हिंदुत्व के घोड़े पर सवार मोदी की निगाहें लाल किले पर, मोदी की हालत देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे एच डी देवेगौड़ा जैसी है जो एक प्रांत के मुख्यमंत्री से सीधे देश के प्रधानमंत्री बन बैठे लेकिन उनका विजन और उनकी सोच राज्य से बाहर की नहीं थी।
"देवेगौड़ा जैसा ही हाल है नरेन्द्र मोदी का" मोदी की आलोचना की है शिवसेना के मुखपत्र सामना ने, सामना अपने लेख में लिखता है नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर जो हमला पीएम मनमोहन सिंह पर बोला था उससे ऐसा प्रतीत होता है की उनके केंद्र की सत्ता में आते ही हालात स्वत: ठीक हो जायेंगे।
सामना, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के हवाले से लिखता है, की 15 अगस्त को नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की आलोचना से बचना चाहिए था। सामना साथ में ये भी लिखता है की प्रधानमंत्री ऐसी शख्सियत हैं जिनकी आलोचना होनी चाहिए लेकिन समय और दिन का ध्यान रखना चाहिए था।
सामना ये भी लिखता है नरेन्द्र मोदी ने भुज के लालन कालेज से पीएम मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए कहा की अगर केंद्र और गुजरात में रेस हो तो गुजरात जीत जाएगा, इस बयान के बारे में भाजपा शासित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह क्या सोचते है उनकी भी राय लेंनी चाहिए।
सामना में अपने लेख के माध्यम से शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ये भी लिखते है, मोदी की शैली आक्रामक है जबकि मनमोहन सिंह इस शैली के वाहक नहीं है। अगर आडवाणी कोई बात कहतें हैं तो उसमें अनुभव का समावेश होता है। आडवानी एक देशभक्त और राष्ट्रीय राजनीति के परिचित चेहरे है, उनकी सोच राष्ट्रीय स्तर की और विजन व्यापक है इसलिए आडवाणी और मोदी की सोच में जमीन आसमान का फर्क है।
"देवेगौड़ा जैसा ही हाल है नरेन्द्र मोदी का" मोदी की आलोचना की है शिवसेना के मुखपत्र सामना ने, सामना अपने लेख में लिखता है नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर जो हमला पीएम मनमोहन सिंह पर बोला था उससे ऐसा प्रतीत होता है की उनके केंद्र की सत्ता में आते ही हालात स्वत: ठीक हो जायेंगे।
सामना, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के हवाले से लिखता है, की 15 अगस्त को नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की आलोचना से बचना चाहिए था। सामना साथ में ये भी लिखता है की प्रधानमंत्री ऐसी शख्सियत हैं जिनकी आलोचना होनी चाहिए लेकिन समय और दिन का ध्यान रखना चाहिए था।
सामना ये भी लिखता है नरेन्द्र मोदी ने भुज के लालन कालेज से पीएम मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए कहा की अगर केंद्र और गुजरात में रेस हो तो गुजरात जीत जाएगा, इस बयान के बारे में भाजपा शासित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह क्या सोचते है उनकी भी राय लेंनी चाहिए।
सामना में अपने लेख के माध्यम से शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ये भी लिखते है, मोदी की शैली आक्रामक है जबकि मनमोहन सिंह इस शैली के वाहक नहीं है। अगर आडवाणी कोई बात कहतें हैं तो उसमें अनुभव का समावेश होता है। आडवानी एक देशभक्त और राष्ट्रीय राजनीति के परिचित चेहरे है, उनकी सोच राष्ट्रीय स्तर की और विजन व्यापक है इसलिए आडवाणी और मोदी की सोच में जमीन आसमान का फर्क है।
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