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Tuesday, 20 August 2013

ये "मुलायम" की सियासत है

चुनाव करीब है, उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्व हिन्दू परिषद की प्रस्तावित चौरासी कोसी यात्रा पर रोक लगा दी है, इस रोक के साथ ही राममंदिर निर्माण का मुद्दा भी अब फिजाओं में तैरने लगा है। मुलायम सिंह यादव से विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं की मुलाकात को लेकर मुलायम सिंह यादव के दिल के लगे और वरिष्ठ सहयोगी आज़म खान नाराज है।

आज़म खान क्यों नाराज है ये किसी से छुपा नहीं वजह साफ़ है आज़म खान का मानना है, मुलायम सिंह यादव की विहिप के संयोज़क अशोक सिंघल की मुलाकात ने मुसलमानों को सकते में डाल दिया है, मुस्लिम बाबरी मस्जिद ध्वस्त होने का जिम्मेदार सिंघल को ही मानते है। 

आज़म खान की नाराजगी जायज है, मुलायम सिंह यादव हिन्दुओ की गोद में जाकर बैठ जाए ये खुद आज़म खान और मुस्लिम समुदाय को गंवारा नहीं है। 2012 के विधानसभा चुनाव में जिस तरह मुस्लिम समुदाय ने सभी विकल्पों को छोड़कर समाजवादी पार्टी का साथ दिया था उससे वो समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव पर अपना हक समझते है। 

हाल में ही विश्व हिन्दू परिषद् के नेताओं ने अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए चौरासी कोसी परिक्रमा करने के लिए अनुमति मांगी थी ये परिक्रमा करीब 375 किलोमीटर की होनी थी जो अयोध्या से लगी 6 जिलों की सीमाओं से होकर गुजरनी थी। सरकार ने पहले आदर के साथ विहिप नेताओं को मलने के लिए बुलाया और करीब डेढ़ घंटे तक इस मामले में विचार विमर्श किया। 

मुलायम सिंह यादव ने इस मामले में विहिप को सहयोग करने का आश्वासन भी दिया लेकिन चौबीस घंटे बीतते ही सरकार ने सभी प्रशासनिक और राजनीतिक पहलुओ पर विचार करने के बाद इस यात्रा को साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला और नई परम्परा को डालने वाला कहते हुये प्रतिबंधित कर दिया। 

विश्व हिन्दू परिषद की राममंदिर निर्माण के लिए की गई इस नई पहल को प्रदेश सरकार ने एक तरह से फुस्स करते हुये अपने मुस्लिम वोट बैंक को सहेजने का काम कर लिया। सरकार के इस फैसले ने आने वाले दिनों में नई संघर्ष की जमीन भी तैयार कर दी। विहिप के पर्तिनिधि मंडल में गए स्वामी चिन्मयानन्द ने मुलायम सिंह यादव के ऊपर संत समाज से धोखे का आरोप लगा दिया है। 

विहिप ने अपनी चौरासी कोसी यात्रा के कार्यक्रम को यथावत रखते हुये साफ़ कर दिया की ये यात्रा अब होकर रहेगी। इस यात्रा के देखे जाए तो कई मायने है, लोकसभा चुनाव करीब है जिन 6 जिलों से यात्रा गुजरने वाली है उनमे करीब एक दर्जन से ज्यादा लोकसभा की सीटे है जो मंदिर आन्दोलन को आगे बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

सरकार द्वारा प्रतिबन्ध और विहीप का चौरासी कोसी परिक्रमा के लिए अड़ जाना प्रदेश की राजनीतिक समीकरण को बदलने वाला साबित हो सकता है। प्रदेश की राम मंदिर मुद्दे पर बदलती स्थिति ने अन्य दलों के डर को भी उजागर कर दिया है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने कहा लोकसभा चुनाव के मद्दे नज़र सपा और भाजपा प्रदेश के सियासी समीकरण को बदल कर अपने पक्ष में करना चाहती है। 

मायावती का डर जायज भी है, प्रदेश के राजनीतिक इतिहास पर नज़र डाली जाए तो जब जब समाजवादी पार्टी या भाजपा सत्ता में रही है दोनों पार्टियों को जबर्दस्त सियासी फायदा हुआ है। अब एक बार फिर राममंदिर मुद्दे को लेकर मुलायम सिंह यादव की पहले हाँ फिर ना ने हिन्दू संगठनो में उबाल ला दिया है। 

मुलायम सिंह यादव प्रदेश की राजनीति को समझने वाले सबसे बड़े नेता है। मुलायम अपने नफा और नुक्सान का आंकलन तुरंत करते है इसी वजह से उन्होंने सरकारी प्रतिबन्ध के तुरंत बाद कहा राममंदिर मुद्दा उच्चतम न्यायालय में है, और माननीय उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए। 

भाजपा ने अभी इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं बोला लेकिन प्रदेश की बदलती राजनीतिक स्थिति खुद बा खुद उसके पक्ष में राजनीतिक माहौल पैदा कर रही है। अभी कुछ दिन पहले ही भाजपा के प्रदेश प्रभारी और नरेन्द्र मोदी के करीबी अमित शाह ने अयोध्या जाकर राम लल्ला के दर्शन किये और उन्होंने राममंदिर निर्माण की बात छेड़ पुराने मुद्दे को हवा दे दी। 

प्रदेश की सियासत बदल रही है आज़म खान ने मुलायम से अपनी नाराजगी को दिखा दिया है साथ ही सही समय पर बयान देकर अपने को मुस्लिमों का सच्चा रहनुमा भी साबित कर दिया है। उधर विहिप भी नाराज हो चला है मुलायम सिंह यादव के मदद के आश्वासन के बाद मुकरने ने विहिप की मुहीम को और धार दे दी है, लेकिन इन सब के पीछे एक बात साफ़ हो गई है प्रदेश की राजनीति की जमीन पर शतरंज की नई बिसात बिछ चुकी है। 

अयोध्या एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है आनेवाले समय में देखने वाली बात ये होगी की मुलायम या भाजपा कौन इस मुद्दे को भुनाकर अपनी राजनीति को शिखर पर ले जाता है।

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