केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने दंगो पर सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला बोला है। शनिवार को लखनऊ आये जयराम रमेश ने कहा मुजफ्फरनगर दंगे पूरी तरह से सपा- भाजपा द्वारा प्रायोजित थे, दोनों पार्टियों की मिलीभगत से एक छोटी सी घटना ने साम्प्रदायिक दंगो का रूप ले लिया। जयराम रमेश ने साफ़ कहा कि प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जिस तरह से अपने पद का इस्तेमाल करना चाहिए था उस समय वो मुख्यमंत्री आवास के अपने आलिशान शयनकक्ष में सो रहे थे।
जयराम रमेश ने मुजफ्फरनगर दंगो पर बोलते हुये कहा कि ये दंगे भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की मिलीभगत के नतीजे के तौर पर सामने आये। उन्होंने ये भी कहा कि जिस तरह से 27 अगस्त के बाद धीरे धीरे एक छोटी सी चिंगारी ने बड़ा रूप ले लिया हैं उसमे सरकार के अगुवा की निष्क्रियता साफ़ झलकती है, वही भाजपा आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर ऐसे दंगो में अपने हाथ सेंक कर सियासी फायदा उठाना चाहती है।
जयराम रमेश के प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर किये गए इस खुलेआम हमले ने प्रदेश सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है। जयराम रमेश से पहले भी खुद प्रदेश के राज्यपाल बनवारी लाल जोशी ने भी अखिलेश सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी, इस टिप्पणी में राज्यपाल ने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में साफ़ लिखा था कि प्रदेश की अखिलेश सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं की।
जयराम रमेश की प्रदेश सरकार पर की गई इस तल्ख़ टिप्पणी का जवाब समाजवादी पार्टी किस रूप में देती है ये भविष्य में की जाने वाली राजनीति के बाद ही सामने आयेगा वैसे मुजफ्फरनगर दंगो को लेकर मोर्चा और रिपोर्ट सरकार को राज्यपाल बीएल जोशी ने भेजी थी, उसी रिपोर्ट को एक तरह से और तीखे अंदाज में जयराम रमेश ने आगे बढ़ा दिया है।
इस बीच पुलिस ने मुजफ्फरनगर दंगो के लिए दोषी ठहराये जा रहे भाजपा के दो विधायकों सुरेश राणा और संगीत सिंह सोम को गिरफ्तार किया है| वहीं, बसपा के विधायक नूर सलीम को भी पुलिस ने गिरफ्त में लिया है। मुजफ्फरनगर दंगो के बाद कठघरे में खड़ी प्रदेश सरकार ने इन तीनो विधायकों की गिरफ्तारी कर अपने दामन पर लगे दागो को धोने की कोशिश की है।
केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने मनरेगा घोटालों पर भी उत्तर प्रदेश की सपा सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किये है। रमेश ने साफ़ कहा कि मनरेगा घोटाले पर प्रदेश की अखिलेश सरकार गंभीर नहीं है, उन्होंने साफ़ कहा की इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराये जाने की आवश्यकता है।
मुजफ्फरनगर दंगे और मनरेगा के बहाने ही केंद्र की सत्ता की अगुवाई कर रही कांग्रेस प्रदेश सरकार पर निशाना साध कर अपने उस वोट बैंक को बचाने की कवायद में लग गई है जो प्रदेश में सियासत कर रही सभी पार्टियां कांग्रेस के पाले से खिसका रही है। कांग्रेस अपनी 2009 की स्थिति को बचाने में लगी हुई है, देखना है उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस फिलहाल इन दो मुद्दों को उठाकर अखिलेश सरकार और अन्य पार्टियों को कितना दबा सकती है।
जयराम रमेश ने मुजफ्फरनगर दंगो पर बोलते हुये कहा कि ये दंगे भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की मिलीभगत के नतीजे के तौर पर सामने आये। उन्होंने ये भी कहा कि जिस तरह से 27 अगस्त के बाद धीरे धीरे एक छोटी सी चिंगारी ने बड़ा रूप ले लिया हैं उसमे सरकार के अगुवा की निष्क्रियता साफ़ झलकती है, वही भाजपा आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर ऐसे दंगो में अपने हाथ सेंक कर सियासी फायदा उठाना चाहती है।
जयराम रमेश के प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर किये गए इस खुलेआम हमले ने प्रदेश सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है। जयराम रमेश से पहले भी खुद प्रदेश के राज्यपाल बनवारी लाल जोशी ने भी अखिलेश सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी, इस टिप्पणी में राज्यपाल ने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में साफ़ लिखा था कि प्रदेश की अखिलेश सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं की।
जयराम रमेश की प्रदेश सरकार पर की गई इस तल्ख़ टिप्पणी का जवाब समाजवादी पार्टी किस रूप में देती है ये भविष्य में की जाने वाली राजनीति के बाद ही सामने आयेगा वैसे मुजफ्फरनगर दंगो को लेकर मोर्चा और रिपोर्ट सरकार को राज्यपाल बीएल जोशी ने भेजी थी, उसी रिपोर्ट को एक तरह से और तीखे अंदाज में जयराम रमेश ने आगे बढ़ा दिया है।
इस बीच पुलिस ने मुजफ्फरनगर दंगो के लिए दोषी ठहराये जा रहे भाजपा के दो विधायकों सुरेश राणा और संगीत सिंह सोम को गिरफ्तार किया है| वहीं, बसपा के विधायक नूर सलीम को भी पुलिस ने गिरफ्त में लिया है। मुजफ्फरनगर दंगो के बाद कठघरे में खड़ी प्रदेश सरकार ने इन तीनो विधायकों की गिरफ्तारी कर अपने दामन पर लगे दागो को धोने की कोशिश की है।
केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने मनरेगा घोटालों पर भी उत्तर प्रदेश की सपा सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किये है। रमेश ने साफ़ कहा कि मनरेगा घोटाले पर प्रदेश की अखिलेश सरकार गंभीर नहीं है, उन्होंने साफ़ कहा की इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराये जाने की आवश्यकता है।
मुजफ्फरनगर दंगे और मनरेगा के बहाने ही केंद्र की सत्ता की अगुवाई कर रही कांग्रेस प्रदेश सरकार पर निशाना साध कर अपने उस वोट बैंक को बचाने की कवायद में लग गई है जो प्रदेश में सियासत कर रही सभी पार्टियां कांग्रेस के पाले से खिसका रही है। कांग्रेस अपनी 2009 की स्थिति को बचाने में लगी हुई है, देखना है उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस फिलहाल इन दो मुद्दों को उठाकर अखिलेश सरकार और अन्य पार्टियों को कितना दबा सकती है।
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