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Monday, 19 August 2013

अखिलेश राज में पिट रही है खाकी

प्रदेश का निजाम बदलते ही, नेताओं, अपराधियों, शोहदों और नेताओं से जुड़े मनबढ़ और अराजक तत्वों के हौसले बुलंद है। समाजवादी सरकार को सत्ता पर काबिज हुये अभी डेढ़ साल हुये है इन डेढ़ सालों में प्रदेश की कानून व्यवस्था भगवान भरोसे हो गई है वजह साफ़ है, प्रदेश पुलिस के काम और काम के जज्बे को प्रदेश सरकार में बैठे नेता अपने यहाँ बंधक बना कर रखे हुए है। जबकि पुलिस विभाग गृहमंत्रालय के अधीन होता है और उत्तर प्रदेश का गृहमंत्रालय खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास है| 

पुलिस का मनोबल गिरा हुआ वजह आज पुलिस पर हमले हो रहे है और पुलिस पीटी जा रही है। हालत ये है कि प्रदेश की सत्ता से जुड़े रसूखदार लोगो के आगे बेबस पुलिस और उसके नियम बौने साबित हो रहे है। आज प्रदेश की सड़कों पर पुलिस का मतलब वर्दी में खड़ा एक आम आदमी जिसे सत्ता में बैठा कोई भी आदमी या उससे जुड़ा शोहदा घंटे की तरह बजा कर निकल जा रहा है। 

प्रदेश पुलिस की हालत सपा सरकार में ऐसी हो गई है की जो शराबी पहले पुलिस की वर्दी देखते ही अपना नशा खो देते थे और रास्ता बदल देते थे आज वो सीधे पुलिस से भिड़ने में अपनी शान समझ रहे है। कोई ओहदे के गुमान में खाकी की गरिमा को तार तार कर रहा है तो कोई वर्दी उतरवाने की धमकी देकर पुलिस को अर्दब में लेने की कोशिश कर रहा है। 

प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस आज सपा नेताओं की बंधक बन गई है, वर्दी नेताओं के आगे झुक चुकी है, नेता जो चाह रहा है वर्दी से करवा रहा ये हाल प्रदेश के सभी हिस्सों का है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बात की जाये तो यहाँ पर शोहदे पुलिस के ऊपर भारी पड़ रहे है। पुलिस चौराहों पर पीटी जा रही है। आज पुलिस की कार्यशैली और उनके खराब रवैये की वजह से कोई भी उनकी मदद को आगे नहीं आ रहा है। 

पुलिस के पीटे जाने की खबर जब उनके अधिकारियों के पास पहुंचती है तो वो अपनी फजीहत से बचने के लए मातहतों को चुप रहने की सलाह देते है। वजह साफ़ है बात बढ़ेगी तो सत्ता के कानो तक पहुंचेगी उसके बाद होने वाले सवालों के जवाब कौन देगा। राजधानी के व्यस्त हज़रतगंज इलाके से लेकर चिनहट मानकनगर तक के पुलिस वालों को शराब कारोबारियों और रसूखदार लोगो से जुड़े लोगो ने पीटा। 

आज पुलिस महकमे में हालत ये है की पीटे जा रहे पुलिस वालों के मुकदमे भी उनके तैनाती वाले थाने में दर्ज नहीं किये जा रहे है, एक तो उनके अधिकारियों का दबाव दुसरे खुद रसूखदार मुक़दमा दर्ज न करने के लिये आलाधिकारियों पर दबाव बना रहे है। हालत इतने खराब हो चुके है की इन घटनाओं से पुलिस का मनोबल जहा टूट रहा है वही कानून के राज पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है। 

पुलिस के महानिदेशक स्तर से सेवानिवृत हो चुके एक बड़े पुलिस अधिकारी का इन घटनाओं पर कहना है, जब तक कानून का राज नहीं रहेगा और पुलिस का इकबाल बुलंद नहीं होगा तब तक लोगो में कानून का डर नहीं रहेगा तब तक ऐसी वारदात होती रहेगी, पुलिस पर इस तरह हो रहे हमले पूरी व्यवस्था पर हमला है।

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