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Friday, 30 August 2013

सपा की कड़ी कार्रवाई ने दे दिया चुनावी संदेश

अगामी लोकसभा चुनाव में केंद्र की राजनीति में बड़ी भूमिका अदा करने के सपने देख रही समाजवादी पार्टी (सपा) ने शायद अब तय कर लिया है कि जो भी उसके सपनों में रुकावट बनेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सपा के तीन विधायकों का एक साथ निलंबन शायद पार्टी नेतृत्व के इसी कड़े संदेश को प्रदर्शित करता है। 

चूंकि सपा का जनाधार फिलहाल केवल उत्तर प्रदेश में ही है। ऐसे में पार्टी को पता है कि उप्र में बेहतर प्रदर्शन ही उसे लोकसभा चुनाव में दिल्ली की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका अदा करने का मौका दे सकती है। इसलिए सपा नेतृत्व यह कतई बर्दाश्त नहीं करेगा कि उसके किसी नेता की वजह से पार्टी की छवि खराब हो और उसका खामियाजा उसे लोकसभा चुनाव में भगुतना पड़े।

सपा संसदीय बोर्ड के सदस्य ने बताया कि लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व यह बिल्कुल नहीं चाहता कि किसी विधायक या मंत्री के अनैतिक कृत्य या गुंडागर्दी की वजह से पार्टी की छवि खराब हो और विपक्षी दलों को पार्टी और सरकार को घेरने का मौका मिले।

सपा नेता ने कहा कि अगर पार्टी की छवि खराब करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई न की गई तो जनता में गलत संदेश जाएगा और लोकसभा चुनाव में जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी के तीन विधायकों का निलंबन करके सपा नेतृत्व ने विधायकों, मंत्रियों और नेताओं को यह कड़ा संदेश देने की कोशिश की है, कि जो भी पार्टी की छवि खराब करेगा उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा। सपा की तरफ से शायद पहली बार इतना बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है।

अपने तीनों विधायकों के कृत्यों से पिछले दो-तीन दिनों से लगातार सपा विपक्षी दल के निशाने पर थी। सीतापुर से विधायक महेंद्र सिंह मंगलवार की रात गोवा के एक होटल में रंगरेलियां मनाते पकड़े गए। रायबरेली के विधायक रामलाल अकेला के बेटे पर आरोप लगा कि उसने एक चिकित्साधिकारी का घर गिरवाकर जमीन पर कब्जा कर लिया। वहीं सीतापुर से विधायक राधेश्याम जायसवाल के बेटे पर आरोप लगा कि उसने जमीन कब्जा करने के लिए एक युवक की हत्या कर दी।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार देर शाम कार्रवाई का डंडा चलाते हुए तीनों विधायकों की पार्टी सदस्यता निलंबित कर दी और अकेला व जायसवाल के बेटों को पार्टी से निष्कासित कर दिया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव लगातार विभिन्न मंचों से सार्वजनिक तौर कर कह रहे थे कि पार्टी के विधायक ऐसा आचरण प्रस्तुत न करें जिससे कि उनकी और पार्टी की छवि खराब हो।

मुलायम के करीबी और विधान परिषद सदस्य बुक्कल नवाब ने कहा, जो भी नेता अपने कृत्यों से पार्टी की छवि खराब करेगा, नेतृत्व उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। जनता ने बड़ी उम्मीदों से सपा को उप्र की सत्ता सौंपी है। शीर्ष नेतृत्व लोगों की उम्मीदों को किसी भी हाल में नहीं टूटने देगा।

सात करोड़ रुपये रोज़ खर्च करने वाली महिला

जहां पूरा विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है, वहीँ विश्व के ज्यादातर देशों में हालात ऐसे है कि वहां के युवाओं को एक नौकरी पाने के लिए और चंद रुपये अपनी जीविका चलाने के लिए कमाना मुश्किल हो रहा है वही विश्व में कुछ ऐसी शख्सियत भी है जो रोजाना 7 करोड़ रुपये अपने रहन सहन और शौक को पूरा करने में खर्च कर देते है। 

विश्व के बड़े और छोटे देशों में पैसे वालों की कमी नहीं है, वही विश्व में कुछ ऐसे इलाके भी है जहां लोग भुखमरी और कुपोषण का शिकार तक हो रहे है लेकिन अकूत तेल संपदा वाले देशों में पैसे के बल पर ऐश की जिंदगी जीने वालों की कोई कमी नहीं है।

ऐसी एक शख्सियत है मोरक्को की महारानी लला सलमा, जो मोरक्को के राजा मोहम्मद-VI की पत्नी है। लला सलाम का जन्म एक साधारण शिक्षक के घर में हुआ था। लला सलमा का नाम जो उनके परिजनों ने दिया वो था मिस सलमा बेनानी। 

मोरक्को की महारानी का तमगा पाने से पहले रबत शहर में रहने वाली लला सलमा एक आम लड़की थी लेकिन अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई ख़त्म कर जब सलमा बेनानी नाम की इस लड़की ने नौकरी शुरू की तो उसे खुद नहीं मालूम था कि एक दिन वो मोरक्को की महारानी बन जायेगी। लला सलमा ONA ग्रुप में इन्फार्मेशन इंजिनियर के पद पर कार्यरत थी। 

1999 में लला सलमा की एक कार्यक्रम के दौरान मोरक्को के राजा मोहम्मद-VI से मिली मोरक्को के राजा को मिस सलमा बेनानी इतनी पसंद आई कि उन्होंने दो साल चले इस मेलजोल के सम्बन्ध को शादी में बदलने का प्रस्ताव रखा| लला सलाम मान गई| 12 अक्टूबर 2001 को लला सलमा मोरक्को के राजा की पत्नी बन गई। 

आज लला सलमा देश की सबसे बड़ी होल्डिंग कंपनी की सर्वेसर्वा है, और मोरक्को की महारानी लला सलमा के दो बच्चे है। लला सलमा आज विश्व की उन हस्तियों में शुमार है जो ब्रेन ब्यूटी और मनी तीनो के लिए विख्यात है। लला सलमा को विश्व की उन महिलाओं में भी शामिल किया जाता है जो रोज़ाना 7 करोड़ रुपये खर्च करती है यानि महीने का 210 करोड़ और साल का 2520 करोड़ रुपया खर्च करती है जो किसी गरीब देश की अर्थव्यवस्था के लिए मददगार हो सकता है। करीब 16250 करोड़ रुपए की दौलत के मालिक मोहम्मद की कंपनी में सलमा निवेशक के रूप में भी भूमिका निभाती हैं। 

लला सलमा विश्व की नामी हस्तियों में से है, जिन्हें दो विश्व विख्यात अवार्ड भी मिले है| 2004 में आर्डर आफ लियोपोल्ड और 2005 में आर्डर आफ इसाबेल दी कैथोलिक आफ स्पेन। लला सलमा को उनके काम की वजह से ज्यादा जाना जाता है लेकिन वो अपनी शाहखर्ची के लिए भी खासी जानी जाती है।

महात्मा गांधी से प्रेरित था 'वाशिंगटन कूच'

अमेरिका के नागरिक अधिकार आंदोलन के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के प्रसिद्ध भाषण 'मेरा एक सपना है' की पचासवीं वर्षगांठ पर हजारों अमेरिकी लिंकन मेमोरियल पर पहले अश्वेत राष्ट्रपति बराक ओबामा को सुनने के लिए एकत्र हुए। 

ठीक 50 वर्ष पहले 28 अगस्त 1963 को जिस स्थान पर खड़े होकर किंग ने अपना प्रसिद्ध भाषण दिया था वहीं से ओबामा ने बुधवार को कहा कि किंग की वाणी ने लाखों लोगों, अश्वेत, श्वेत और अन्य को आशा दी।

ओबामा ने कहा कि उनके शब्दों से अधिक स्वतंत्रता के लिए महात्मा गांधी से प्रेरित 'वाशिंगटन कूच' हमारे देश में स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा प्रदर्शन था। इस समारोह में ओबामा के अतिरिक्त दो अन्य पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और जिमी कार्टर भी उपस्थित थे।

अश्वेतों के समान अधिकारों के लिए लोगों द्वारा किए गए संघर्ष को याद करते हुए ओबामा ने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए उनका निर्वाचन इन संघर्षो की श्रृंखला की अगली कड़ी थी। हल्की बूंदाबांदी के बीच ओबामा ने कहा, क्योंकि उन्होंने कूच जारी रखा इसलिए अमेरिका बदला।

ओबामा ने कहा कि लोगों के संघर्ष के कारण शहर की परिषदों, राज्य विधायिकाओं और कांग्रेस में बदलाव आया और अंत में व्हाइट हाउस में भी बदलाव आया। पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने अपने भाषण में कहा कि किंग के भाषण ने और कूच से अमेरिका में व्यापक बदलाव आया। 

क्लिंटन ने कहा, उन्होंने दिमागों को खोला और दिलों को नर्म बनाया। अरकंसास में एक 17 वर्षीय लड़के सहित उन्होंने लाखों लोगों को बदला। इस मौके पर कार्टर ने कहा, हम सभी को पता है कि वोटर पहचान पत्र की जरूरत और अन्य कानूनों पर किंग कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करते। हमारे पास काफी व्यापक एजेंडा है और मैं मार्टिन लूथर किंग जूनियर का शुक्रगुजार हूं। उनका सपना अभी भी जीवित है।

Wednesday, 28 August 2013

आजम को चाहिये स्वास्थ्य मंत्रालय

समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरे और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सबसे करीबी सहयोगी सरकार के अहम् हिस्से या ये कहे अपने मार्गदर्शन में सरकार चलाने वाले आज़म खान अब स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों और बड़े अफसरों से नाराज है। आज़म खान साहब की नाराजगी का आलम ये है कि उन्होंने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त करने के लिए उसकी (स्वास्थ्य विभाग) कमान उनके (आज़म खान) हाथों में देने की मांग की है। 

समाजवादी पार्टी के सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक आज़म खान ने मुलायम सिंह यादव से सीधे बात कर कहा की प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मुस्लिम धर्म से जुड़े लोगो का समुचित इलाज़ डाक्टर नहीं कर रहे है। आज़म खान ने स्वास्थ्य मंत्रालय सपा के वयोवृद्ध नेता अहमद हसन से वापस लेने को कहा। आज़म खान की नाराजगी का आलम ये है कि उन्होंने प्रदेश के प्रांतीय सेवा के डाक्टरों के ऊपर अविश्वास भी जता दिया है। 

आज़म खान की इस नई मांग ने पार्टी और सरकार के हलचल पैदा कर दी है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक आज़म खान स्वास्थय मंत्रालय अपने पास लाने के लिए पूरा जोर लगा रहे है। आज़म खान ने स्वास्थ्य मंत्रालय खुद दिये जाने का जो कारण दिया है वो कारण जनता के बीच विभेद पैदा वाला है। आज़म खान की इस नई मांग को अगर सही मान लिया जाए तो अब सरकार को उस 80 प्रतिशत जनता के बारे में भी सोचना होगा जो कही नहीं मुस्लिम धर्म मानने वालों से अधिक है, और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से कोई दिक्कत नहीं है साथ ही प्रदेश की अस्सी प्रतिशत जनता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के स्वास्थ्य सेवाओं में किये जा रहे प्रयासों से संतुस्ट है। 

सूत्र बताते है आज़म खान की इस नई मांग के बाद सरकार भी दुविधा में फंस गई है। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के ढाँचे पर नज़र डाली जाए तो प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा मानकों के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। पिछली बसपा सरकार के दौरान इसी प्रदेश ने स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटालों ने नये कीर्तिमान बनाये थे। उस दौरान केंद्र सरकार से आये राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) में करीब 5 हज़ार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। 

प्रदेश में सत्ता बदलते ही सपा सरकार ने इस विभाग की जिम्मेदारी सपा के वरिष्ठ नेता अहमद हसन को सौंपी थी। अखिलेश सरकार का गठन 15 मार्च 2012 हुआ था इस बीच 16 महीने सरकार को बने हुए बीत गए। मुख्यमंत्री की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग में बड़े और जनहित के कार्य किये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने कम समय में बड़े काम किये है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कालेज खोले गए है। वही मेडिकल कालेजों में 500 सीटे बढ़ा दी गई है। 

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने हाल में ही समाजवादी एम्बुलेंस सेवा का शुभारम्भ किया, प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने 108 नंबर की एम्बुलेंस सेवाओं पर रोक लगा दी थी, प्रदेश की जनता को सुचारू सेवा देने के लिए सरकार ने करीब 100 करोड़ रुपये का भरी भरकम बजट इस सेवा को शुरू करने के लिए दिया । 

प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री और खुद स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन स्वास्थ्य सेवाओं को सुधरने में लगे है , अब आज़म खान के इस नई मांग से सरकार में उथल पुथल है। सूत्रों के हवाले से ख़बरों के मुताबिक आज़म खान की इस नई मांग ने सपा के वरिष्ठ नेताओं के माथे पर बल ला दिया है।

मोदी खेमे की टेस्टिंग थी

विश्व हिन्दू परिषद की फेल हो चुकी चौरासी कोसी यात्रा कहीं मोदी खेमे की लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति को जांचने के लिए टॉप नहीं थी ? विहिप को इस यात्रा को आयोजित करने का मौन समर्थन कही न कही नरेन्द्र मोदी के करीबी और उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रभारी अमित शाह के तरफ से भी था, इस यात्रा को इस समय आयोजित करने पर भाजपा और विहिप नेताओं के बीच मतभेद की भी ख़बरें आई थी। 

विहिप की फुस चौरासी कोसी यात्रा को लेकर भाजपा और विहिप ने कोई भी साझा रणनीति नहीं बनाई थी, भाजपा ने समय का इंतज़ार किया और सही समय पर अपने पाँव पीछे खींच लिए थे। 17 अगस्त को विहिप के संयोज़क अशोक सिंघल और संतों की टोली सपा मुखिया और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले तो ऐसा सन्देश गया कि सरकार इस यात्रा के न तो समर्थन में है और न ही उसे रोकने के पक्ष में संत भी ख़ुशी ख़ुशी मुलायम से मिलकर बाहर आये। 

लेकिन अचानक दो दिनों बाद ही सरकार ने पलटी मारते हुये यात्रा पर रोक लगाने की घोषणा कर दी। विहिप भी अड़ गई की वो यात्रा निकाल कर ही रहेगी। भाजपा नेताओं और विहिप ने इस यात्रा को लेकर अपने अपने मत दिए भाजपा नेताओं ने विहिप के बड़े नेताओं से इस यात्रा को निकालने के लिए मना भी किया। भाजपा को चौरसी कोसी यात्रा के समय को लेकर एतराज था। 

विहिप और भारतीय जनता पार्टी के अन्दर से आ रही ख़बरों के मुताबिक इस यात्रा को लेकर दोनों पक्षों के संबंधो में खटास की भी ख़बरें है। भाजपा का मानना है कि प्रदेश सरकार ने जिस तरह की छीछालेदर विहिप की कि उसने भाजपा की चुनावी संभावनो को भी धूमिल कर दिया। विहिप का मकसद इस यात्रा के माध्यम से वोटो का ध्रुवीकरण करने का था, लेकिन विहिप अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकी लेकिन समाजवादी पार्टी को इसका फायदा जरुर हो गया। 

समाजवादी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत लगा कर इस यात्रा को विफल कर दिया| वहीँ, विहिप इस मुद्दे को लोकसभा चुनावों के बहाने अयोध्या और राममंदिर मुद्दे को गर्माना चाहती थी। इस पूरे प्रकरण में RSS भी विहिप को परदे के पीछे से समर्थन कर रहा था। भाजपा न चाहते हुये भी दबे मन से इस यात्रा के साथ जा खड़ी हुई थी। 

भाजपा सूत्रों के मुताबिक़, भारतीय जनता पार्टी ने विहिप के बड़े नेताओं को साफ़ कह दिया था कि इस समय परिक्रमा का सही समय नहीं है। अगर कही यात्रा फेल हो गई तो जनता के बीच गलत सन्देश चला जायेगा। भाजपा का डर सही साबित हुआ समाजवादी पार्टी ने अपने वोट बैंक को दिखाने के लिए इस यात्रा को विफल करने में पूरी ताकत लगा दी, सपा अपने वोटरों को सन्देश देने में सफल रही वही प्रदेश की जनता ये कहते नज़र आई जब चुनाव आते है भाजपा को मंदिर की याद क्यों आती है। 

वैसे देखा जाए तो मोदी की टीम ने उत्तर प्रदेश के सियासी पारे को विहिप की इस असफल चौरासी कोसी यात्रा के माध्यम से नाप लिया| वहीँ, मुलायम सिंह यादव भी अपने वोटरों को साध कर खुश है लेकिन पूरी भाजपा आज पशोपेश में है कि जो चुनावी जमीन वो तैयार कर थे उसमें विहिप की इस असमय की यात्रा ने उस जमीन को खिसका दिया जो खुद ब खुद भाजपा विरोधी पार्टियाँ उसके लिए बना रही थी।

Tuesday, 27 August 2013

सिद्धू मुम्बई में कामेडियन कपिल के साथ देखे गए

 भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर से लापता हो गए है। सिद्धू के निर्वाचन क्षेत्र जनता उन्हें लापता घोषित कर उनके ऊपर इनाम घोषित कर चुकी है। अमृतसर की जनता ने सिद्धू के ऊपर दो लाख का ईनाम घोषित किया है और बाकायदा शहर के प्रमुख इलाकों में पोस्टर लगाकर उन्हें खोजने की अपील जारी कर दी है। 

भाजपा के टिकट पर चुनकर अमृतसर से संसद पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू बीते कई महीनो से अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता के बीच गए ही नहीं। अपने सांसद से मिलने और अपने काम कराने को आतुर सिखों के प्रमुख धार्मिक शहर में शुमार अमृतसर वासियों ने अब सिद्धू को लापता घोषित कर दिया। 

पंजाब प्रांत में भाजपा और अकाली दल की गठबंधन की सरकार सत्ता पर काबिज है। सिद्दू भाजपा से सांसद है इस वजह से वहा के कार्यकर्ता और आम जनता उन्हें अपने कामो को कराने के लिए बेसब्री से खोज रही है लेकिन सांसद महोदय है कि उनकी पकड़ से बाहर है। 

वैसे सिद्धू का पता एक टीवी चैनल के पास है जिसमें वो हर शनिवार और रविवार को एक और अमृतसरवासी कपिल शर्मा के चुटकुलों पर ताली ठोक कर हँसते देखा जा सकता है। साथ ही सिद्धू को फ़िल्मी परदे के बड़े सितारों की बातों पर ये भी बोलते सुना जा सकता है " इन्होने बड़ी अच्छी बात बोली और हमें बहुत ही अच्छे मनोरंजक पल साझा किये, ठोंको इनके लिए ताली"। 

अमृतसर शहर में लगे सिद्धू के लापता होने की बात बताते ये पोस्टर सिद्धू और भाजपा की दूरियों की कहानी भी बयान करते है। खुद सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर जो अकाली भाजपा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव है और अमृतसर से भाजपा विधायक नवजोत कौर का सिद्धू के बारे में कहना है की उन्हें भाजपा में वो इज्जत नही मिल रही थी जो उन्हें टीवी के कार्यक्रम में मिल रही है। 

नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर से 2004 से भाजपा से चुनकर संसद पहुंचते रहे है। सिद्धू ने कांग्रेसी दिग्गज रघुनन्दन लाल भाटिया को चुनाव में हराकर अमृतसर क सीट पर कब्ज़ा किया था, भाटिया 1972 में पहली बार सांसद चुने गए थे, 77 का चुनाव हारने के बाद भाटिया ने 1980 से जो इस सीट पर कब्जा किया तो 2004 में सिद्धू ने ही उन्हें सक्रीय राजनीति से बाहर किया| इस बीच भाटिया विदेश मंत्रालय में मंत्री भी बने । 

सिद्धू की तलाश आज अमृतसर क जनता इस लिए भी कर रही है क्योंकि उन्होंने 6 बार उनका प्रतीनिधित्व कर चुके कांग्रेसी दिग्गज रघुनन्दन लाल भाटिया के ऊपर उन्हें तरजीह दी थी चुनाव जीतने के बाद आज सिद्धू अगर लापता हैं तो जनता उन्हें तलाशेगी ही।

मंत्री पद के लिए जूते भी पालिश करने पड़ते है

झारखण्ड देश का एक ऐसा राज्य जहां की राजनीति देश के अन्य राज्यों की राजनीति से खासी अलग है। झारखण्ड राज्य की शुरुवात से ही यहाँ की राजनीति में उथल पुथल का माहौल बना रहा है। हाल में ही झारखण्ड में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा- कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनी जिसका नेतृत्व सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन के हाथ में आ गया| दोनों पार्टियों के मंत्री भी बनाये गए। 

कांग्रेस के एक विधायक योगेन्द्र साहू ने एक ऐसा बयान दिया जिसने नेताओं के चरित्र और लाभ का पद पाने के लिए गिरने की सारी सीमाए पार कर दी। साहू ने कहा जब झारखण्ड में जेएमएम और कांग्रेस की संयुक्त सरकार बनी और मंत्री पद का गठन हो रहा था तब उनका नाम मंत्री वाली लिस्ट में नहीं था। 

लिस्ट में नाम न होने की दशा में उन्होंने नेताओं की परिक्रमा शुरू की| कई बड़े नेताओं के जूते भी चमकाने पड़े फिर भी उन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया। हार कर उन्होंने सोनिया गांधी से गुहार लगाईं तब जाकर उन्हें मंत्री पद मिला। 

एक राज्य के मंत्री के मुंह से ऐसा बयान सुनकर राजनीति और राजनीति करने वाले नेताओं की ओछी मानसिकता का पता चलता है।

परीछा चिमनी काण्ड : 600 करोड़ के घोटाले की जवाबदेही किसकी

बसपा सरकार के दौरान 24 मई 2010 को परीछा थर्मल पावर कारपोरेशन झाँसी में गिरी निर्माणाधीन चिमनी ने उस समय की राजनीति को गर्म कर दिया था। तात्कालिक बहुजन समाज पार्टी की सरकार की मुखिया मायावती ने इस घटना में दोषी कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे, NBCCL ही परीछा में बन रही इस 263 फीट ऊँची चिमनी का निर्माण कर रही थी। चिमनी गिरने के से उस घटना में पांच मजदूरों की मौत हुई थी वही करीब सौ मजदूर घायल हो गए थे। मायावती ने तात्कालिक ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय और पावर कारपोरेशन के एमडी नवनीत सहगल को इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे। 

इस घटना का एक पक्ष लेकिन पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा था वो सिर्फ बिजली विभाग का जिम्मा संभाले तात्कालिक मंत्री , मुख्य प्रबंध निदेशक और यूपी थर्मल पावर जेनेरेशन कॉर्पोरेशन के चेयरमैन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अलोक टंडन जानते थे। इन सभी जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं और अधिकारियो ने लाशो का भी सौदा करने में गुरेज नहीं की। इस चिमनी के निर्माण के टेंडर से लेकर इसके गिरने तक और जांच में भी खेल हुआ। अधिकारियों ने अपनी जेबे भरने और अपने उन लोगो को फ़ायदा पहुंचाने के लिए चिमनी के गिरने के बाद इंश्योरेंस क्लेम को करा कर पैसे की बन्दर बाँट करने क भी कोशिश की। 

इस पूरे काण्ड में चिमनी का निर्माण करने वाली कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) और नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन और तत्काल्क बसपा सरकार में बैठे नेताओं और बड़े अधिकारियों ने करीब 600 करोड़ रुपयों की उत्पादन क्षति के साथ पूरे मामले में एक आपराधिक साजिश रची और टेंडर में भी घोटाले को अंजाम दिया था। इस चिमनी के ठेके को पाने के लिए दो बड़ी निर्माण कंपनियों ने टेंडर डाले थे जिसमें मेसर्स गैमन और मेसर्स NBCCL नई दिल्ली के बिड पड़े थे। जब टेंडर खोला गया तो गैमन का न्यूनतम बिड 38 करोड़ रुपये था वही NBCCL का बिड 44 करोड़ रुपये निकला। बिड खुलने के बाद अधिकारी सकते में थे वजह साफ़ थी इस ठेके को NBCCL को देने के लिए अध्यक्ष स्तर के अधिकारी आलोक टंडन ने पहले ही अपने अधिनस्थ अधिकारियों से कह रखा था।। 

टेंडर खुलने के बाद सकते में आये अधीकारियों ने टेंडर NBCCL को देने के लिए नियमों और शर्तो में भरी बदलाव कर दिया। ब्रिक फ्लू को बदलकर ऊपर से लटके पाइप के फ्लू लगाकर व नीवं की मोटाई को बदलकर हल्का और पतला कर दिया गया था। अधिकारियों ने इस काम को NBCCL को देने और राजधानी में बैठे अपने आकाओं को खुश करने के लए वो सभी काम किये जिसने 24 मई 2010 को चिमनी गिरने की घटना को अंजाम दिया। यही से इस घोटाले क शुरुवात हो गई। इस ठेकों को NBCCL को देने के लिए अधिकारीयों ने एक उच्चस्तरीय साजिश को अंजाम दिया जिसमें दोबारा मेसर्स गैमन से रेट लिया गया, जबक तथ्यों के हिसाब से ये सह बात नहीं थी, इस ठेके के लिए सरकार में बैठे ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय और तात्कालिक अध्यक्ष आलोक टंडन ने अधिकारियों के ऊपर दबाव डालकर दोबारा टेंडर कराया और नए टेंडर में ये दिखाया गया कि मेसर्स नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) का रेट मेसर्स गैमन के रेट 38 करोड़ के सापेक्ष 31 करोड़ है। वही अधिकारियों की साजिश ने गैमन के मूल टेंडर को ही गायब करा दिया। 

ऊपर टेंडर की प्रक्रिया चल रही थी वह दूसरी तरफ नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) और ए स्वायल ने स्थलीय परिक्षण कर चिमनी के नीव का नक्शा बदल कर नई ड्राइंग प्रस्तुत कर दी, जिसमें 45.7 मीटर की गोलाकार रेक्ट 4. 57 मीटर मोटाई तथा 462 पाईल के साथ इस ठेके के सलाहकार मेसर्स नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (NTPC) को सौंप दी। इन सबके बीच जहा अभी तक परदे के पीछे रहकर तात्कालिक ऊर्जा मंत्री अपनी भूमिका निभा रहे थे वो भी प्रत्यक्ष शामिल हो गए। इस ठेके में लूट के लिए उन्होंने तात्कालिक CMD आलोक टंडन को अधकार सौंप दिए आलोक टंडन ने अपने तेज़ दिमाग का इस्तेमाल कर इस काम को अपने विश्वसनीय एन के गुप्ता जो मुख्य अभियंता के तौर पर कार्यरत थे उन्हें लगा दिया। चिमनी के काम और ठेके में आने वाली बड़ी रकम सबके हिस्से में आये इसलिए सभी ने मिलकर 4 -2-2008 को एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई जो नोएडा में हुई थी। 

इस मीटिंग में NTPC , NBCCL और मेसर्स स्टूप कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड मुंबई के अधिकारियों सहित मुख्य अभियंता एन के गुप्ता भी शामिल हुये। इस चिमनी का काम इंजिनयरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कांट्रेक्ट (EPC) के तहत होना था, इस वजह से सभी साजिशकर्ताओं ने मिलकर इस चिमनी की डिज़ाइन और ड्राइंग बदल दिया था। जिसकी मुख्य वजह करोडो का लेनदेन था। इन सभी के साजिश और अपने फायदे को बढाने के लिए इन लोगो ने चिमनी की मोटाई पूर्व में निर्धारित 462 पाईल के स्थान पर बदल कर 330 पाईल कर दी जिसकी ड्राइंग को बना इस चिमनी को असुरक्षित कर दिया जो सीधे तौर पर नियमों के विरुद्ध और साजिश के तहत किया गया। ये सभ काम लखनऊ में बैठे आलोक टंडन के इशारे पर हो रहा था। हालत ये थे की आलोक टंडन के खिलाफ कोई भी आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। आलोक टंडन के इशारे पर रची जा रही स साजिश में सरकार को 600 सौ करोड़ का नुकसान होने जा रहा था।

इस पूरी साजिश में और मेसर्स NBCCL को लाभ पहुंचाने के लिए इस कंपनी के प्राईस शेड्यूल को दिनांक 9-2-2007 को 9.16 प्रतिशत बढ़ा दिया गया जो हाथ से बढ़ाया गया इस बढ़ोतरी की वजह से मेसर्स NBCCL का लाभ 31 करोड़ से बढ़कर 34 करोड़ हो गया। परीछा तापीय परियोजना के महाप्रबंधक डी के अग्रवाल आलोक टंडन के मातहत होने क वजह से उनके ख़ास आदमियों में शुमार करते थे हर महीने आलोक टंडन द्वारा एक तय शुदा रकम डी के अग्रवाल आलोक टंडन को पहुंचाते थे। हालात ये थे की उधर चिमनी का काम चल रहा था इधर ये दोनों अधिकारी अपने अपने हिस्सों के पैसे अपनी तिजोरियों में बंद कर लेना चाहते थे। इसकी वजह साफ़ थी आलोक टंडन के ऊपर उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम का महाप्रबंधक रहते हुये 750 करोड़ के घोटाले में शामिल होने की बात सामने आ गई थी, जिसकी जांच चल रही थी। 

परीछा में 24-5-2010 को निर्माणाधीन चिमनी जिस दिन गिरी थी उस दिन तक चिमनी अभी पूर्ण नहीं हुई थी। लेकिन अधिकारियों और आलोक टंडन के आदेश पर बिना साईट अभियंता से सलाह लिए बिना 1 बजकर 48 मिनट पर चिमनी के ब्वायलर को लाईटअप कर दिया, अधिक गर्म होने से चिमनी से धुंआ निकलने लगा| तापमान इतना बढ़ा की चिमनी धराशाई हो गई और चिमनी की छाँव में बैठकर खाना खा रहे करीब 100 मजदूर दब गए जिनमे पांच की मौत हो गई। चिमनी गिरने की खबर प्रदेश क्या देश में भी आग की तरह फैली सरकार ने आनन फानन में जांच IIT दिल्ली को सौंपी, IIT को जांच सौंपे जाने से अलोक टंडन और उनके साथियों के चेहरे पर शिकन आई लेकिन ये थोड़े समय के लिए ही थी। 

IIT ने अपनी जांच करके रिपोर्ट उसी NBCCL कंपनी को सौंपी जिसको ठेका दिलाने के लिए प्रदेश स्तर के अधिकारियों ने साजिशो का दौर चलाया था। जांच रिपोर्ट में कंक्रीट की स्ट्रेंथ मानक से अधिक पाई गई निर्माण में प्रयोग की गई बालू सीमेंट और स्टील के साथ अन्य सामग्री मानक के अनुसार थी। इस पूरे प्रकरण में सरकारी उच्च पदों पर बैठे आलोक टंडन , डी के अग्रवाल , और एन के गुप्ता ये समझ गए थे की उनके दबाव की वजह से चिमनी से निकलने वाला धुंआ मानको के विपरीत था साथ ही डिजाइन की फेरबदल भी गलत थी। साथ ही हवा के दबाव को रोकने के लिए स्ट्रेक पंख लगाने थे जो उस समय तक नहीं लगाए गए थे। इस पूरी घटना ने NBCCL और NTPC द्वारा नियमो के विरुद्ध किये गए काम को उजागर करके रख दिया। 

चिमनी गिरने के बाद भी इन अधिकारियों के पैसे की हवस समाप्त नहीं हुई इन्होने चिमनी गिरने की घटना के तुरंत बाद हरदुआगंज चिमनी के लिए 8 करोड़ और परीछा की चिमनी के लिए 1 करोड़ का अतरिक्त भुगतान कराकर आपस में बाँट लिया। चिमनी गिरी तो NBCCL ने अपने नुक्सान की भरपाई करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम के लिए दावा किया जिसमें ये लिखा गया कि चिमनी गिरने की घटना मात्र एक दुर्घटना है और ये एक दैवीय आपदा। इस क्लेम को लेने के लिए कंपनी और सरकार ने विचित्र कारण बताये सरकार ने भी NBCCL को क्लेम लेने के लिए आनन फानन में एनओसी जारी कर दी जिसमें भी भारी लेनदेन हुआ था। कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से दिनाकं 29- 08-2011 को एनओसी जारी कर दी गई। 

आज हालत ये है कि मेसर्स NBCCL ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड पर 700 करोड़ का दावा किया है जबकि इसके पहले उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने जेनेरेशन लॉस होने की बात कहते हुए मेसर्स NBCCL पर 502 करोड़ का दावा किया है। विभाग के सूत्रों के अनुसार ये सारा खेल दिल्ली के डिस इन्वेस्टमेंट विभाग में बैठे वरिष्ठ आईएएस आलोक टंडन के इशारे पर हो रहा है। इस पूरे खेल में तात्कालिक बसपा सरकार के मंत्री नेता और बिजली विभाग को चलाने वाले बड़े अधिकारी शामिल है जिसमें आलोक टंडन इस घोटाले और चिमनी के गिरने का मुख्य सूत्रधार के तौर पर सामने आये है। 

आलोक टंडन और उनके सहयोगियों द्वारा किये कए इस घोटाले को उजागर करता हुआ एक पत्र दिनाक 8-8-2013 को जालौन के पूर्व सांसद भानु प्रताप सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के मुख्य प्रबंध निदेशक को भेजा है। इस पत्र में विस्तार से और साक्ष्यों के साथ तथ्य प्रस्तुत किये गए है जो इन आरोपियों को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। देखना ये है कि उत्तर प्रदेश सरकार और महामहिम आलोक टंडन और उनके साथियों पर क्या कार्रवाई करने के आदेश देते है।

84 मिनट भी नहीं चली चौरासी कोस की यात्रा

विश्व हिन्दू परिषद की 25 अगस्त से प्रस्तावित यात्रा को सपा सरकार ने रोक दिया| विहिप से लगायत भाजपा और हिंदूवादी संगठन के नेताओ को उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार ने जगह जगह गिरफ्तार किया। विहिप के नेताओं पर जहां प्रदेश की खुफिया पुलिस ने पहले से नज़र जमा रखी थी, वही सिविल पुलिस इन नेताओं की धर पकड़ में लगातार लगी रही। अशोक सिंघल, प्रवीण तोगडिया, लल्लू सिंह, जैसे नेताओ को पुलिस में हिरासत में लेकर 14 दिनों के लिए जेल में भेज दिया। इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकार की जीत हुई| वही विहिप की प्रस्तावित 84 कोसी यात्रा 84 मिनट भी न टिक सकी। 

24 अगस्त की शाम उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए उथल पुथल वाली शाम थी, विहिप के सभी नेता उत्तर प्रदेश सरकार के निशाने पर थे, उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़े पैमाने पर इन नेताओं के यूपी प्रवेश से पहले ही रोक लगाने की तैयारी कर ली थी। अशोक सिंघल और बाहरी प्रदेशों से आने वाले नेताओं को प्रदेश की सीमा से बाहर रोकने के पुख्ता इंतजाम किये गए थे वही अयोध्या के उन मठो और आश्रमों को पुलिस ने अपने रडार पर ले रखा था जो अयोध्या आन्दोलन के केंद्र हुआ करते थे। पुलिस को ये भी खबर लगी थी, की पुलिस और खुफिया अभिसूचना इकाई को चकमा देकर कुछ विहिप कार्यकर्ता और बड़े नेता अयोध्या पहुँच चुके है जिनमे प्रवीण तोगडिया का भी नाम शामिल था। 

विहिप ने उस मौखडा गाँव से इस यात्रा की शुरुवात करने की तैयारी की थी जहां पर चौदह साल तक भरत ने भगवान राम का खड़ाऊ रखकर राज चलाया था। इस यात्रा में 200 साधुओ का दल चलता जो एक पडाव से दूसरे पड़ाव तक पहुँच कर इस यात्रा को दूसरे जत्थे को सौंप देता। पुलिस ने इस यात्रा को प्रदेश की सपा सरकार के इशारे पर पूरी तरह से विफल करने की तैयारी कर ली थी। अशोक सिंघल के लखनऊ पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर ही रोक लिया और उन्हें दिल्ली वापस जाने पर मजबूर कर दिया। अशोक सिंघल ने रोकी गई यात्रा का सारा इल्जाम प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और सपा के मुस्लिम चेहरे कहे जाने वाले आज़म खान पर लगाया। अशोक सिंघल ने साफ़ कहा कि इस यात्रा को हरी झंडी खुद मुलायम सिंह यादव ने दी थी लेकिन आज़म खान के बीच में कूदने से मुलायम और प्रदेश सरकार अपने वादे से मुकर गई। 

अयोध्या में प्रवीण तोगडिया, पूर्व विधायक लल्लू सिंह, राम विलास वेदांती, परमहंस दास जैसे संतो को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया वही सरयू नदी के उस तट पर भी पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किया जहा से रामभक्त जल भरकर इस यात्रा की शुरुवात करने वाले थे। विहिप की इस यात्रा की हवा निकलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 6 जिलों में ऐसी किसी भी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगा दी जिससे माहौल खराब होने की संभावना हो। उत्तर प्रदेश सरकार ने फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, बस्ती, बलरामपुर, गोंडा और बाराबंकी जिलों में धारा 144 लागू कर दी। सरकार के इस फैसले से इन जिलों में विहिप की चौरासी कोसी क्या अब कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा का आयोज़न बैन हो गया। 

विहिप की इस यात्रा से प्रदेश में एक बार फिर रामजन्म भूमि मुद्दा गर्म हो गया जहां ये यात्रा पहले सिर्फ विहिप की एक धार्मिक यात्रा लेकर प्रचारित की गई थी, वही बाद में इसने राजनीतिक रूप ले लिया। भाजपा ने भी इस यात्रा के समर्थन में बोलना शुरू किया। जबकि विश्व हिन्दू परिषद के संयोज़क अशोक सिंघल ने साफ़ किया की ये कोई भी राजनीतिक यात्रा नहीं थी, और ना ही इस यात्रा से किसी को राजनीतिक लाभ पहुँचाने वाला था। लेकिन अशोक सिंघल एक बात कहते है कि उनकी इस यात्रा स एक मकसद हल होने वाला था, वो था की विहिप 300 राम भक्तों को चुनाव के माध्यम से चुन कर संसद भेजना चाहती थी ताकि रामलल्ला तम्बू से निकल कर भव्य मंदिर में विराजमान हो सके।

चौरासी कोसी यात्रा का जो मकसद था उसे विहिप पूरा नहीं कर सकी लेकिन इस यात्रा के रोक कर प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी ने उन मुस्लिम वोटो को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश जरुर कर ली जो चुनाव की घोषणा और केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से कांग्रेस के पक्ष में जा सकती थी। प्रदेश में बीते दो दिनों से इस यात्रा को लेकर चले हाई ड्रामें के बाद दोनों पक्ष अपने अपने मतदाताओं को ये सन्देश देने में जरुर कामयाब रहे की वो अपने मतदाताओं के हित की रक्षा के लिए वो सब करेंगे जो उन्हें केंद्र की सता के करीब ले जाए। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम में विहिप को पहली चोट प्रदेश की अखिलेश सरकार ने दे दी है देखने वाली बात ये होगी की विहिप इस बात को अपने लोगो तक कैसे पहुंचा कर आने वाले समय में फायदा उठाती है।

Monday, 26 August 2013

परीछा चिमनी काण्ड का जवाब कौन देगा

बसपा सरकार के दौरान 24 मई 2010 को परीछा थर्मल पावर कारपोरेशन झाँसी में गिरी निर्माणाधीन चिमनी ने उस समय की राजनीति को गर्म कर दिया था। तात्कालिक बहुजन समाज पार्टी की सरकार की मुखिया मायावती ने इस घटना में दोषी कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे, NBCCL ही परीछा में बन रही इस 263 फीट ऊँची चिमनी का निर्माण कर रही थी। चिमनी गिरने के से उस घटना में पांच मजदूरों की मौत हुई थी वही करीब सौ मजदूर घायल हो गए थे। मायावती ने तात्कालिक ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय और पावर कारपोरेशन के एमडी नवनीत सहगल को इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे। 

इस घटना का एक पक्ष लेकिन पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा था वो सिर्फ बिजली विभाग का जिम्मा संभाले तात्कालिक मंत्री , मुख्य प्रबंध निदेशक और यूपी थर्मल पावर जेनेरेशन कॉर्पोरेशन के चेयरमैन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अलोक टंडन जानते थे। इन सभी जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं और अधिकारियो ने लाशो का भी सौदा करने में गुरेज नहीं की। इस चिमनी के निर्माण के टेंडर से लेकर इसके गिरने तक और जांच में भी खेल हुआ। अधिकारियों ने अपनी जेबे भरने और अपने उन लोगो को फ़ायदा पहुंचाने के लिए चिमनी के गिरने के बाद इंश्योरेंस क्लेम को करा कर पैसे की बन्दर बाँट करने क भी कोशिश की। 

इस पूरे काण्ड में चिमनी का निर्माण करने वाली कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) और नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन और तत्काल्क बसपा सरकार में बैठे नेताओं और बड़े अधिकारियों ने करीब 600 करोड़ रुपयों की उत्पादन क्षति के साथ पूरे मामले में एक आपराधिक साजिश रची और टेंडर में भी घोटाले को अंजाम दिया था। इस चिमनी के ठेके को पाने के लिए दो बड़ी निर्माण कंपनियों ने टेंडर डाले थे जिसमें मेसर्स गैमन और मेसर्स NBCCL नई दिल्ली के बिड पड़े थे। जब टेंडर खोला गया तो गैमन का न्यूनतम बिड 38 करोड़ रुपये था वही NBCCL का बिड 44 करोड़ रुपये निकला। बिड खुलने के बाद अधिकारी सकते में थे वजह साफ़ थी इस ठेके को NBCCL को देने के लिए अध्यक्ष स्तर के अधिकारी आलोक टंडन ने पहले ही अपने अधिनस्थ अधिकारियों से कह रखा था।। 

टेंडर खुलने के बाद सकते में आये अधीकारियों ने टेंडर NBCCL को देने के लिए नियमों और शर्तो में भरी बदलाव कर दिया। ब्रिक फ्लू को बदलकर ऊपर से लटके पाइप के फ्लू लगाकर व नीवं की मोटाई को बदलकर हल्का और पतला कर दिया गया था। अधिकारियों ने इस काम को NBCCL को देने और राजधानी में बैठे अपने आकाओं को खुश करने के लए वो सभी काम किये जिसने 24 मई 2010 को चिमनी गिरने की घटना को अंजाम दिया। यही से इस घोटाले क शुरुवात हो गई। इस ठेकों को NBCCL को देने के लिए अधिकारीयों ने एक उच्चस्तरीय साजिश को अंजाम दिया जिसमें दोबारा मेसर्स गैमन से रेट लिया गया, जबक तथ्यों के हिसाब से ये सह बात नहीं थी, इस ठेके के लिए सरकार में बैठे ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय और तात्कालिक अध्यक्ष आलोक टंडन ने अधिकारियों के ऊपर दबाव डालकर दोबारा टेंडर कराया और नए टेंडर में ये दिखाया गया कि मेसर्स नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) का रेट मेसर्स गैमन के रेट 38 करोड़ के सापेक्ष 31 करोड़ है। वही अधिकारियों की साजिश ने गैमन के मूल टेंडर को ही गायब करा दिया। 

ऊपर टेंडर की प्रक्रिया चल रही थी वह दूसरी तरफ नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) और ए स्वायल ने स्थलीय परिक्षण कर चिमनी के नीव का नक्शा बदल कर नई ड्राइंग प्रस्तुत कर दी, जिसमें 45.7 मीटर की गोलाकार रेक्ट 4. 57 मीटर मोटाई तथा 462 पाईल के साथ इस ठेके के सलाहकार मेसर्स नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (NTPC) को सौंप दी। इन सबके बीच जहा अभी तक परदे के पीछे रहकर तात्कालिक ऊर्जा मंत्री अपनी भूमिका निभा रहे थे वो भी प्रत्यक्ष शामिल हो गए। इस ठेके में लूट के लिए उन्होंने तात्कालिक CMD आलोक टंडन को अधकार सौंप दिए आलोक टंडन ने अपने तेज़ दिमाग का इस्तेमाल कर इस काम को अपने विश्वसनीय एन के गुप्ता जो मुख्य अभियंता के तौर पर कार्यरत थे उन्हें लगा दिया। चिमनी के काम और ठेके में आने वाली बड़ी रकम सबके हिस्से में आये इसलिए सभी ने मिलकर 4 -2-2008 को एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई जो नोएडा में हुई थी। 

इस मीटिंग में NTPC , NBCCL और मेसर्स स्टूप कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड मुंबई के अधिकारियों सहित मुख्य अभियंता एन के गुप्ता भी शामिल हुये। इस चिमनी का काम इंजिनयरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कांट्रेक्ट (EPC) के तहत होना था, इस वजह से सभी साजिशकर्ताओं ने मिलकर इस चिमनी की डिज़ाइन और ड्राइंग बदल दिया था। जिसकी मुख्य वजह करोडो का लेनदेन था। इन सभी के साजिश और अपने फायदे को बढाने के लिए इन लोगो ने चिमनी की मोटाई पूर्व में निर्धारित 462 पाईल के स्थान पर बदल कर 330 पाईल कर दी जिसकी ड्राइंग को बना इस चिमनी को असुरक्षित कर दिया जो सीधे तौर पर नियमों के विरुद्ध और साजिश के तहत किया गया। ये सभ काम लखनऊ में बैठे आलोक टंडन के इशारे पर हो रहा था। हालत ये थे की आलोक टंडन के खिलाफ कोई भी आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। आलोक टंडन के इशारे पर रची जा रही स साजिश में सरकार को 600 सौ करोड़ का नुकसान होने जा रहा था। 

इस पूरी साजिश में और मेसर्स NBCCL को लाभ पहुंचाने के लिए इस कंपनी के प्राईस शेड्यूल को दिनांक 9-2-2007 को 9.16 प्रतिशत बढ़ा दिया गया जो हाथ से बढ़ाया गया इस बढ़ोतरी की वजह से मेसर्स NBCCL का लाभ 31 करोड़ से बढ़कर 34 करोड़ हो गया। परीछा तापीय परियोजना के महाप्रबंधक डी के अग्रवाल आलोक टंडन के मातहत होने क वजह से उनके ख़ास आदमियों में शुमार करते थे हर महीने आलोक टंडन द्वारा एक तय शुदा रकम डी के अग्रवाल आलोक टंडन को पहुंचाते थे। हालात ये थे की उधर चिमनी का काम चल रहा था इधर ये दोनों अधिकारी अपने अपने हिस्सों के पैसे अपनी तिजोरियों में बंद कर लेना चाहते थे। इसकी वजह साफ़ थी आलोक टंडन के ऊपर उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम का महाप्रबंधक रहते हुये 750 करोड़ के घोटाले में शामिल होने की बात सामने आ गई थी, जिसकी जांच चल रही थी। 

परीछा में 24-5-2010 को निर्माणाधीन चिमनी जिस दिन गिरी थी उस दिन तक चिमनी अभी पूर्ण नहीं हुई थी। लेकिन अधिकारियों और आलोक टंडन के आदेश पर बिना साईट अभियंता से सलाह लिए बिना 1 बजकर 48 मिनट पर चिमनी के ब्वायलर को लाईटअप कर दिया, अधिक गर्म होने से चिमनी से धुंआ निकलने लगा| तापमान इतना बढ़ा की चिमनी धराशाई हो गई और चिमनी की छाँव में बैठकर खाना खा रहे करीब 100 मजदूर दब गए जिनमे पांच की मौत हो गई। चिमनी गिरने की खबर प्रदेश क्या देश में भी आग की तरह फैली सरकार ने आनन फानन में जांच IIT दिल्ली को सौंपी, IIT को जांच सौंपे जाने से अलोक टंडन और उनके साथियों के चेहरे पर शिकन आई लेकिन ये थोड़े समय के लिए ही थी। 

IIT ने अपनी जांच करके रिपोर्ट उसी NBCCL कंपनी को सौंपी जिसको ठेका दिलाने के लिए प्रदेश स्तर के अधिकारियों ने साजिशो का दौर चलाया था। जांच रिपोर्ट में कंक्रीट की स्ट्रेंथ मानक से अधिक पाई गई निर्माण में प्रयोग की गई बालू सीमेंट और स्टील के साथ अन्य सामग्री मानक के अनुसार थी। इस पूरे प्रकरण में सरकारी उच्च पदों पर बैठे आलोक टंडन , डी के अग्रवाल , और एन के गुप्ता ये समझ गए थे की उनके दबाव की वजह से चिमनी से निकलने वाला धुंआ मानको के विपरीत था साथ ही डिजाइन की फेरबदल भी गलत थी। साथ ही हवा के दबाव को रोकने के लिए स्ट्रेक पंख लगाने थे जो उस समय तक नहीं लगाए गए थे। इस पूरी घटना ने NBCCL और NTPC द्वारा नियमो के विरुद्ध किये गए काम को उजागर करके रख दिया। 

चिमनी गिरने के बाद भी इन अधिकारियों के पैसे की हवस समाप्त नहीं हुई इन्होने चिमनी गिरने की घटना के तुरंत बाद हरदुआगंज चिमनी के लिए 8 करोड़ और परीछा की चिमनी के लिए 1 करोड़ का अतरिक्त भुगतान कराकर आपस में बाँट लिया। चिमनी गिरी तो NBCCL ने अपने नुक्सान की भरपाई करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम के लिए दावा किया जिसमें ये लिखा गया कि चिमनी गिरने की घटना मात्र एक दुर्घटना है और ये एक दैवीय आपदा। इस क्लेम को लेने के लिए कंपनी और सरकार ने विचित्र कारण बताये सरकार ने भी NBCCL को क्लेम लेने के लिए आनन फानन में एनओसी जारी कर दी जिसमें भी भारी लेनदेन हुआ था। कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से दिनाकं 29- 08-2011 को एनओसी जारी कर दी गई। 

आज हालत ये है कि मेसर्स NBCCL ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड पर 700 करोड़ का दावा किया है जबकि इसके पहले उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने जेनेरेशन लॉस होने की बात कहते हुए मेसर्स NBCCL पर 502 करोड़ का दावा किया है। विभाग के सूत्रों के अनुसार ये सारा खेल दिल्ली के डिस इन्वेस्टमेंट विभाग में बैठे वरिष्ठ आईएएस आलोक टंडन के इशारे पर हो रहा है। इस पूरे खेल में तात्कालिक बसपा सरकार के मंत्री नेता और बिजली विभाग को चलाने वाले बड़े अधिकारी शामिल है जिसमें आलोक टंडन इस घोटाले और चिमनी के गिरने का मुख्य सूत्रधार के तौर पर सामने आये है। 

आलोक टंडन और उनके सहयोगियों द्वारा किये कए इस घोटाले को उजागर करता हुआ एक पत्र दिनाक 8-8-2013 को जालौन के पूर्व सांसद भानु प्रताप सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के मुख्य प्रबंध निदेशक को भेजा है। इस पत्र में विस्तार से और साक्ष्यों के साथ तथ्य प्रस्तुत किये गए है जो इन आरोपियों को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। देखना ये है कि उत्तर प्रदेश सरकार और महामहिम आलोक टंडन और उनके साथियों पर क्या कार्रवाई करने के आदेश देते है।

Sunday, 25 August 2013

चेन्नई एक्सप्रेस' से तेज दौड़ पायेगी सत्याग्रह, कृष-3 या बेशर्म

शाहरुख़ खान अभिनीत और रोहित शेट्टी निर्देशित 'चेन्नई एक्सप्रेस' यूटीवी मोशन पिक्चर्स और रेड चिलिज एंटर्टेन्मेंट का 75 करोड़ रुपये का संयुक्त प्रस्तुतिकरण है। ईद के मौके पर रिलीज हुई यह फिल्म तेजी से 100 करोड़ के क्लब में शामिल हो गई।

कहा जाता है रिकार्ड टूटने के लिए ही बनता हैं। सफलता की नया मापदंड तय करने वाले बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान की 'चेन्नई एक्सप्रेस' को पछाड़ने को अब अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, ऋतिक रोशन और आमिर खान जैसे बड़े नामों पर नजरें टिकी हैं। बता दें अपने पहले सप्ताह में ही 'चेन्नई एक्सप्रेस' ने 156.70 करोड़ रुपये की भारी कमाई कर ली। 

सफलता का आनंद ले रहे 47 वर्षीय शाहरुख भी मानते हैं कि रिकार्ड मायने नहीं रखते चूंकि कुछ महीनों में वो 'बराबर' या 'ऊंचे' हो जाएंगे। अगर 'सत्याग्रह' 30 अगस्त को आ रही है तो साल के चौथे हिस्से में आने वाली रणबीर कपूर की 'बेशर्म', ऋतिक की 'कृष 3' और आमिर की 'धूम 3' भी प्रतीक्षित-चर्चित फिल्में हैं।

हालांकि इन चारों फिल्मों के बजट का अभी खुलासा नहीं किया गया है लेकिन एक अंतरंगी के अनुसार प्रकाश झा की राजनीतिक सनसनी 'सत्याग्रह' का अनुमानित खर्च 40 करोड़ रुपये है। जबकि अभिनव कश्यप की हास्यमय रचना का बजट 50 करोड़ से ऊपर होगा। स्पेशल इफेक्ट्स से भरपूर राकेश रोशन की फिल्म का बजट 90 करोड़ रुपये के करीब होगा।

संभावना जताई गई थी कि 100 करोड़ की फिल्मों के लिए मशहूर अक्षय कुमार की 'वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा' 'चेन्नई एक्सप्रेस' को पीछे छोड़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। डीटी सिनेमाज के निदेशक-बिजनेस हेड अनंत वर्मा को 'कृष 3' से और 'धूम 3' से बड़ी उम्मीदें हैं। दोनों ही फिल्में बॉलीवुड की अति सफलतम फ्रैंचाइज से हैं।

वर्मा का कहना है, मैं धूम 3 और कृष 3 के बहुत अच्छा करने की उम्मीद कर रहा हूं चूंकि ये सभी तरह के लोगों और आयुवर्ग द्वारा देखी जा सकती हैं।

जींस पहन कर गांधी की 'खादी' बेचते है

आधुनिकता के इस दौर में खादी वस्त्रों की मांग भी खास लोगों तक ही सिमट कर रह गई है। खादी के अत्यधिक महंगे कपड़ों से जहां आम आदमी मुंह फेरे हुए हैं, वहीं विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी खादी वस्त्रों को निष्ठा के साथ अपने पहनावे में नहीं लागू कर पा रहे हैं। वे भी जींस की पैंट और टेरीकॉटन कपड़ों को तरजीह दे रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश शासन ने बैठकों एवं विभागीय कार्यो में इस प्रकार के कपड़े पहनने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस संबंध में सभी को शासनादेश लागू कर निर्देश भी दिया गया है कि वे इसका सख्ती से पालन करें, अन्यथा उन पर कार्रवाई हो सकती है, फिर भी वे जींस पर फिदा हैं। 

प्रदेश में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड से संबंधित हजारों कर्मचारी हंै। इसके अलावा खादी की विभिन्न संस्थाएं भी संचालित हैं लेकिन विभिन्न स्थानों पर संचालित दुकानें एवं संस्थाओं के कर्मचारी एवं अधिकारी भी खादी वस्त्रों से अपना मुंह मोड़ने लगे हैं। खादी वस्त्रों के साथ ही जींस की पैंट एवं टेरीकाटन वस्त्रों को पहनकर विभागीय कार्य किए जा रहे हैं। 

यही नहीं, विभागीय बैठकों में भी अब गैर खादी के कपड़े पहने ही कर कोई नजर आता है। ऐसे में शासन ने खादी वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों एवं अधिकारियों को सबसे पहले अधिक से अधिक खादी वस्त्रों के प्रयोग करने की नसीहत दी है। 

प्रमुख सचिव खादी ग्रामोद्योग ने सभी जनपदों में इस संबंध में शासनादेश लागू कर सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को खादी के वस्त्र पहनकर ही विभागीय कार्य करने का निर्देश दिया है। उन्होंने खादी को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले खुद पर इस नियम को लागू करने का निर्देश दिया है। इसके बाद जनपद स्तर पर सभी कर्मचारियों को इस शासनादेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दे दिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, विभागीय कार्य के दौरान यदि कोई जींस की पैंट या टेरीकॉटन वस्त्रों को पहने हुए पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

Wednesday, 21 August 2013

मुलायम सिंह जी क्या बहुसंख्यक गरीब नहीं ?

 उत्तर प्रदेश के 30 सरकारी विभागों के 85 योजनाओं में अब प्रदेश के मुस्लिमों के लिए अखिलेश सरकार ने 20 प्रतिशत कोटा की घोषणा करके बड़ी राजनीतिक गति हासिल कर ली है। लोकसभा चुनावों से पहले अखिलेश सरकार के इस मास्टर स्ट्रोक ने प्रदेश में राजनीति करने वाली पार्टियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है, अखिलेश सरकार के इस फैसले से मुस्लिम राजनीति करने वाले दल भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार को बाध्य हो गए है। 

अखिलेश सरकार के इस फैसले से जहाँ एक तरफ मुस्लिम तुष्टिकरण को साबित कर दिया है वही, अन्य जातियों में गुस्सा भी भर दिया है। सरकार ने अपने इस फैसले में कहा है कि ये योजना उन्ही इलाकों में लागू होगी जहां की आबादी में मुस्लिम परिवारों की संख्या 25 प्रतिशत होगी। 

सरकार का ये फैसला इस ओर भी इशारा करता है कि सरकार अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए समाज में विभेद पैदा कर रही है। सरकार को अब शायद समाज में हिन्दू वर्ग के वो गरीब नहीं दिखाई दे रहे है जिन्हें अल्पसंख्यक समाज की तरह ही विकास और योजनाओं में भागीदारी की जरुरत है। अखिलेश सरकार के इस फैसले ने समाज के एक बड़े वर्ग में गुस्सा भरने का काम किया है। 

अखिलेश सरकार और समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे है, इन आरोपों को कैबिनेट के इस फैसले ने सही साबित कर दिया है। अखिलेश सरकार ने अपने इस फैसले से उस तबके के लोगो को निराशा कर दिया जिन्हें प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अपना जीवन स्तर और अपने क्षेत्र में विकास की उम्मीदे लगा रखी थी। 

प्रदेश में 2001 की जनगणना के अनुसार, करीब 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक है, जिनमे मुस्लिम धर्म को मानने वाले करीब 19 प्रतिशत हैं, सरकार ने अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल कर अपने उस बड़े वोट बैंक को खुश कर दिया जिसके सहारे वो आने वाले चुनाव और भविष्य की राजनीति करना चाहती है। 

अखिलेश सरकार के इस फैसले ने प्रदेश के 80 प्रतिशत आबादी को उनके भाग्य के सहारे छोड़ दिया जबकि राजधर्म की परिभाषा ये कहती है, राज में सभी वर्ग के लोगो का विकास सामान तौर पर होना चाहिये, राज करने वाली पार्टी और उसके अगुवा की नज़रों में कोई अलग नहीं होता।

2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जनसंख्या पर नज़र डाली जाए तो यहाँ की आबादी करीब 20 करोड़ है, इस आबादी में अल्पसंख्यक 4 करोड़ है उसमें मुस्लिम धर्म को मानने वाले करीब 3. 60 करोड़ है सरकार ने इसी वोट बैंक को साधने के लिए इस फैसले को किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस फैसले को सच्चर कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सही ठहराते हुये अब केंद्र को दबाव में लाने की वकालत भी शुरू कर दी है। 

सरकार के इस फैसले को उन्होंने अपना चुनावी वादा पूरा करने वाला बताया है। अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने चुनाव के घोषणा पत्र में ये वादा किया था की अल्पसंख्यकों को आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ाने के वादे पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने सच्चर और रंगनाथ मिश्रा कमेटियों की रिपोर्ट को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 

सरकार ने इस फैसले को लेने में प्रदेश के जातीय समीकरण का भरपूर लाभ उठाया हैं। प्रदेश के जातिगत ढाँचे पर नज़र डाली जाए तो उत्तर प्रदेश का जातिगति ढांचा अन्य प्रदेशो से विपरीत परिस्थतियों वाला है यही वजह है कि भारत में जाति की राजनीति की नीवं डालने वाला उत्तर प्रदेश आज अलग अलग जातियों और समुदायों में बंट गया हैं। 

समाजवादी पार्टी ने प्रदेश के जातिगत ढाँचे का इस्तेमाल करने के लिए अपने तरकश से वो तीर निकाला है जिसके आगे सभी पार्टियां निरुत्तर हो गई है। प्रदेश की जनसंख्या के हिसाब से अगर सभी जातियों का अलग अलग बंटवारा किया जाए तो सरकार के इस फैसले के पीछे की सोच खुद ब खुद साफ़ हो जाती है। 

प्रदेश की कुल जनसंख्या 20 करोड़ के आस पास है जिसमें अल्पसंख्यक करीब 20 प्रतिशत यानि 4 करोड़ , पिछड़ी जातियाँ 24 प्रतिशत यानि करीब 5 करोड़ , वही सामान्य जातियां जिसमें ब्राहमण , ठाकुर , बनिया और कायस्थ कुल 28 प्रतिशत यानि लगभग 6 करोड़ वहीँ 28 प्रतिशत दलित और अन्य जातियाँ शामिल है। 

समाजवादी पार्टी को अपने पिछड़े वोट बैंक पर पूरा भरोसा है की वो कही नहीं जायेंगे यह वजह है की अखिलेश सरकार ने एक बड़े वोट बैंक को साधने के लिए प्रदेश की अन्य जातियों को हाशिये पर डाल दिया। सरकार के इस फैसले ने आम जन को सोचने पर मजबूर कर दिया है क सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति क वजह से आज प्रदेश के विकास में भी जाति और धर्म को ध्यान में रखा जायेगा। 

सरकार का ये फैसला उन योजनाओं के लिए है जहाँ पर विकास कार्य होने है। इसमें अल्पसंख्यक इलाकों में कोटे के हिसाब से हैंडपंप लगाना, आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना, संपर्क मार्ग और अन्य ग्रामीण अवस्थापानाओ के निर्माण के अलावा ऐसी योजनाये जिसमें व्यक्ति विशेष को आर्थिक विकास या लाभ का मौका मिले। सामाजिक पेंशन योजनाये, ग्रामीण एवं शहरी गरीबों के लिए आवास, कन्या विद्या धन, निशुल्क बोरिंग, जैसी योजनाये भी दायरे में है। 

सरकार के इस फैसले और उपरोक्त योजनाओं का लाभ क्या केवल अल्पसंख्यक समाज के लोगों को मिलना चाहिए, बहुसंख्यक समाज में ऐसे इलाके और उन इलाकों में रहने वाले गरीब लोग नहीं है जिनके लिए भी इन योजनाओं का उतना ही महत्व हो जितना अल्पसंख्यको के लिए। आज लोगो का सवाल ये है कि अखिलेश यादव की सोच अन्य राजनीतिक पार्टियों की सोच की तरह क्यों हो गई कि वो समाज में फुट डालकर राज करना चाहते है। 

सन 2002 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री के एक बयान ने भारतीय राजनीति को नई बहस दे दी थी, पूर्व प्रधानमंत्री ने दंगो के ऊपर एक मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा था "आपने राजधर्म नहीं निभाया" यही बयान आज अखिलेश यादव के ऊपर भी लागू हो रहा है साथ ही जनता ये सवाल भी कर रही है क्या खोटे के हक़दार सिर्फ अल्पसंख्यक है, बहुसंख्यकों में गरीब नहीं? 

मंदिर पर राजनीति की फिर शुरुवात

सपा सरकार और हिंदुत्ववादी संगठन एक बार फिर आमने सामने आने की तैयारी में है। विश्व हिन्दू परिषद की प्रस्तावित चौरासी कोसी यात्रा पर प्रतिबन्ध लागने के बाद प्रदेश सरकार ने अयोध्या से सटी 6 जिलों की सीमाओं को भी सील करने के आदेश जारी कर दिए है।

प्रदेश की अखिलेश सरकार इन जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रही है, साथ ही 25 अगस्त से पहले इन जिलों में सुरक्षा को बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। सरकार ने फैजाबाद सहित उससे सटी 6 जिलों की सीमाओं को सील करने के आदेश भी जारी कर दिए है।

प्रदेश की अखिलेश सरकार इस चौरासी कोसी यात्रा के मद्दे नज़र कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती इस वजह से सरकार ने प्रदेश की सीमाओं से लगे अन्य प्रदेशो की सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ा दी है। साथ ही जरुरत के हिसाब से इन सीमाओं को सील करने के दिशा निर्देश भी जारी कर दिए है।

प्रदेश सरकार ने बीते सोमवार को विहिप की प्रस्तावित चौरासी कोसी परिक्रमा पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। अखिलेश सरकार ने प्रस्तावित चौरासी
कोसी यात्रा को नई परम्परा बताते हुये कहा सरकार किसी नई यात्रा की अनुमति नहीं दे सकती जिससे साम्प्रादायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो।

सरकार ने इस प्रतिबन्ध से भड़के साधू संतो को रोकने के लिए व्यापक प्रबंध करने के भी निर्देश दिए है, सरकार ने परिवहन, रेल , और हवाई मार्ग से आने वाले साधू संतो की चेकिंग के आदेश दिए है । प्रदेश सरकार इस यात्रा को रोकने के लिए कमर कस चुकी है वही साधू संत भी अयोध्या पहुँचने की तैयारी में है।

इस चौरासी कोसी यात्रा पर प्रतिबन्ध से भड़के विहिप के संयोज़क अशोक सिंघल ने साफ़ किया है कि सरकार लाख कोशिश कर ले ये यात्रा होकर रहेगी। वही विहिप ने प्रदेश सरकार के ऊपर ये भी आरोप लगाया कि प्रदेश की अखिलेश सरकार मुस्लिम समुदाय के हाथों की कठपुतली बन गई है।

चौरासी कोसी यात्रा का ऐलान कर जहां विहिप ने एक बार फिर मंदिर आन्दोलन को हवा दे दी। वही, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा भी इस मुद्दे पर विहिप के साथ कड़ी हो गई है। इस यात्रा के दौरान विहिप 374 किलोमीटर की यात्रा 6 जिलों से निकलने वाली थी, ये जिले है बस्ती , फैजाबाद ,
अम्बेडकरनगर, बाराबंकी बलरामपूर और गोंडा जो की मंदिर आन्दोलन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते है।

बहरहाल इस मुद्दे पर मुलायम सिंह यादव और विश्व हिन्दू परिषद् ने राजनीति की नई जमीन तैयार कर दी है, इस मुद्दे पर प्रदेश ही क्या देश की राजनीति भी उबाल पर है। वही, अगर मामला गर्म होता है तो ये तय है की
वोटो का धुर्विकरण भी हो सकता है जिसमें फायदा किसका है ये किसी से छुपा नहीं है।

भारतीय सेना की शान बना हरक्यूलिस

भारत ने लद्दाख दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी पर हरक्यूलिस विमान को सफलता पूर्वक उतार कर चाइना को अपनी सामरिक ताकत का अहसास करा दिया है। हरक्यूलिस के लद्दाख क्षेत्र में उतरने से भारत को इस क्षेत्र में सेना के साजो सामान और हथियार के साथ रसद भेजने में आसानी हो जायेगी। 

C-130 J सुपर हरक्यूलिस चार इंजनो वाला वो विमान है, जो सेना की शान कहा जा सकता, हरक्यूलिस अपनी उड़ान के दौरान 20 टन तक सेना के साजो सामान और हथियार ले जा सकता है। 

बीते महीने भारत चाइना बार्डर पर उत्पन्न हुये तनाव के बाद हरक्यूलिस के दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी पर उतरने से भारतीय सेना को अब इस क्षेत्र में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

सेना इससे पूर्व इस क्षेत्र में हेलीकाप्टर से सामान भेजती थी, दौलत बेग ओल्डी की हवाई पट्टी विश्व की सबसे ऊँचे स्थान पर स्थित हवाई पट्टी है, हरक्यूलिस की खासियत यही है कि वो छोटी हवाई पट्टियों पर भी उतर सकता है। 

हरक्यूलिस की मौजूदगी से वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अब पहले से बड़ी तादाद में सैनिकों को लाया-ले जाया सकेगा और पहले से अधिक रसद की आपूर्ति संभव हो सकेगी। इस उपलब्धि से सशस्त्र बल बड़े विमानों को सैनिकों को लाने-ले जाने, रसद पहुंचाने और संचार नेटवर्क सुधारने में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कदम लद्दाख में तैनात सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में भी काफी मददगार साबित हो सकता है।

हरक्यूलिस का इस्तेमाल अमेरिकन सेना भी करती है। चार इंजन वाले इस जहाज ने दौलत बेग ओल्डी पर उतर कर भारतीय सेना के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

भारतीय सेना की शान बना हरक्यूलिस

भारत ने लद्दाख दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी पर हरक्यूलिस विमान को सफलता पूर्वक उतार कर चाइना को अपनी सामरिक ताकत का अहसास करा दिया है। हरक्यूलिस के लद्दाख क्षेत्र में उतरने से भारत को इस क्षेत्र में सेना के साजो सामान और हथियार के साथ रसद भेजने में आसानी हो जायेगी। 

C-130 J सुपर हरक्यूलिस चार इंजनो वाला वो विमान है, जो सेना की शान कहा जा सकता, हरक्यूलिस अपनी उड़ान के दौरान 20 टन तक सेना के साजो सामान और हथियार ले जा सकता है। 

बीते महीने भारत चाइना बार्डर पर उत्पन्न हुये तनाव के बाद हरक्यूलिस के दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी पर उतरने से भारतीय सेना को अब इस क्षेत्र में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

सेना इससे पूर्व इस क्षेत्र में हेलीकाप्टर से सामान भेजती थी, दौलत बेग ओल्डी की हवाई पट्टी विश्व की सबसे ऊँचे स्थान पर स्थित हवाई पट्टी है, हरक्यूलिस की खासियत यही है कि वो छोटी हवाई पट्टियों पर भी उतर सकता है। 

हरक्यूलिस की मौजूदगी से वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अब पहले से बड़ी तादाद में सैनिकों को लाया-ले जाया सकेगा और पहले से अधिक रसद की आपूर्ति संभव हो सकेगी। इस उपलब्धि से सशस्त्र बल बड़े विमानों को सैनिकों को लाने-ले जाने, रसद पहुंचाने और संचार नेटवर्क सुधारने में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कदम लद्दाख में तैनात सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में भी काफी मददगार साबित हो सकता है।

हरक्यूलिस का इस्तेमाल अमेरिकन सेना भी करती है। चार इंजन वाले इस जहाज ने दौलत बेग ओल्डी पर उतर कर भारतीय सेना के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

Tuesday, 20 August 2013

ये "मुलायम" की सियासत है

चुनाव करीब है, उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्व हिन्दू परिषद की प्रस्तावित चौरासी कोसी यात्रा पर रोक लगा दी है, इस रोक के साथ ही राममंदिर निर्माण का मुद्दा भी अब फिजाओं में तैरने लगा है। मुलायम सिंह यादव से विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं की मुलाकात को लेकर मुलायम सिंह यादव के दिल के लगे और वरिष्ठ सहयोगी आज़म खान नाराज है।

आज़म खान क्यों नाराज है ये किसी से छुपा नहीं वजह साफ़ है आज़म खान का मानना है, मुलायम सिंह यादव की विहिप के संयोज़क अशोक सिंघल की मुलाकात ने मुसलमानों को सकते में डाल दिया है, मुस्लिम बाबरी मस्जिद ध्वस्त होने का जिम्मेदार सिंघल को ही मानते है। 

आज़म खान की नाराजगी जायज है, मुलायम सिंह यादव हिन्दुओ की गोद में जाकर बैठ जाए ये खुद आज़म खान और मुस्लिम समुदाय को गंवारा नहीं है। 2012 के विधानसभा चुनाव में जिस तरह मुस्लिम समुदाय ने सभी विकल्पों को छोड़कर समाजवादी पार्टी का साथ दिया था उससे वो समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव पर अपना हक समझते है। 

हाल में ही विश्व हिन्दू परिषद् के नेताओं ने अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए चौरासी कोसी परिक्रमा करने के लिए अनुमति मांगी थी ये परिक्रमा करीब 375 किलोमीटर की होनी थी जो अयोध्या से लगी 6 जिलों की सीमाओं से होकर गुजरनी थी। सरकार ने पहले आदर के साथ विहिप नेताओं को मलने के लिए बुलाया और करीब डेढ़ घंटे तक इस मामले में विचार विमर्श किया। 

मुलायम सिंह यादव ने इस मामले में विहिप को सहयोग करने का आश्वासन भी दिया लेकिन चौबीस घंटे बीतते ही सरकार ने सभी प्रशासनिक और राजनीतिक पहलुओ पर विचार करने के बाद इस यात्रा को साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला और नई परम्परा को डालने वाला कहते हुये प्रतिबंधित कर दिया। 

विश्व हिन्दू परिषद की राममंदिर निर्माण के लिए की गई इस नई पहल को प्रदेश सरकार ने एक तरह से फुस्स करते हुये अपने मुस्लिम वोट बैंक को सहेजने का काम कर लिया। सरकार के इस फैसले ने आने वाले दिनों में नई संघर्ष की जमीन भी तैयार कर दी। विहिप के पर्तिनिधि मंडल में गए स्वामी चिन्मयानन्द ने मुलायम सिंह यादव के ऊपर संत समाज से धोखे का आरोप लगा दिया है। 

विहिप ने अपनी चौरासी कोसी यात्रा के कार्यक्रम को यथावत रखते हुये साफ़ कर दिया की ये यात्रा अब होकर रहेगी। इस यात्रा के देखे जाए तो कई मायने है, लोकसभा चुनाव करीब है जिन 6 जिलों से यात्रा गुजरने वाली है उनमे करीब एक दर्जन से ज्यादा लोकसभा की सीटे है जो मंदिर आन्दोलन को आगे बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

सरकार द्वारा प्रतिबन्ध और विहीप का चौरासी कोसी परिक्रमा के लिए अड़ जाना प्रदेश की राजनीतिक समीकरण को बदलने वाला साबित हो सकता है। प्रदेश की राम मंदिर मुद्दे पर बदलती स्थिति ने अन्य दलों के डर को भी उजागर कर दिया है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने कहा लोकसभा चुनाव के मद्दे नज़र सपा और भाजपा प्रदेश के सियासी समीकरण को बदल कर अपने पक्ष में करना चाहती है। 

मायावती का डर जायज भी है, प्रदेश के राजनीतिक इतिहास पर नज़र डाली जाए तो जब जब समाजवादी पार्टी या भाजपा सत्ता में रही है दोनों पार्टियों को जबर्दस्त सियासी फायदा हुआ है। अब एक बार फिर राममंदिर मुद्दे को लेकर मुलायम सिंह यादव की पहले हाँ फिर ना ने हिन्दू संगठनो में उबाल ला दिया है। 

मुलायम सिंह यादव प्रदेश की राजनीति को समझने वाले सबसे बड़े नेता है। मुलायम अपने नफा और नुक्सान का आंकलन तुरंत करते है इसी वजह से उन्होंने सरकारी प्रतिबन्ध के तुरंत बाद कहा राममंदिर मुद्दा उच्चतम न्यायालय में है, और माननीय उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए। 

भाजपा ने अभी इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं बोला लेकिन प्रदेश की बदलती राजनीतिक स्थिति खुद बा खुद उसके पक्ष में राजनीतिक माहौल पैदा कर रही है। अभी कुछ दिन पहले ही भाजपा के प्रदेश प्रभारी और नरेन्द्र मोदी के करीबी अमित शाह ने अयोध्या जाकर राम लल्ला के दर्शन किये और उन्होंने राममंदिर निर्माण की बात छेड़ पुराने मुद्दे को हवा दे दी। 

प्रदेश की सियासत बदल रही है आज़म खान ने मुलायम से अपनी नाराजगी को दिखा दिया है साथ ही सही समय पर बयान देकर अपने को मुस्लिमों का सच्चा रहनुमा भी साबित कर दिया है। उधर विहिप भी नाराज हो चला है मुलायम सिंह यादव के मदद के आश्वासन के बाद मुकरने ने विहिप की मुहीम को और धार दे दी है, लेकिन इन सब के पीछे एक बात साफ़ हो गई है प्रदेश की राजनीति की जमीन पर शतरंज की नई बिसात बिछ चुकी है। 

अयोध्या एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है आनेवाले समय में देखने वाली बात ये होगी की मुलायम या भाजपा कौन इस मुद्दे को भुनाकर अपनी राजनीति को शिखर पर ले जाता है।

Monday, 19 August 2013

गोकुलाष्टमी मनाएंगे मुंबई के डब्बावाले

मुंबई के प्रसिद्ध डब्बावाले इस गोकुलाष्टमी (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) पर एक नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। वे इस वर्ष गोकुलाष्टमी मनाने जा रहे हैं। यह जानकारी भोजन आपूर्तिकर्ताओं द्वारा गठित इस संस्था के एक नेता ने दी है। अपने 123 वर्षो के इतिहास में पहली बार डब्बावालों ने 28-29 अगस्त को गोकुलाष्टमी मनाने की योजना बनाई है।

डब्बावाले 28 अगस्त की अर्ध रात्रि से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाएंगे और अगले दिन 29 अगस्त को बड़ा समारोह आयोजित करेंगे। नूतन मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लायर्स ट्रस्ट (एनएमटीबीएसटी) के अधिकारी सुभाष तालेकर ने कहा, हम सालभर होने वाले करीब सभी सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हम कभी गोकुलाष्टमी समारोह में शामिल नहीं हुए। हमारे सदस्यों द्वारा लगातार मांग करने पर, हम पूरे उत्साह के साथ यह त्योहार मनाएंगे। 

तालेकर ने बताया कि दक्षिण मुंबई में होने वाले कार्यक्रम के लिए प्रख्यात हस्तियों के साथ ही साधारण लोगों और डब्बावालों के परिवारों को समारोह में आने के निमंत्रण भेजे जा रहे हैं।वर्तमान में करीब 5,000 की संख्या वाले ये प्रसिद्ध डब्बावाले पूरे शहर में साल भर हर मौसम में कार्यालयों में डिब्बाबंद खाना पहुंचाने और अपनी दक्षता के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं। यही नहीं ये कई अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन और अनुसंधान के लिए अध्ययन का विषय रह चुके हैं।

धर्मनिरपेक्षता की अनोखी मिसाल

पिछले 100 वर्षो के अपने जीवनकाल में सिनेमा ने, खासकर हिंदी सिनेमा ने फिल्मों के सार तत्व को बेहतर तरीके से परिभाषित किया है। फिल्मकार मनमोहन देसाई की 1977 में आई फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' ऐसी ही बेहतरीन फिल्मों का एक उदाहरण है। 

अपनी जबरदस्त व्यवसायिक सफलता से इतर यह फिल्म भारतीय राष्ट्रवाद के मूल में निहित बहुलतावाद और आश्चर्यजनक समन्वयन का संदेश देने में कामयाब रही थी। देसाई ने बड़ी ही खूबसूरती से फिल्म में मुखर और स्पष्ट तरीके से तीन अलग-अलग धर्म समुदायों में जन्मे और पले-बढ़े युवकों के बीच गहरी मित्रता और सौहार्द्र को दिखाया है।

आज जब टीवी पर अतिशयोक्ति पूर्ण विचारों वाले लोग 'हिंदू राष्ट्रवाद' का मतलब अपने-अपने तरीके से बखानने में लगे हैं, 'अमर अकबर एंथनी' जैसी फिल्म को फिर से देखा जाना काफी उपयोगी सिद्ध हो सकता है। अनुभवी पत्रकार और लेखक सिद्धार्थ भाटिया की आने वाली पुस्तक 'अमर अकबर एंथनी-मसाला, मैडनेस एंड मनमोहन देसाई' फिल्म के धर्मनिरेक्ष स्वर और रंग के बारे में बात करती है।

भाटिया ने एक साक्षात्कार में कहा, मनमोहन देसाई अपने संदेश को जबरदस्ती लोगों तक नहीं पहुंचा रहे थे, बल्कि उनकी फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' खुद ही एक संदेश थी। हिंदी सिनेमा ने भारत की धर्मनिपेक्षता की नीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और 'अमर अकबर एंथनी' इसका एक उदाहरण है।

भाटिया से यह पूछे जाने पर कि उनके अनुसार फिल्म के तीन मजबूत पक्ष कौन-कौन से हैं, उन्होंने कहा, "फिल्म कहीं पर भी उबाऊ नहीं है, इसकी गति कहीं भी धीमी नहीं पड़ती। आज 40 साल बाद भी फिल्म उतनी ही ताजा और नई है। क्या आज कोई फिल्म ऐसी है, जो आज से 40 साल बाद भी आपको नई लगे। फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' आप आज भी देखें तो फिल्म आपको हंसाने में सक्षम है।