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Friday, 16 August 2013

निदेशक जी मातहत को बचाने में चले गए जेल

 चले थे मातहत को बचाने खुद पहुँच गए जेल, उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में निदेशक से लेकर चपरासी तक के लिए ऊपर से आये आदेश को मानना न मानना उनके ऊपर लागू होता है। अपने अधिकारीयों के आदेश को न मानना सरकारी महकमों के काम का तरीका है लेकिन अब कोर्ट के आदेश को भी दरकिनार करना अधिकारियों का शगल बन गया है। 

इलाहबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर मंडल के पशुधन विभाग के निदेशक डॉ रूद्र प्रताप को तीन दिनों के लिए कोर्ट की अवमानना के आरोप में जेल भेज दिया। निदेशक डॉ रूद्र प्रताप को न्यायालय से ही गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। मामला दो अधिकारियों के स्थानांतरण से जुड़ा हुआ है जिसमें एक अधिकारी का तबादला उन्हें इतना नागवार गुजरा की उन्होंने दुसरे अधिकारी के तबादले को चुनौती देने के लिए कोर्ट में अर्जी डाल दी उसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में इस मामले से जुड़े कागजात जमा न करने पर कोर्ट ने निदेशक पशुधन विभाग डॉ रूद्र प्रताप को जेल की सज़ा सुना दी। 

पूरा मामला पशुधन विभाग देवरिया और गोरखपुर का है। पशुधन विभाग देवरिया में तैनात रविन्द्र प्रताप सिंह का तबादला 12 मई 2012 को गोरखपुर के लिए कर दिया गया था, उनके स्थान पर गोरखपुर में तैनात नागेन्द्र प्रताप सिंह को देवरिया स्थानांतरित किया, 11 माह बाद नागेन्द्र प्रताप सिंह का पुन: तबादला गोरखपुर कर दिया गया। 

तबादले को रविन्द्र सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दे दी, इस अपील में कहा गया नागेन्द्र प्रताप बीते 12 वर्षो से गोरखपुर में तैनात है, देवरिया से इनका दुबारा तबादला दबाव में किया गया। कोर्ट ने रविन्द्र सिंह के पक्ष को सुनते हुये गोरखपुर मंडल के पशुधन विभाग के निदेशक डॉ रूद्र प्रताप को इस प्रकरण से जुड़े दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया। लेकिन निदेशक डॉ रूद्र प्रताप ने प्रकरण से जुड़े कागजात न पेश कर कोई और दस्तावेज पेश कर दिए। 

कोर्ट ने निदेशक की इस हरकत को कोर्ट की अवमानना माना और उन्हें कोर्ट में ही गिरफ्तार कर जेल भेजने के आदेश दे दिए। पुलिस ने डॉ रूद्र प्रताप को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, बाद में डॉ रूद्र प्रताप के वकीलों ने उनकी जमानत याचिका प्रस्तुत की जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।

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