राज्य चीनी निगम की चीनी मीलों की बसपा सरकार के दौरान हुई बिक्री की जांच कर रहे लोकायुक्त की जांच पर ब्रेक लग गई है। लोकायुक्त की जांच में पूर्व गन्ना मंत्री और बसपा के महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर संदेह गहराते और इस बिक्री की डील कराने में शामिल करीब एक दर्जन अफसरों का नाम आने के बाद घोटालेबाजों ने कार्रवाई से बचने के लिए हाईकोर्ट का रूख कर लिया है। मामला हाईकोर्ट में पहुंचते ही लोकायुक्त की जांच की धीमी पड़ गई है।
इस मामले का संज्ञान लेते हुये हाईकोर्ट की पीठ ने आयकर आयुक्त को बेचीं गई चीनी मिलों का मूल्यांकन कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट को प्रेषित करें। यही वजह है कि लोकायुक्त द्वारा की गई जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं भेजी जा रही है। वही लोकायुक्त ने भी अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार करना बेहतर समझा है।
प्रदेश की तात्कालिक बसपा सरकार के दौरान प्रदेश में स्थित सहकारी चीनी मीलों को औने पौने दाम में बेच दिया गया था। इन बेचीं गई 21 चीनी मिलों का सौदा 1180 करोड़ रुपयों में हुआ था। चीनी मिलों को बेचे जाने को लेकर उस समय विपक्ष में बैठी और आज सरकार बना चुकी समाजवादी पार्टी ने ख़ासा हंगामा किया था।
उत्तर प्रदेश में पिछली मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार में हुए उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के बिक्री घोटाले से प्रदेश को लगभग 1179.84 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बसपा सरकार में नमक के भाव बेची गईं 21 चीनी मिलों की सीएजी जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आये हैं जिनसे पता चला है कि माया ने शराब कारोबारी पोंटी चड्डा को फायदा दिलाने के लिए नियम कानून को अपनी मर्जी से तोडा मरोड़ा।
उत्तर प्रदेश विधान सभा में सीएजी रिपोर्ट जारी हुई तो इस पर जमकर हंगामा हुआ| इसके बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश पर आ गयी की वो जल्द से जल्द इस रिपोर्ट को आधार बना सख्त कार्यवाही करें| सीएजी रिपोर्ट में सामने आया है कि सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के चहेते मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के संरक्षण में शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा के स्वामित्व वाली कंपनियों को इन चीनी मिलों को न सिर्फ नमक के भाव बेचा गया बल्कि चीनी मिलें किसे बेचनी हैं, ये सक्षम अधिकारियों को बिडिंग-प्रक्रिया आरंभ होने से पहले ही पता था। बिडर्स यानि कि चड्डा की कंपनियों को वित्तीय बिड भी पहले ही बता दी गई थी ताकि उसे कोई परेशानी न हो, इस पर भी काम नहीं बना तब बिडिंग के मध्य में ही फेरबदल कर दिया गया।
पोंटी को इस डील में ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके इसके लिए माया के इशारे पर मिलों की भूमि उसके प्लांट और मशीनरी का मूल्य बाजार भाव से भी न्यूनतम कर दिया गया। सिर्फ इतने पर ही सरकार नहीं रुकी उसने रजिस्ट्री के लिए स्टाम्प ड्यूटी में भी कटौती कर दी गई। सीएजी रिपोर्ट में पता चला है कि चीनी मिलों का मूल्यांकन करने वालों ने साजिश रच मूल्यांकन किया जिससे चड्डा को तो लाभ हुआ लेकिन सरकार को 840.34 करोड़ की चपत लगी है।
सीएजी जांच में सामने आया है कि चीनी मिलें बेचने से सूबे को 1179.84 करोड़ से भी अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है। चड्डा से आर्थिक लाभ लेने वाले अधिकारी और मंत्री गठजोड़ ने चड्डा की कम्पनी को वित्तीय बिड पहले बता रखी थी इसके चलते सूबे के बुलंदशहर और सहारनपुर जिले की चीनी मिलों में वेव इंडस्ट्रीज और पंजाब फूड्स ही बिडर्स थे जिन्होंने 49 फीसदी की चोट सूबे के राजस्व को दी| वहीँ सरकारी उपक्रम इंडियन पोटाश ने 6 मिलों के लिए अपेक्षित मूल्य से कहीं ज्यादा बिड की लेकिन उसे कुछ नहीं मिला|
इस मामले का संज्ञान लेते हुये हाईकोर्ट की पीठ ने आयकर आयुक्त को बेचीं गई चीनी मिलों का मूल्यांकन कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट को प्रेषित करें। यही वजह है कि लोकायुक्त द्वारा की गई जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं भेजी जा रही है। वही लोकायुक्त ने भी अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार करना बेहतर समझा है।
प्रदेश की तात्कालिक बसपा सरकार के दौरान प्रदेश में स्थित सहकारी चीनी मीलों को औने पौने दाम में बेच दिया गया था। इन बेचीं गई 21 चीनी मिलों का सौदा 1180 करोड़ रुपयों में हुआ था। चीनी मिलों को बेचे जाने को लेकर उस समय विपक्ष में बैठी और आज सरकार बना चुकी समाजवादी पार्टी ने ख़ासा हंगामा किया था।
उत्तर प्रदेश में पिछली मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार में हुए उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के बिक्री घोटाले से प्रदेश को लगभग 1179.84 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बसपा सरकार में नमक के भाव बेची गईं 21 चीनी मिलों की सीएजी जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आये हैं जिनसे पता चला है कि माया ने शराब कारोबारी पोंटी चड्डा को फायदा दिलाने के लिए नियम कानून को अपनी मर्जी से तोडा मरोड़ा।
उत्तर प्रदेश विधान सभा में सीएजी रिपोर्ट जारी हुई तो इस पर जमकर हंगामा हुआ| इसके बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश पर आ गयी की वो जल्द से जल्द इस रिपोर्ट को आधार बना सख्त कार्यवाही करें| सीएजी रिपोर्ट में सामने आया है कि सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के चहेते मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के संरक्षण में शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा के स्वामित्व वाली कंपनियों को इन चीनी मिलों को न सिर्फ नमक के भाव बेचा गया बल्कि चीनी मिलें किसे बेचनी हैं, ये सक्षम अधिकारियों को बिडिंग-प्रक्रिया आरंभ होने से पहले ही पता था। बिडर्स यानि कि चड्डा की कंपनियों को वित्तीय बिड भी पहले ही बता दी गई थी ताकि उसे कोई परेशानी न हो, इस पर भी काम नहीं बना तब बिडिंग के मध्य में ही फेरबदल कर दिया गया।
पोंटी को इस डील में ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके इसके लिए माया के इशारे पर मिलों की भूमि उसके प्लांट और मशीनरी का मूल्य बाजार भाव से भी न्यूनतम कर दिया गया। सिर्फ इतने पर ही सरकार नहीं रुकी उसने रजिस्ट्री के लिए स्टाम्प ड्यूटी में भी कटौती कर दी गई। सीएजी रिपोर्ट में पता चला है कि चीनी मिलों का मूल्यांकन करने वालों ने साजिश रच मूल्यांकन किया जिससे चड्डा को तो लाभ हुआ लेकिन सरकार को 840.34 करोड़ की चपत लगी है।
सीएजी जांच में सामने आया है कि चीनी मिलें बेचने से सूबे को 1179.84 करोड़ से भी अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है। चड्डा से आर्थिक लाभ लेने वाले अधिकारी और मंत्री गठजोड़ ने चड्डा की कम्पनी को वित्तीय बिड पहले बता रखी थी इसके चलते सूबे के बुलंदशहर और सहारनपुर जिले की चीनी मिलों में वेव इंडस्ट्रीज और पंजाब फूड्स ही बिडर्स थे जिन्होंने 49 फीसदी की चोट सूबे के राजस्व को दी| वहीँ सरकारी उपक्रम इंडियन पोटाश ने 6 मिलों के लिए अपेक्षित मूल्य से कहीं ज्यादा बिड की लेकिन उसे कुछ नहीं मिला|
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