कहा जाता है कि जब बुरा वक्त आता है तो अपने भी साथ छोड़ने लगते हैं। इन दिनों ऐसा ही कुछ हो रहा है आध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू के साथ। एक किशोरी के यौन उत्पीड़न के आरोप में 'गुरु' जेल क्या गए, उनके कुनबे पर मुसीबतों का पहाड़ टूटने लगा है। आसाराम के बेटे नारायण साईं पर एक युवती को धोखा देकर शादी कराने का आरोप लगा है, तो ग्वालियर, इंदौर सहित अन्य स्थानों पर आश्रम की जमीन भी विवादों के घेरे में आने लगी है।
जोधपुर पुलिस ने आसाराम को इंदौर के आश्रम से ही गिरफ्तार किया था। आसाराम के जेल जाने के बाद से मध्य प्रदेश में ही उनसे जुड़े लोगों पर आरोपों की झड़ी लग गई है। इंदौर की एक युवती ने आसाराम के बेटे नारायण साईं पर धोखा देकर अपने शिष्य से शादी करवाने और अश्लील हरकत करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की मगर, कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद युवती ने इंदौर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। युवती की ओर से न्यायालय में दायर परिवाद में कहा गया है कि नारायण साईं ने अपने शिष्य ईश्वर वाधवानी से यह कहकर शादी कराई कि वह तलाकशुदा है, मगर बाद में पता चला कि उसकी पहली पत्नी ने उसे तलाक नहीं दिया है।
युवती का यह भी आरोप है कि गर्भवती होने पर गर्भपात करने का दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, प्रलोभन देकर नारायण साईं ने भी उसके साथ अश्लील हरकत करने की कोशिश की। दूसरी तरफ इंदौर आश्रम के लिए जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगने के बाद प्रशासन ने नाप-जोख शुरू कर दी है। नाप-जोख में बेजा कब्जे की बात सामने आने पर आसाराम की मुश्किलें बढ़नी तय है।
इसी तरह ग्वालियर व सागर में जमीन पर कब्जा करने के आरोपों ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। ग्वालियर के जिलाधिकारी पी. नरहरि ने भी जिले के जमीन संबंधी दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है। वे पुराने रिकार्ड के जरिए पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जिस जमीन पर आश्रम है, वह कहीं बेजा कब्जा तो नहीं है! वहीं सागर के गोराखुर्द में तो लोगों ने प्रदर्शन का दौर शुरू कर दिया है।
आसाराम का छिंदवाड़ा आश्रम तो लंबे अरसे से विवादों में रहा है। इस आश्रम के लिए जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने के अलावा आश्रम परिसर में 'अनैतिक कार्य' होने के आरोप लगते रहे हैं। बच्चों की मौत के कारण भी यह आश्रम विवादों में आ चुका है।
आसाराम की गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े लोग भी अब उनके बचाव में सामने आने से कतरा रहे हैं। जोधपुर में आसाराम पर प्रकरण दर्ज होने पर जो नेता उनके बचाव में सामने आए थे, वे भी अब आसाराम आश्रम से अपनी दूरी बढ़ाने लगे हैं।
वहीं, प्रशासन की भी आसाराम के आश्रमों के लिए कब्जाई गई जमीन पर नजर तिरछी हो चली है। इससे इतना तो तय है कि राज्य में आसाराम के कुनबे के लिए आने वाले दिन अच्छे रहने वाले नहीं हैं।
जोधपुर पुलिस ने आसाराम को इंदौर के आश्रम से ही गिरफ्तार किया था। आसाराम के जेल जाने के बाद से मध्य प्रदेश में ही उनसे जुड़े लोगों पर आरोपों की झड़ी लग गई है। इंदौर की एक युवती ने आसाराम के बेटे नारायण साईं पर धोखा देकर अपने शिष्य से शादी करवाने और अश्लील हरकत करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की मगर, कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद युवती ने इंदौर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। युवती की ओर से न्यायालय में दायर परिवाद में कहा गया है कि नारायण साईं ने अपने शिष्य ईश्वर वाधवानी से यह कहकर शादी कराई कि वह तलाकशुदा है, मगर बाद में पता चला कि उसकी पहली पत्नी ने उसे तलाक नहीं दिया है।
युवती का यह भी आरोप है कि गर्भवती होने पर गर्भपात करने का दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, प्रलोभन देकर नारायण साईं ने भी उसके साथ अश्लील हरकत करने की कोशिश की। दूसरी तरफ इंदौर आश्रम के लिए जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगने के बाद प्रशासन ने नाप-जोख शुरू कर दी है। नाप-जोख में बेजा कब्जे की बात सामने आने पर आसाराम की मुश्किलें बढ़नी तय है।
इसी तरह ग्वालियर व सागर में जमीन पर कब्जा करने के आरोपों ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। ग्वालियर के जिलाधिकारी पी. नरहरि ने भी जिले के जमीन संबंधी दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है। वे पुराने रिकार्ड के जरिए पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जिस जमीन पर आश्रम है, वह कहीं बेजा कब्जा तो नहीं है! वहीं सागर के गोराखुर्द में तो लोगों ने प्रदर्शन का दौर शुरू कर दिया है।
आसाराम का छिंदवाड़ा आश्रम तो लंबे अरसे से विवादों में रहा है। इस आश्रम के लिए जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने के अलावा आश्रम परिसर में 'अनैतिक कार्य' होने के आरोप लगते रहे हैं। बच्चों की मौत के कारण भी यह आश्रम विवादों में आ चुका है।
आसाराम की गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े लोग भी अब उनके बचाव में सामने आने से कतरा रहे हैं। जोधपुर में आसाराम पर प्रकरण दर्ज होने पर जो नेता उनके बचाव में सामने आए थे, वे भी अब आसाराम आश्रम से अपनी दूरी बढ़ाने लगे हैं।
वहीं, प्रशासन की भी आसाराम के आश्रमों के लिए कब्जाई गई जमीन पर नजर तिरछी हो चली है। इससे इतना तो तय है कि राज्य में आसाराम के कुनबे के लिए आने वाले दिन अच्छे रहने वाले नहीं हैं।
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