सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए गए इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के आतंकी असदुल्लाह अख्तर उर्फ तबरेज उर्फ हड्डी की गिरफ्तारी के साथ ही राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' और कैफी आजमी जैसी महान विभूतियों की धरती आजमगढ़ एक बार फिर आतंकवाद के धब्बे से कलंकित हुई है।
दिल्ली, सूरत और अहमदाबाद में बीते सालों में हुए विस्फोटों में शामिल होने का आरोपी असदुल्लाह आजमगढ़ के देवगांव कोतवाली क्षेत्र के बैरीडीह गांव का रहने वाला है। बीते 29 अगस्त को बिहार नेपाल सीमा पर वह आईएम के संस्थापक सदस्य यासीन भटकल के साथ गिरफ्तार किया गया।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मानें तो असदुल्लाह 2008 में हुए बाटला हाउस मुठभेड़ में भी शामिल था और इस कांड के बाद से ही वह फरार चल रहा था। दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) उसकी शिद्दत से तलाश कर रही थी। असदुल्लाह ने शुरुआती पढ़ाई स्थानीय ज्योति स्कूल से की और स्नातक शिब्ली कॉलेज से पूरा किया। स्नातक के बाद वह लखनऊ से बी़ फार्मा करने लगा। इसी दौरान सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए विस्फोटों और फिर बाटला हाउस मुठभेड़ में उसके नाम का खुलासा हुआ।
आजमगढ़ के स्थानीय लोग इस बात से आहत हैं कि पिछले कुछ सालों से उनका जिला आतंकवादियों की वजह से कुख्यात होता आ रहा है। सरायमीर निवासी पूर्व ग्राम प्रधान नौशाद अहमद कहते हैं, जब हम लोग कहीं बाहर जाते हैं तो हमें शक की नजरों से देखा जाता है। हमारे साथ बुरा बर्ताव भी किया जाता है। लोग हमसे कहते हैं आप उसी आजमगढ़ से हैं जहां के युवा आतंकवादी बनकर जगह-जगह विस्फोट करते हैं।
नौशाद ने आगे बताया, यह सब सुनकर बहुत दुख पहुंचता है कि चंद लोगों के गलत कृत्यों की वजह से इस ऐतिहासिक स्थल के निवासियों को बाहर अपमान सहना पड़ता है। लखनऊ में मेडिकल का कोर्स कर रहे सुहैल हैदर कहते हैं कि गलत राह पर जाने वाले आजमगढ़ के चंद युवाओं की वजह से हमें लखनऊ, दिल्ली और मुबंई में स्थानीय परिवार किराए पर कमरा देना पसंद नहीं करते।
मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में अबु सलेम का नाम आने के बाद पहली बार आजमगढ़ का नाम आतंक के साथ जुड़ा था। सलेम आजमगढ़ के सरायमीर मुहल्ले का रहने वाला था। उसके बाद तो देश में हुए कई विस्फोटों में आजमगढ़ का नाम सामने आता रहा। 2008 में दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ में संजरपुर गांव निवासी साजिद और आतिफ मारे गए थे।
असदुल्ला की गिरफ्तारी के बाद अभी भी देश के अलग-अलग स्थानों पर हुए विस्फोट के मामलों में पुलिस और एनआईए को जिले के सात युवकों की तलाश है। ये लोग घर छोड़कर फरार चल रहे हैं। आजमगढ़ के नजीमाबाद के एक सामाजिक कार्यकर्ता कौशल किशोर कहते हैं, माना कि इस जिले के कुछ युवा आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए, लेकिन सिर्फ इसीलिए आजमगढ़ को आतंकवाद की नर्सरी कहा जाना गलत है।
उन्होंने कहा कि आजमगढ़ की धरती पर तमाम महान हस्तियों ने जन्म लेकर इस जिले का मान बढ़ाया। इस जिले को अच्छे लोगों की वजह से जाना जाना चाहिए।
दिल्ली, सूरत और अहमदाबाद में बीते सालों में हुए विस्फोटों में शामिल होने का आरोपी असदुल्लाह आजमगढ़ के देवगांव कोतवाली क्षेत्र के बैरीडीह गांव का रहने वाला है। बीते 29 अगस्त को बिहार नेपाल सीमा पर वह आईएम के संस्थापक सदस्य यासीन भटकल के साथ गिरफ्तार किया गया।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मानें तो असदुल्लाह 2008 में हुए बाटला हाउस मुठभेड़ में भी शामिल था और इस कांड के बाद से ही वह फरार चल रहा था। दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) उसकी शिद्दत से तलाश कर रही थी। असदुल्लाह ने शुरुआती पढ़ाई स्थानीय ज्योति स्कूल से की और स्नातक शिब्ली कॉलेज से पूरा किया। स्नातक के बाद वह लखनऊ से बी़ फार्मा करने लगा। इसी दौरान सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए विस्फोटों और फिर बाटला हाउस मुठभेड़ में उसके नाम का खुलासा हुआ।
आजमगढ़ के स्थानीय लोग इस बात से आहत हैं कि पिछले कुछ सालों से उनका जिला आतंकवादियों की वजह से कुख्यात होता आ रहा है। सरायमीर निवासी पूर्व ग्राम प्रधान नौशाद अहमद कहते हैं, जब हम लोग कहीं बाहर जाते हैं तो हमें शक की नजरों से देखा जाता है। हमारे साथ बुरा बर्ताव भी किया जाता है। लोग हमसे कहते हैं आप उसी आजमगढ़ से हैं जहां के युवा आतंकवादी बनकर जगह-जगह विस्फोट करते हैं।
नौशाद ने आगे बताया, यह सब सुनकर बहुत दुख पहुंचता है कि चंद लोगों के गलत कृत्यों की वजह से इस ऐतिहासिक स्थल के निवासियों को बाहर अपमान सहना पड़ता है। लखनऊ में मेडिकल का कोर्स कर रहे सुहैल हैदर कहते हैं कि गलत राह पर जाने वाले आजमगढ़ के चंद युवाओं की वजह से हमें लखनऊ, दिल्ली और मुबंई में स्थानीय परिवार किराए पर कमरा देना पसंद नहीं करते।
मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में अबु सलेम का नाम आने के बाद पहली बार आजमगढ़ का नाम आतंक के साथ जुड़ा था। सलेम आजमगढ़ के सरायमीर मुहल्ले का रहने वाला था। उसके बाद तो देश में हुए कई विस्फोटों में आजमगढ़ का नाम सामने आता रहा। 2008 में दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ में संजरपुर गांव निवासी साजिद और आतिफ मारे गए थे।
असदुल्ला की गिरफ्तारी के बाद अभी भी देश के अलग-अलग स्थानों पर हुए विस्फोट के मामलों में पुलिस और एनआईए को जिले के सात युवकों की तलाश है। ये लोग घर छोड़कर फरार चल रहे हैं। आजमगढ़ के नजीमाबाद के एक सामाजिक कार्यकर्ता कौशल किशोर कहते हैं, माना कि इस जिले के कुछ युवा आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए, लेकिन सिर्फ इसीलिए आजमगढ़ को आतंकवाद की नर्सरी कहा जाना गलत है।
उन्होंने कहा कि आजमगढ़ की धरती पर तमाम महान हस्तियों ने जन्म लेकर इस जिले का मान बढ़ाया। इस जिले को अच्छे लोगों की वजह से जाना जाना चाहिए।
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