उत्तरप्रदेश सरकार ने हाल के दिनों में खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाने के लिए चर्चा में रहीं गौतमबुद्ध नगर की उपजिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को राज्य में पहली तैनाती के महज 10 महीने बाद ही निलंबित कर दिया।
अखिलेश के शासन में पहली निलंबित आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल मामले में सभी राजनीतिक पार्टी अपनी-अपनी रोटियां सेंकने में लगीं है? वहीँ सब राजनीतिक पार्टियों के पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए है। जहाँ सपा नेता निलंबन सही ठहराने को लेकर तरह-तरह की बयानबाजी कर रहे हैं वहीँ कांग्रेस, भाजपा और रालोद बहाली को लेकर न केवल बयान बाजी बल्कि सड़क पर उतरने की तैयारी में है।
आपको बता दें कि अखेलिश सरकार के डेढ़ साल के शासन में में किसी आईएएस अधिकारी के निलंबन का पहला मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री पर अन्य विरोधी पार्टियों का चौतरफ हमला बढ़ता जा रहा है। इस हमले के जवाब में मुख्यमंत्री के मंत्रियों का कहना है कि अधिकारियों का निलंबन तो हर राज्य में हर पार्टी के शासन के दौरान होता है तो दुर्गा के मामले को इतना तूल क्यों दिया जा रहा है। इस सवाल का जवाब तो सपा सरकार को मालूम होना चाहिए। उन्होंने मायावती के शासन में हुए निलंबनो का हवाला दिया।
गौरतलब है कि सबसे अधिक निलंबन मायावती के शासनकाल में लगभग 68 अफसरों को निलम्बित किया गया था। बसपा शासन के दौरान सबसे अधिक आईएएस अफसरों का निलंबन समीक्षा बैठकों और औचक निरीक्षण के दौरान किया गया था। इस दौरान प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया मुख्य सचिव डीएस बग्गा को भी निलम्बित होना पड़ा था।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने शासनकाल में कई प्रमुख सचिवों, सचिवों, मण्डलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों तथा कई जिलों के उप जिलाधिकारियों को निलंबित किया था। इन सब निलंबन के पीछे उचित कारण बता दिए जाते थे लेकिन इस बार मामल कुछ अलग है। निलंबन की सही वजह क्या दीवार गिरना ही थी? या फिर ओमेंद्र खारी के खिलाफ एफआईआर इस निलंबन की वजह बनी?
इस सवाल का जवाब आना बाकी है। प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में दुर्गा शक्ति के निलंबन को लेकर विरोध हो चुकें हैं। अखिलेश सरकार पर उँगलियाँ उठाई जा रहीं हैं। गौरतलब है कि 27 जुलाई 2013 को सरकार ने दुर्गा शक्ति को निलंबित कर दिया। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा के कादलपुर गांव में बन रही एक मस्जिद के निर्माण को अवैध करार देकर उसकी दीवार को गिरा दिया। जिससे इलाके में धार्मिक सदभाव बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसलिए उनका निलंबन जरुरी है, लेकिन इस निलंबन के पीछे क्या कोई साजिश है?
अखिलेश यादव ने अपने इस फैसले को सही ठहराया है। मुख्यमंत्री अखिलेश के मुताबिक, पहले दुर्गा शक्ति को गांव के लोगो सूचित करना चाहिए था। मुस्लिम परिवार के गरीब लोग जो चंदा लेकर के अपनी मस्जिद बनाना चाहते थे दीवाल बनी थी औऱ बिना किसी के साथ विचार विमर्श किये उन्होंने निर्णय ले लिया जिससे सदभाव बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया इसलिए उनका निलंबन जरुरी था।
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने तो दुर्गा नागपाल, केंद्र सरकार, आईएएस एसोसिएशन और मीडिया तक को निशाने पर ले रखा है। उन्होंने मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और दुर्गा नागपाल को नासमझ और ईमानदारी से काम न करने वाला एसडीएम बताया। साथ ही मस्जिद की दीवार गिराने पर माफी मांगने को कहा।
दुर्गा शक्ति के निलंबन की पीछे छिपी कहानी सवालों औऱ जांच का हिस्सा बने हुए थे। तभी इस निलंबन के पीछे साजिश की शंका तब पैदा हुई जब निलंबन के दो दिन बाद ही इलाके के विधायक नरेंद्र भाटी का बयान सामने आया। यूपी एग्रो के अध्यक्ष नरेंद्र भाटी ने भरी सभा में कहा कि 10.30 बजे माननीय अखिलेश जी से बात की और 11 बजकर 11 मिनट पर एसडीएम का सस्पेशन ऑर्डर कलेक्टर के यहां रिसीव हो गय। मैं ये आप लागों को बताने आया हूं जिस औरत ने इतनी बेहूदगी दिखाई वो उस डंडे को चालीस मिनट नहीं झेल पायी। 10.30 से लेकर 11 बजकर 11 मिनट में,41 मिनट में सस्पेंशन का आर्डर छप कर लखनऊ से यहां क्लेक्टर के यहां तामील हो गया।
अखिलेश के शासन में पहली निलंबित आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल मामले में सभी राजनीतिक पार्टी अपनी-अपनी रोटियां सेंकने में लगीं है? वहीँ सब राजनीतिक पार्टियों के पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए है। जहाँ सपा नेता निलंबन सही ठहराने को लेकर तरह-तरह की बयानबाजी कर रहे हैं वहीँ कांग्रेस, भाजपा और रालोद बहाली को लेकर न केवल बयान बाजी बल्कि सड़क पर उतरने की तैयारी में है।
आपको बता दें कि अखेलिश सरकार के डेढ़ साल के शासन में में किसी आईएएस अधिकारी के निलंबन का पहला मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री पर अन्य विरोधी पार्टियों का चौतरफ हमला बढ़ता जा रहा है। इस हमले के जवाब में मुख्यमंत्री के मंत्रियों का कहना है कि अधिकारियों का निलंबन तो हर राज्य में हर पार्टी के शासन के दौरान होता है तो दुर्गा के मामले को इतना तूल क्यों दिया जा रहा है। इस सवाल का जवाब तो सपा सरकार को मालूम होना चाहिए। उन्होंने मायावती के शासन में हुए निलंबनो का हवाला दिया।
गौरतलब है कि सबसे अधिक निलंबन मायावती के शासनकाल में लगभग 68 अफसरों को निलम्बित किया गया था। बसपा शासन के दौरान सबसे अधिक आईएएस अफसरों का निलंबन समीक्षा बैठकों और औचक निरीक्षण के दौरान किया गया था। इस दौरान प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया मुख्य सचिव डीएस बग्गा को भी निलम्बित होना पड़ा था।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने शासनकाल में कई प्रमुख सचिवों, सचिवों, मण्डलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों तथा कई जिलों के उप जिलाधिकारियों को निलंबित किया था। इन सब निलंबन के पीछे उचित कारण बता दिए जाते थे लेकिन इस बार मामल कुछ अलग है। निलंबन की सही वजह क्या दीवार गिरना ही थी? या फिर ओमेंद्र खारी के खिलाफ एफआईआर इस निलंबन की वजह बनी?
इस सवाल का जवाब आना बाकी है। प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में दुर्गा शक्ति के निलंबन को लेकर विरोध हो चुकें हैं। अखिलेश सरकार पर उँगलियाँ उठाई जा रहीं हैं। गौरतलब है कि 27 जुलाई 2013 को सरकार ने दुर्गा शक्ति को निलंबित कर दिया। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा के कादलपुर गांव में बन रही एक मस्जिद के निर्माण को अवैध करार देकर उसकी दीवार को गिरा दिया। जिससे इलाके में धार्मिक सदभाव बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसलिए उनका निलंबन जरुरी है, लेकिन इस निलंबन के पीछे क्या कोई साजिश है?
अखिलेश यादव ने अपने इस फैसले को सही ठहराया है। मुख्यमंत्री अखिलेश के मुताबिक, पहले दुर्गा शक्ति को गांव के लोगो सूचित करना चाहिए था। मुस्लिम परिवार के गरीब लोग जो चंदा लेकर के अपनी मस्जिद बनाना चाहते थे दीवाल बनी थी औऱ बिना किसी के साथ विचार विमर्श किये उन्होंने निर्णय ले लिया जिससे सदभाव बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया इसलिए उनका निलंबन जरुरी था।
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने तो दुर्गा नागपाल, केंद्र सरकार, आईएएस एसोसिएशन और मीडिया तक को निशाने पर ले रखा है। उन्होंने मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और दुर्गा नागपाल को नासमझ और ईमानदारी से काम न करने वाला एसडीएम बताया। साथ ही मस्जिद की दीवार गिराने पर माफी मांगने को कहा।
दुर्गा शक्ति के निलंबन की पीछे छिपी कहानी सवालों औऱ जांच का हिस्सा बने हुए थे। तभी इस निलंबन के पीछे साजिश की शंका तब पैदा हुई जब निलंबन के दो दिन बाद ही इलाके के विधायक नरेंद्र भाटी का बयान सामने आया। यूपी एग्रो के अध्यक्ष नरेंद्र भाटी ने भरी सभा में कहा कि 10.30 बजे माननीय अखिलेश जी से बात की और 11 बजकर 11 मिनट पर एसडीएम का सस्पेशन ऑर्डर कलेक्टर के यहां रिसीव हो गय। मैं ये आप लागों को बताने आया हूं जिस औरत ने इतनी बेहूदगी दिखाई वो उस डंडे को चालीस मिनट नहीं झेल पायी। 10.30 से लेकर 11 बजकर 11 मिनट में,41 मिनट में सस्पेंशन का आर्डर छप कर लखनऊ से यहां क्लेक्टर के यहां तामील हो गया।
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