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Monday, 23 September 2013

विधायकों की गिरफ्तारी सपा-भाजपा की राजनीति तो नहीं

18 सितम्बर को उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान जहाँ मुजफ्फरनगर दंगा पूरी तरह से सदन के अन्दर छाया रहा, शुक्रवार को भाजपा विधायक सुरेश राणा की लखनऊ के गोमतीनगर इलाके से हुई गिरफ्तारी के बाद पूरी प्रदेश की सियासत गर्म हो गई, वहीँ समाजवादी पार्टी और भाजपा इस गिरफ्तारी को लेकर आमने सामने आ गए। विधानसभा सत्र के आखिरी दिन सदन के अन्दर दोनों दलों के विधायकों ने अपने कुर्ते की बांह चढ़ाकर संसदीय गरिमा को तार-तार किया तो सरकार ने सदन के अन्दर हुए अपमान का बदला ले लिया। 

सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगो के आरोप में जारी किये गए वारंट के तामिल के लिए पुलिस अफसरों के चूले कसे तो अफसर भी विधानसभा सत्र के दौरान जिन आरोपी विधायकों को ढूंढ नहीं पा रहे थे वो उन्हें सड़क चलते मिल गए पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुरेश राणा को राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया और जज के सामने प्रस्तुत कर जेल भेजने की तैयारी कर ली उधर बाकी आरोपी विधायक राजधानी में सत्र समाप्त होते है सरकार और पुलिस की जानकारी में और उनकी आँखों के सामने अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुँच गए।

सरकार और पुलिस का समन्वय यहाँ समझ नहीं आया जो मुजफ्फरनगर एक छोटी सी घटना के बाद दो सप्ताह तक साम्प्रदायिक दंगो की आग में झुलसता रहा। प्रदेश की अखिलेश सरकार भाजपा के विधायको हुकुम सिंह, संगीत सोम, भारतेंदु सिंह, सतीश राणा और बसपा विधायक नूर सलीम राणा को इस दंगे का जिम्मेदार मानकर मुकादमा दर्ज कराती रही| पुलिस इन्हें खोजने के लिए वारंट लेकर इधर उधर दौडती रही| वो सभी माननीय लगातार चार दिनों तक प्रदेश की राजधानी के अति महत्वपूर्ण और अति सुरक्षित इलाकों में घुमते रहे| तब पुलिस ने सपा सरकार के इशारे पर गिरफ्तार नहीं किया लेकिन जैसे ही वो अपने क्षेत्र जो इस समय प्रदेश का सांप्रदायिक दंगो को लेकर संवेदनशील हो चुका है वहां पहुंचे पुलिस ने उन्हें उनके घरो से गिरफ्तार कर लिया। 

सरकार और पुलिस का ये नाटक समझ से परे है जो विधायक राजधानी लखनऊ में आसानी से गिरफ्तार किये जा सकते थे उन्हें उनके ही प्रभाव वाले क्षेत्र में उनके समर्थको के सामने गिरफ्तार करने के पीछे सरकार की मंशा क्या है? ये राजनीति की थोड़ी समझ रखने वाला व्यक्ति समझ जाएगा। मुजफ्फरनगर दंगो के पीछे किसका हाथ है ये जांच के बाद पता चलेगा लें पूर्व में आ रही खबरों और प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के तथाकथित फ़ोन करने की बात सामने आने के बाद इन दंगो की छुपी सच्चाई सामने आने लगी है। भाजपा विधायकों हुकुम सिंह, संगीत सोम और बसपा के नूर सलीम राणा की गिरफ्तारी कुछ और ही कहानी कह रही है। 

मुजफ्फरनगर में हुई इन गिरफ्तारियों के पीछे सपा-भाजपा की सोची समझी राजनीतिक चाल तो नहीं है? संगीत सोम ने अपनी गिरफ्तारी के समय कहा उनकी गिरफ्तारी पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी मंत्री और कद्दावर सपा नेता आज़म खान के इशारे पर हुई है, संगीत सोम का ये बयान अपने में बहुत कुछ कह रहा है। वहीँ सरकार और पुलिस ने इन गिरफ्तारियों को मुजफ्फरनगर में करके एक बार फिर उन जख्मो को कुरेद दिया है जो अभी दंगो के बाद हरे है। विधायको को गिरफ्तार करवा कर प्रदेश की अखिलेश सरकार कौन सा सन्देश मुजफ्फरनगर वासियों को देना चाहती है इसे समझना अभी बाकी है। 

भाजपा विधायकों की गिरफ्तारी के समय उनके समर्थको के आक्रोश था और वहा हुई नारेबाजी के बाद एक बात साफ़ हो गई कि सरकार ने दंगो की आग को सेना और अर्धसैनिक बल लगाकर दबा भले दिया हो लेकिन अन्दर ही अंदर चिंगारी सुलग रही है। सरकार और भाजपा की मंशा साफ़ नहीं है इन गिरफ्तारियों को जो लखनऊ में हो जानी चाहिए थी उसे मुजफ्फरनगर में कर के सरकार ने दबी चिंगारी को हवा देने का ही काम किया वो इन दोनों पार्टियों की मिली जुली राजनीति की तरफ ही इशारा कर रही है। 

जांच एजेंसियों की जांच में कितनी सामने आयेगी ये तो रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा लेकिन पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति को इन दोनों दलों ने 27 अगस्त को ही तय कर दिया जो भविष्य में अपना रंग दिखाएगी साथ ही लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं के फर्क को भी तय कर देगी की दोनों वर्ग किस तरफ जायेंगे।

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