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Tuesday, 2 July 2013

3700 लोगो ने उसे अपना मसीहा बनाया

वो मसीहा है  जेलों में बंद कैदियों का वो मसीहा है उनका जिनको विदेश में पुर्साहाल लेने वाला कोई नहीं उसे मसीहा एक दो लोगो ने नहीं बनाया है बल्कि पुरे 3700 लोगो ने उसे अपना मसीहा भाई , दोस्त और ना जाने किस किस नाम से पुकारा है। 

हम इस रिपोर्ट में आज एक ऐसी शख्सियत के बारे में दुनिया को बताने जा रहे है जिसने इस मतलब परस्त दुनिया में ऐसे  3700 लोगो को एक बार फिर उनकी दुनिया में लौटने का मौक़ा दिलाया है जिसे वो भूल चुके थे। ये मसीहा है दुबई के आभूषण कंपनी के मालिक फिरोज जी मर्चेंट जिनकी पहल से आज ना सिर्फ हिन्दुस्तान के बल्कि कई देशों के सजायाफ्ता कैदी अपने देश, अपने घरों और अपने परिवारों के पास लौट चुके है। 

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय मूल के आभूषण कारोबारी फिरोज जी मर्चेंट ने ऐसे कैदियों की मदद की जो अरब की अलग अलग जेलों में बंद थे और जिन्हें वहा पूछने वाला कोई नहीं था। इन कैदियों में ज्यादातर ऐसे थे जिन्होंने अपनी सज़ा अरब के अलग अलग जेलों में काट भी ली थी लेकिन जुर्माने की रकम न चुका पाने की वजह से सज़ा कटाने के बाद भी जेलों में बंद थे। 

फिरोज जी मर्चेंट ने इन कैदियों की दुर्दशा और उनकी दिक्कतों के बारे में सुना फिरोज का दिल अपने देश के इन निरीह लोगो के लिए पसीज गया और उन्होंने इनकी मदद का बीड़ा उठाया फिरोज ने न सिर्फ उनकी लिस्ट तैयार की बल्कि उन्हें जेल से बाहर निकालने के लिए उन सभी कानूनी पहलुओ पर भी अपने वकीलों से राय ली ताकि उन्हें अरब कानून के मुताबिक़ बाहर निकाला जा सके। 

फिरोज जी मर्चेंट ने ये काम 2011 से शुरू किया और अभी तक 3700 लोगो को कैद से आज़ाद करा चुके है। इस साल करीब 500 कैदी जेल से रिहा किये गए इस पूरी प्रक्रिया में फिरोज जी मर्चेंट का करीब 6 करोड़ रुपया खर्च हो चुका है। फिरोज इस साल करीब 1000 कैदियों का ऋण चुकाने के लिए प्रयासरत है ताकि इन बिछड़े कैदियों की मुलाकात अपनों से हो सके। 

फीरोज का कहना है कि मैंने इन कैदियों के बारे में सुना था, बाद में मैंने जेलों में इनकी दशा को जाकर देखा मुझे ऐसे सैकड़ो कैदी मिले जिन्होंने अपनी सज़ा पूरी कर ली थी, लेकिन वो अपने देश इस लिए वापस नहीं जा पा रहे थे की उन्होंने यहाँ रहते हुए जो कर्ज लिया था उसे चुकता करने के लिए इनके पास पैसे नहीं थे। 

फिरोज जी मर्चेंट का कहना है कि अरब की जेलों में सुविधाये बहुत है लेकिन जेल तो जेल होती है। उनका ये भी मानना है कि कोई अपने परिवार और देश से एक दुसरे देश की जेल में बंद रहे ये उन्हें और उनके परिवार को मंजूर नहीं था इसीलिये उन्होंने इन्हें रिहा करा कर वापस इनके देश भेजने का बीड़ा उठाया। 

फीरोज का ये भी कहना है कि ये सिर्फ उन कैदियों की मदद करते है जो मकान का किराया, कार ऋण, क्रेडिट कार्ड का भुगतान जैसे मामलों में पैसे न चुका पाने की स्थिति में जेल में बंद होते है। उनका मानना है कि उनके स्मगलर, ह्त्या, दुष्कर्म, और नशीले पदार्थो के सेवन करने वाले कैदियों के लिए कोई जगह नहीं है। 

फिरोज जी मर्चेंट का कहना है की उनका दिल तब बहुत दुखता था जब वो अखबारों और टीवी पर ऐसे लोगो की ख़बरों को पढ़ते थे ये वो लोग थे जो अपना सब कुछ दाँव पर लगा कर अरब पैसे कमाने आये थे लेकिन आर्थिक मंदी के दौर में इनकी नौकरियां चली गई थी। 

फिरोज ने इस काम की शुरुवात भारतीय कैदियों को जेलों से रिहा कराने के साथ की थी लेकिन बाद में इन्होने पाकिस्तान, श्रीलंका, मालद्वीप, जैसे देशों के कैदियों को भी उनका ऋण चुका कर बाहर कराया और उन्हें टिकट करा कर उनके देश भेजा। 

फिरोज की ये अनोखी सेवा आज उन्हें भारत सहित कई देशों में एक अच्छे और नेकदिल इंसान के तौर पर पहचान दिला रही है। फिरोज आज भी इस मिशन में लगे हुए है। अरब में निताकत कानून के आने के बाद लाखों लोगो की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। फिरोज आने वाले समय में ऐसे लोगो की मदद करते देखे जा सकते है जिनका इस परदेश में कोई नहीं जो उन्हें उनके बिछड़ो से मिला सके लेकिन फिरोज जी मर्चेंट के रूप में एक मसीहा वहा मौजूद है जो उन्हें उनके घरों का रास्ता दिखा सकता है।    

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