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Wednesday, 3 July 2013

भ्रष्टाचारियों पर मेहरबान सपा सरकार

हम भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों को उनकी सही जगह पहुंचा देंगे। प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ये बयान चुनावों के समय और सरकार बनने के बाद अक्सर सुनाई पड़ता रहता था, लेकिन आज इस सरकार में ईमानदारों को बेइज्जत किया जा रहा है और बेईमानो को गले लगाया जा रहा है। 

प्रदेश के प्रशासनिक महकमें में हलचल पैदा करने वाले प्रांतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हरिशंकर पांडे के साथ जिस तरह सरकार और उनके साहबों ने बर्ताव किया उसने राजनीतिक के साथ पारिवारिक पहलुओ को उजागर कर दिया। हरिशंकर पांडे की गिनती ईमानदार अधिकारियों में होती है लेकिन उनके पारिवारिक रिश्ते आज उन्ही पर भारी पड़ रहे है। 

अखिलेश सरकार का गठन जब हुआ था तब प्रदेश के सभी वर्गो में ये उम्मीद थी कि प्रदेश का ये युवा मुख्यमंत्री फिलहाल किसी भ्रष्टाचारी को गले नहीं लगायेगा और ना ही सरकार के आस पास फटकने देंगे। लेकिन सरकार के करीब सवा साल बीतते ही सरकार और उससे जुड़े लोगो का चेहरा और सच सामने आने लगा। 

अखिलेश सरकार, बसपा सरकार के समय लाइमलाईट में रहे, उन भ्रष्ट लोगो को गले लगा रही है जिनका वजूद आज इस सरकार में खत्म हो जाना चाहिये था लेकिन अखिलेश सरकार ऐसे लोगो को अपने साथ जोड़ने में लगी है जो ऊँचे पदों पर बैठकर पैसा बनाने में माहिर माने जाते है। ऐसा ही एक नाम है संजय मोहन का, जो प्रदेश क्या प्रदेश के बाहर भी भ्रष्टाचार करने में बड़ा नाम माना जाता है।

संजय मोहन को 2011 में हुये TET घोटाले का सूत्रधार माना जाता है। संजय मोहन को फ़रवरी 2012 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने रमाबाई नगर से गिरफ्तार किया था। संजय मोहन के ऊपर TET में पैसा लेकर परीक्षा को आगे बढ़ाने का आरोप है। संजय मोहन के ऊपर ये भी आरोप है कि उसने TET की एक एक सीट का सौदा कर लिया था। 

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निदेशक के पद पर करीब 8 सालों तक अपना खूंटा गाड़ने वाले संजय मोहन ने पूर्वी उत्तर प्रदेश को शिक्षा माफियाओं का गढ़ बना दिया था। संजय मोहन ने जिसकी जेब में पैसा देखा उसी का सगा बन गया या उसे सगा बना लिया। संजय मोहन ने सिर्फ राजधानी लखनऊ में ही कई इंटर कालेज में अपने पैसे लगाये। 

संजय मोहन को करीब से जानने वालों का कहना है कि संजय मोहन की अवैध कमाई का करीब सौ करोड़ रुपया लखनऊ में ही विभिन्न कालेज में लगा हुआ है। संजय मोहन के इस अवैध कमाई के कृत्य में उसके कई साझीदार है जिनमे लखनऊ के कुछ नामी शिक्षण संस्थान भी शामिल है। सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक पूरे प्रदेश में संजय मोहन की करीब 200 करोड़ की सम्पति होने का अनुमान है। 

आज संजय मोहन जमानत करा कर जेल से बाहर आ चुका है। ख़बरों के मुताबिक़, संजय मोहन ने अपने पुराने संबंधो को भुनाकर एक बार फिर सरकार और सपा की गोद में बैठने की तैयारी कर ली है। जेल से रिहा होने के बाद संजय मोहन ने अपनी सपा से नजदीकियों का फायदा उठाने की पूरी तैयारी कर ली है। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर है कि संजय मोहन माध्यमिक शिक्षा परिषद के पाठ्यक्रम तय करने वाली समिति के चेयरमैन पद पर आसीन होने वाला है। 

संजय मोहन को इस पद पर लाने के लिए शिक्षा माफियाओ से लेकर राजधानी में विचरने वाले कुछ तथाकथित वो बड़े नाम है जो यदा कदा सुर्ख़ियों में रहते है साथ ही उससे लाभ लेने वाले कुछ ऐसे लोग लगे है जिन्होंने कभी संजय मोहन को लाभ पहुंचाया होगा और लाभ लिया होगा। ख़बरों के मुताबिक, संजय मोहन को इस पद पर बैठाने के लिए सभी कवायदे पूरी कर ली गई है वहीँ, शासन स्तर से उनके पद पर आसीन होने वाली फ़ाइल फाईनल स्टेज पर पहुँच चुकी है। 

ED की जांच का सामना कर रहे संजय मोहन अब माध्यमक शिक्षा विभाग का पाठ्यक्रम तय करेंगे| साथ ही उन किताब की कंपनियों से करोड़ों रुपये सिर्फ इस बात के लेंगे कि उनकी किताब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों में छात्र-छात्राओं को पढ़ने के लिए लगाई जा सके। 

संजय मोहन की तरह ही तपेन्द्र प्रसाद भी एक चर्चित नाम है जो बसपा सरकार के समय खनन विभाग का निदेशक होने के नाते आये दिन चर्चा में रहता था। पूर्व मंत्री और NRHM घोटाले में जेल में बंद बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी तपेन्द्र प्रसाद भी आजकल अखिलेश सरकार के आँखों के तारे बने हुए हैं|

तपेन्द्र प्रसाद को सरकार ने हाल ही में प्रशासनिक सुधार विभाग में सलाहकार नियुक्त कर लाल बत्ती से नवाज दिया है । तपेन्द्र प्रसाद पर UPSIDC में हुये करोड़ों के घोटाले की जांच चल रही है| तपेन्द्र प्रसाद की जांच SIT कर रही है। अब अखिलेश सरकार दागी तपेन्द्र प्रसाद पर इतनी मेहरबान क्यों है इसकी वजह तो पता नहीं लेकिन इन सभी बातों को देखकर साफ़ पता लगता है की प्रदेश की अखिलेश सरकार भी उसी राह पर है जिस पर पूर्व की बसपा सरकार चल रही थी। 

भ्रष्ट और घोटालों को अंजाम देने के लिये भी अनुभव की जरुरत होती है जो सभी के अन्दर नहीं होता है इस विलक्षण प्रतिभा के धनी कुछ ही लोग होते है जिनमें संजय मोहन, तपेन्द्र प्रसाद और एक नया नाम हाल में ही शामिल हुआ है ललित श्रीवास्तव का। 

ललित श्रीवास्तव शिक्षा विभाग में मामूली बाबू के पद पर तैनात होने वाला शख्स है जो अपनी जोड़तोड़ और चाटुकारिता की वजह से शिक्षा विभाग के चर्चित नामों में शुमार है या ये कहे विख्यात है। ललित श्रीवास्तव की नजदीकियाँ पूर्व निदेशक संजय मोहन से भी है। संजय मोहन ललित श्रीवास्तव के आका के तौर पर जाना जाता है लेकिन परिस्थितिया आज ऐसी है कि संजय मोहन को उसी ललित श्रीवास्तव का सहारा लेना पड़ रहा है जो ललित श्रीवास्तव संजय मोहन की हुक्मउदूली किया करता था। 

सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक संजय मोहन की नई तैनाती में ललित श्रीवास्तव का अहम् किरदार है। ललित श्रीवास्तव ने आज अपना कद इतना बड़ा कर लिया है की संजय मोहन उसी के सहारे दोबारा अपनी पहचान पाने की कोशिश में लगे है। शिक्षा विभाग में मामूली बाबू से अपने नौकरी की शुरुवात करने वाले ललित श्रीवास्तव ने अपनी तेज़ी और जोड़तोड़ से शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों के बीच अपनी पहचान बनाई। 

जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यालय में बाबू की नौकरी करते हुए ललित श्रीवास्तव को पत्रावलियों में हेरफेर का दोषी पाते हुए विभाग ने निलंबत कर दिया था, लेकिन संजय मोहन से अपनी नजदीकियों की वजह से ना सिर्फ ये बहाल हुआ बल्कि इसने अपनी सरकारी नौकरी को लात मार एक प्राइवेट कालेज में शिक्षक की नौकरी कर ली|इसके पीछे की मंशा उस समय लोगो को समझ में नहीं आई। 

लेकिन आज ललित श्रीवास्तव के माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड में सदस्य बन जाने के बाद उसको जानने वाले इसकी जोड़तोड़ और दिमाग के कायल हो गए। संजय मोहन ने अपने एक रिश्तेदार को भी कला के शिक्षक के तौर पर के सेंटेनियल कालेज में पद दिलवा दिया जो संजय मोहन के आदेश से हुआ था। बाद में जांच के बाद नित्यानंद नामक इस शिक्षक को उसके पद से बर्खास्त कर दिया गया। 

शिक्षा विभाग में बाबू रहते और संजय मोहन की सरपरस्ती में ललित श्रीवास्तव ने अकूत धन कमाया जिसका इस्तेमाल उसने अपने कुछ संपर्को को साथ लेकर माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड के सदस्य तक पहुँचने के लिए किया। ललित श्रीवास्तव आज उस कुर्सी पर बैठा हुआ है जहाँ उसे उसके तथाकथित आकाओं को शिक्षक चयन के माध्यम से अरबो रुपयों का वारा न्यारा करने का मौक़ा मिल सकता है। 

आज हालात ये है कि शिक्षा विभाग में कुख्यात ललित श्रीवास्तव की चयन बोर्ड में नियुक्ति को लेकर शिक्षा क्षेत्र से चुनकर आने वाले विधायक और शिक्षा संघों से जुड़े शिक्षक नेता ललित श्रीवास्तव की पात्रता ना होने के बावजूद चयन बोर्ड का सदस्य बनाये जाने को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे है साथ ही अपनी मांग और बात को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कानो तक पहुंचाने के लिए ज्ञापन का सहारा ले रहे है। 

प्रदेश के शिक्षा विभाग ने हाल में ही करीब 6 हज़ार शिक्षकों की भर्ती करने का एलान किया है ये सभी भर्ती माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड के माध्यम से होंगी। सूत्रों के हवाले से ये भी खबर है कि ललित श्रीवास्तव की देखरेख में इस चयन प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। वहीँ, अब सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के लिए पढाई जाने वाली किताबो के चयन का अधिकार सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर छूटे शिक्षा विभाग से अरबो की कमाई करने वाले संजय मोहन के हाथ में देने की तैयारी हो गई है। 

सरकार और खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आये दिन सरकार से काम करवाने के लिए करोड़ों रुपये डकारने वाले तथाकथित लोगो की पैरवी से भ्रष्ट लोगो को ऐसे पदों पर बैठा रहे है, जहाँ इनके कदम पड़ते ही घोटालों और भ्रष्टाचार की नई नीवं पड़ जायेगी। प्रदेश की अखिलेश सरकार, बसपा सरकार के दौरान आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे उन अधिकारियों कर्मचारयों को चुन चुन कर ऐसी जगहों पर क्यों बैठा रही है ये सरकार ही जाने| लेकिन एक वजह तो साफ़ है सरकार की मंशा ऐसे लोगो को जिम्मेदार ओहदों पर बैठाने से साफ़ नहीं लग रही। 

घोटाले और भ्रष्टाचार में मास्टर की डिग्री हासिल कर चुके तपेन्द्र प्रसाद, संजय मोहन, ललित श्रीवास्तव की जरुरत सरकार को इतनी है कि आज उसे प्रदेश में इन जैसे भ्रष्टो के अलावा कोई अधिकारी नज़र नहीं आता। अखिलेश सरकार की इन घोटालेबाजों की नियुक्ति से ये बात साफ़ है घोटाला करके पैसा कैसे कमाया जाता है इस विधा में महारत रखने वाले इन लोगो की जरुरत सरकार को ज्यादा है। 

प्रदेश के लाखों छात्र छात्राओं को अपने चुनावी वादों के मुताबिक आगे की पढ़ाई को हाईटेक तरीके से करवाने के लिए प्रदेश की अखिलेश सरकार लैपटाप और टेबलेट बाँट रही है लेकिन अब सरकार द्वारा ऐसे भ्रष्टो को बड़े ओहदों पर बैठाने से इस योजना में भी धांधली होने की आशंका बढ़ गई है। अखिलेश सरकार को अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरिशंकर पांडे जैसे ईमानदार अधिकारियों की जरुरत है ना की तपेन्द्र, संजय मोहन और ललित श्रीवास्तव जैसे घोटालो में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों की।

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