फेकू अपने पीक पर है, हमारे पास भी ओबामा है जो देशी है, कुछ ऐसे ही ट्वीट आजकल ट्वीटर पर तैर रहे है। 11 अगस्त को गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के केन्द्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र मोदी की हैदराबाद में आयोजित रैली के बाद इस समय देश में चर्चा और हाट टापिक बने नरेन्द्र मोदी पर सभी भाजपा विरोधी दल हमलावार हो गए है।
यस वी कैन, यस वी विल डू जैसे नारों के साथ अपने चुनावी अभियान की शुरुवात करने वाले नरेन्द्र मोदी पर पहला वार किया कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने , दिग्विजय सिंह ने नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर फेकू करार देते हुये कहा कि वो अपने फ़ार्म में है।
दिग्विजय सिंह यही पर नहीं रुके उन्होंने "यस वी कैन, यस वी विल डू" जैसे नारे को अपनी जनसभा में आये युवाओ से बोलवाने वाले मोदी को देशी ओबामा की संज्ञा से नवाजा। नरेन्द्र मोदी ने हैदराबाद के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में अपनी पांच रुपये वाली रैली में वहा आये युवाओं को अगले चुनाव के लिए जुट जाने का आह्वान करते हुये इन नारों रुपी शपथ को उनसे बोलने के लिए कहा था।
नरेन्द्र मोदी के दावों को गलत करार देते हुये कांग्रेस ने उनपर हमला किया। नरेन्द्र मोदी पर टिप्पणी ना करने की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की हिदायत के बाद भी मोदी की जनसभा को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और रेणुका चौधरी ने जिस तरह हमला बोला उसने मोदी की लोकप्रियता के ग्राफ को बढ़ा दिया।
यस वी कैन को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का नारा बताते हुये कांग्रेस जिस तरह से मोदी के ऊपर हमलावर हुई उसने मोदी और कांग्रेस के बीच चल रही रस्साकसी को उजागर कर दिया। रेणुका चौधरी ने मोदी के ऊपर हमला करते हुये कहा, लगता है मोदी का भाषण किसी अमेरिकन ने लिखा है, अच्छा होता अगर उनका भाषण कोई भारतीय लिखता।
अपने ऊपर नारे की नक़ल का आरोप लगते ही मोदी ने हैदराबाद की रैली के दो दिनों बाद ही अपने द्वारा 2004 में दिये गए भाषण का एक टेप जारी करते हुये इस बहस को नया मोड़ दे दिया, मोदी ने इस टेप के माध्यम से कांग्रेस और पुरे देश को ये बताने की कोशिश की कि उन्होंने उस नारे नक़ल नहीं की बल्कि अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनके द्वारा कहे गए नारे की नक़ल की।
मोदी द्वारा इस टेप के जारी करते ही भारतीय राजनीति और मोदी को लेकर नया तूफ़ान खड़ा हो गया, उक्त नारे को 2008 के चुनाव में ओबामा ने अपनी चुनावी सभाओं में खूब इस्तेमाल किया था। आज उसी नारे को लेकर देश की राजनीति अपने उफान पर। दोनों दल और उसके नेता एक दुसरे को किसी भी मौके पर नीचा दिखाने को लेकर कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ रहे है।
वैसे कांग्रेस को इस मुद्दे पर नरेन्द्र मोदी ने अपने टेप को जारी कर काफी पीछे छोड़ दिया है। अब इसे नरेन्द्र मोदी की सोची समझी सियासत कही जाए या उनकी दूरअंदेशी क्यों की मोदी उस जानर के नेता है जिन्हें इस बात का पता है कि कब वो क्या बोलेंगे और उसका विरोधी पार्टियां क्या उत्तर देगी। मोदी ने अपने यस वी कैन के नारे के साथ ही भारतीय राजनीति को नई बहस की वजह दे दी वही कांग्रेस को उनके ऊपर हमला करके मुंह की खाने की वजह।
यस वी कैन, यस वी विल डू जैसे नारों के साथ अपने चुनावी अभियान की शुरुवात करने वाले नरेन्द्र मोदी पर पहला वार किया कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने , दिग्विजय सिंह ने नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर फेकू करार देते हुये कहा कि वो अपने फ़ार्म में है।
दिग्विजय सिंह यही पर नहीं रुके उन्होंने "यस वी कैन, यस वी विल डू" जैसे नारे को अपनी जनसभा में आये युवाओ से बोलवाने वाले मोदी को देशी ओबामा की संज्ञा से नवाजा। नरेन्द्र मोदी ने हैदराबाद के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में अपनी पांच रुपये वाली रैली में वहा आये युवाओं को अगले चुनाव के लिए जुट जाने का आह्वान करते हुये इन नारों रुपी शपथ को उनसे बोलने के लिए कहा था।
नरेन्द्र मोदी के दावों को गलत करार देते हुये कांग्रेस ने उनपर हमला किया। नरेन्द्र मोदी पर टिप्पणी ना करने की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की हिदायत के बाद भी मोदी की जनसभा को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और रेणुका चौधरी ने जिस तरह हमला बोला उसने मोदी की लोकप्रियता के ग्राफ को बढ़ा दिया।
यस वी कैन को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का नारा बताते हुये कांग्रेस जिस तरह से मोदी के ऊपर हमलावर हुई उसने मोदी और कांग्रेस के बीच चल रही रस्साकसी को उजागर कर दिया। रेणुका चौधरी ने मोदी के ऊपर हमला करते हुये कहा, लगता है मोदी का भाषण किसी अमेरिकन ने लिखा है, अच्छा होता अगर उनका भाषण कोई भारतीय लिखता।
अपने ऊपर नारे की नक़ल का आरोप लगते ही मोदी ने हैदराबाद की रैली के दो दिनों बाद ही अपने द्वारा 2004 में दिये गए भाषण का एक टेप जारी करते हुये इस बहस को नया मोड़ दे दिया, मोदी ने इस टेप के माध्यम से कांग्रेस और पुरे देश को ये बताने की कोशिश की कि उन्होंने उस नारे नक़ल नहीं की बल्कि अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनके द्वारा कहे गए नारे की नक़ल की।
मोदी द्वारा इस टेप के जारी करते ही भारतीय राजनीति और मोदी को लेकर नया तूफ़ान खड़ा हो गया, उक्त नारे को 2008 के चुनाव में ओबामा ने अपनी चुनावी सभाओं में खूब इस्तेमाल किया था। आज उसी नारे को लेकर देश की राजनीति अपने उफान पर। दोनों दल और उसके नेता एक दुसरे को किसी भी मौके पर नीचा दिखाने को लेकर कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ रहे है।
वैसे कांग्रेस को इस मुद्दे पर नरेन्द्र मोदी ने अपने टेप को जारी कर काफी पीछे छोड़ दिया है। अब इसे नरेन्द्र मोदी की सोची समझी सियासत कही जाए या उनकी दूरअंदेशी क्यों की मोदी उस जानर के नेता है जिन्हें इस बात का पता है कि कब वो क्या बोलेंगे और उसका विरोधी पार्टियां क्या उत्तर देगी। मोदी ने अपने यस वी कैन के नारे के साथ ही भारतीय राजनीति को नई बहस की वजह दे दी वही कांग्रेस को उनके ऊपर हमला करके मुंह की खाने की वजह।
No comments:
Post a Comment