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Thursday, 5 September 2013

कवाल काण्ड की आग में झुलस रही है प्रदेश सरकार

मुजफ्फरनगर के कवाल में मचे बवाल ने प्रदेश सरकार के कानूनी मोर्चे पर फेल होने की गवाही दे दी है। कवाल काण्ड के बाद अब प्रदेश सरकार अपने हाथ जलाने के लिए तैयार नहीं है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक जो पहले हरिद्वार में प्रस्तावित थी वो अब आगरा में होगी। 11,12 सितम्बर को होने वाली बैठक के लिए समाजवादी पार्टी ने तैयारिया शुरू कर दी है। वही हरिद्वार से स्थान बदलने को लेकर राजनीति और बयानबाजियों का दौर भी शुरू हो गया है। 

समाजवादी पार्टी आगरा में ही बड़ी बैठकें करती रही है। हरिद्वार का चयन उन्होंने पश्चिम उत्तर प्रदेश को ध्यान में रख कर किया था| हरिद्वार उत्तर प्रदेश के करीब चार जिलों से मिलता है। यही वजह थी की समाजवादी पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को हरिद्वार में आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया था। इस तय कार्यक्रम के अनुसार 11,12 सितम्बर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक वहां होनी थी। 

मुजफ्फरनगर में हुये कवाल हत्याकांड के बाद उठे बवाल ने मुजफ्फरनगर के साथ आसपास के जिलों में भी तनाव फैला दिया है तनाव का असर हरिद्वार के साथ इसके आसपास के उन जिलों में भी फैला जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। उधर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक देवराज नागर ने भी स्वीकार किया की प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव तेज़ी से फैलता जा रहा है, आश्चर्य की बात ये है कि अब साम्प्रदायिक तनाव शहरो की बजाय ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। डीजीपी नागर ये भी कहते है कि चुनावों के करीब आने की वजह से प्रदेश में अराजकता का माहौल है। 

कवाल गांव के मजरा मलिकपुरा निवासी गौरव नंगला के किसान इंटर कॉलेज का छात्र था। परिवार की लड़कियों से छेड़छाड़ को लेकर गौरव की गांव के युवकों से कई बार झड़प हो चुकी थी। गत मंगलवार सुबह गौरव जब साइकिल से स्कूल जा रहा था, रास्ते में शाहनवाज से उसकी साइकिल छू गयी जिसपर दोनों में कहासुनी हुई| दोपहर में स्कूल से लौटते समय गौरव को शाहनवाज ने पकड़ लिया। इसी बीच, गौरव के मामा सचिन भी वहां पहुँच गए| मिली जानकारी के मुताबिक दोनों ने शाहनवाज को इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। 

शाहनवाज को मरा देख कर जब मामा-भांजे वहां से भागे तो चौराहे पर मुस्लिम दुकानदारों ने दोनों को पकड़ लिया। तभी इनदोनो को दौड़ा रही भीड़ ने दोनों को चाकू-छुरियों से गोद डाला और पत्थर से इनके सिर और चेहरे को कूच कर इनकी हत्या कर दी। जब ये बात गौरव और सचिन के लोगों को पता चली तो दोनों समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए और फायरिंग और पथराव के बाद बाजार बंद होते चले गए। 

बेकाबू हो चुके हालात को सँभालने जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी ने दलबल के साथ मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया इस दौरान हल्का बल भी प्रयोग किया गया। मृतक गौरव-सचिन के रिश्तेदारों ने प्रशासन को डेढ़ घंटे तक शव नहीं उठाने दिया। पुलिस ने आरोपियों की तलाश में घरों पर दबिश दी, लेकिन महिलाओं के अलावा कोई नहीं मिला।

फिलहाल इस समय मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में माहौल काफी तनावपूर्ण हो चुका है, दोनों ही समुदाय के बड़े बुजुर्ग आलाधिकारियों के साथ मिलकर माहौल को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं| सूत्रों के मुताबिक दोनों ही पक्षों के लोग अन्दर ही अन्दर बड़ी वारदात की तैयारी कर रहे हैं, प्रशासन की ज़रा ही लापरवाही पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश को बारूद के ढेर पर खड़ा कर देगी|

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