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Tuesday, 27 August 2013

परीछा चिमनी काण्ड : 600 करोड़ के घोटाले की जवाबदेही किसकी

बसपा सरकार के दौरान 24 मई 2010 को परीछा थर्मल पावर कारपोरेशन झाँसी में गिरी निर्माणाधीन चिमनी ने उस समय की राजनीति को गर्म कर दिया था। तात्कालिक बहुजन समाज पार्टी की सरकार की मुखिया मायावती ने इस घटना में दोषी कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे, NBCCL ही परीछा में बन रही इस 263 फीट ऊँची चिमनी का निर्माण कर रही थी। चिमनी गिरने के से उस घटना में पांच मजदूरों की मौत हुई थी वही करीब सौ मजदूर घायल हो गए थे। मायावती ने तात्कालिक ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय और पावर कारपोरेशन के एमडी नवनीत सहगल को इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे। 

इस घटना का एक पक्ष लेकिन पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा था वो सिर्फ बिजली विभाग का जिम्मा संभाले तात्कालिक मंत्री , मुख्य प्रबंध निदेशक और यूपी थर्मल पावर जेनेरेशन कॉर्पोरेशन के चेयरमैन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अलोक टंडन जानते थे। इन सभी जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं और अधिकारियो ने लाशो का भी सौदा करने में गुरेज नहीं की। इस चिमनी के निर्माण के टेंडर से लेकर इसके गिरने तक और जांच में भी खेल हुआ। अधिकारियों ने अपनी जेबे भरने और अपने उन लोगो को फ़ायदा पहुंचाने के लिए चिमनी के गिरने के बाद इंश्योरेंस क्लेम को करा कर पैसे की बन्दर बाँट करने क भी कोशिश की। 

इस पूरे काण्ड में चिमनी का निर्माण करने वाली कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) और नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन और तत्काल्क बसपा सरकार में बैठे नेताओं और बड़े अधिकारियों ने करीब 600 करोड़ रुपयों की उत्पादन क्षति के साथ पूरे मामले में एक आपराधिक साजिश रची और टेंडर में भी घोटाले को अंजाम दिया था। इस चिमनी के ठेके को पाने के लिए दो बड़ी निर्माण कंपनियों ने टेंडर डाले थे जिसमें मेसर्स गैमन और मेसर्स NBCCL नई दिल्ली के बिड पड़े थे। जब टेंडर खोला गया तो गैमन का न्यूनतम बिड 38 करोड़ रुपये था वही NBCCL का बिड 44 करोड़ रुपये निकला। बिड खुलने के बाद अधिकारी सकते में थे वजह साफ़ थी इस ठेके को NBCCL को देने के लिए अध्यक्ष स्तर के अधिकारी आलोक टंडन ने पहले ही अपने अधिनस्थ अधिकारियों से कह रखा था।। 

टेंडर खुलने के बाद सकते में आये अधीकारियों ने टेंडर NBCCL को देने के लिए नियमों और शर्तो में भरी बदलाव कर दिया। ब्रिक फ्लू को बदलकर ऊपर से लटके पाइप के फ्लू लगाकर व नीवं की मोटाई को बदलकर हल्का और पतला कर दिया गया था। अधिकारियों ने इस काम को NBCCL को देने और राजधानी में बैठे अपने आकाओं को खुश करने के लए वो सभी काम किये जिसने 24 मई 2010 को चिमनी गिरने की घटना को अंजाम दिया। यही से इस घोटाले क शुरुवात हो गई। इस ठेकों को NBCCL को देने के लिए अधिकारीयों ने एक उच्चस्तरीय साजिश को अंजाम दिया जिसमें दोबारा मेसर्स गैमन से रेट लिया गया, जबक तथ्यों के हिसाब से ये सह बात नहीं थी, इस ठेके के लिए सरकार में बैठे ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय और तात्कालिक अध्यक्ष आलोक टंडन ने अधिकारियों के ऊपर दबाव डालकर दोबारा टेंडर कराया और नए टेंडर में ये दिखाया गया कि मेसर्स नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) का रेट मेसर्स गैमन के रेट 38 करोड़ के सापेक्ष 31 करोड़ है। वही अधिकारियों की साजिश ने गैमन के मूल टेंडर को ही गायब करा दिया। 

ऊपर टेंडर की प्रक्रिया चल रही थी वह दूसरी तरफ नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (NBCCL) और ए स्वायल ने स्थलीय परिक्षण कर चिमनी के नीव का नक्शा बदल कर नई ड्राइंग प्रस्तुत कर दी, जिसमें 45.7 मीटर की गोलाकार रेक्ट 4. 57 मीटर मोटाई तथा 462 पाईल के साथ इस ठेके के सलाहकार मेसर्स नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (NTPC) को सौंप दी। इन सबके बीच जहा अभी तक परदे के पीछे रहकर तात्कालिक ऊर्जा मंत्री अपनी भूमिका निभा रहे थे वो भी प्रत्यक्ष शामिल हो गए। इस ठेके में लूट के लिए उन्होंने तात्कालिक CMD आलोक टंडन को अधकार सौंप दिए आलोक टंडन ने अपने तेज़ दिमाग का इस्तेमाल कर इस काम को अपने विश्वसनीय एन के गुप्ता जो मुख्य अभियंता के तौर पर कार्यरत थे उन्हें लगा दिया। चिमनी के काम और ठेके में आने वाली बड़ी रकम सबके हिस्से में आये इसलिए सभी ने मिलकर 4 -2-2008 को एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई जो नोएडा में हुई थी। 

इस मीटिंग में NTPC , NBCCL और मेसर्स स्टूप कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड मुंबई के अधिकारियों सहित मुख्य अभियंता एन के गुप्ता भी शामिल हुये। इस चिमनी का काम इंजिनयरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कांट्रेक्ट (EPC) के तहत होना था, इस वजह से सभी साजिशकर्ताओं ने मिलकर इस चिमनी की डिज़ाइन और ड्राइंग बदल दिया था। जिसकी मुख्य वजह करोडो का लेनदेन था। इन सभी के साजिश और अपने फायदे को बढाने के लिए इन लोगो ने चिमनी की मोटाई पूर्व में निर्धारित 462 पाईल के स्थान पर बदल कर 330 पाईल कर दी जिसकी ड्राइंग को बना इस चिमनी को असुरक्षित कर दिया जो सीधे तौर पर नियमों के विरुद्ध और साजिश के तहत किया गया। ये सभ काम लखनऊ में बैठे आलोक टंडन के इशारे पर हो रहा था। हालत ये थे की आलोक टंडन के खिलाफ कोई भी आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। आलोक टंडन के इशारे पर रची जा रही स साजिश में सरकार को 600 सौ करोड़ का नुकसान होने जा रहा था।

इस पूरी साजिश में और मेसर्स NBCCL को लाभ पहुंचाने के लिए इस कंपनी के प्राईस शेड्यूल को दिनांक 9-2-2007 को 9.16 प्रतिशत बढ़ा दिया गया जो हाथ से बढ़ाया गया इस बढ़ोतरी की वजह से मेसर्स NBCCL का लाभ 31 करोड़ से बढ़कर 34 करोड़ हो गया। परीछा तापीय परियोजना के महाप्रबंधक डी के अग्रवाल आलोक टंडन के मातहत होने क वजह से उनके ख़ास आदमियों में शुमार करते थे हर महीने आलोक टंडन द्वारा एक तय शुदा रकम डी के अग्रवाल आलोक टंडन को पहुंचाते थे। हालात ये थे की उधर चिमनी का काम चल रहा था इधर ये दोनों अधिकारी अपने अपने हिस्सों के पैसे अपनी तिजोरियों में बंद कर लेना चाहते थे। इसकी वजह साफ़ थी आलोक टंडन के ऊपर उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम का महाप्रबंधक रहते हुये 750 करोड़ के घोटाले में शामिल होने की बात सामने आ गई थी, जिसकी जांच चल रही थी। 

परीछा में 24-5-2010 को निर्माणाधीन चिमनी जिस दिन गिरी थी उस दिन तक चिमनी अभी पूर्ण नहीं हुई थी। लेकिन अधिकारियों और आलोक टंडन के आदेश पर बिना साईट अभियंता से सलाह लिए बिना 1 बजकर 48 मिनट पर चिमनी के ब्वायलर को लाईटअप कर दिया, अधिक गर्म होने से चिमनी से धुंआ निकलने लगा| तापमान इतना बढ़ा की चिमनी धराशाई हो गई और चिमनी की छाँव में बैठकर खाना खा रहे करीब 100 मजदूर दब गए जिनमे पांच की मौत हो गई। चिमनी गिरने की खबर प्रदेश क्या देश में भी आग की तरह फैली सरकार ने आनन फानन में जांच IIT दिल्ली को सौंपी, IIT को जांच सौंपे जाने से अलोक टंडन और उनके साथियों के चेहरे पर शिकन आई लेकिन ये थोड़े समय के लिए ही थी। 

IIT ने अपनी जांच करके रिपोर्ट उसी NBCCL कंपनी को सौंपी जिसको ठेका दिलाने के लिए प्रदेश स्तर के अधिकारियों ने साजिशो का दौर चलाया था। जांच रिपोर्ट में कंक्रीट की स्ट्रेंथ मानक से अधिक पाई गई निर्माण में प्रयोग की गई बालू सीमेंट और स्टील के साथ अन्य सामग्री मानक के अनुसार थी। इस पूरे प्रकरण में सरकारी उच्च पदों पर बैठे आलोक टंडन , डी के अग्रवाल , और एन के गुप्ता ये समझ गए थे की उनके दबाव की वजह से चिमनी से निकलने वाला धुंआ मानको के विपरीत था साथ ही डिजाइन की फेरबदल भी गलत थी। साथ ही हवा के दबाव को रोकने के लिए स्ट्रेक पंख लगाने थे जो उस समय तक नहीं लगाए गए थे। इस पूरी घटना ने NBCCL और NTPC द्वारा नियमो के विरुद्ध किये गए काम को उजागर करके रख दिया। 

चिमनी गिरने के बाद भी इन अधिकारियों के पैसे की हवस समाप्त नहीं हुई इन्होने चिमनी गिरने की घटना के तुरंत बाद हरदुआगंज चिमनी के लिए 8 करोड़ और परीछा की चिमनी के लिए 1 करोड़ का अतरिक्त भुगतान कराकर आपस में बाँट लिया। चिमनी गिरी तो NBCCL ने अपने नुक्सान की भरपाई करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम के लिए दावा किया जिसमें ये लिखा गया कि चिमनी गिरने की घटना मात्र एक दुर्घटना है और ये एक दैवीय आपदा। इस क्लेम को लेने के लिए कंपनी और सरकार ने विचित्र कारण बताये सरकार ने भी NBCCL को क्लेम लेने के लिए आनन फानन में एनओसी जारी कर दी जिसमें भी भारी लेनदेन हुआ था। कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से दिनाकं 29- 08-2011 को एनओसी जारी कर दी गई। 

आज हालत ये है कि मेसर्स NBCCL ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड पर 700 करोड़ का दावा किया है जबकि इसके पहले उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने जेनेरेशन लॉस होने की बात कहते हुए मेसर्स NBCCL पर 502 करोड़ का दावा किया है। विभाग के सूत्रों के अनुसार ये सारा खेल दिल्ली के डिस इन्वेस्टमेंट विभाग में बैठे वरिष्ठ आईएएस आलोक टंडन के इशारे पर हो रहा है। इस पूरे खेल में तात्कालिक बसपा सरकार के मंत्री नेता और बिजली विभाग को चलाने वाले बड़े अधिकारी शामिल है जिसमें आलोक टंडन इस घोटाले और चिमनी के गिरने का मुख्य सूत्रधार के तौर पर सामने आये है। 

आलोक टंडन और उनके सहयोगियों द्वारा किये कए इस घोटाले को उजागर करता हुआ एक पत्र दिनाक 8-8-2013 को जालौन के पूर्व सांसद भानु प्रताप सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के मुख्य प्रबंध निदेशक को भेजा है। इस पत्र में विस्तार से और साक्ष्यों के साथ तथ्य प्रस्तुत किये गए है जो इन आरोपियों को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। देखना ये है कि उत्तर प्रदेश सरकार और महामहिम आलोक टंडन और उनके साथियों पर क्या कार्रवाई करने के आदेश देते है।

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