियों के साथ विशेष आसन करते हुये शूट किया गया है। 

पुलिस शिवा द्वारा किये गए इन नए खुलासों की जांच कर रही है। वही पुलिस शिल्पी और आसाराम के रसोइये प्रकाश को भी खोजने में लग गई है जिसके सीने में आश्रम के कुकर्मों के राज दफ़न है साथ ही आसाराम के उन काली रातों के राज भी दफ़न है जब आसाराम सेक्स और सम्मोहन की दुनिया में लीन होकर मासूम लड़कियों से दरिंदो की तरह पेश आता था। 

आसाराम के राज शिवा के बयानों से लगातार बाहर आ रहे है पुलिस की टीम आसाराम के तीन और करीबी लोगो को पकड़ने की फिराक में जो लगातार पुलिस को चकमा दे रहे है ये तीनो लोग है शिल्पी, प्रकाश और शरत चन्द्र राही इन तीनो के पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आसाराम का विभत्स चेहरा दुनिया के सामने आएगा जिस पर उसने मुखौटा चढ़ा रखा है और अपने करोड़ो भक्तो को बेवक़ूफ़ बना उनकी संवेदनाओं से खेल रहा है।

पीएम की रेस से मोदी हुये बाहर ?

 भारतीय जनता पार्टी में मची उठा-पटक और विरोधियों के हमलों को झेलने वाले नरेन्द्र मोदी डीजी बंजारा, लोकायुक्त जैसे मुद्दों के बीच अब अपना नाम प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नहीं देखना चाहते है। मोदी के शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में एक स्कूल में बच्चो के कार्यक्रम के दौरान दिए गए भाषण में ये बात सामने आई। सवाल ये उठता है मोदी क्या विरोधियों के हमले से पस्त हो रहे है या उनकी पार्टी ने उन्हें हरा कर इस रेस से बाहर करने का इंतजाम कर दिया है।

नरेन्द्र मोदी हारने वाली शख्सियत नहीं है लेकिन बीते कुछ दिनों से जिस तरह भारतीय राजनीति में उनको लेकर बयानबाजी और बहस चल रही है उससे मोदी खुद की राह आसान नहीं मान रहे है। डीजी बंजारा प्रकरण ने मोदी को बैकफुट पर ला दिया है। वही भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की राह काटने वालों की एक लंबी जमात है। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी मोदी को पसंद नहीं करते है, वहीँ अरुण जेटली और सुषमा स्वराज भी नरेन्द्र मोदी की वजह से अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को पूरा होता नहीं देख रहे है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ही मोदी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे है। आज आये नरेन्द्र मोदी के बयान के बाद पीएम पद की दौड़ में शामिल होने की कोशिश में लगे मोदी की हताशा और निराशा साफ़ दिखाई दे रही है, इस हताशा का एक पक्ष और भी है। 

मोदी के भाजपा चुनाव समिति का अध्यक्ष बनते ही NDA में सबसे बड़ी टूट हुई| भाजपा की सबसे बड़ी सहयोगी और सत्रह साल से कांग्रेस के सामने भाजपा को खड़ा करने वाली जनता दल यूनाइटेड ने भाजपा का हाथ रास्ते में छोड़ दिया और कांग्रेस की गोद में जा बैठी। उधर कांग्रेस ने भी मोदी पर निशाना साधना नहीं छोड़ा। कांग्रेस ने इस बीच चुनाव को करीब देखते हुये संसद में दो बिल पास करा कर मास्टर स्ट्रोक मारा जिसने भाजपा सहित सभी विपक्षी और सहयोगी पार्टियों को चुनावी रेस में मीलो पीछे छोड़ दिया। 

कांग्रेस ने मानसून सत्र का फायदा चुनाव में उतरने के लिए बखूबी उठाया| इस सत्र में कांग्रेस ने दो ऐसे बिल अपने पिटारे से निकाले जिसने ना सिर्फ बीते चार वर्षों में यूपीए सरकार द्वारा की गई गलतियों पर पर्दा दाल दिया और सरकार की कमियों को भी छुपाने की कोशिश की जो कांग्रेस चुनाव में लेकर नहीं उतर सकती थी। कांग्रेस ने खाद्य सुरक्षा बिल और भूमि अधिग्रहण बिल को संसद से पास कराकर भाजपा को भी चुनावी पटरी से उतारने की कोशिश की। इस बिल को पास कराने में कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने उन्ही विपक्षियों के कंधो पर बन्दूक रखकर दोनों बिल को पास करा लिया जिसको नहीं करने की इन दलों की हिम्मत नहीं थी। 

कांग्रेस की इस चुनावी चाल ने भाजपा सहित कांग्रेस का लोकसभा में सहयोग कर रही पार्टियों को भी पस्त करके रख दिया। खाद्य सुरक्षा बिल के एक तीर से कांग्रेस ने कई शिकार कर लिए थे, रही सही कसर भूमि अधिग्रहण सुधार बिल को संसद से पारित करा कर कांग्रेस पूरी कर ली। कांग्रेस को वैसे भी धर्म निरपेक्ष पार्टी का तमगा मिला हुआ है यही धर्म निरपेक्षता भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले मीलो पीछे छोड़ती है। 

नरेन्द्र मोदी राजनीति के मंझे खिलाड़ी है, वो जानते है कि अगर चुनाव में उनको हार मिली तो उनके कद और राजनीति को विराम लग सकता है और वो सिर्फ गुजरात तक सीमित रह सकते है, मोदी ने शिक्षक दिवस के दिन अपने को गुजरात का सेवक बता कर और 2017 तक गुजरात की सेवा की बात कहकर एक तरह से खुद को पीएम की रेस से बाहर कर दिया।

KBC का पहला करोड़पति

 साल 2000 में भारतीय टेलीविजन में आम भारतियों के जीवन को बदलने वाले एक शो ने दस्तक दी थी, इस शो को कौन बनेगा करोड़पति के नाम से प्रसारित किया गया। स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले इस शो में लोगो ने उतनी रूचि नहीं दिखाई थी जितनी दिखानी चाहिये लेकिन एक शख्स ने आम भारतीयों को उनके टीवी सेट्स के सामने बैठने पर मजबूर कर दिया वो थे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन। 

अमिताभ बच्चन भी उन दिनों गुमनामी में चले गए थे, लेकिन क्वीज मास्टर के नाम से मशहूर सिद्धार्थ बसु ने अपने दिमाग की उपज से जब इस शो का प्लाट निकाला तो प्रतिभागियों से सवाल को अपने अंदाज में पूछने के लिए पहला नाम जो उनके दिमाग में आया वो अमिताभ बच्चन का ही था। अमित जी के इस शो से जुड़ने की वजह से पहले ही ये शो चर्चा में आ गया था। 

इस शो ने भारतीय टेलीविजन को भी नया आयाम दिया था। भारत में सेटेलाईट चैनल्स अपनी जगह बनाने में लगे हुये थे। स्टार प्लस पर रात 9 बजे प्रसारित होने वाले इस शो की टीआरपी उस समय सबसे ज्यादा मापी गई थी। शो अपनी शुरुवात और प्रतिभागियों के पैसे कमाने की वजह से लगातार चर्चा में आ रहा था लेकिन शो को असली सफलता तब मिली जब इस शो से पहले प्रतिभागी ने एक करोड़ रुपये जीतकर पहला करोड़पति बनने का श्रेय हासिल किया था। 

15 सवाल तीन लाइफ लाइन और आप बन सकते है पहले करोड़पति कुछ ऐसा ही लक्ष्य लेकर शो में आये थे हर्षवर्धन नवाथे जो मुम्बई के थे जिनकी आँखों में भारतीय प्रशासनिक सेवा का बड़ा अधिकारी बनने का सपना पल रहा था, लेकिन हर्षवर्धन नवाथे पर लक्ष्मी क मेहरबानी होनी थी जो इस शो कौन बनेगा करोड़पति के माध्यम से हुई। 

कहते है जहा लक्ष्मी रहती है वहा सरस्वती का वास नहीं होता लेकिन हर्षवर्धन नवाथे के साथ ऐसा नहीं था हर्षवर्धन नवाथे को इस शो के माध्यम से मिली लक्ष्मी में सरस्वती का बहुत बड़ी भूमिका थी वो अलग बात है की लक्ष्मी के आते ही हर्षवर्धन से सरस्वती रूठ गई थी लेकिन तब तक मुम्बई का ये 27 वर्षीय लड़का पूरे भारत में मशहूर हो चूका था। 

हर्षवर्धन नवाथे इस शो को जीतकर पहले करोड़पति बन चुके थे, शो जीतने के एवज में उन्हें अपने IAS बनने के सपने को खोना पडा। पैसा आया तो मन चंचल हो गया इस पैसे का इस पैसे का इस्तेमाल हर्षवर्धन ने अपना जीवन शैली को सुधारने में खर्च किया। मुंबई में घर , MBA की पढ़ाई और 2007 में शादी आज कई कार्पोरेट कंपनियों में काम करने के बाद हर्षवर्धन कृषि क्षेत्र से जुड़ कर किसानो की भलाई के काम में लगे है। 

हर्षवर्धन की उस जीत ने करोडो हिन्दुस्तानियों के मन और आँखों में सपने के साथ एक विश्वास भी भर दिया कि वो भी ज्ञान के माध्यम से अपने हकीक़त में बदल सकते है बस जरुरत है, भाग्य और खुद पर विश्वास की। हर्षवर्धन द्वारा सन 2000 में खींची गई उस लाइन को आज कई लोगो ने पार कर लिया है और अपने साथ कई लोगो की ज़िन्दगी बदल दी है। 

महानायक एक बार फिर 6 सितम्बर से सोनी चैनल पर करोड़पति का सांतवा सीजन लेकर आ रहे है। नए सीजन में ईनाम राशि 7 करोड़ रुपये रखी गई है। इस सीजन की टैग लाइन अमित जी अपने ही अंदाज में कुछ इस तरह बोलते है कि "ज्ञान की कोई सीमा नही होती" वो सही है लेकिन हमारा ये मानना है इस ज्ञान के साथ भाग्य भी करोड़ों हिन्दुस्तानियों से प्रबल होना चाहिये तभी आप उस ज़िन्दगी बदलने वाली कुर्सी तक पहुँच सकते है।

Thursday, 5 September 2013

प्रधानमंत्री जी कोयला आवंटन फाइलों के लिये FIR कब लिखवायेंगे

कोयला ब्लाक आवंटन में हुये घोटाले को लेकर भाजपा केंद्र की मनमोहन सरकार को बख्सने के मूड में नहीं है। कोयला ब्लाक आवंटन मामले में संसद में चल रहा गतिरोध लगातार जारी है। प्रधानमंत्री जहा इस गतिरोध को दूर करने के लिए खुद ही भाजपा नेताओं को मनाने समझाने में लगे है वही पूरी सरकार अपनी अपनी तरह से इस मामले को ख़त्म करने के प्रयास कर रह है। 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद आगे बढ़ते हुए लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली से संपर्क कर चूके है। प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओ की लम्बी मंत्रणा के बाद भी भाजपा नेताओं ने इस मुद्दों को न छोड़ने का इरादा जाहिर करते हुए संसद में आज फिर इस मुद्दों को सदन में गर्म कर दिया। 

नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री द्वारा सदन में दिये गए बयान पर और उनके सदन से तुरंत चले जाने पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा सदन को सरकार ने 6 दिन पहले बताया था कि कोयला घोटाले की कुछ फाईले गुम हो गई है। आज करीब 6 दिन बितने के बाद भी सरकार इस मामले में कोई बयान नहीं दे रही है। 

सुषमा स्वराज ने साफ़ कहा गुम हुई फाइलों के बारे में प्रधानमन्त्री को जवाब देना चाहिये क्यों कि वो खुद उस समय कोयला मंत्रालय का भार संभाले हुये थे। प्रधानमंत्री को खुद जांच के लिये आगे आ जाना चाहिये। सुषमा स्वराज ने ये भ कहा कि सरकार ने गुम हुई फाइलों को लेकर कोई ठोस कदम नही उठाया जबकि अब साफ़ हो गया हा वो फाइले चोरी हो गई है। 

सुषमा स्वराज ने साफ़ किया की चोरी हुई वस्तु की सबसे पहले प्राथमिकी दर कराई जाती है। सुषमा स्वराज ने ये भी कहा अगर कल प्रधानमंत्री सदन में रूकते तो उसके बारे में उनसे पूछा जाता लेकिन प्रधानमंत्री खुद कोयला आवंटन में हुये घोटालों में उठे सवालों से बचना चाहते है।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर सन्देह गहराया

राज्य चीनी निगम की चीनी मीलों की बसपा सरकार के दौरान हुई बिक्री की जांच कर रहे लोकायुक्त की जांच पर ब्रेक लग गई है। लोकायुक्त की जांच में पूर्व गन्ना मंत्री और बसपा के महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर संदेह गहराते और इस बिक्री की डील कराने में शामिल करीब एक दर्जन अफसरों का नाम आने के बाद घोटालेबाजों ने कार्रवाई से बचने के लिए हाईकोर्ट का रूख कर लिया है। मामला हाईकोर्ट में पहुंचते ही लोकायुक्त की जांच की धीमी पड़ गई है। 

इस मामले का संज्ञान लेते हुये हाईकोर्ट की पीठ ने आयकर आयुक्त को बेचीं गई चीनी मिलों का मूल्यांकन कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट को प्रेषित करें। यही वजह है कि लोकायुक्त द्वारा की गई जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं भेजी जा रही है। वही लोकायुक्त ने भी अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार करना बेहतर समझा है। 

प्रदेश की तात्कालिक बसपा सरकार के दौरान प्रदेश में स्थित सहकारी चीनी मीलों को औने पौने दाम में बेच दिया गया था। इन बेचीं गई 21 चीनी मिलों का सौदा 1180 करोड़ रुपयों में हुआ था। चीनी मिलों को बेचे जाने को लेकर उस समय विपक्ष में बैठी और आज सरकार बना चुकी समाजवादी पार्टी ने ख़ासा हंगामा किया था। 

उत्तर प्रदेश में पिछली मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार में हुए उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के बिक्री घोटाले से प्रदेश को लगभग 1179.84 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बसपा सरकार में नमक के भाव बेची गईं 21 चीनी मिलों की सीएजी जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आये हैं जिनसे पता चला है कि माया ने शराब कारोबारी पोंटी चड्डा को फायदा दिलाने के लिए नियम कानून को अपनी मर्जी से तोडा मरोड़ा। 

उत्तर प्रदेश विधान सभा में सीएजी रिपोर्ट जारी हुई तो इस पर जमकर हंगामा हुआ| इसके बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश पर आ गयी की वो जल्द से जल्द इस रिपोर्ट को आधार बना सख्त कार्यवाही करें| सीएजी रिपोर्ट में सामने आया है कि सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के चहेते मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के संरक्षण में शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा के स्वामित्व वाली कंपनियों को इन चीनी मिलों को न सिर्फ नमक के भाव बेचा गया बल्कि चीनी मिलें किसे बेचनी हैं, ये सक्षम अधिकारियों को बिडिंग-प्रक्रिया आरंभ होने से पहले ही पता था। बिडर्स यानि कि चड्डा की कंपनियों को वित्तीय बिड भी पहले ही बता दी गई थी ताकि उसे कोई परेशानी न हो, इस पर भी काम नहीं बना तब बिडिंग के मध्य में ही फेरबदल कर दिया गया।

पोंटी को इस डील में ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके इसके लिए माया के इशारे पर मिलों की भूमि उसके प्लांट और मशीनरी का मूल्य बाजार भाव से भी न्यूनतम कर दिया गया। सिर्फ इतने पर ही सरकार नहीं रुकी उसने रजिस्ट्री के लिए स्टाम्प ड्यूटी में भी कटौती कर दी गई। सीएजी रिपोर्ट में पता चला है कि चीनी मिलों का मूल्यांकन करने वालों ने साजिश रच मूल्यांकन किया जिससे चड्डा को तो लाभ हुआ लेकिन सरकार को 840.34 करोड़ की चपत लगी है।

सीएजी जांच में सामने आया है कि चीनी मिलें बेचने से सूबे को 1179.84 करोड़ से भी अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है। चड्डा से आर्थिक लाभ लेने वाले अधिकारी और मंत्री गठजोड़ ने चड्डा की कम्पनी को वित्तीय बिड पहले बता रखी थी इसके चलते सूबे के बुलंदशहर और सहारनपुर जिले की चीनी मिलों में वेव इंडस्ट्रीज और पंजाब फूड्स ही बिडर्स थे जिन्होंने 49 फीसदी की चोट सूबे के राजस्व को दी| वहीँ सरकारी उपक्रम इंडियन पोटाश ने 6 मिलों के लिए अपेक्षित मूल्य से कहीं ज्यादा बिड की लेकिन उसे कुछ नहीं मिला|

कवाल काण्ड की आग में झुलस रही है प्रदेश सरकार

मुजफ्फरनगर के कवाल में मचे बवाल ने प्रदेश सरकार के कानूनी मोर्चे पर फेल होने की गवाही दे दी है। कवाल काण्ड के बाद अब प्रदेश सरकार अपने हाथ जलाने के लिए तैयार नहीं है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक जो पहले हरिद्वार में प्रस्तावित थी वो अब आगरा में होगी। 11,12 सितम्बर को होने वाली बैठक के लिए समाजवादी पार्टी ने तैयारिया शुरू कर दी है। वही हरिद्वार से स्थान बदलने को लेकर राजनीति और बयानबाजियों का दौर भी शुरू हो गया है। 

समाजवादी पार्टी आगरा में ही बड़ी बैठकें करती रही है। हरिद्वार का चयन उन्होंने पश्चिम उत्तर प्रदेश को ध्यान में रख कर किया था| हरिद्वार उत्तर प्रदेश के करीब चार जिलों से मिलता है। यही वजह थी की समाजवादी पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को हरिद्वार में आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया था। इस तय कार्यक्रम के अनुसार 11,12 सितम्बर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक वहां होनी थी। 

मुजफ्फरनगर में हुये कवाल हत्याकांड के बाद उठे बवाल ने मुजफ्फरनगर के साथ आसपास के जिलों में भी तनाव फैला दिया है तनाव का असर हरिद्वार के साथ इसके आसपास के उन जिलों में भी फैला जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। उधर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक देवराज नागर ने भी स्वीकार किया की प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव तेज़ी से फैलता जा रहा है, आश्चर्य की बात ये है कि अब साम्प्रदायिक तनाव शहरो की बजाय ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। डीजीपी नागर ये भी कहते है कि चुनावों के करीब आने की वजह से प्रदेश में अराजकता का माहौल है। 

कवाल गांव के मजरा मलिकपुरा निवासी गौरव नंगला के किसान इंटर कॉलेज का छात्र था। परिवार की लड़कियों से छेड़छाड़ को लेकर गौरव की गांव के युवकों से कई बार झड़प हो चुकी थी। गत मंगलवार सुबह गौरव जब साइकिल से स्कूल जा रहा था, रास्ते में शाहनवाज से उसकी साइकिल छू गयी जिसपर दोनों में कहासुनी हुई| दोपहर में स्कूल से लौटते समय गौरव को शाहनवाज ने पकड़ लिया। इसी बीच, गौरव के मामा सचिन भी वहां पहुँच गए| मिली जानकारी के मुताबिक दोनों ने शाहनवाज को इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। 

शाहनवाज को मरा देख कर जब मामा-भांजे वहां से भागे तो चौराहे पर मुस्लिम दुकानदारों ने दोनों को पकड़ लिया। तभी इनदोनो को दौड़ा रही भीड़ ने दोनों को चाकू-छुरियों से गोद डाला और पत्थर से इनके सिर और चेहरे को कूच कर इनकी हत्या कर दी। जब ये बात गौरव और सचिन के लोगों को पता चली तो दोनों समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए और फायरिंग और पथराव के बाद बाजार बंद होते चले गए। 

बेकाबू हो चुके हालात को सँभालने जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी ने दलबल के साथ मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया इस दौरान हल्का बल भी प्रयोग किया गया। मृतक गौरव-सचिन के रिश्तेदारों ने प्रशासन को डेढ़ घंटे तक शव नहीं उठाने दिया। पुलिस ने आरोपियों की तलाश में घरों पर दबिश दी, लेकिन महिलाओं के अलावा कोई नहीं मिला।

फिलहाल इस समय मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में माहौल काफी तनावपूर्ण हो चुका है, दोनों ही समुदाय के बड़े बुजुर्ग आलाधिकारियों के साथ मिलकर माहौल को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं| सूत्रों के मुताबिक दोनों ही पक्षों के लोग अन्दर ही अन्दर बड़ी वारदात की तैयारी कर रहे हैं, प्रशासन की ज़रा ही लापरवाही पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश को बारूद के ढेर पर खड़ा कर देगी|

Wednesday, 4 September 2013

आखिर क्यों न डरे महिला हवलदार

आपरेशन मजनू, आपरेशन रोड रोमियो, और आपरेशन छैला चलाने वाली पुलिस के अन्दर ही मजनू, रोमियो, और छैला प्रवृति के अफसर हो तो राह चलती लड़कियों की क्या कहे, थाने के अन्दर तैनात महिला कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं है। राजधानी के ट्रांस गोमती इलाके में स्थित एक थाने के थानेदार की आशिकी के चर्चे तो वैसे काफी आम थे लेकिन उनकी आशिकी का शिकार जब उनकी सहकर्मी एक हवालदार हो गई तो हंगामा बरप गया। 

ट्रांस गोमती स्थित इस थाने में पुलिस वालों के बीच दरोगा जी के आशिकी के चर्चे वैसे तो उनके सहकर्मी एक दूसरे से चटकारे लेकर सुनते-सुनाते थे लेकिन दरोगा जी एक महिला हवलदार पर फ़िदा थे ये किसी को पता नहीं था। दरोगा जी अपना प्रेम गाहे-बेगाहे उक्त महिला हवलदार को दिखा भी दिया करते थे। दरोगा जी की आशिकी दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। हालात उस महिला हवलदार के लिए खराब हो रहे थे, उसकी मजबूरी ये थी कि वो अपनी पीड़ा किसी से कह नहीं सकती थी, वजह वर्दी वालों के कुछ नियम क़ानून अपने वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बनाये गए है। 

महिला हवलदार अपने ऊपर हो रहे इस आशिकाना हमले को झेलते हुये खुद को अपने ही अधिकारी से बचाने में लगी थी। लेकिन सोमवार को उक्त थानेदार ने सारी हदे पार कर दी और महिला हवलदार को अपने कमरे में बुलाकर आपत्तिजनक बाते करने लगे। महिला हवलदार ने पहले तो उन्हें ऐसी बातो के लिए मना करने से मना कर दिया लेकिन थानेदार साहब अपनी आशिकी के जलवे उसे दिखाने लगे और कामंधता में इतने अंधे हो गये कि उन्होंने उक्त महिला हवलदार का हाथ पकड़ कर उससे अपने प्यार को स्वीकार करने का अनुरोध करने लगे। महिला हवलदार अपने अधिकारी की इस हरकत से खासी डर गई। 

थानेदार साहब ने उक्त महिला के हाथ पर पहले प्यार की निशानी दिल का चित्र बनाया और उसके हाथ पर "आई लव यू" लिख दिया। थानेदार की इस हरकत से महिला हवलदार डर गई तब तक थानेदार साहब की हिम्मत बढ़ चुकी थी वो उक्त हवलदार के साथ अश्लील हरकत पर उतारू हो गए। संघर्ष के बाद हवलदार ने अपने आप को थानेदार के चंगुल से किसी तरह बचाया और थाना परिसर स्थित क्षेत्राधिकारी के आफिस में पहुँच गई। क्षेत्राधिकारी ने महिला हवलदार की बात सुनी और अवाक रह गए लेकिन हवलदार की आपबीती सुनने के बाद आवश्यक कदम उठाने की जगह उन्होंने जो बात कही वो अविश्वसनीय थी| 

सीओ साहब ने विभाग की बदनामी का डर दिखा कर उक्त हवलदार को चुप रहने की सलाह दे डाली लेकिन महिला हवलदार ने अपनी इज्जत पर हाथ डालने वाले उक्त थानेदार को सबक सिखाने का मन बना लिया था, सीओ की बात न मानने के एवज में सीओ साहब ने उन्हें जबरिया एक हफ्ते की छुट्टी पर भेज दिया। महिला हवलदार थाने से निकल कर डीआईजी नवनीत सिकेरा द्वारा स्थापित"वूमेन पावर हेल्प लाइन" आफिस चली गई और थानेदार के खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कराया। मामला दर्ज होते ही बात उच्चाधिकारियों तक पहुंची जिसमें डीआईजी नवनीत सिकेरा तक के कानो में महिला हवलदार का मामला पहुँच गया। 

अधिकारी के साथ पूरा पुलिस विभाग थानेदार की हरकत को लेकर शर्मिन्दा है, वही महिला हवलदार इस मामले को ठंडा न होने देने की बात कह अपने ही अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रही है। ट्रांस गोमती इलाके में स्थित इस थाने के थानेदार एक ख़ास समुदाय के बताये जा रहे है जिनके ऊपर आजकल सरकार भी खासी मेहरबान दिखाई पड़ रही है। देखना है कि वूमेन पावर हेल्प लाइन और खुद डीआईजी नवनीत सिकेरा अपनी इस मातहत को न्याय दिला पाते है या नहीं|

Tuesday, 3 September 2013

अपवित्र आसाराम

जोधपुर पुलिस की गिरफ्त में आये कथावाचक आसाराम बापू से पुलिस अब 15 अगस्त की उस घटना पूछताछ रही कि आखिर उस दिन उन्होंने उस लड़की के साथ क्या क्या किया था। पुलिस के सवालों के जवाब देने की बजाय आसाराम अब नया राग अलापने लगे है, जहा पहले अपनी गिरफ्तार होने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा था कि जेल बैकुंठ है वहा जाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं वो वहा भी जाकर भगवान् का ध्यान करेंगे। लेकिन अब आसाराम जेल जाने से बचने के लिए ये कह रहे है कि वो जेल जाकर अपवित्र हो जायेंगे क्योंकि जेल में अपराधिक प्रवृति के लोग बंद रहते है। 

आज दोपहर बाद जोधपुर पुलिस आसाराम को इंदौर से वाया दिल्ली होते हुई पहुंची जहा से आसाराम को जोधपुर के उस आश्रम लेकर गई जहा पर पीड़ित लड़की के अनुसार आसाराम ने उस पर यौन हमला किया था। पुलिस ने उस कुटिया में ले जाकर आसाराम से पूछताछ की| पूछताछ के दौरान आसाराम ने कहा कि उस दिन उसने लड़की को प्रवचन दिया और उसे दूध पिलाया था बाकी कुछ भी नहीं हुआ था। पुलिस उसके बाद आसाराम को लेकर मंडोर स्थित राजस्थान आर्म्ड कान्सटेबलरी (RAC) के गेस्ट हाउस चली आई। 

गेस्ट हाउस में पुलिस ने आसाराम से छिंदवाड़ा के उनके स्कूल में पढ़ने वाली पीडिता के साथ किये गए दुष्कर्म पर फिर सवालात शुरू किये यहाँ भी आसाराम पुलिस के सवालों से बचते हुए अपने को जेल जाने से बचाने में ही लगे रहे। वही इस केस की इंचार्ज चंचल मिश्रा और उनकी टीम आसाराम पर लगातार सवालों की बौछार करती रही लेकिन आसाराम अपने को भगवान की भक्ति में लिप्त करते हुए पुलिस के सवालों से बचते रहे। 

वही आज सुबह एएसपी सतीश जांगिड के नेतृत्व में इंदौर गई राजस्थान पुलिस की टीम ने आसाराम को उनके आश्रम से गिरफ्तार कर विमान से वाया दिल्ली होते हुए जोधपुर ले आई जहा इस केस की जांच और पूछताछ शुरू हुई। आज सुबह ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने कहा था कि वो चाहे कितना बड़ा आदमी हो कानून से ऊपर नहीं है अगर उसने कोई भी कानून तोड़ने का काम किया है उसकी गिरफ्तारी जरुर होगी।

मौज में है गोरखपुर मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य

आगामी 15 सितम्बर को प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गोरखपुर जाकर मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित बच्चों का हाल जानेंगे। सरकारी अधिकारी और मेडिकल कालेज प्रशासन मुख्यमंत्री के दौरे की जमकर तैयारियों में जुटा हुआ है। कालेज के प्रधानाचार्य डॉ के पी कुशवाहा जो खुद पूर्वी उत्तर प्रदेश के विख्यात बाल रोग विशेषज्ञ है, अपने सभी काम और मर रहे मासूम बच्चो के ईलाज की समुचित व्यवस्था न कर अपने कर्मो को छुपाने के लिए मुख्यमंत्री की अगुवानी ठीक हो और उनके द्वारा किये गए कुकर्म बाहर न आ सके इसके इंतजाम में लगे है। 

बीते तीन दशक से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों में आतंक का पर्याय बने मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) ने हज़ारों माओं की गोद सूनी कर दी। वही लाखो बच्चे इस बीमारी की चपेट में आकर अपना जीवन दाँव पर लगा चुके है। वही कुछ ऐसे भी है जो इस बीमारी चपेट में आने के बाद ईलाज के बाद ठीक होने के बावजूद आज अपंग का जीवन जीने पर मजबूर है। 

प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन मस्तिष्क ज्वर (जापनी इंसेफ्लाईटिस) से लड़ने के लिए करोड़ों रुपयों का बजट हर साल आवंटित करती आ रही है, लेकिन साल दर साल न तो सरकार इस बीमारी पर काबू पा सकी है और न ही इस बीमारी को करीब देखने जानने वाले इस बीमारी का समूल नाश करने की वजह ही पता लगा सके। सवाल यहाँ ये भी है कि अगर बीमारी की वजह के बारे में पता है तो उसे ख़त्म करने के लिए सरकार द्वारा दिया जा रहा बजट कहाँ जा रहा है। 

पूर्वांचल में बच्चो के भगवान के नाम से विख्यात डॉ केपी कुशवाहा जब तक बच्चो के डाक्टर के तौर पर बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में कार्यरत थे तब तक मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चों के माँ बाप अपने मासूमो को लेकर यहाँ आते थे तो उन्हें एक उम्मीद रहती डॉ कुशवाहा के रहते उनके नौनिहालों को कुछ नहीं होगा। डॉ कुशवाहा भी अपनी पूरी ताकत और अनुभव के आधार पर बच्चो को ठीक करने में जुट जाते थे लेकिन जब से वो मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य एक साजिश के तहत बने उन्होंने सिर्फ अपने बारे में सोचा और उस कुर्सी को बचाने की जुगत में ही लगे रहे जो शायद उनकी नहीं थी। 

दिसंबर 2011 को जबसे डॉ के पी कुशवाहा बाबा राघव मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य बने तब से इन दो सालों में मासूमो की मौत का आंकड़ा चौकाने वाला है। मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) के समय जुलाई और अगस्त महीने के आंकड़ो पर नज़र डाले तो स्थिति खुद ब खुद साफ़ हो जाती है। 2012 के जुलाई महीने तक मेडिकल कालेज में भर्ती होने वाले बच्चो की संख्या 536 थी जिसमें से 94 बच्चे काल के गाल में समा गए। वही अगस्त महीने में 427 मरीज मेडिकल कालेज में अपना इलाज़ करने आये जिसमें 65 की मौत हो गई। 2013 के जुलाई महीने में 237 मरीज भर्ती हुये जिसमें 60 की मौत हो गई, वही अगस्त में 413 बच्चे अपने जीवन से संघर्ष करते हुये और बेहतर इलाज़ की आशा में मेडिकल कालेज के वार्ड नंबर 6 में भर्ती हुये जिसमें से 115 अपने जीवन की जंग हार गए। 

यहाँ इन आंकड़ो को देखकर दिमाग घूम जाता है, जिस डॉ कुशवाहा को पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग भगवान का दर्जा देते है उन्ही डॉ कुशवाहा के देखरेख में इन दो सालों में मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चो के मरने में इजाफा हुआ है। जबकि पूर्व के सालों में इस बिमारी से पीड़ित बच्चो को बचाने के लिए डॉ कुशवाहा के संघर्ष को भी लोग याद करते है। ऐसा इन दो सालों में क्या हुआ जिसकी वजह से मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चों की मौत में इजाफा हुआ। नाम न छापने की शर्त पर कुछ परिजन कहते है डॉ कुशवाहा तो सिर्फ अपनी प्रधानाचार्य की कुर्सी बचाने में लगे हुये है साथ ही उन आंकड़ो को छुपाने में जो स्वास्थय विभाग और सरकार के पास भेजी जाती है। 

डॉ कुशवाहा के ऊपर दवा कंपनियों से मेलजोल की बाते भी सामने आ रही है। मेडिकल कालेज प्रशासन आजकल सिर्फ अपने आकाओ को खुश करने में लगा हुआ है ताकि उनके द्वारा किये जा रहे कुकर्म प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव के सामने न आ जाए। अब 15 सितम्बर को अखिलेश यादव गोरखपुर का दौरा करने जा रहे है जिसमें उनका कार्यक्रम बाबा राघव दास मेडिकल कालेज जाने का भी है। डॉ कुशवाहा और उनकी पूरी टीम उनकी अगुवानी में जोर शोर से लगी हुई है ताकि मेडिकल कालेज में चल रही धांधली और वार्ड नंबर 6 से बच्चो और उनके परिजनों की दर्द भरी आवाज प्रदेश के मुख्यमंत्री के कानो तक न पहुँच जाए।