विश्व हिन्दू परिषद की 25 अगस्त से प्रस्तावित यात्रा को सपा सरकार ने रोक दिया| विहिप से लगायत भाजपा और हिंदूवादी संगठन के नेताओ को उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार ने जगह जगह गिरफ्तार किया। विहिप के नेताओं पर जहां प्रदेश की खुफिया पुलिस ने पहले से नज़र जमा रखी थी, वही सिविल पुलिस इन नेताओं की धर पकड़ में लगातार लगी रही। अशोक सिंघल, प्रवीण तोगडिया, लल्लू सिंह, जैसे नेताओ को पुलिस में हिरासत में लेकर 14 दिनों के लिए जेल में भेज दिया। इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकार की जीत हुई| वही विहिप की प्रस्तावित 84 कोसी यात्रा 84 मिनट भी न टिक सकी।
24 अगस्त की शाम उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए उथल पुथल वाली शाम थी, विहिप के सभी नेता उत्तर प्रदेश सरकार के निशाने पर थे, उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़े पैमाने पर इन नेताओं के यूपी प्रवेश से पहले ही रोक लगाने की तैयारी कर ली थी। अशोक सिंघल और बाहरी प्रदेशों से आने वाले नेताओं को प्रदेश की सीमा से बाहर रोकने के पुख्ता इंतजाम किये गए थे वही अयोध्या के उन मठो और आश्रमों को पुलिस ने अपने रडार पर ले रखा था जो अयोध्या आन्दोलन के केंद्र हुआ करते थे। पुलिस को ये भी खबर लगी थी, की पुलिस और खुफिया अभिसूचना इकाई को चकमा देकर कुछ विहिप कार्यकर्ता और बड़े नेता अयोध्या पहुँच चुके है जिनमे प्रवीण तोगडिया का भी नाम शामिल था।
विहिप ने उस मौखडा गाँव से इस यात्रा की शुरुवात करने की तैयारी की थी जहां पर चौदह साल तक भरत ने भगवान राम का खड़ाऊ रखकर राज चलाया था। इस यात्रा में 200 साधुओ का दल चलता जो एक पडाव से दूसरे पड़ाव तक पहुँच कर इस यात्रा को दूसरे जत्थे को सौंप देता। पुलिस ने इस यात्रा को प्रदेश की सपा सरकार के इशारे पर पूरी तरह से विफल करने की तैयारी कर ली थी। अशोक सिंघल के लखनऊ पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर ही रोक लिया और उन्हें दिल्ली वापस जाने पर मजबूर कर दिया। अशोक सिंघल ने रोकी गई यात्रा का सारा इल्जाम प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और सपा के मुस्लिम चेहरे कहे जाने वाले आज़म खान पर लगाया। अशोक सिंघल ने साफ़ कहा कि इस यात्रा को हरी झंडी खुद मुलायम सिंह यादव ने दी थी लेकिन आज़म खान के बीच में कूदने से मुलायम और प्रदेश सरकार अपने वादे से मुकर गई।
अयोध्या में प्रवीण तोगडिया, पूर्व विधायक लल्लू सिंह, राम विलास वेदांती, परमहंस दास जैसे संतो को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया वही सरयू नदी के उस तट पर भी पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किया जहा से रामभक्त जल भरकर इस यात्रा की शुरुवात करने वाले थे। विहिप की इस यात्रा की हवा निकलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 6 जिलों में ऐसी किसी भी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगा दी जिससे माहौल खराब होने की संभावना हो। उत्तर प्रदेश सरकार ने फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, बस्ती, बलरामपुर, गोंडा और बाराबंकी जिलों में धारा 144 लागू कर दी। सरकार के इस फैसले से इन जिलों में विहिप की चौरासी कोसी क्या अब कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा का आयोज़न बैन हो गया।
विहिप की इस यात्रा से प्रदेश में एक बार फिर रामजन्म भूमि मुद्दा गर्म हो गया जहां ये यात्रा पहले सिर्फ विहिप की एक धार्मिक यात्रा लेकर प्रचारित की गई थी, वही बाद में इसने राजनीतिक रूप ले लिया। भाजपा ने भी इस यात्रा के समर्थन में बोलना शुरू किया। जबकि विश्व हिन्दू परिषद के संयोज़क अशोक सिंघल ने साफ़ किया की ये कोई भी राजनीतिक यात्रा नहीं थी, और ना ही इस यात्रा से किसी को राजनीतिक लाभ पहुँचाने वाला था। लेकिन अशोक सिंघल एक बात कहते है कि उनकी इस यात्रा स एक मकसद हल होने वाला था, वो था की विहिप 300 राम भक्तों को चुनाव के माध्यम से चुन कर संसद भेजना चाहती थी ताकि रामलल्ला तम्बू से निकल कर भव्य मंदिर में विराजमान हो सके।
चौरासी कोसी यात्रा का जो मकसद था उसे विहिप पूरा नहीं कर सकी लेकिन इस यात्रा के रोक कर प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी ने उन मुस्लिम वोटो को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश जरुर कर ली जो चुनाव की घोषणा और केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से कांग्रेस के पक्ष में जा सकती थी। प्रदेश में बीते दो दिनों से इस यात्रा को लेकर चले हाई ड्रामें के बाद दोनों पक्ष अपने अपने मतदाताओं को ये सन्देश देने में जरुर कामयाब रहे की वो अपने मतदाताओं के हित की रक्षा के लिए वो सब करेंगे जो उन्हें केंद्र की सता के करीब ले जाए। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम में विहिप को पहली चोट प्रदेश की अखिलेश सरकार ने दे दी है देखने वाली बात ये होगी की विहिप इस बात को अपने लोगो तक कैसे पहुंचा कर आने वाले समय में फायदा उठाती है।
24 अगस्त की शाम उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए उथल पुथल वाली शाम थी, विहिप के सभी नेता उत्तर प्रदेश सरकार के निशाने पर थे, उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़े पैमाने पर इन नेताओं के यूपी प्रवेश से पहले ही रोक लगाने की तैयारी कर ली थी। अशोक सिंघल और बाहरी प्रदेशों से आने वाले नेताओं को प्रदेश की सीमा से बाहर रोकने के पुख्ता इंतजाम किये गए थे वही अयोध्या के उन मठो और आश्रमों को पुलिस ने अपने रडार पर ले रखा था जो अयोध्या आन्दोलन के केंद्र हुआ करते थे। पुलिस को ये भी खबर लगी थी, की पुलिस और खुफिया अभिसूचना इकाई को चकमा देकर कुछ विहिप कार्यकर्ता और बड़े नेता अयोध्या पहुँच चुके है जिनमे प्रवीण तोगडिया का भी नाम शामिल था।
विहिप ने उस मौखडा गाँव से इस यात्रा की शुरुवात करने की तैयारी की थी जहां पर चौदह साल तक भरत ने भगवान राम का खड़ाऊ रखकर राज चलाया था। इस यात्रा में 200 साधुओ का दल चलता जो एक पडाव से दूसरे पड़ाव तक पहुँच कर इस यात्रा को दूसरे जत्थे को सौंप देता। पुलिस ने इस यात्रा को प्रदेश की सपा सरकार के इशारे पर पूरी तरह से विफल करने की तैयारी कर ली थी। अशोक सिंघल के लखनऊ पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर ही रोक लिया और उन्हें दिल्ली वापस जाने पर मजबूर कर दिया। अशोक सिंघल ने रोकी गई यात्रा का सारा इल्जाम प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और सपा के मुस्लिम चेहरे कहे जाने वाले आज़म खान पर लगाया। अशोक सिंघल ने साफ़ कहा कि इस यात्रा को हरी झंडी खुद मुलायम सिंह यादव ने दी थी लेकिन आज़म खान के बीच में कूदने से मुलायम और प्रदेश सरकार अपने वादे से मुकर गई।
अयोध्या में प्रवीण तोगडिया, पूर्व विधायक लल्लू सिंह, राम विलास वेदांती, परमहंस दास जैसे संतो को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया वही सरयू नदी के उस तट पर भी पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किया जहा से रामभक्त जल भरकर इस यात्रा की शुरुवात करने वाले थे। विहिप की इस यात्रा की हवा निकलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 6 जिलों में ऐसी किसी भी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगा दी जिससे माहौल खराब होने की संभावना हो। उत्तर प्रदेश सरकार ने फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, बस्ती, बलरामपुर, गोंडा और बाराबंकी जिलों में धारा 144 लागू कर दी। सरकार के इस फैसले से इन जिलों में विहिप की चौरासी कोसी क्या अब कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा का आयोज़न बैन हो गया।
विहिप की इस यात्रा से प्रदेश में एक बार फिर रामजन्म भूमि मुद्दा गर्म हो गया जहां ये यात्रा पहले सिर्फ विहिप की एक धार्मिक यात्रा लेकर प्रचारित की गई थी, वही बाद में इसने राजनीतिक रूप ले लिया। भाजपा ने भी इस यात्रा के समर्थन में बोलना शुरू किया। जबकि विश्व हिन्दू परिषद के संयोज़क अशोक सिंघल ने साफ़ किया की ये कोई भी राजनीतिक यात्रा नहीं थी, और ना ही इस यात्रा से किसी को राजनीतिक लाभ पहुँचाने वाला था। लेकिन अशोक सिंघल एक बात कहते है कि उनकी इस यात्रा स एक मकसद हल होने वाला था, वो था की विहिप 300 राम भक्तों को चुनाव के माध्यम से चुन कर संसद भेजना चाहती थी ताकि रामलल्ला तम्बू से निकल कर भव्य मंदिर में विराजमान हो सके।
चौरासी कोसी यात्रा का जो मकसद था उसे विहिप पूरा नहीं कर सकी लेकिन इस यात्रा के रोक कर प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी ने उन मुस्लिम वोटो को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश जरुर कर ली जो चुनाव की घोषणा और केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से कांग्रेस के पक्ष में जा सकती थी। प्रदेश में बीते दो दिनों से इस यात्रा को लेकर चले हाई ड्रामें के बाद दोनों पक्ष अपने अपने मतदाताओं को ये सन्देश देने में जरुर कामयाब रहे की वो अपने मतदाताओं के हित की रक्षा के लिए वो सब करेंगे जो उन्हें केंद्र की सता के करीब ले जाए। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम में विहिप को पहली चोट प्रदेश की अखिलेश सरकार ने दे दी है देखने वाली बात ये होगी की विहिप इस बात को अपने लोगो तक कैसे पहुंचा कर आने वाले समय में फायदा उठाती है।
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