आगामी 15 सितम्बर को प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गोरखपुर जाकर मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित बच्चों का हाल जानेंगे। सरकारी अधिकारी और मेडिकल कालेज प्रशासन मुख्यमंत्री के दौरे की जमकर तैयारियों में जुटा हुआ है। कालेज के प्रधानाचार्य डॉ के पी कुशवाहा जो खुद पूर्वी उत्तर प्रदेश के विख्यात बाल रोग विशेषज्ञ है, अपने सभी काम और मर रहे मासूम बच्चो के ईलाज की समुचित व्यवस्था न कर अपने कर्मो को छुपाने के लिए मुख्यमंत्री की अगुवानी ठीक हो और उनके द्वारा किये गए कुकर्म बाहर न आ सके इसके इंतजाम में लगे है।
बीते तीन दशक से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों में आतंक का पर्याय बने मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) ने हज़ारों माओं की गोद सूनी कर दी। वही लाखो बच्चे इस बीमारी की चपेट में आकर अपना जीवन दाँव पर लगा चुके है। वही कुछ ऐसे भी है जो इस बीमारी चपेट में आने के बाद ईलाज के बाद ठीक होने के बावजूद आज अपंग का जीवन जीने पर मजबूर है।
प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन मस्तिष्क ज्वर (जापनी इंसेफ्लाईटिस) से लड़ने के लिए करोड़ों रुपयों का बजट हर साल आवंटित करती आ रही है, लेकिन साल दर साल न तो सरकार इस बीमारी पर काबू पा सकी है और न ही इस बीमारी को करीब देखने जानने वाले इस बीमारी का समूल नाश करने की वजह ही पता लगा सके। सवाल यहाँ ये भी है कि अगर बीमारी की वजह के बारे में पता है तो उसे ख़त्म करने के लिए सरकार द्वारा दिया जा रहा बजट कहाँ जा रहा है।
पूर्वांचल में बच्चो के भगवान के नाम से विख्यात डॉ केपी कुशवाहा जब तक बच्चो के डाक्टर के तौर पर बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में कार्यरत थे तब तक मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चों के माँ बाप अपने मासूमो को लेकर यहाँ आते थे तो उन्हें एक उम्मीद रहती डॉ कुशवाहा के रहते उनके नौनिहालों को कुछ नहीं होगा। डॉ कुशवाहा भी अपनी पूरी ताकत और अनुभव के आधार पर बच्चो को ठीक करने में जुट जाते थे लेकिन जब से वो मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य एक साजिश के तहत बने उन्होंने सिर्फ अपने बारे में सोचा और उस कुर्सी को बचाने की जुगत में ही लगे रहे जो शायद उनकी नहीं थी।
दिसंबर 2011 को जबसे डॉ के पी कुशवाहा बाबा राघव मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य बने तब से इन दो सालों में मासूमो की मौत का आंकड़ा चौकाने वाला है। मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) के समय जुलाई और अगस्त महीने के आंकड़ो पर नज़र डाले तो स्थिति खुद ब खुद साफ़ हो जाती है। 2012 के जुलाई महीने तक मेडिकल कालेज में भर्ती होने वाले बच्चो की संख्या 536 थी जिसमें से 94 बच्चे काल के गाल में समा गए। वही अगस्त महीने में 427 मरीज मेडिकल कालेज में अपना इलाज़ करने आये जिसमें 65 की मौत हो गई। 2013 के जुलाई महीने में 237 मरीज भर्ती हुये जिसमें 60 की मौत हो गई, वही अगस्त में 413 बच्चे अपने जीवन से संघर्ष करते हुये और बेहतर इलाज़ की आशा में मेडिकल कालेज के वार्ड नंबर 6 में भर्ती हुये जिसमें से 115 अपने जीवन की जंग हार गए।
यहाँ इन आंकड़ो को देखकर दिमाग घूम जाता है, जिस डॉ कुशवाहा को पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग भगवान का दर्जा देते है उन्ही डॉ कुशवाहा के देखरेख में इन दो सालों में मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चो के मरने में इजाफा हुआ है। जबकि पूर्व के सालों में इस बिमारी से पीड़ित बच्चो को बचाने के लिए डॉ कुशवाहा के संघर्ष को भी लोग याद करते है। ऐसा इन दो सालों में क्या हुआ जिसकी वजह से मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चों की मौत में इजाफा हुआ। नाम न छापने की शर्त पर कुछ परिजन कहते है डॉ कुशवाहा तो सिर्फ अपनी प्रधानाचार्य की कुर्सी बचाने में लगे हुये है साथ ही उन आंकड़ो को छुपाने में जो स्वास्थय विभाग और सरकार के पास भेजी जाती है।
डॉ कुशवाहा के ऊपर दवा कंपनियों से मेलजोल की बाते भी सामने आ रही है। मेडिकल कालेज प्रशासन आजकल सिर्फ अपने आकाओ को खुश करने में लगा हुआ है ताकि उनके द्वारा किये जा रहे कुकर्म प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव के सामने न आ जाए। अब 15 सितम्बर को अखिलेश यादव गोरखपुर का दौरा करने जा रहे है जिसमें उनका कार्यक्रम बाबा राघव दास मेडिकल कालेज जाने का भी है। डॉ कुशवाहा और उनकी पूरी टीम उनकी अगुवानी में जोर शोर से लगी हुई है ताकि मेडिकल कालेज में चल रही धांधली और वार्ड नंबर 6 से बच्चो और उनके परिजनों की दर्द भरी आवाज प्रदेश के मुख्यमंत्री के कानो तक न पहुँच जाए।
बीते तीन दशक से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों में आतंक का पर्याय बने मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) ने हज़ारों माओं की गोद सूनी कर दी। वही लाखो बच्चे इस बीमारी की चपेट में आकर अपना जीवन दाँव पर लगा चुके है। वही कुछ ऐसे भी है जो इस बीमारी चपेट में आने के बाद ईलाज के बाद ठीक होने के बावजूद आज अपंग का जीवन जीने पर मजबूर है।
प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन मस्तिष्क ज्वर (जापनी इंसेफ्लाईटिस) से लड़ने के लिए करोड़ों रुपयों का बजट हर साल आवंटित करती आ रही है, लेकिन साल दर साल न तो सरकार इस बीमारी पर काबू पा सकी है और न ही इस बीमारी को करीब देखने जानने वाले इस बीमारी का समूल नाश करने की वजह ही पता लगा सके। सवाल यहाँ ये भी है कि अगर बीमारी की वजह के बारे में पता है तो उसे ख़त्म करने के लिए सरकार द्वारा दिया जा रहा बजट कहाँ जा रहा है।
पूर्वांचल में बच्चो के भगवान के नाम से विख्यात डॉ केपी कुशवाहा जब तक बच्चो के डाक्टर के तौर पर बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में कार्यरत थे तब तक मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चों के माँ बाप अपने मासूमो को लेकर यहाँ आते थे तो उन्हें एक उम्मीद रहती डॉ कुशवाहा के रहते उनके नौनिहालों को कुछ नहीं होगा। डॉ कुशवाहा भी अपनी पूरी ताकत और अनुभव के आधार पर बच्चो को ठीक करने में जुट जाते थे लेकिन जब से वो मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य एक साजिश के तहत बने उन्होंने सिर्फ अपने बारे में सोचा और उस कुर्सी को बचाने की जुगत में ही लगे रहे जो शायद उनकी नहीं थी।
दिसंबर 2011 को जबसे डॉ के पी कुशवाहा बाबा राघव मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य बने तब से इन दो सालों में मासूमो की मौत का आंकड़ा चौकाने वाला है। मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) के समय जुलाई और अगस्त महीने के आंकड़ो पर नज़र डाले तो स्थिति खुद ब खुद साफ़ हो जाती है। 2012 के जुलाई महीने तक मेडिकल कालेज में भर्ती होने वाले बच्चो की संख्या 536 थी जिसमें से 94 बच्चे काल के गाल में समा गए। वही अगस्त महीने में 427 मरीज मेडिकल कालेज में अपना इलाज़ करने आये जिसमें 65 की मौत हो गई। 2013 के जुलाई महीने में 237 मरीज भर्ती हुये जिसमें 60 की मौत हो गई, वही अगस्त में 413 बच्चे अपने जीवन से संघर्ष करते हुये और बेहतर इलाज़ की आशा में मेडिकल कालेज के वार्ड नंबर 6 में भर्ती हुये जिसमें से 115 अपने जीवन की जंग हार गए।
यहाँ इन आंकड़ो को देखकर दिमाग घूम जाता है, जिस डॉ कुशवाहा को पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग भगवान का दर्जा देते है उन्ही डॉ कुशवाहा के देखरेख में इन दो सालों में मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चो के मरने में इजाफा हुआ है। जबकि पूर्व के सालों में इस बिमारी से पीड़ित बच्चो को बचाने के लिए डॉ कुशवाहा के संघर्ष को भी लोग याद करते है। ऐसा इन दो सालों में क्या हुआ जिसकी वजह से मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफ्लाईटिस) से पीड़ित बच्चों की मौत में इजाफा हुआ। नाम न छापने की शर्त पर कुछ परिजन कहते है डॉ कुशवाहा तो सिर्फ अपनी प्रधानाचार्य की कुर्सी बचाने में लगे हुये है साथ ही उन आंकड़ो को छुपाने में जो स्वास्थय विभाग और सरकार के पास भेजी जाती है।
डॉ कुशवाहा के ऊपर दवा कंपनियों से मेलजोल की बाते भी सामने आ रही है। मेडिकल कालेज प्रशासन आजकल सिर्फ अपने आकाओ को खुश करने में लगा हुआ है ताकि उनके द्वारा किये जा रहे कुकर्म प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव के सामने न आ जाए। अब 15 सितम्बर को अखिलेश यादव गोरखपुर का दौरा करने जा रहे है जिसमें उनका कार्यक्रम बाबा राघव दास मेडिकल कालेज जाने का भी है। डॉ कुशवाहा और उनकी पूरी टीम उनकी अगुवानी में जोर शोर से लगी हुई है ताकि मेडिकल कालेज में चल रही धांधली और वार्ड नंबर 6 से बच्चो और उनके परिजनों की दर्द भरी आवाज प्रदेश के मुख्यमंत्री के कानो तक न पहुँच जाए।
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