पश्चिम अफ्रिका में स्थित देश लाइबेरिया की एक यूनिवर्सिटी ने अपने यहाँ एंट्रेंस एग्जाम में शामिल हुये 25 हज़ार छात्रों को फेल घोषित कर दिया है। एंट्रेंस एग्जाम में स्कूली स्तर के छात्र - छात्राए शामिल हुये थे, इस एग्जाम में अंग्रेजी का वैकल्पिक प्रशन पत्र रखा गया था। एंट्रेंस एग्जाम के बाद जब रिजल्ट घोषित हुआ तो सभी छात्र छात्रायें फेल घोषित कर दिए गए।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि इसमें किसी की कोई गलती नहीं छात्र- छात्राओं का अंग्रेजी स्तर का ज्ञान ही नहीं है तो इसमें विश्वविद्यालय क्या कर सकता है। लाइबेरिया यूनिवर्सिटी में फेल किये गए छात्रों पर देश के शिक्षा मंत्री का कहना है कि ये "मॉस मर्डर" है वो इस मामले को गंभीरता से लेते हुये शिक्षा अधिकारियों से बात करने और जरुरी कदम उठाने को कहती है।
वही इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने से यूनिवर्सिटी के हालात ऐसे है कि फेल हुये छात्र छात्राओं की वजह से इस साल फर्स्ट इयर में कोई भी छात्र क्लास अटेंड करता नज़र नहीं आएगा। विश्वविध्यालय प्रशासन का मानना है की अंग्रेजी में छात्रों का बौद्धिक ज्ञान इतना कम होना चिंता का विषय है।
गौरतलब है इस पश्चिम अफ़्रीकी देश में बीते एक दशक पहले ख़त्म हुये गृहयुद्ध से उबरने की कोशिश में लगा हुआ युद्ध की विभिषका इतनी बड़ी थी कि उससे उबरने में अभी कुछ समय लगेगा जिसका असर शिक्षा पर भी पड़ा है। जानकारों का मानना है कि यही वजह है लाइबेरिया का शिक्षा क्षेत्र काफी पिछड़ गया। देश के अंदरूनी भागो में हालात ये है कि वहा शिक्षा के लिए मूलभूत सुविधाये भी नहीं।
वही यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले में कुछ भी कहने से इन्कार कर रहा है। उनका कहना है जब तक शिक्षा का स्तर ठीक नहीं हो जाता और छात्र खुद से एंट्रेंस एग्जाम पास नहीं कर लेते तबतक किसी भी छात्र को दाखिला नहीं दिया जा सकता। यूनिवर्सिटी संवेदना के आधार पर किस को दाखिला नहीं देगा।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि इसमें किसी की कोई गलती नहीं छात्र- छात्राओं का अंग्रेजी स्तर का ज्ञान ही नहीं है तो इसमें विश्वविद्यालय क्या कर सकता है। लाइबेरिया यूनिवर्सिटी में फेल किये गए छात्रों पर देश के शिक्षा मंत्री का कहना है कि ये "मॉस मर्डर" है वो इस मामले को गंभीरता से लेते हुये शिक्षा अधिकारियों से बात करने और जरुरी कदम उठाने को कहती है।
वही इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने से यूनिवर्सिटी के हालात ऐसे है कि फेल हुये छात्र छात्राओं की वजह से इस साल फर्स्ट इयर में कोई भी छात्र क्लास अटेंड करता नज़र नहीं आएगा। विश्वविध्यालय प्रशासन का मानना है की अंग्रेजी में छात्रों का बौद्धिक ज्ञान इतना कम होना चिंता का विषय है।
गौरतलब है इस पश्चिम अफ़्रीकी देश में बीते एक दशक पहले ख़त्म हुये गृहयुद्ध से उबरने की कोशिश में लगा हुआ युद्ध की विभिषका इतनी बड़ी थी कि उससे उबरने में अभी कुछ समय लगेगा जिसका असर शिक्षा पर भी पड़ा है। जानकारों का मानना है कि यही वजह है लाइबेरिया का शिक्षा क्षेत्र काफी पिछड़ गया। देश के अंदरूनी भागो में हालात ये है कि वहा शिक्षा के लिए मूलभूत सुविधाये भी नहीं।
वही यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले में कुछ भी कहने से इन्कार कर रहा है। उनका कहना है जब तक शिक्षा का स्तर ठीक नहीं हो जाता और छात्र खुद से एंट्रेंस एग्जाम पास नहीं कर लेते तबतक किसी भी छात्र को दाखिला नहीं दिया जा सकता। यूनिवर्सिटी संवेदना के आधार पर किस को दाखिला नहीं देगा।
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