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Monday, 23 September 2013

सियासत और मोदी

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी आम चुनावों को लेकर पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को घोषित कर कांग्रेस से मामले में बढ़त ले ली। नरेन्द्र मोदी की प्रधानमंत्री पद पर उम्मीदवारी घोषित होते ही ये तय हो गया कि भाजपा और सहयोगी पार्टियां आम चुनाव में बहुमत के लिए जरुरी 272 का जादुई आंकड़ा छूती है तो देश के अगले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही होंगे।

नरेन्द्र मोदी ने भी अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद भाजपा की केन्द्रीय चुनाव संचालन समिति के पद से इस्तीफा दे दिया। भाजपा की केन्द्रीय प्रचार टीम अब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेन्द्र मोदी के देश के अलग अलग हिस्सों में आयोजित होने वाली चुनावी जनसभाओ के कार्यक्रम को तैयार करने में जुट गई है। भाजपा ने नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को तय करने में जातिगत वोट बैंक, लोकसभा सीटों के हिसाब से प्रदेशो में होने वाले जनसभाओ की संख्या भी तय करना शुरू कर दिया है। 

भाजपा 2014 आम चुनावों में 1996 को दोहराना चाहती है। वजह भी साफ़ है 1996 में राममंदिर आन्दोलन और तात्कालिक प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की असफल कांग्रेस सरकार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में उतरी भाजपा ने 1991 से एक कदम आगे निकलते हुये 51 सीटों से एक सीट ज्यादा जीतकर 96 में प्रदेश में भाजपा का परचम 52 सीटों पर जीत दर्ज कर लहरा दिया था। यही वो साल था जब भाजपा ने पहली बार 13 दिन की सरकार बनाई और लोकसभा में बहुमत साबित न होने की वजह से अटल बिहारी वाजपेई की सरकार एक वोट से गिर गई थी।

जिस उत्तर प्रदेश ने भारतीय जनता पार्टी को केंद्र की सत्ता के करीब पहुंचाया आज वही उत्तर प्रदेश एक बार फिर भाजपा की प्रयोगशाला बनने जा रहा है, और इस प्रयोगशाला पर प्रयोग करने की कमान भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के कंधो पर डाली गई है भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने नरेन्द्र मोदी के उत्तर प्रदेश की आम जनता को लुभाने के लिए उनके कार्यक्रमों की एक लम्बी लिस्ट तैयार की है जो 15 अक्टूबर से जनसभाओ में तब्दील होने लगेगी| देखने वाली बात ये होगी गुजरात के नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश की आम जनता की आँखों में कैसे कैसे लुभावने सपने डालते है। 

मोदी शब्दों के बाज़ीगर कहे जाते है उनकी भाषण शैली जहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की याद दिलाती है वहीँ, वो भाजपा के जनप्रिय नेता अटल जी से एक कदम आगे आक्रामक शैली का भी प्रयोग करते है। नरेन्द्र मोदी को जमीनी राजनीति की हकीक़त पता है। जातियों में बनती उत्तर प्रदेश की राजनीति की नब्ज पकड़ना मोदी और भाजपा के लिए आसान नहीं है इस बात से वाकिफ भाजपा का थिंक टैंक और खुद मोदी भी इस प्रदेश की महत्वता समझते हुये फूंक फूंक कर कदम रख रहे है। 

नरेन्द्र मोदी की पहली जनसभा कानपुर में होने वाली है जहां से केन्द्रीय कोयला मंत्री और तीन बार से सांसद श्री प्रकाश जायसवाल संसंदीय क्षेत्र का नेतृत्व करते है| मोदी कांग्रेस पर पहली चोट कानपुर से ही करेंगे वही दूसरी जनसभा झाँसी में होगी जहां के सांसद आदित्य जैन है जो केंद्र सरकार में मंत्री है जबकि तीसरी जनसभा जनसंघ की प्रयोगशाला के तौर पर मशहूर बहराइच में होगी इस सीट से भी सोनिया गांधी के करीबी और राजीव गाँधी की सुरक्षा में तैनात रहे कमांडो कमल किशोर सांसद है। 

नरेंद्र मोदी और भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी पहली तीन जनसभाओ का एलान कर चुके है इसके अलावा भी मोदी की आगामी जनसभाओ का एलान जल्द होगा| मोदी और उनकी टीम उन सीटों को ही पहले निशाने पर ले चुकी है जहां से कांग्रेस ने 2009 के चुनावों में जीत हासिल की थी, मोदी और उनके सबसे करीबी अमित शाह की मंशा इन लोकसभा सीटो का चयन कर ये साफ़ कर चुकी है की मोदी की जनसभाओ में भीड़ जुटाकर केंद्र में बैठी यूपीए सरकार को ये सन्देश दे दिया जाये की कांग्रेस से जनता उब चुकी है। 

मोदी और भाजपा अच्छी तरह से जानते है अगर उत्तर प्रदेश जीत लिया तो केंद्र जीत लिया, इस बात को ध्यान में रखते हुए भाजपा की केन्द्रीय समिति ने अपनी कमर कस ली है। भाजपा नेतृत्व को अच्छी तरह पता है कि अगर भाजपा ने 1991, 1996 दोहरा दिया तो प्रदेश में भाजपा की स्वर्णिम उड़ान एक बार फिर शुरू हो जायेगी। जनसंघ की प्रयोगशाला के तौर पर जानी जाने वाली यूपी को लेकर भाजपा सतर्क हो गई है। भाजपा ने जातिगत आधार को भी ध्यान में रखकर नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को तय किया है। नरेन्द्र मोदी खुद पिछड़ी जाति से आते है। 

80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में चुनावी घमासान की आहट सुनाई पड़ने लगी है। मुलायम सिंह यादव खुद अपने कार्यकर्ताओं से 60 सीटे जीतकर देने की मांग कर चुके है। वहीँ, कांग्रेस भी अपनी उन 21 सीटों को बचाने की जुगत में लगी हुई है जो उसने अप्रत्याशित रूप से 2009 में जीती थी। भाजपा भी 2014 के आम चुनावों में व्यक्तिवादी सोच से आगे निकलकर पार्टी के सन्देश और मोदी के व्यक्तित्व को प्रदेश की जनता तक पहुंचाने में लगी हुई है। 

भाजपा ने 2004 और 2009 के चुनाव में 10-10 सीट जीती थी, जो स्थानीय भाजपा नेताओं के खुद के प्रभाव वाली सीटे थी। मोदी इन्ही 10 सीटो से आगे बढ़कर लोकसभा चुनाव में 50 सीट को जीत में तब्दील करना चाहते है। भाजपा ने प्रदेश में मोदी के प्रथम आगमन की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। मोदी को भाजपा ने जून महीने में ही केन्द्रीय चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष मनोनित किया था, तभी से कयास लगाये जा रहे थे की मोदी उत्तर प्रदेश का रूख कब करते है, पार्टी के अंदरुनी सूत्रों की माने तो मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद ही पार्टी चाहती थी कि मोदी उत्तर प्रदेश आये, अब भाजपा वही करने जा रही है। 

84 कोसी परिक्रमा, राममंदिर का राग और अब मुजफ्फरनगर दंगो ने प्रदेश की जनता में एक माहौल और डर पैदा करने का काम किया है। मुजफ्फरनगर दंगो के बाद प्रदेश की सियासत गर्म है प्रदेश सरकार और उनके कद्दावर मंत्री पर आलोचनाओं की झड़ी लग गई है। भाजपा, बसपा, कांग्रेस जैसी पार्टिया इन दंगो को भुनाने में लगी है वही समाजवादी पार्टी भी इन दंगो को कैश कराने के लिए तत्पर दिख रही है। मोदी मुजफ्फरनगर दंगो पर बोलेंगे कि नहीं ये 15 अक्तूबर को पता चलेगा लेकिन ये तय है की अब मोदी का कार्यक्रम आ जाने के बाद प्रदेश की राजनीति का पारा चढ़ने वाला है।

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