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Sunday, 30 June 2013

कांजीरंगा में इस साल बाढ़ से नहीं होगा नुकसान

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ने के साथ ही असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों ने चेतावनी की घोषणा कर दी है और बाढ़ की सम्भावना से निपटने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यह उद्यान यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है।

 कुछ दिनों पहले उद्यान में पानी घुसने के बाद बाढ़ प्रबंधन योजना का जायजा लिया गया। पिछले साल बहुत विकराल बाढ़ आई थी, जिसमें एक सींग वाले गैंडे, हिरण और हाथी जैसे सैकड़ों वन्य जीव मारे गए थे।

860 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला काजीरंगा उद्यान एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है। मार्च में की गई गणना के मुताबिक यहां 2,329 गैंडे हैं।


उद्यान क्षेत्र में धारा 144 लागू करें (जिसके तहत पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक होती है) और राष्ट्रीय राजमार्ग 37 पर वाहनों की गति सीमित करें। बाढ़ के दौरान जानवर इस मार्ग को पार कर दूसरी ओर शरण लेने के लिए जाते हैं।"

Saturday, 29 June 2013

सत्याग्रह तेरे कितने रूप

मध्य प्रदेश के लोग अपनी मांगों को पूरा करने के लिए आंदोलन, प्रदर्शन करते रहे हैं, अब यहां वक्त के साथ मांगें पूरी कराने के लिए किए जाने वाले सत्याग्रहों का रूप बदल चला है। पहले जल सत्याग्रह हुआ, फिर जन सत्याग्रह व चिता सत्याग्रह हुआ और अब जीवन अधिकार सत्याग्रह शुरू हो गया है। 

नर्मदा घाटी पर बन रहे पांच बांधों के प्रभावितों ने राजधानी भोपाल में डेरा डाला है। ओंकारेश्वर, इंदिरा, महेश्वर, मान व बेदा बांध के प्रभावित पहली बार अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए एकजुट होकर राजधानी की सड़क पर उतरे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुवाई में हजारों प्रभावित लोग शाहजहानी पार्क में डेरा डाले हुए हैं। वे पांच दिन तक यहां जीवन अधिकार सत्याग्रह करने जुटे हैं। वहीं पांच सदस्य प्रतीकात्मक तौर पर पांच दिन के उपवास पर हैं। वे नारा दे रहे हैं कि पुनर्वास व जमीन दो नहीं तो बांध खाली करो। साथ ही, सरकार को चुनाव में सबक सिखाने का भी वे खुलकर संकेत दे रहे हैं। प्रभावितों की मांग है कि पुनर्वास नीति का पालन किए जाने के साथ आठ सूत्री मांगें मानी जाएं। 

नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने कहा कि ओंकारेश्वर व इंदिरा सागर बांध के प्रभावितों ने जल में रहकर सत्याग्रह किया था, उसे जल सत्याग्रह नाम दिया गया था, मगर आज पांच बांध के प्रभावित भोपाल में जमा हुए हैं और उन्हें अपना जीवन बचाना है, लिहाजा इसे जीवन अधिकार सत्याग्रह का नाम दिया गया है। अग्रवाल का कहना है कि नर्मदा घाटी के पांचों बांध वाले क्षेत्रों में 11 विधानसभा सीटें हरदा, हरसूद, खंडवा, मान्धाता, बागली, कन्नौद खातेगांव, कसरावद, महेश्वर, बडवाह, भीकनगांव, गंधवानी सीधे रूप से प्रभावित हो रही है। हर सीट पर हजारों प्रभावित मौजूद हैं, इसके अलावा इंदिरा सागर बांध से प्रभावित लोग अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी हैं। इस प्रकार कुल 15 से 20 सीटों पर नर्मदा घाटी के विस्थापित सीधा प्रभाव डाल सकते हैं। सरकार ने मांगें नहीं मानी तो विधानसभा चुनाव में उसे खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 

जीवन अधिकार सत्याग्रह से पहले नर्मदा नदी पर बन रहे ओंकारेश्वर व इंदिरा सागर बांध के प्रभावितों ने जल सत्याग्रह कर प्रदेश ही नहीं, देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। एक पखवाड़े तक पानी में रहने वालों के शरीर में गलन पैदा हो गई थी, उसके बाद ही सरकार जागी थी और तीन मंत्रियों की समिति बनाकर प्रभावितों से बातचीत कर मांगें पूरी करने का भरोसा दिलाया था।

इसके अलावा कटनी जिले में बन रहे वेलस्पन बिजली संयंत्र के प्रभावितों ने अपने गांव में चिताएं बनाकर चिता सत्याग्रह किया था। गांव के लोग अपने खेतों में लकड़ी की चिताएं बना ली थीं और फिर उस पर बच्चों और महिलाओं के साथ मिट्टी तेल की शीशी हाथ में लेकर अनशन पर बैठे थे। इसके इतर समाजसेवी पी. राजगोपाल ने जनजातीय वर्ग के लोगों को जमीन का हक दिलाने के लिए जन सत्याग्रह किया था। इसके तहत उन्होंने ग्वालियर से दिल्ली तक की पदयात्रा की, मगर केंद्र सरकार आंदोलनकारियों के आगरा तक पहुंचने पर ही मांगों को मानने के लिए तैयार हो गई। 

राज्य में प्रभावित लोग अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए आंदोलन व प्रदर्शन के नए नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले सत्याग्रह में वे जहां लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहे, वहीं मांगें मनवाने में भी सफलता हासिल की थी, अब देखना है कि 'जीवन अधिकार सत्याग्रह' कितना सफल होता है।

दलाओ को रोको नहीं तो खराब होगी छवि

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश और सबसे बड़ी जनसँख्या का पोषक| यहाँ की पुलिस का रुतबा भी अन्य प्रदेशों की पुलिस से अलग|वजह यहाँ की पुलिस हर घंटे कोई न कोई मामला निपटाती रहती है लेकिन अगर प्रदेश पुलिस के मुखिया देवराज नागर के एक बयान पर ध्यान दें तो यूपी पुलिस को दलाल चला रहे है| पुलिस मुखिया देवराज नागर ने मेरठ में अपने मातहतो को समझाते हुये कहा कि आपकी कार्यशैली जनता के रक्षक की होनी चाहिये ना कि उनके आका की आज आम जनता थानों में अकेले आने में डरती है इसके लिए वो दलाल का सहारा लेती है| 

DGP देवराज नागर की बात में अगर थोड़ी भी सच्चाई है तो ये स्थिति प्रदेश के पुलिस, गृह विभाग और सरकार के लिए चिंताजनक बात है| DGP द्वारा दिए गए इस बयान कि प्रदेश सरकार को समीक्षा करानी चाहिये ताकि इस सच्चाई का पता लगाकर थानों को दलाओ से मुक्त कराया जा सके साथ ही उन अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जा सके जो ऐसे दलालों को संरक्षण देते है| 

पूर्व में भी सपा सरकारों के दौरान ऐसे मामले सामने आते रहे जब थानों को दलालों द्वारा चलाये जाने कि बात सामने आती रही है| हमारा सवाल ये है कि क्या पुलिस सीधे जनता से संवाद स्थापित नहीं कर सकती या अपनी छवि उस दोस्त के जैसे नहीं बना सकती जिससे प्रदेश कि जनता अपनी बात आसानी से कह सके| प्रदेश कि जनता अपने बहुमूल्य वोट से सरकार चुनती है तो उसकी इतनी अपेक्षा तो हो सकती है कि अगर वो फ़रियाद लेकर थाने में जाये तो सामने वर्दी पहने बैठा व्यक्ति उससे ठीक से पेश आये|

लेखपाल और सिपाही भी होंगे हाईटेक

अखिलेश सरकार ने जहा दसवीं और बारहवीं पास स्टूडेंट्स को टेबलेट और लैपटॉप बांटा और अब बारी है प्रदेश के लेखपालों की| खबर है कि जल्द ही प्रदेश के 27  हज़ार लेखपालों को टेबलेट बांटा जाएगा ,इसके लिए राजस्व परिषद इस सरकार की मंशा के अनुसार योजना पर विचार कर रहा है। इस योजना से लेखपालों के काम तो आसान होंगे ही साथ में इससे सरकार की ऑनलाइन योजनाओं का काम भी आसानी से हो सकता है| वही प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस का भी चेहरा बदलने का फैसला कर लिया है| प्रदेश सरकार प्रदेश पुलिस के सिपाहियों के लिए वायरलेस और जीपीएस सिस्टम से लैस हाईटेक साईकिल देने जा रही है| 

राजस्व परिसद की ये योजना लेखपालों के बीच सुचारू रूप से काम करे , इसके लिए कई ऐसी मुख्य बातें हैं जिनपर ध्यान दिया जा रहा है। टेबलेट की बारीकियां को समझाने के लिए प्रशिक्षण से लेकर लेखपालों के लिए उनका खुद का लॉग इन बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि काम करते समय किसी भी तरह की परेशानियां लेखपालों को न हो| 

लेखपालों के काम के लिए एक अलग सॉफ्टवेयर  भी तैयार किया जा रहा है| पारंपरिक बस्ता लेखपालों की पहचान भी होती है जिसमें लोगों के इलाकावार खतौनी से ले के उनके जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड शामिल रहता है। अगर कोई आवेदक ऑनलाइन आवेदन के जरिए जन्म-मृत्यु, आय , खसरा -खतौनी के बारे में आवेदन करता है तो उसे बिना किसी भाग दौड़ के इलाके के लेखपाल तक भेज दिया जाएगा।

जिसके बाद लेखपाल टेबलेट के जरिये ही अपनी रिपोर्ट आगे बढ़ाएगा। अब पहले की तरह आम लोगों को कचहरी और लेखपाल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे| राजस्व परिषद ऑनलाइन व्यवस्था के जरिये ही लेखपालों पर नज़र रखेगा कि उसके पास कितने आवेदकों की लिस्ट है| इसके साथ ही मामलों का निपटारा न करने वाले लेखपालों से परिषद जवाब तलब करेगा| सूत्रों के मुताबिक़, खबर ये भी है कि लेखपालों के साथ साथ 12000 नायब तहसीलदारों और 450 तहसीलदारों को भी टेबलेट दिए जायंगे।

वही प्रदेश सरकार ने प्रदेश के चार बड़े शहरों को का चयन किया है जिनके बीट सिपाही अब साइकिलों पर चलते दिखाई पड़ सकते है, इन सिपाहियों को पूरी वर्दी में अगर आप साईकिल चलाते हुए देंखे तो हैरत में ना पड़े वजह साफ़ है सरकार गली कूचों का इस्तेमाल कर भागने वाले अपराधियों को बख्सने के मूड में नहीं है| प्रदेश सरकार ने राजधानी लखनऊ, कानपुर, गाज़ियाबाद, इलाहाबाद का चयन किया है जहा हाईटेक सुविधाओं से लैस साईकिल सवार तैनात किये जायेंगे| 

प्रदेश पुलिस ऐसी साइकिलें खरीदने जा रही है जिसमें जीपीएस सिस्टम के साथ वायरलेस भी लगा होगा ताकि डयूटी पर मौजूद अधिकारी को सिपाही की बीट लोकेशन और उसकी गतिविधियों का पता रहे साथ ही कोई बड़ी घटना होने पर बीट सिपाही साईकिल में लगे वायरलेस सिस्टम से अपने अधिकारियों को घटना की सूचना दे सके ताकि अपराध और अपराधियों की गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके| 

जीपीएस और वायरलेस से लैस इन साइकिलों की कीमत करीब 45 हज़ार रुपयें है| ये साइकिले चयनित जिलों के कंट्रोल रूम के अंडर में रहेंगी इन साइकिलों की संख्या प्रत्येक जिलें में 200 होगी| वही यूपी पुलिस अपने अधिकारियों कर्मचारियों को काम में असुविधा ना हो इसके लिए 75 जीप और हाईटेक स्कॉर्पियो गाड़ियां खरीदेगी साथ ही 300 मोटरसाईकिल भी दी जायेगीं| बड़े शहरों को सीसीटीवी कैमरों की जद में लाया जायेगा| 

प्रदेश सरकार का पुलिस को हाईटेक बनाने और उनका चेहरा और चाल बदलने से आने वाले समय में ये देखना दिलचस्प होगा की इन हाईटेक उपकरणों के आने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा चयनित इन शहरों में अपराध और अपराधियों पर कितना अंकुश लग पाता है|

Friday, 28 June 2013

CAT की परीक्षा भी धांधली से अछूती नहीं

दाखिले के लिए होने वाले परीक्षाओं में धांधली आम बात होती जा रही है। चाहे वो बड़े संस्थानों के लिए हो या फिर प्राइवेट संस्थानों के लिए। ऐसी ही धांधली का पता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) व अन्य प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में दाखिले के लिए आयोजित कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के रिजल्ट में पाया गया। इस टेस्ट के रिजल्ट में छेड़छाड़ कर 80 अभ्यर्थियों का परसेंटाइल बढ़ा दिया गया। इस धांधली का खेल कैट की वेबसाइट www.catiim.in को मेंटेन करने वाली लखनऊ की वेब वेवर्स ने किया है।

मामला पकड़े जाने पर इस बार कैट का आयोजन करने वाले केरल के आईआईएम कोझिकोड़ ने इस कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। सभी 80 अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। कैट में इस बार 2,14,068 अभ्यर्थी बैठे थे। परीक्षा लखनऊ समेत देशभर के 36 शहरों में हुई थी।

कैट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में पहली बार हुई इस सेंधमारी से सभी हैरान और परेशान हैं। आईआईएम कोझिकोड के लिए पब्लिक रिलेशन का जिम्मा संभालने वाली अधिकारी मेघना चंद्रा ने बताया कि लखनऊ की वेब वेवर्स कंपनी कैट की वेबसाइट का मेंटेनेंस करती है। आईआईएम कोझिकोड़ ने कैट के रिजल्ट के डाटा की जो सीडी वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए वेब वेवर्स को सौंपी उसमें इसने टेंपरिंग कर 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ा दिए गए। 

शिकायत पर आईआइएम कोझिकोड़ ने मास्टर डाटा सीडी से मिलान किया तो वेब वेवर्स की गड़बड़ी पकड़ी गई। जांच में उजागर हुआ कि सारी कारस्तानी वेब वेवर्स की है आईआईएम कोझिकोड़ इसके लिए कहीं से भी जिम्मेदार नहीं है क्योंकि उसने प्रोमेटिक कंपनी से रिजल्ट का डाटा तैयार कराने के बाद वेब वेवर्स को वेवसाइट पर अपलोड करने के लिए दे दिया था। जिन 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ाए गए थे उन्हें कई आईआईएम व बिजनेस स्कूलों में दाखिले मिल गए थे और इसके कारण अन्य छात्रों को नुकसान उठा पड़ा है।

मामला पकड़े जाने के बाद सभी दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। उनकी जगह जो अभ्यर्थी बेहतर परसेंटाइल लाए थे उन्हें दाखिला दिया जा रहा है। वेब वेवर्स के खिलाफ आईआईएम कोझिकोड ने बीती 15 जून को ही रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वेब वेवर्स का ऑफिस लखनऊ में है। मेघना चंद्रा कहती हैं कि इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर इन अभ्यर्थियों को वेब वेवर्स ने किस नीयत से लाभ पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वेब वेवर्स ने पूरा खेल धन के लालच में किया हो। पूरा मामला तो पुलिस की पड़ताल और मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

इन सभी 80 अभियार्थों के नाम और टेस्टिंग आईआईएम आईडी नंबर सभी 13 आईआईएम प्रबंध संस्थानों को भेज दिए गए हैं जो आईआईएम केर स्कोर का प्रयोग करते हैं ताकि आगे किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका न रहे। गौरतलब है कि आईआईएम में दाखिले के लिए पिछले साल 11 अक्तूबर से लेकर 6 नवम्बर तक कैट के ठाट कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट लिए गए थे। इसके परिणाम बीती 9 जनवरी को घोषित किया गया था और सभी आईआईएम में कैट स्कोर के अनुसार, जीडीआई के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया गया था और जून में दाखिले की प्रक्रिया पूरी कर ली। 

गौरतलब है कि कैट की वेबसाइट www.catiim.in का मेंटेनेंस का काम वेब वेवर्स तीन वर्षों से कर रही है। आईआईएम कोझिकोड की पीआर अधिकारी मेघना कहती हैं कि यह ठेका उसे वर्ष दो साल पहले तब मिला था जब आईआईएम लखनऊ ने कैट आयोजित कराया था। आईआईएम कलकत्ता ने भी जब कैट का आयोजन करवाया तो वेबसाइट को मेंटेन करने का पूरा काम इसी से करवाया। बीते दो बार कैट में कोई गड़बड़ी न मिलने के कारण ही इस बार हमने भी फैसला किया कि इसी से वेबसाइट का मेंटेनेंस का काम करवाएंगे।

Ameican Idol में धूम मचाई भारतीय ने

अमेरिकन आइडल विश्व के उभरते गायकों का वो मंच जिस पर प्रस्तुति देने के लिये विश्व के सभी देशो के गायक उतावले रहते है| लेकिन ये मंच सिर्फ अमेरिकन्स के लिये है, अमेरिकन आइडल के मंच पर इस साल एक भारतीय लड़की ने अपनी रेशमी आवाज की ताकत से कार्यक्रम में प्रतिभागियों को जज कर रहे विश्व प्रसिद्द निर्णायकों को सम्मोहित कर दिया| शुभा वेदुला नामक 17 वर्षीय भारतीय मूल की अमेरिकन नागरिक ने 'टाप 20' में जगह बना कर भारत की रूहानी आवाज से जजेज को अपना मुरीद बना लिया|

शुभा वेदुला ने हज़ारों प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए 'टाप - 20' में जगह बनाने वाली पहली भारतीय लड़की बनी| शुभा के माता पिता बीस साल पहले अमेरिका जाकर बस गए थे| 100505 नंबर की प्रतिभागी शुभा वेदुला ने सेमीफाइनल में जगह बनते हुए अपना नाम अमेरिकन आइडल के इतिहास में दर्ज करा लिया| शुभा वेदुला ने अमेरिकन आइडल के 12वें सीजन में ये कारनामा किया| 

शुभा सेमीफ़ाईनल्स से आगे नहीं जा पाई वेगास में सेमीफाइनल 'Born This Way' गाते हुए उन्होंने इस सिंगिंग प्रतियोगिता से विदाई ली| शुभा वेदुला ने प्रतियोगिता के जजेज मारिया कैरे, निकी मीनाज, कीथ अर्बन, और रेडी जैक्सन के सामने अपनी प्रस्तुति दी| Fox टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम को विश्व के करीब सभी देश देखते है| 

भारत में इसी कार्यक्रम की तर्ज पर सोनी टेलीविजन पर हर साल इंडियन आइडल आता है| सिंगिंग कार्यक्रमों में अच्छे सिंगर्स खोजने के लिए ये दोनों कार्यक्रम अपने अपने देशों में अलग स्थान रखते है| शुभा वेदुला ने अंतिम 20 में पहुँच कर भारतीय गायकी और गले का लोहा तो मनवाया ही साथ ही उन सिंगरों के लिए भी रास्ता बना दिया जनका गला और सुर तो अच्छे है लेकिन अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए उन्हें उपयुक्त मंच नहीं मिलता| 

शुभा वेदुला को हिंदी गाने गाना भी अच्छा लगता है और वो अंग्रेजी गानों के साथ हिंदी में भी गाना गाना पसंद करती है| शुबा बालीवूड में अपनी पहचान बनाना चाहती है|

ये है वो खूबसूरत बला जिसने वेबसाईट क्रश करा दी

रेनमिन विश्वविद्यालय जिसका चाइना में काफी नाम है, बीजिंग में स्थित इस यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वालों की तो वैसे भीड़ लगी रहती है | लेकिन इस साल यूनिवर्सिटी को ना जाने क्या सूझी की उसने कैंग कैंग नामक छात्रा की फोटो आपनी आधिकारिक वेबसाईट पर लगा दी| बला की खूबसूरत कैंग कैंग की तस्वीर विश्वविश्वविद्यालय की साईट पर आते ही कैंग कैंग के खूबसूरत चेहरे को देखने वालों की बाढ़ आ गई| 

कैंग कैंग की फोटो साईट पर पोस्ट होते ही जैसे उस साईट को सर्च करने वालों की बाढ़ आ गई| साईट क्रैश हो गई, कैंग कैंग ने अलग अलग पोजेज में अपनी फोटो इस साईट पर लोड कराई थी| विश्वविद्यालय की साईट क्रैश होने की वजह से विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए फ़ार्म डालने वाले छात्र छात्राओं को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा| 

प्रसिद्द अखबार के मुताबिक विश्वविद्यालय के आई टी एक्सपर्ट वेबसाईट को ठीक करने में लगे रहे लेकिन कैंग कैंग के दिवानो की संख्या इतनी तेज़ी से बढ़ रही थी की आई टी एक्सपर्ट भी हैरान रह गये| विश्वविद्यालय की साईट क्रैश हो चुकी है और कैंग कैंग नामक खूबसूरत 'बला' उसे बला ही कहा जाए तो ठीक है आज पुरे विश्व में इंटरनेट यूजर के बीच प्रसिद्द हो चुकी है|

सेवा का दूसरा नाम भारतीय सेना, शाबाश जवानो शाबाश

उत्तराखंड आपदा के बाद वहां फंसे तीर्थ यात्रियों और स्थानीय निवासियों को जिस तरह सेना के जवानो ने राहत पहुंचाई और भयंकर बाढ़ और बारिश में राहत और बचाव कार्य किया उसकी सराहना चारों तरफ हो रही है| सचिन तेंदुलकर से लेकर, अमिताभ बच्चन, हरभजन सिंह और वो हज़ारों तीर्थ यात्री जिन्होंने मौत को करीब से देखा और जान बचाने के लिए लाशो का भी सहारा लिया आज वो सेना, ITBP , NDRF , नेवी, और वायु सेना को दिल से दुआ और शुभकामनाये दें रहे है| 

भारतीय सेना में शामिल इन तीनो अंगो और अपनी जांबाजी के लिए प्रसिद्द अर्धसैनिक बलों को सरकार और जनता से कुछ नहीं चाहिए बस उन्हें प्रसंशा के दो बोल ही दुगनी ताकत से अपने मिशन को पूरा करने की ताकत और जज्बा दे देते है| जोश और जज्बे से भरी आर्मी को आज उनके अगुवा जनरल बिक्रम सिंह की भी शाबाशी मिल गई| आज सेना प्रमुख ने अपनी सेना की कर्तव्य परायणता की प्रशंसा करते हुए उनके द्वारा उत्तराखंड में किये गए बाचाव और राहत कार्य के लिए सराहना की साथ ही उनके जोश के लए शाबाशी भी दी|

उत्तराखंड आपदा में आर्मी, अर्धसैनिक बलों और NDRF ने पीड़ित और पहाड़ो के बीच फंसे लोगो को बचाने के लिये अपनी पूरी ताकत लगा दी| सभी अंगो के जवानो ने आपदा के 13वें दिन तक करीब एक लाख लोगो को आपदा ग्रस्त क्षेत्रों से निकाला| इस मिशन में सेना के तीनो अंगो के हजारों जवान लगाए गए| पीड़ितों को बाहर निकालने के लिये करीब 55 हेलीकाप्टर का सहारा लिया गया जिसमें कुछ प्राईवेट कंपनियों के भी थे| 

राहत और बचाव कार्य के दौरान इन जवानो के मन पर एक घटना ने जख्म भी दे दिया जब 25 जून को अंतिम संस्कार का सामान लेकर सेना का हेलीकाप्टर MI-17 केदारघाटी गया था, वापसी करते हुये गौरीकुंड के पास हेलीकाप्टर MI-17 हादसे का शिकार हो गया इसमें सवार सभी 20 लोगो मारे गए| सेना ने अपने जवान खोये तो NDRF ने अपने जांबाजों को इस घटना में खो दिया, जिसने देश को भी शोक में डाल दिया|

हेलीकाप्टर MI-17 के क्रैश होने के बाद भी सेना और सभी अंगो का जोश कम नहीं हुआ, अगले दिन देहरादून पहुंचे वायु सेना प्रमुख एन ए के ब्राउन ने शोक के हालत में कहा कि इस आपदा में फंसे अंतिम आदमी को निकाले जाने तक हेलीकाप्टर के पंखे बंद नहीं होंगे| आज सेना प्रमुख बिक्रम सिंह ने भी सेना के काम और जज्बे को सलाम करते हुये उनके काम को सराहा| 

देश सेना के जज्बे और उत्तराखंड में उनके द्वारा पहुंचाई गए राहत को सलाम करता है| आज जो लोग बच गये वो सेना को ही धन्यवाद कर रहे है, नहीं तो देश की राजनीति और राजनेताओं ने श्रेय लेने के लिए जो अपना विद्रूप चेहरा दिखाया है उसने देश को आपदा के समय शर्मसार ही किया है| हमारी तरफ से भी सेना को उसकी कर्तव्य परायणता के लिए सलाम|

कमाल खान ने धनुष के लिये किन जातिसूचक शब्दों का प्रयोग क्या पढिये और सुनिये

फ़िल्मी दुनिया में अपने चर्चित और विवादास्पद बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहने वाले कमाल खान ने 'रांझणा' के हीरो धनुष के किरदार को लेकर अशोभनीय जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया है| कमाल रशीद खान के ऊपर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी और समाज के प्रति अपनी अलग सोच रखने वाले अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ के गोमती नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है| कमाल खान ने एक वीडियो यु ट्यूब पर अपलोड किया है जिसमें वो जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते सुने और देखे जा सकते है| 

इस विडियो रिव्यू में इस फिल्म के हीरो धनुष के लिए अत्यंत ही आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गयी हैं पर चूँकि वे पूर्णतया व्यक्तिगत टिप्पणियाँ हैं| जिस विषय को कमाल आर खान ने अपने आवाज में टिप्पणी की है उसे सुनने के लिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें| कमाल खान ने जस तरह से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया है उससे स्पष्ट है कि कमाल आर खान की यह टिप्पणी सीधे-सीधे जातिसूचक है यह अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(x) के अंतर्गत अपराध है| इस अपराध की भयावहता इस कारण और भी बढ़ जाती है कि यह टिप्पणी एक पढ़े, लिखे, सामाजिक हैसियत वाले एक कथित फिल्म स्टार द्वारा आज के इक्कीसवीं सदी के समाज में की गयी है और इस कारण से कमाल खान का आचरण पूरी तरह अक्षम्य है| पुलिस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में लिखा कि कमाल खान की उपरोक्त टिप्पणी किसी भी प्रकार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अथवा मनोरंजन हेतु दिया गया वक्तव्य नहीं है बल्कि सीधे-सीधे दो अनुसूचित जाति के लोगों पर घृणित और ओछी टिप्पणी है| 

पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में ये भी कहा गया उपरोक्त आपराधिक कृत्य के संज्ञेय अपराध होने के कारण धारा 154 सीआरपीसी के अंतर्गत इनके सम्बन्ध में उपयुक्त तथा विधिसम्मत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित कर आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें| मैं विशेषकर निवेदन करूँगा कि अनुसूचित जाति के प्रति किये गए इस इस अत्यंत गंभीर अपराध के सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज किया जाना और आज के समय में भी इस प्रकार की सोच रखने वाले लोगों पर दंडात्मक कार्यवाही किया जाना न्याय हित में नितांत आवश्यक प्रतीत होता है| 
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Thursday, 27 June 2013

बाबा का होगा शुद्धिकरण

बाबा केदारनाथ की नियमित पूजा 15 तारीख को आई आपदा के बाद बंद है, पुजारियों और सरकार के प्रयासों से बाबा की पूजा शनिवार से शुरू हो सकती है| केदारनाथ मंदिर में नियमित पूजा शुरू करने के लिए मंदिर की कार्यसमिति और स्थानीय प्रशासन ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए है| 

केदारनाथ बाबा की पूजा अर्चना और शुद्धिकरण के लिए मंदिर समिति और स्थानीय अधिकारियों की गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर में बद्री- केदार नाथ समिति की बैठक हुई बैठक में ये निर्णय लिया गया की मंदिर की साफ़ सफाई करके उसका शुद्धिकरण करके शनिवार से पूजा शुरू हो| 

समिति की बैठक में ये फैसला लिया गया कि आगामी 29 जून को मंदिर कि सफाई के लिए एक 22 सदस्यों कि एक टीम दो पुजारियों के साथ वहा रवाना होगी जो अपनी देख रेख में मंदिर कि सफाई करायेगी|पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त होने से हेलीकाप्टर से मंदिर समिति के कर्मचारी वहां पहुंचेंगे। इसमें दो पुजारी भी होंगे। 

मंदिर परिसर और गर्भ गृह समेत सभी स्थानों की सफाई व धुलाई कराई जाएगी। इसके बाद हवन कर मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। पहले चरण में ये कार्य पूरे होने पर मंदिर में पूजा हो सकेगी। इस बारे में डीएम दिलीप जावलकर का कहना है कि मंदिर समिति के कार्य में प्रशासन का दखल नहीं होता, ये मंदिर समिति खुद फैसले करती है। 

कैसे नसीब होगी दो जून की रोटी

केदारनाथ के रास्ते में तीर्थयात्रियों के लिए कुली, श्रमिक का काम करने वाले और तीर्थयात्रा के दौरान छोटी दुकानें लगा कर जीवनयापन करने वाले उत्तराखंड के सैंकड़ों ग्रामीण लापता हैं। आज हालात ये है कि कई कई गाँव ऐसे है जहा पुरुषो को कोई नामो निशान नहीं बचा है| अपने घरों को चलाने और अपने बीबी बच्चों का भरण पोषण करने के लिए स्थानीय ग्रामीण केदारनाथ और चार धाम यात्रा के दौरान छोटे छोटे काम करके पुरे साल कि कमाई इन चार महीनो में कर लिया करते थे| 

लोक विज्ञान संस्थान, देहरादून के निदेशक और राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के सदस्य (विशेषज्ञ) रवि चोपड़ा का कहना है, राष्ट्रीय समाचार माध्यमों ने चार धाम तीर्थयात्रा के चार तीर्थ स्थलों केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में बारिश और बाढ़ की त्रासदी की खबर लगातार प्रकाशित-प्रसारित कर रहे हैं। लेकिन तीर्थस्थलों से आगे इस त्रासदी ने स्थानीय लोगों के जीवन में ज्यादा जटिल परिस्थिति पैदा की है। सबसे अहम उनसे जीवनयापन का जरिया छिन जाना है।

चोपड़ा के मुताबिक, मंदाकिनी घाटी के गांवों के सैंकड़ों लोग 14 किलोमीटर तीर्थयात्रा मार्ग पर बच्चों, महिलाओं या बुजुर्गो को अपनी पीठ पर ढोने, चिप्स या बोतल बंद पानी और बरसाती बेचने का काम करते रहे हैं और कई ढाबा चलाते रहे हैं। चोपड़ा ने कहा, इनमें से कई लोग लापता हैं। अब यात्रा सत्र समाप्त हो गया है और हम नहीं जानते कि यह फिर कब शुरू होगा। ग्रामीणों पर अत्यंत गहरा असर पड़ा है।उनके सहयोगी ने सूचना दी है कि 22 किलोमीटर दूर गुप्तकाशी के एक गांव के 78 लोग लापता हैं। ये लोग केदारनाथ में काम करते थे।

तीर्थयात्रा के अलावा ग्रामीण अपने जीवनयापन के लिए पर्यटकों के आने पर भी आश्रित होते हैं। चोपड़ा ने कहा, यही उनके जीवनयापन का मुख्य स्रोत है। त्रासदी में हजारों भवन और घर, पुल और सड़कें ध्वस्त हो गई हैं, जिससे पर्यटन पर अत्यंत बुरा प्रभाव पड़ेगा।

फेडरर पर लगी विंबलडन में रोक

 स्विट्जरलैंड के स्टार टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर को विंबलडन के लिए निर्धारित ड्रेस कोड, पूर्णत: सफेद कपड़े पहनने, का उल्लंघन करते पाए जाने के बाद उन पर विंबलडन में अपने नारंगी तल्ले वाले जूते पहनने पर पाबंदी लगा दी गई है। 

सात बार के चैम्पियन फेडरर ने विंबलडन के पहले दौर के मैच के दौरान ये जूते पहन रखे थे। विंबलडन की नियमों के अंतर्गत टूर्नामेंट में खेल के दौरान खिलाड़ियों को पूर्णत: सफेद कपड़े पहनने होंगे। ख़बरों के मुताबिक विंबलडन के अधिकारी ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता के पहले दो दिनों में अनेक खिलाड़ियों को इस बारे में टोक चुके हैं।

मोदी ने कहा मै नही ले गया 15 हज़ार लोगो को

नरेन्द्र मोदी द्वारा उत्तराखंड दौरे के समय दिए गए बयान की "मैंने 15 हज़ार गुजरातियों की जान बचाई" को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कोरी बकवास कहा है| राजनाथ सिंह ने मीडिया में चल रही मोदी के बयान वाली ख़बरों और विवाद के बाद खुद मोदी से फोन पर बात की और पूछा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान दिया है तो मोदी खुद इस बात से हैरान रह गए| 

मोदी के बयान को जो मीडिया में चल रहा है उसका कोई सिर पैर नहीं लेकन इस बयान के बाद जिस तरह कांग्रेस ने मोदी के ऊपर हमला बोला उसने भारत कि राजनीति को गर्मा दिया| कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने मोदी को कहा 'फेकू फिर चालु हो गए', तो वही जयंती नटराजन ने मोदी को 'रैम्बो' कि संज्ञा दे डाली, केंद्र सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने उन्हें 'सुपरमैन' कि संज्ञा देते हुए मज़ाक तक उड़ा दिया था| 

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने 'ये बयान कहा से उड़ाया गया' उसकी जांच कि मांग की है| वही नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस नेताओं के बीच इस बयान को लेकर जो बयानबाजी हो रही है उसने उत्तराखंड आपदा पर हो रही राजनीति का स्याह चेहरा उजागर कर दिया है|

BIG B ने खरीदा नया बंगला

BIG B ने मुम्बई में अपना नया ठिकाना बना लिया है| सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने मुम्बई में एक और बंगला खरीद लिया है| आमिताभ बच्चन ने ये नया बंगला करीब 50 करोड़ रुपये में खरीदा है| माया नगरी के पॉश इलाके जुहू में स्थिति इस बंगले को पाने के लिए अमिताभ बच्चन को काफी मशक्कत करनी पड़ी जिसकी ख़ास वजह भी थी| 

आमिताभ बच्चन वर्तमान समय में जिस बंगलें में रहते है वो जलसा है इसी बंगले के बगल में स्थित इस बंगले की दीवार अमिताभ बच्चन के बंगले की दीवार से लगी हुई है| ख़बरों के मुताबिक अमिताभ बच्चन इस बंगले की दीवार गिराकर नए बंगले को जलसा में मिला लेंगे| 

अमिताभ बच्चन के परिवार में सुपर स्टार्स की कमी नहीं है, आज भी फिल्मों में सक्रीय अमिताभ बच्चन फ़िल्मी दुनिया के सबसे प्रसिद्द कलाकार है, वही उनकी बहु एश्वर्या राय बच्चन फ़िल्मी दुनिया की टाप हिरोईन है, जबकि उनके सुपुत्र अभिषेक बच्चन भी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं है| 

आमिताभ बच्चन परिवार के पास मुम्बई शहर में ही चार बंगले है, बच्चन परिवार ने अब एक और नया बंगला खरीद लिया है, अमिताभ बच्चन के बंगलों का नाम भी उनकी शख्सियत के अनुरूप ही है| प्रतीक्षा, जलसा, जनक और वत्स नामक ये बंगले बच्चन परिवार के बंगले के तौर पर जाने जाते है|

Wednesday, 26 June 2013

स्वर्ग पर दौड़ी रेल

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की सुहानी यात्रा का लुत्फ़ अब आम भारतीय रेल से उठा सकते है। आज देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बनिहाल - काजीगुंड रेलमार्ग देश को समर्पित किया। 

18 किलोमीटर लम्बे रेल मार्ग का उद्घाटन करते हुए मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने ख़ुशी जाहिर की और कहा कश्मीर अब देश के सभी हिस्सों से रेल मार्ग से जुड़ गया है। इस रेल मार्ग के शुरू होने से इस क्षेत्र की तरक्की भी तेज़ी से होगी। 

बनिहाल - काजीगुंड के बीच 27 जून से नियमित रेल गाड़िया चलेगीं, इस ट्रैक पर चलने के लिए रेलवे ने सात जोड़ी रेलगाड़िया चलाने का फैसला किया है। ये रेलवे ट्रैक 11 किलोमीटर उस सुरंग से गुजरेगा जिसे एशिया में तीसरी सबसे बड़ी सुरंग होने का दावा किया गया है। 

करीब 1691 करोड़ की लागत से बनी ये सुरंग और रेल ट्रैक पूरे भारत को कश्मीर की सुन्दर वादियों से जोड़ेगी बनिहाल से बारामुला के बीच चलने वाली रेलगाड़ी रोजाना पांच चक्कर लगायेगी। इस सेवा की शुरुवात बनिहाल से कल से सुबह 7.10 से शुरू हो जायेगी वह बारमुला से चलने वाली गाड़ी रोजना 7.35 मिनट पर छुटेगी। 

18 किलोमीटर की लंबाई वाले इस रेलखंड पर जम्मू के बनिहाल और कश्मीर के काजीगुंड को जोड़ा गया है। अब लद्दाख जाने के लिए पर्यटकों को 17-18 घंटे की थकाऊ यात्रा नहीं करनी होगी। मात्र छह से सात घंटे में वह श्रीनगर और फिर लद्दाख पहुंच सकेंगे। 

जम्मू को कश्मीर से रेल सेवा से जोड़ने वाली पीर पंजाल की वजह से ही ये यात्रा इतनी सुगम हो सकी है| बनिहाल से काजीगुंड के बीच लगभग 11 किलोमीटर की यह सुरंग देश की सबसे लंबी सुरंग है, इस रेलखंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सर्दियों में भी यह सुरंग खुली रहेगी।

नसीमुद्दीन पर होने वाली कार्रवाई से बचायेंगे मौलवी

22 मई को उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा ने मायावती सरकार के दौरान बनाये गये स्मारकों, पार्को में हुये घोटाले की जांच रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। आज करीब सवा महीने बीतने के बाद भी प्रदेश की सपा सरकार और उसके मुखिया अखिलेश यादव ने कोई भी कार्रवाई किसी भी आरोप और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ नहीं की। 

जस्टिस एन के मेहरोत्रा द्वारा सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में स्मारकों के निर्माण में 14.10 अरब के घोटाले के लिए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा सहित कुल 199 लोगों को दोषी ठहराते हुए उनसे रकम वसूलने की सिफारिश की है। इसके साथ ही उन्होंने 19 लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराकर मुकदमा चलाने की सिफारिश की।

बसपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अखिलेश सरकार पर मुसलमानों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाते हुये मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुये एक पत्र लिखा है जिसमें नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने साफ़ लिखा है अखिलेश सरकार मुसलमानों के साथ धोखा कर रही है जिसका सुबूत है मेरे खिलाफ लोकायुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर होने वाली संभावित कार्रवाई। सरकार लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट को हथियार बना कर उन्हें परेशान करना चाहती है और जेल भेजना चाहती है। 

ये पत्र नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मुस्लिम धर्म के प्रचार प्रसार में लगे लोगो और मौलवी के साथ मस्जिदों के मुत्त्वलियों को भी भेजा है। सिद्दीकी के करीबी सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब मुस्लिम समाज को साथ लेकर अपना बचाव करना चाह रहे है। 

लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा ने अपनी रिपोर्ट एक महीने पहले ही सरकार को सौंप दी थी, उसके बाद भी सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जबकि जस्टिस मेहरोत्रा ने सरकार को तत्काल मुक़दमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की संतुति की थी। ईधर कार्रवाई न होने की वजह से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मिले समय में उन्होंने इस प्रकरण और लोकायुक्त की रिपोर्ट का राजनीतिककरण करने का समय दे दिया और मौलवियों का सहारा लेकर अपने को बचाने का रास्ता खोजने का रास्ता भी दिखा दिया है। 

अब समय और प्रदेश की राजनीति ही तय करेगी की प्रदेश की अखिलेश सरकार नसीमुद्दीन को जेल भेजती है या नसीमुद्दीन मुस्लिम वोट बैंक का सहारा लेकर खुद को बचा ले जाते है| 

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत बनने लगे राशन कार्ड

छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा विधेयक 2012 विधानसभा में प्रस्तुत किया था, जिसे 21 दिसंबर 2012 को सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। देश में बने पहले खाद्य सुरक्षा कानून की शुरुआत छत्तीसगढ़ से हो चुकी है। इस नये खाद्य सुरक्षा कानून के तहत छत्तीसगढ़ में नए राशन कार्ड बनाने की मुहिम शुरू हो गई है। इसके लिए अधिकारियों को अब तक 62 लाख 58 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं जिन्हें कम्प्यूटरों में दर्ज कर लिया गया है। पात्र लोगों को नए राशन कार्ड बांटे जा रहे हैं।

प्राप्त आवेदनों के परीक्षण के बाद इनमें से 27 लाख 38 हजार 778 आवेदकों को नए राशन कार्डो के लिए पात्र पाया गया। इनमें से 20 जून तक 23 लाख 84 हजार 531 आवेदकों के राशन कार्ड कम्प्यूटरों के जरिए तैयार किए जा चुके हैं और तेजी से वितरण किया जा रहा है। पिछले माह अपनी विकास यात्रा के विभिन्न पड़ावों में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को नए राशन कार्डो का वितरण किया है। पात्रता रखने वाले शेष आवेदकों के राशन कार्ड भी युद्ध स्तर पर तैयार किए जा रहे हैं।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा विधेयक 2012 विधानसभा में प्रस्तुत किया था, जिसे 21 दिसंबर 2012 को सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। यह देश का पहला खाद्य सुरक्षा कानून है, जिसमें छत्तीसगढ़ के प्राथमिकता वाले गरीब परिवारों, अंत्योदय परिवारों और सामान्य परिवारों को मिलाकर लगभग 55 लाख 66 हजार 693 परिवारों को राशन दुकानों से किफायती अनाज देने की कानूनी व्यवस्था की गई है। इनमें 36 लाख 17 हजार परिवार बीपीएल यानी गरीबी रेखा से नीचे श्रेणी के हैं, जबकि 19 लाख 49 हजार 682 परिवार इस श्रेणी से ऊपर यानी एपीएल श्रेणी के हैं। 

राशन कार्ड विहीन परिवारों को नए राशन कार्ड जारी करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा 10 अप्रैल से 30 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाया गया और शिविर लगाकर लोगों से आवेदन प्राप्त किए गए। कुल 62 लाख 58 हजार 78 आवेदन प्राप्त हुए। 

जिन आवेदनों को नए राशन कार्ड के लिए विचारणीय माना गया, उनमें राशन कार्ड विहीन आवेदक, बीपीएल या मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के वर्तमान कार्ड धारकों द्वारा अंत्योदय योजना के लिए गुलाबी राशन कार्ड के लिए प्रस्तुत आवेदन, अन्नपूर्णा योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायत योजना के तहत हर महीने दस किलो अनाज की पात्रता वाले केशरिया एवं हरे राशन कार्ड धारकों द्वारा अंत्योदय योजना के राशन कार्डो के लिए प्रस्तुत आवेदन तथा वर्तमान एपीएल यानी सफेद राशन कार्ड धारकों द्वारा अंत्योदय (गुलाबी या प्राथमिकता वाले नीले राशन कार्ड के लिए प्रस्तुत आवेदन शामिल हैं। शेष आवेदकों को पुराना आवेदक माना गया है। इसी आधार पर खाद्य विभाग की वेबसाइट में नए एवं पुराने आवेदन की जानकारी दर्ज की गई है। 

विभागीय अधिकारियों ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून 2012 में प्राथमिकता श्रेणी के सभी गरीब परिवारों को हर महीने दो रूपए प्रति किलो की दर से 35 किलो अनाज, दो किलो नि:शुल्क आयोडिन नमक (अमृत नमक) और अनुसूचित क्षेत्रों में पांच रूपए प्रति किलो की दर से दो किलो चना था गैर अनुसूचित क्षेत्रों में दस रूपए प्रति किलो की दर से दो किलो दाल की पात्रता दी गयी है। प्राथमिकता श्रेणी में भूमिहीन कृषि मजदूरों सहित लघु और सीमान्त कृषक परिवार, असंगठित क्षेत्र के पंजीकृत श्रमिक परिवार, भवन एवं अन्य सन्निर्माण में पंजीकृत श्रमिक शामिल किए गए हैं। अन्त्योदय श्रेणी में विशेष पिछड़ी बैगा, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, कमार और अबूझमाड़िया जनजातियों के सभी परिवारों को शामिल किया गया है।

अंत्योदय श्रेणी में ऐसे परिवार भी शामिल किए गए है, जिनकी मुखिया घर की एकाकी महिला है। इसके अलावा जिन परिवारों के मुखिया किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं, जिन परिवारों के मुखिया नि:शक्त व्यक्ति हैं या वृद्ध और निराश्रित पेंशन धारक है, बंधुआ मजदूरी से विमुक्त श्रमिक हैं और शासकीय योजनाओं में आवास प्राप्त करने की पात्रता रखने वाले आवास विहीन परिवार हैं, उन्हें भी अन्त्योदय श्रेणी में शामिल किया गया है। इन परिवारों को एक रूपए प्रति किलो की दर से 35 किलो चावल की पात्रता है। उन्हें भी प्राथमिकता के श्रेणी के परिवारों की तरह दो किलो नि:शुल्क आयोडिन नमक (अमृत नमक) और अनुसूचित क्षेत्रों में पांच रूपए प्रति किलो की दर से दो किलो चना था गैर अनुसूचित क्षेत्रों में दस रूपए प्रति किलो की दर से दो किलो दाल की पात्रता दी गयी है। 

सामान्य श्रेणी के परिवारों में ऐसे परिवारों को शामिल किया गया है। जिनके मुखिया आयकरदाता नहीं हैं। उनके अलावा गैर अनुसूचित क्षेत्रों में चार हेक्टेयर से ज्यादा सिंचित अथवा आठ हेक्टेयर से ज्यादा असिंचित भूमि धारक परिवारों, दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी एवं मानदेय पर कार्यरत कर्मचारियों के परिवारों को भी सामान्य श्रेणी में शामिल किया गया है। सामान्य श्रेणी के परिवारों को राशन कार्ड पर साढ़े नौ रूपए प्रति किलो की दर से हर महीने 15 किलो अनाज की पात्रता दी गयी है।

Monday, 24 June 2013

1983 में आज के दिन क्रिकेट के सिरमौर बने हम

25 जून 1983 पूरे भारत की साँसे थमी हुई थी वजह , भारत ने एक ऐसा सपना देखा था , जिसके पूरा होने की उम्मीद केवल सपनो में ही थी | पर भारत के रणबांकुरो ने वो कर दिखाया जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी , वो करिश्मा था , क्रिकेट का वर्ल्ड कप जितना | कपिल देव की अगुवाई में इंग्लैण्ड गई भारतीय टीम ने करोडो भारतीयों का वो सपना पूरा किया जिसको हिन्दुस्तान 1975 से लगतार देख रहा था | कपिल की टीम ने फाइनल हराया भी तो उस टीम को जिसका कप्तान और वो टीम उस समय वर्ल्ड क्रिकेट में अजेय समझी जाती थी क्लाइव लायड की कप्तानी वाली इस टीम ने लगातार दो वर्ल्ड कप जीते थे , और 83 में अगर वो वर्ल्ड कप जीत जाते तो विश्व क्रिकेट की वेस्टइंडीज पहली टीम बन जाती जो लगातार तीन वर्ल्ड कप जीतने का रिकार्ड बना कर इतिहास में अपने को दर्ज करा लेती | पर कपिल की टीम ने लायड की टीम को फाइनल में वो आसमान दिखाया जिसकी उम्मीद क्रिकेट के बड़े से बड़ा पंडित भी नहीं कर सकता था | 

लार्ड्स का एतिहासिक मैदान स्टेडियम खचाखच क्रिकेट प्रेमियों से भरा हुआ था , वेस्टइंडीज ने टास जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का न्योता भारत को दिया था , पूरी भारतीय टीम 54 .4 ओवर में 183 रन बना कर आउट हो चुकी थी , वेस्टइंडीज इतिहास बनाने के करीब पहुच गई थी| सभी क्रिकेट प्रेमी वेस्टइंडीज की जीत को ही तय मान कर चल रहे थे, जब भारतीय टीम ने गेंदबाज़ी की शुरुवात की तो किसी को ये उम्मीद नहीं थी कि भारत फाइनल जीत भी सकता हई| भारतीय गेंदबाजों ने कप्तान कपिल की अगुवाई में वो करिश्मा किया जिसने क्रिकेट के इतिहास में भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया | भारतीय गेंदबाजों ने सधी हुई बालिंग करते हुए वेस्टइंडीज को 140 रन पर ही धराशाई कर दिया था | बैटिंग में इंडियन क्रिकेट टीम कुछ खास नहीं कर पाई थी, केवल श्रीकांत ने ही वेस्टइंडीज के गेंदबाजों से थोडा संघर्ष कर के 33 रन बनाये थे| वही पूरी टीम ने मिलकर 183 रन का लक्ष्य रख पाई थी| अब इसे संजोग ही कहा जायेगा कि ये वर्ल्ड कप 1983 में खेला गया और फाइनल में जिस टीम ने पहले बैटिंग करते हुए जो स्कोर दिया था वो 183 रन था, जोकि विपक्षी टीम पार नहीं कर सकी | 

दूसरी पारी की शुरुवात हुई तब इंडियन क्रिकेट टीम संघर्ष करने के लिए उतरी पर संघर्ष भी ऐसा जिसमे देश की अस्मिता ही दाँव पर लगी हुई थी , कपिल देव ने जब बालिंग की शुरुवात की तो किसी को नहीं पता था कि 60 ओवर के इस खेल में आज एक नया सिरमौर होने जा रहा है| इंडियन बालरो ने वेस्ट इंडीज को 5 रन के स्कोर पर पहला झटका देते हुए सलामी बल्लेबाज़ ग्रीनिच को आउट कर उनकी प्रारंभिक जोड़ी को तोड़ दिया, वही दूसरा विकेट हेंस के रूप में 50 रन के योग पर गिरा था , तब तक सभी लोग ये मान चुके थे कि अब वेस्टइंडीज को तीसरा वर्ल्ड कप जीतने से कोई नहीं रोक सकता , वजह भी साफ़ थी वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज़ अभी तक स्टेडियम में बैठे थे | पर जब 57 रन के स्कोर पर वेस्ट इंडीज का तीसरा विकेट गिरा जिसको कपिल देव ने करीब 20 कदम दौड़ कर पकड़ा था , उस विकेट ने भारत की संभावनाओ को जिन्दा कर दिया , वो विकेट था , उस समय के क्रिकेट के धुरंधर बल्लेबाज़ सर विवियन रिचर्ड्स का जिन्होंने पहला विकेट गिराने के बाद 33 रन बनाकर पारी को संभाला था | इंडियन क्रिकेट टीम के साथ लार्ड्स के मैदान पर मौजूद सभी भारतीय दर्शक भी जश्न मानने लगे थे, पर कप और जीत के बीच अभी भी 7 ऐसे खिलाडियों को वापस स्टेडियम आउट कर के भेजना था, जो विश्व विजेता टीम के सदस्य थे और उन्हें ऐसा प्रेशर झेलना आता था | पर 25 जून को इंडियन टीम ने भी ठान लिया था कि आज शेर के जबड़े से जीत छीन लेनी है उसके बाद हुआ भी वही , मोहिंदर अमरनाथ की धारदार बालिंग ने वो करिश्मा किया जिसकी उम्मीद खुद इंडियन और वेस्टइंडीज टीम को भी नहीं थी | 

मोहिंदर अमरनाथ ने बाद के बल्लेबाजो पर वो अंकुश लगाया की इंडीज टीम के धुरंधर बल्लेबाज भी एक एक रन को तरसने लगे | और 66 रन के स्कोर पर 2 विकेट गिराने के बाद इंडियन टीम ने वेस्टइंडीज टीम पर अपना शिकंजा कस लिया और विकेटों का पतझड़ लगातार होता रहा कप्तान लायड ने अपने टीम की गिरती पारी को संभालने की कोशिश तो की लेकिन भी असफल हो गए , और पूरी वेस्ट इंडीज टीम 52 ओवेरो में 142 रन बना कर मैच हार चुकी थी साथ ही वर्ल्ड कप भी , भारत वर्ल्ड क्रिकेट का नया सरताज बन गया | और कपिल की टीम ने वो करिश्मा कर दिखाया जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी| सभी क्रिकेट विश्लेषक भारतीय टीम को अंडरडाग समझ रहे थे , पर भारतीय टीम ने विश्लेषको द्वारा दिए गए टैग को उन्हें ही ससम्मान वापस कर दिया साथ ही वर्ल्डकप जीत कर दिखा दिया कि भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि धर्म है | 

फाइनल मुकाबले का मैच जब ख़त्म हुआ तो मोहिंदर अमरनाथ फिर एक बार मैन आफ द मैच चुने गए , साथ ही उन्हें ओवर आल टूर्नामेंट में प्रदर्शन करने के लिए मैन आफ द सीरिज भी चुना गया | भारतीय टीम ने इतिहास के पन्नो में अपना नाम दर्ज करा लिया था | कपिल देव की अगुवाई वाली इस टीम ने एक ऐसी टीम को मात दे दी थी जो पूर्व में दो बार वर्ल्डकप जीत चुकी थी और भारतीय टीम ने उसका विजय रथ रोक दिया था | इस टीम ने 1974 और 1979 में हुए वर्ल्ड कप को जीतकर तीसरा वर्ल्ड कप जीतने के इरादे से इंग्लैण्ड पहुची थी , पर उसे नहीं मालूम था कि भारतीय टीम उस टीम को हरा कर वेस्टइंडीज को इतिहास नहीं बनाने देगी, बल्कि खुद ही इतिहास गढ़ जाएगी|

टी-20 - वर्ल्ड कप - चैम्पियंस ट्राफी के बाद अगला क्या धोनी!

महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट के नए महानायक जिन्होंने भारत को क्रिकेट के हर फार्मेट में शीर्ष पर पहुंचा दिया। माही उपनाम से प्रसिद्द धोनी वाकई में भारतीयों के दिलों के माही ही साबित हुए। 2007 के टी- 20 वर्ल्ड कप के बाद धोनी ने भारतीय क्रिकेट फैन्स को वो ख़ुशी के सभी लम्हे दिए जिसको पाने के लिए विश्व क्रिकेट बिरादरी के सभी देश और उनके फैन्स आतुर रहते है। 

धोनी ने क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की भी इच्छा पूरी की उन्हें वर्ल्ड कप जीतकर तोहफे में दिया। आज धोनी भारत के सबसे सफल कप्तान बन चुके है। भारत टेस्ट में शीर्ष पर पहुंचा तो धोनी की कप्तानी में भारत 2007 में टी-20 चैम्पियन बना धोनी की कप्तानी में, भारत ने तीस साल बाद 2011 में वर्ल्ड कप जीता धोनी की कप्तानी में अब ICC चैम्पियन बनकर माही ने भारत और खुद को उस जगह पर बैठा दिया जहाँ सारा जमाना अपना दिखता है। 

लेकिन धोनी संतुष्ट होने वाले कप्तानो में से नहीं है। कैप्टन कूल की उपाधि से नवाजे गये धोनी अब विश्व विजय पर निकलेंगे। 2007 के टी- 20 वर्ल्ड कप के लिए उपहार स्वरुप कप्तानी पाये महेंद्र सिंह धोनी ने बीते दिनों IPL विवाद के बाद भी टीम को एकजुट रखने में सफलता पाई, मीडिया के सवालों से बचने वाले माही ने कहा की समय आने पर जवाब दूंगा ये था धोनी का जवाब जो उन्होंने चैम्पियंस ट्राफी को जीतकर दिया। 

धोनी की टीम आईपीएल 6 में सट्टेबाजी और फिक्सिंग के विवादों के साये में इंग्लैंड पहुंची। इस विवाद से न सिर्फ धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई की टीम की साख को धक्क लगा, बल्कि टीम इंडिया की साख भी बुरी तरह प्रभावित हुई। लेकिन धोनी एंड कंपनी ने चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर साबित कर दिया कि धोनी नंबर वन कप्तान हैं।

धोनी की टीम ने टूर्नामेंट में सभी मैच जीते। यहां तक कि अभ्यास मैचों में भी टीम इंडिया विपक्षी टीम पर भारी साबित हुए। टीम ने दो अभ्यास मैचों समेत कुल 7 मैच लगातार जीते। सेमीफाइनल में श्रीलंका को मात देने से पहले टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान को हराया।

Sunday, 23 June 2013

जब माँ पार्वती ने मांगे महादेव के बराबर पैसे !


देवो के देव महादेव की पार्वती यानि सोनारिका भदौरिया जल्द ही महादेव से बाहर होने वाली है| सोनारिका भदौरिया और महादेव का निर्माण करने वाले प्रोडक्शन हाउस के बीच अनबन की ख़बरें है| खबर है महादेव की पार्वती सोनारिका भदौरिया ने ज्यादा पैसों की मांग की है| इस बात को लेकर प्रोडक्शन हाउस और माँ पार्वती के बीच अनबन और बहस हो चुकी है जिसकी वजह से सोनारिका भदौरिया ने शूटिंग में देर से आना शुरू कर दिया| 

माँ पार्वती के सौम्य रूप को धारण करने वाली सोनारिका ने देवो के देव महादेव का किरदार निभाने वाले मोहित रैना के बराबर पैसे की मांग रखी थी| प्रोडक्शन हाउस के अधिकारियों ने पहले सोनारिका से बातचीत में कुछ पैसे बढाने की बात मान ली थी लेकिन सोनारिका मोहित के बराबर पैसा लेने पर अड़ी रही| प्रोडक्शन हाउस माँ पार्वती का किरदार निभाने वाली सोनारिका की जगह दूसरी कलाकार को खोज रहा है ताकि सोनारिका को महादेव से बाहर का रास्ता दिखाया जा सके| 

ख़बरों के मुताबिक देवो के देव महादेव में माँ पार्वती का किरदार निभाकर सोनारिका भदौरिया ने काफी प्रसिद्धि पा ली है, खबर ये भी है सोनारिका अपने दोस्त के प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से फ़िल्मी दुनिया में कदम रखने वाली है| अब फिल्मों में हिरोईन का किरदार निभाने जा रही सोनारिका को छोटा स्क्रीन कैसे भायेगा यही वजह है सोनारिका के नखरे इन दिनों बढे हुए है|

मोदी नहीं मोटा भाई है, सिर्फ 2 दिन 15 हज़ार गुजराती पहुँच गए घर


उतराखंड में भाजपा की सरकार ना हो लेकिन मोदी ने वहा एक तरह से गुजरात की सरकार उतार कर अपने प्रदेश के 15 हज़ार नागरिकों को दो दिन में ही निकाल ले गए| मोदी का मैनेजमेंट उत्तराखंड सरकार पर भारी पड़ गया| उत्तराखंड में बरपे कुदरत के कहर के बाद अपनी गुजराती स्पेशल 'रेस्क्यू टीम' संग देहरादून पहुंचे नरेंद्र मोदी सुपरमैन की तरह आये और गुजराती श्रद्धालुओं को वहां से ले गए। उत्तराखंड में इन दो दिनों में मोदी अपनी खास कार्यशैली से कांग्रेस की विजय बहुगुणा सरकार और आपदा में लगे अधिकारियों को काम का तरीका सिखा गए।

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार रात अचानक देहरादून पहुंचे। मोदी अपने साथ अपनी एक पूरी गुजरात से रेस्क्यू टीम लेकर आए थे। इसमें 5 आईएएस , 1 आईपीएस, 1 आईएफएस और दो गुजरात प्रशासनिक सेवा के आला अधिकारी थे। इसके अलावा दो डीएसपी और 5 पुलिस इंस्पेक्टर भी उनकी टीम का हिस्सा थे। देहरादून पहुंचते ही मोदी ने सबसे पहले जौली ग्रांट एयरपोर्ट पर इंतजार में बैठे करीब 150 गुजराती तीर्थ यात्रियों को अपने साथ लाये चार्टर्ड प्लेन से अहमदाबाद भेज दिया।

इसके बाद दिन में अपने साथ आई टीम के साथ मीटिंग करते रहे। बाढ़ से प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में फसें गुजरातियों को देहरादून तक पहुंचाने के लिए 80 एसयूवी लगाई गई थीं। इसके अलावा चार बोइंग विमान का भी इंतजाम था। 25 लग्जरी बसों से कई यात्रियों को दिल्ली रवाना किया गया जिसको खुद नरेन्द्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। गुजरात के नागरिकों के लिए चल रहे इस रेस्क्यू कार्यक्रम दिल्ली और देहरादून में तैनात दो सीनियर आईएएस अधिकारियों की देखरेख में हो रहा था। इसके अलावा हरिद्वार में भी एक मेडिकल टीम तैनात की गई थी। बताया जाता है कि टिहरी में लोगों के सड़क जाम करने के कारण एक गुजराती श्रद्धालु की कार वहां फंस गई थी। मोदी की टीम के आईएएस अधिकारी ने तुरंत उसे वहां से निकलवाया।

उधर, उत्तराखंड बीजेपी के नेता मोदी के इस स्टाइल से बेहद प्रभावित हैं। वह उनकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं। बीजेपी नेता अनिल बलूनी ने कहा, 'उन्होंने जो कुछ भी कहा वह शानदार था। अगर किसी को यह पसंद नहीं आ रहा है तो क्या किया जा सकता है।

Saturday, 22 June 2013

कौन सी तस्वीर पाना चाहते है पी एम इन वेटिंग

भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी इन दिनों अपनी एक पुरानी फोटो को पाने के लिये बेचैन है। आडवाणी की ये फोटो 1951-52 के समय की है जब वो खुद और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने कोटा रेलवे स्टेशन पर भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अगुवाई की थी। 

करीब साठ साल पुरानी इस फोटो में आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेई की उम्र करीब 25 से 30 साल की रही होगी। दुबले पतले आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेई दक्षिण पंथ के युवा अगुवा नेता के तौर पर उभर रहे थे। जनसंघ के संस्थापक डॉ मुखर्जी के नाक कान कहे जाने वाले ये दोनों युवा नेता भारतीय राजनीति की वो कड़ी थे जो अपने राजनीतिक जीवन में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाते रहे। 

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी इन दोनों नेताओं के हाथ में जनसंघ का भविष्य सुरक्षित देखते थे। जिसे 1957 में अटल बिहारी वाजपेई ने मात्र 33 साल की उम्र में सही साबित कर दिखाया और दूसरी लोकसभा में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से चुनकर पहुँच गए। अटल बिहारी वाजपेई की जीत पर तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था ये युवक और लोकसभा में प्रभावी विपक्षी सदस्य की भूमिका निभाने वाला सदस्य एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा। 

ऐसे ही दुर्लभ वक्तव्यों और स्मृतियों को अपनी किताब "माई कंट्री, माई लाइफ" में समेटने वाले लाल कृष्ण आडवाणी आज अपनी उस तस्वीर को पाने के लिए बेक़रार है जो उनके साथी और राजनीतिक गुरु डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कोटा रेलवे स्टेशन पर खिची गई थी। 

आडवाणी ने एक तरह से अपने को भाजपा की राजनीति से अलग कर लिया है, आडवाणी आज अपनी पुरानी यादो को समेटने में लगे है, इस तस्वीर के बाबत आडवाणी के पास फोन भी आया लेकिन वो दुर्लभ तस्वीर नहीं आई आडवाणी का कहना है उस 'तस्वीर का इंतज़ार मै आगे भी करूंगा वो मुझे मिल जाये तो मुझे अच्छा लगेगा'। 

स्कूली छात्रों ने खोजा छुद्र ग्रह

दिल्ली के एक स्कूल के दो छात्रों ने एक नए छुद्र ग्रह को खोज निकाला तथा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय ने इस खोज को मान्यता दे दी। अंतरिक्ष विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के काम में जुटे एक गैर सरकारी संगठन ने शनिवार को यह जानकारी दी। दक्षिणी दिल्ली के पुष्प विहार में स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के शौर्य चांबियाल तथा गौरव पाटी ने अखिल भारतीय छुद्र ग्रह खोज अभियान के तहत यह खोज की।

अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग (आईएसएसी) के साथ इस अभियान को शुरू करने वाले, संचारकों एवं शिक्षकों का विज्ञान सार्वजनिकीकरण संगठन (स्पेस) ने कहा, इस खोज को अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय ने मान्यता दे दी है तथा खोजे गए छुद्र ग्रह को अस्थायी तौर पर 2013एलएस28 नाम दिया गया है।

स्पेस ने आगे बताया, हम इसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (पेरिस) द्वारा जारी की जाने वाली विश्व की आधिकारिक छुद्र ग्रहों की सूची में शामिल किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। स्पेस के सचिन भांबा ने कहा, छुद्र ग्रह की खोज में भारतीय विद्यार्थियों ने पूरी दुनिया के विद्यार्थियों को मात दे दी है, और अब भारत को खगोल के क्षेत्र में आमूलकारी बदलाव के साथ नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है।

Friday, 21 June 2013

महादेव खड़े निर्विकार, श्रद्धालु रोये जार जार



'केदारनाथ धाम' जहाँ हजारों श्रधालुओ की चहल-पहल रहती थी आज बाबा वहां अकेले खड़े है, निर्विकार निराकार| 'बाबा' भी शायद नाराज है नहीं तो वो उस गंगा को इतना कहर बरपाने देते जो उनकी जटाओ में अठखेलिया करती है। बाबा सही में नाराज है नहीं तो वो केदारनाथ जहाँ देश के कोने-कोने से भक्त हफ्तों की यात्रा करके पहुँचने के लिए बेताब रहते हैं वो बाबा का मंदिर आज मलबे के ढेर में तब्दील न हो जाता। बाबा नाराज है उन हुक्मरानों से जिन्होंने पहाड़ को सिर्फ दोहन की वस्तु समझा। 

प्रकृति ने भी इंसान को बता दिया कि उसने उन्हें बनाया है इंसान ने उसे नहीं। आज प्रकृति अपने नुकसान का बदला ले रही है। नहीं तो पलक झपकते ही गंगा और उसकी सहायक नदियां इतना विकराल रूप नहीं ले लेती की हज़ारों लोगो की जान और खरबों का नुकसान चंद घंटो में हो जाता। 

"Land Of God" यानि देवभूमि उत्तराखंड जहां पर आई आपदा में भगवान भी भारी भंवर में फंस गए है, वजह साफ है जिस तरह की आफत आसमान से हिमालय की पहाड़ियों पर उतरी, उसने उत्तराखंड में खौफ की वो तस्वीर पेश की जिसने उत्तरखंड को ही नहीं पूरे देश में डर पैदा कर दिया। 

उत्तराखंड के नौ जिलों में प्रकृति ने जिस तरह से आफत बरसाई उसने पर्यटन में रूचि रखने वाले को उत्तराखंड जाने के नाम पर खौफ पैदा कर दिया है। उत्तराखंड से आ रही ख़बरों के मुताबिक, अभी तक जितना नुक्सान हुआ है उसे ठीक करने में करीब तीन साल का समय और खरबों रुपयें लगेंगे। 

मई से नवम्बर महीने के बीच चलने वाली 'छोटा चार धाम यात्रा' में देश के सभी प्रान्तों से भक्त उत्तराखंड पहुँचते है। इन भक्तों की संख्या लाखो में होती है। करीब 6 महीने चलने वाली चारधाम यात्रा से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है। 

उत्तराखंड के जिन नौ जिलों में प्रकृति ने अपना कहर बरपाया वो नौ जिले हमेशा से प्राकृतिक आपदा का शिकार होते रहे है। 20 अक्टूबर 1991 को राज्य के उत्तरकाशी जिले में आये भूकंप ने करीब हज़ार लोगो के जीवन को ख़त्म के दिया। उत्तरकाशी में आये भूकंप का केंद्र हिमालय की वो पहाड़िया बनी जहां कभी ज़िन्दगी अपनी पूरी रवानी पर रहती थी। 

उत्तरकाशी में आये भूकंप ने देश को भी हिला दिया था, उस समय भी चारधाम की यात्रा चल रही है। देश के सभी हिस्सों से श्रद्धालु वहा पहुंचे थे, इस भूकंप में हज़ारो परिवार प्रभावित हुए थे| वहीँ, खरबों रुपयों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

आज फिर वैसे ही हालात है। पहाड़ और प्रकृति ने अपना विकराल रूप दिखाया है, हज़ारों लापता है, तो हज़ारो को खोजने में हलकान प्रशासन को कुछ सूझ नहीं रहा है तो वहीँ, मुख्यमंत्री और सरकार को लोगो के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। 

उत्तराखंड को देवों की भूमि कहा जाता है, यमनोत्री, गंगोत्री, बदरीनाथ,केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, रूद्रनाथ, पंच प्रयाग, देवप्रयाग, नन्ददेव ऐसे तीर्थ स्थल है जिनमे देश के हिन्दू, सिख और अलग अलग सम्प्रदाय के लोगो की आस्था है। हर साल लाखों यात्री अपने अराध्य के दर्शन के लिए उत्तराखंड की पावन धरती पर कदम रखते है। 

9 नवम्बर 1999 को जब इस राज्य की स्थापना हुई थी तब राज्य को पर्यटन राज्य के तौर पर प्रचारित किया गया लेकिन अपनी विषम परिस्थितियों की वजह से उत्तराखंड का वो विकास नहीं हो सका जो इसे श्रेष्ठ राज्य के तौर पर स्थापित कर सके। उत्तराखंड में आज ज़िन्दगी ठहर गई है, प्रशासन और सरकार राहत और बचाव कार्य को लेकर फेल हो चुके है। 

देश रो रहा है, सरकारे सिमित संसाधनों से लोगो को बचाने का प्रयास कर रही है। जिस समय बाढ़ और बारिश ने अपना तांडव किया उस समय चार धाम यात्रा की सड़क पर करीब 70 हज़ार सैलानी अपने अपने अराध्य के दर्शन के लिए निकले हुए थे। बारिश अपने पूरे शबाब पर थी 14 -15 जून की रात में आई भीषण बारिश और बाढ़ ने मात्र कुछ घंटो के अन्दर राज्य के 9 जिलों की तस्वीर बदल दी। 

एक हफ्ते बीतने के बाद भी चार धाम की यात्रा पर निकले हज़ारों लोग लापता है। सेना ITBP के जवान और BRO के कर्मचारी दिन रात एक कर तीर्थ यात्रियों को बचाने के प्रयास में लगे हुए है। सरकार मौके से भाग रही है, अधिकारी कर्मचारी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे। देश के कोने कोने से लोग अपनों का हाल जानने के लिए बेहाल है। 

देश के हर कोने के किसी न किसी घर से सिसकियों की आवाज आ रही है| किसी के माता-पिता किसी का भाई तो किसी का बेटा कोई ना कोई लापता है, जानकारी के अभाव में दिल चाक-चाक हो रहा है साथ ही एक अंजाना डर भी कही प्रकृति ने उन्हें अपनी गोद में तो नहीं छुपा लिया। 

बहरहाल आज उतराखंड की हर खबर उन लोगो के लिए एक उम्मीद है जिन्होंने अपनों को फिलहाल के लिए खो दिया है। केंद्र सरकार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है वही सिमित संसाधनों में सेना और अर्धसैनिक बालों के जवान कुछ लोगो के चेहरे पर मुस्कान बिखेर रहे है वहीँ, कुछ को मायूसी भी हाथ लग रही है। 

खैर सरकार और खुद आम आदमी को अपने क्षणिक फायदे के लिए प्रकृति से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए नहीं तो जो प्रकृति ने बाबा की मौन सहमती से अपना रौद्र रूप दिखाया और अपने तांडव पर मनुष्य को नचाया कही ऐसा ना हो कि बाबा के दर्शन के लिए तीन नहीं तीस साल का लंबा इंतज़ार करना पड़े|