समाजवादी पार्टी के नेताओं, विधायकों और सांसदों के लिए पंचम तल यानि प्रदेश की सत्ता का सबसे शक्तिशाली केंद्र उनकी पहुँच से दूर हो गया। बहुजन समाज पार्टी की डाली गई परिपाटी को समाजवादी पार्टी ने भी अपना लिया। आज मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक आदेश ने प्रदेश के सभी विधायकों और सांसदों के माथे पर बल के साथ पसीने भी ला दिए।
इस सरकारी फरमान में साफ़ कहा गया है जब तक मुख्यमंत्री अपने कार्यालय में बैठेंगे तब तक कोई भी व्यक्ति पंचम तल पर नहीं जा सकेगा । इस आदेश में साफ़ कहा गया है कि ये आदेश विधायकों सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के ऊपर भी लागू होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी इस तुगलगी फरमान ने पार्टी के अन्दर खलबली मचा दी है।
सत्ता में आने से पहले वर्तमान मुख्यमंत्री जब चुनावी जंग लड़ रहे थे, तो उन्हें कई जनसभाओ में ये कहा कि मुख्यमंत्री मायावती तानाशाह है, वो किसी से नहीं मिलती। वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी चुनावी सभाओं में यहाँ तक कहा था कि प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री आम जनता के लिए सुलभ होंगे।
मुख्यमंत्री ने सरकार बनने के बाद शुरुवाती दौर में सरकार को जनता के लिए सुलभ करते हुये जोरशोर से जनता दरबार का आयोजन किया और खुद जनता से रूबरू होते रहे लेकिन चंद जनता दरबार के बाद मुख्यमंत्री कहाँ लापता हो गए इसका पता जनता दरबार में अपनी दिक्कते कहने आने वाले लोग पता कर रहे है। मुख्यमंत्री ने खुद जनता के बीच न आकर जनता दरबार की जिम्मेदारी अपने खास सिपहसालारों पर डालकर खुद को इस आयोजन से अलग कर लिया, जनता दरबार का क्या हश्र हुआ ये किसी से छुपा नहीं।
जनता दरबार में मुख्यमंत्री के न उपलब्ध होने के बाद जनता को अपन दिक्कतों को सरकार के कानो तक पहुंचाने का एक माध्यम उनके क्षेत्र के विधायक और सांसद थे। अब सरकार और पंचम तल में बैठे अधिकारियों के इस फरमान के बाद जब प्रदेश के सभी क्षेत्रों के विधायक की पहुँच से दूर हो चुके मुख्यमंत्री तक जनता की आवाज कैसे पहुंचेगी ये भी दूभर हो गया।
ऐसा नहीं है किस सरकार द्वारा पहली बार ऐसा तुगलकी फरमान जारी किया गया है पूर्व बसपा सरकार के दौरान भी पंचम तल में पत्रकारों के जाने पर रोक लगाई गई थी, सपा सरकार बसपा सरकार के फरमान से भी दो कदम आगे बढ़ते हुये अब विधायकों और सांसदों के भी पंचम तल पर जाने से रोक लगा रही है।
इस पूरे फरमान में सिर्फ एक छुट दी गई है की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने विवेक से जिस विधायक और सांसद से मिलने का निर्णय करेंगे वही पंचम तल की सीढियों पर चढ़ सकेगा । बहरहाल जिसके भी आदेश से ये फरमान जारी हुआ उसने सरकार के इस फरमान को लेकर जनता और उसके नुमाईन्दो के मन में खलबली पैदा कर दी है,अब देखने वाली बात ये होगी की पत्रकारों पर रोक लगाकर बसपा ने जो गलती की थी उसका खामियाजा जनता ने उसे 2012 के विधानसभा चुनावों में दे दिया, सरकार के इस फैसले का क्या असर होता है ये समय के साथ निर्धारित होगा।
इस सरकारी फरमान में साफ़ कहा गया है जब तक मुख्यमंत्री अपने कार्यालय में बैठेंगे तब तक कोई भी व्यक्ति पंचम तल पर नहीं जा सकेगा । इस आदेश में साफ़ कहा गया है कि ये आदेश विधायकों सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के ऊपर भी लागू होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी इस तुगलगी फरमान ने पार्टी के अन्दर खलबली मचा दी है।
सत्ता में आने से पहले वर्तमान मुख्यमंत्री जब चुनावी जंग लड़ रहे थे, तो उन्हें कई जनसभाओ में ये कहा कि मुख्यमंत्री मायावती तानाशाह है, वो किसी से नहीं मिलती। वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी चुनावी सभाओं में यहाँ तक कहा था कि प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री आम जनता के लिए सुलभ होंगे।
मुख्यमंत्री ने सरकार बनने के बाद शुरुवाती दौर में सरकार को जनता के लिए सुलभ करते हुये जोरशोर से जनता दरबार का आयोजन किया और खुद जनता से रूबरू होते रहे लेकिन चंद जनता दरबार के बाद मुख्यमंत्री कहाँ लापता हो गए इसका पता जनता दरबार में अपनी दिक्कते कहने आने वाले लोग पता कर रहे है। मुख्यमंत्री ने खुद जनता के बीच न आकर जनता दरबार की जिम्मेदारी अपने खास सिपहसालारों पर डालकर खुद को इस आयोजन से अलग कर लिया, जनता दरबार का क्या हश्र हुआ ये किसी से छुपा नहीं।
जनता दरबार में मुख्यमंत्री के न उपलब्ध होने के बाद जनता को अपन दिक्कतों को सरकार के कानो तक पहुंचाने का एक माध्यम उनके क्षेत्र के विधायक और सांसद थे। अब सरकार और पंचम तल में बैठे अधिकारियों के इस फरमान के बाद जब प्रदेश के सभी क्षेत्रों के विधायक की पहुँच से दूर हो चुके मुख्यमंत्री तक जनता की आवाज कैसे पहुंचेगी ये भी दूभर हो गया।
ऐसा नहीं है किस सरकार द्वारा पहली बार ऐसा तुगलकी फरमान जारी किया गया है पूर्व बसपा सरकार के दौरान भी पंचम तल में पत्रकारों के जाने पर रोक लगाई गई थी, सपा सरकार बसपा सरकार के फरमान से भी दो कदम आगे बढ़ते हुये अब विधायकों और सांसदों के भी पंचम तल पर जाने से रोक लगा रही है।
इस पूरे फरमान में सिर्फ एक छुट दी गई है की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने विवेक से जिस विधायक और सांसद से मिलने का निर्णय करेंगे वही पंचम तल की सीढियों पर चढ़ सकेगा । बहरहाल जिसके भी आदेश से ये फरमान जारी हुआ उसने सरकार के इस फरमान को लेकर जनता और उसके नुमाईन्दो के मन में खलबली पैदा कर दी है,अब देखने वाली बात ये होगी की पत्रकारों पर रोक लगाकर बसपा ने जो गलती की थी उसका खामियाजा जनता ने उसे 2012 के विधानसभा चुनावों में दे दिया, सरकार के इस फैसले का क्या असर होता है ये समय के साथ निर्धारित होगा।
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