'नहीं ये आपका स्थान नहीं है ये शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों के लिए आरक्षित है'। माननीय बोले हमें भी राजभवन से भेजी गई चिटठी मिली है। राजभवन में लकझक कलफ किये गए कुर्ते पैजामे में पहुंचे माननीयों को आज इस बात की उम्मीद थी कि नेता जी के इशारे पर लाल बत्ती मिलनी तो तय है।
राजभवन में आज अजीब नज़ारा देखने को मिला जब अखिलेश सरकार के विस्तार के लिए भेजी गई चाय की चिटठी को कुछ माननीय मंत्री पद मिलने का आग्रह पत्र समझ बैठे। सबसे बुरी दशा उनकी हुई जो अपने क्षेत्रों में जनता के बीच गये हुए थे जब उन्हें राजभवन की पाती (चाय के लिये आमंत्रण पत्र) मिला तो उनके निर्वाचन क्षेत्र में हवा फ़ैल गई कि विधायक जी को मंत्री पद मिलने वाला है। अपने क्षेत्रों में गए कुछ माननीय रातो रात राजधानी की राह पकड़ लिये और सुबह राजभवन का रूख कर गये इस उम्मीद में की आज लाल बत्ती में सवार होकर अपनों के बीच वापस जायेंगे।
लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी ऐसे फिरा जैसे नेता जी और टप्पू भईया ने उन्हें वादा किया था लाल बत्ती से नवाजने का, राजभवन में आज नजारा अलग था, जितने माननीय वहां पहुंचे थे किसी को नहीं ये नहीं पता था कि मंत्री पद किसे मिलेगा इस असमंजस की स्थिति में फंसे सभी माननीय आज इस उम्मीद में थे कि उनका नंबर भी लग सकता है।
राजभवन से भेजी गई उस चिट्ठी ने माननीयों को थोड़े समय के लिए ही सही मंत्री बनने का सपना तो दे ही दिया। राजभवन में जब शपथ दिलाने के लिए माननीयो का नाम पुकारा जा रहा था तब अपना नाम नहीं आने पर कुछ को निराशा भी हाथ लगी और कुछ इस उम्मीद में थे कि शायद अगला नाम उनका हो। लेकिन नारद की तरह चपल नारद राय , कैलाश की तरह अटल कैलाश यादव और राम की तरह मर्यादित राममूर्ति वर्मा को लालबत्ती मिली वही नेता जी को खुश करने का ईनाम उस गायत्री प्रजापति को मिला जिन्होंने अमेठी में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
बहरहाल हम तो उन माननीयों के पक्ष में ही खड़े रहेंगे जिन्होंने आज मंत्रिपद ना मिलने पर दिल पे पत्थर रख लिया|वैसे भी कोशिश करने वालों की मदद भगवान के साथ खुद नेता जी भी करते है, लगे रहिये कभी तो लालबत्ती हाथ लगेगी।
राजभवन में आज अजीब नज़ारा देखने को मिला जब अखिलेश सरकार के विस्तार के लिए भेजी गई चाय की चिटठी को कुछ माननीय मंत्री पद मिलने का आग्रह पत्र समझ बैठे। सबसे बुरी दशा उनकी हुई जो अपने क्षेत्रों में जनता के बीच गये हुए थे जब उन्हें राजभवन की पाती (चाय के लिये आमंत्रण पत्र) मिला तो उनके निर्वाचन क्षेत्र में हवा फ़ैल गई कि विधायक जी को मंत्री पद मिलने वाला है। अपने क्षेत्रों में गए कुछ माननीय रातो रात राजधानी की राह पकड़ लिये और सुबह राजभवन का रूख कर गये इस उम्मीद में की आज लाल बत्ती में सवार होकर अपनों के बीच वापस जायेंगे।
लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी ऐसे फिरा जैसे नेता जी और टप्पू भईया ने उन्हें वादा किया था लाल बत्ती से नवाजने का, राजभवन में आज नजारा अलग था, जितने माननीय वहां पहुंचे थे किसी को नहीं ये नहीं पता था कि मंत्री पद किसे मिलेगा इस असमंजस की स्थिति में फंसे सभी माननीय आज इस उम्मीद में थे कि उनका नंबर भी लग सकता है।
राजभवन से भेजी गई उस चिट्ठी ने माननीयों को थोड़े समय के लिए ही सही मंत्री बनने का सपना तो दे ही दिया। राजभवन में जब शपथ दिलाने के लिए माननीयो का नाम पुकारा जा रहा था तब अपना नाम नहीं आने पर कुछ को निराशा भी हाथ लगी और कुछ इस उम्मीद में थे कि शायद अगला नाम उनका हो। लेकिन नारद की तरह चपल नारद राय , कैलाश की तरह अटल कैलाश यादव और राम की तरह मर्यादित राममूर्ति वर्मा को लालबत्ती मिली वही नेता जी को खुश करने का ईनाम उस गायत्री प्रजापति को मिला जिन्होंने अमेठी में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
बहरहाल हम तो उन माननीयों के पक्ष में ही खड़े रहेंगे जिन्होंने आज मंत्रिपद ना मिलने पर दिल पे पत्थर रख लिया|वैसे भी कोशिश करने वालों की मदद भगवान के साथ खुद नेता जी भी करते है, लगे रहिये कभी तो लालबत्ती हाथ लगेगी।

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