बसपा के महासचिव और बड़ी आबादी वाले गरीब मुस्लिमों के रहनुमा कहे जाने वाले मायावती के ख़ास सिपहसलार नसीमुद्दीन सिद्दीकी 1997 से 2012 तक विभिन्न आय स्रोतों से कमाए गए पैसे से करीब बीस गुना ज्यादा पैसा खर्च कर चुके है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ चल रही विजिलेंस की जांच में इन पंद्रह सालों के आय और खर्च का ब्योरा दिया है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी और आम चलन में चलने वाली गणित ने विजिलेंस को भी चक्कर में डाल दिया| नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पंद्रह सालों के दौरान करीब सात साल तक मंत्री पद सुशोभित किया है।
मायावती की सरकार जब जब प्रदेश में बनी नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मंत्री पद दिया गया| मायावती ने अपने इस ख़ास सिपहसलार को अपनी सभी सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा सौंपा था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती की सरकार में 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक उसके बाद 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक फिर जब 2007 में मायावती की पूर्ण बहुमत की सरकार आई तो पांच सालों तक 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक मंत्री पद संभाला।
बीते पंद्रह सालों में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 7 साल तक उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में वरिष्ठ मंत्री के तौर पर काम किया, नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इन पंद्रह सालों के दौरान अपनी आय को करीब 70 लाख बताया लेकिन खर्च करीब 14 करोड़ का किया, जांच एजेंसिया खुद अपनी जांच में इस चक्कर में फंस गई है या नसीमुद्दीन का गणित यहाँ गड़बड़ा गया।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के ऊपर घोटाले और भ्रष्टाचार के तमाम मामले चल रहे है। वहीँ, लोकायुक्त का भी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा नसीमुद्दीन के खिलाफ लोकायुक्त द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट लगातार शासन को भेज रहे है।
बांदा में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ सतर्कता विभाग ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) ई और 13 (2) के तहत कोतवाली में मामला दर्ज किया है। इस मुक़दमे में ये आरोप लगाया गया है की नसीमुद्दीन ने मंत्री पद पर रहते हुये अपने पद का दुरुपयोग करते हुये अनुचित तरीके से 13 करोड़ से ज्यादा को घोटाले करके कमाया।
लोकायुक्त की जांच रपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नसीमुद्दीन के खिलाफ जांच करने की जिम्मेदारी विजिलेंस को सौंपी थी, जांच के बाद ही नसीमुद्दीन पर मुक़दमा दर्ज हुआ।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ चल रही विजिलेंस की जांच में इन पंद्रह सालों के आय और खर्च का ब्योरा दिया है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी और आम चलन में चलने वाली गणित ने विजिलेंस को भी चक्कर में डाल दिया| नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पंद्रह सालों के दौरान करीब सात साल तक मंत्री पद सुशोभित किया है।
मायावती की सरकार जब जब प्रदेश में बनी नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मंत्री पद दिया गया| मायावती ने अपने इस ख़ास सिपहसलार को अपनी सभी सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा सौंपा था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती की सरकार में 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक उसके बाद 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक फिर जब 2007 में मायावती की पूर्ण बहुमत की सरकार आई तो पांच सालों तक 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक मंत्री पद संभाला।
बीते पंद्रह सालों में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 7 साल तक उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में वरिष्ठ मंत्री के तौर पर काम किया, नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इन पंद्रह सालों के दौरान अपनी आय को करीब 70 लाख बताया लेकिन खर्च करीब 14 करोड़ का किया, जांच एजेंसिया खुद अपनी जांच में इस चक्कर में फंस गई है या नसीमुद्दीन का गणित यहाँ गड़बड़ा गया।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के ऊपर घोटाले और भ्रष्टाचार के तमाम मामले चल रहे है। वहीँ, लोकायुक्त का भी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा नसीमुद्दीन के खिलाफ लोकायुक्त द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट लगातार शासन को भेज रहे है।
बांदा में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ सतर्कता विभाग ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) ई और 13 (2) के तहत कोतवाली में मामला दर्ज किया है। इस मुक़दमे में ये आरोप लगाया गया है की नसीमुद्दीन ने मंत्री पद पर रहते हुये अपने पद का दुरुपयोग करते हुये अनुचित तरीके से 13 करोड़ से ज्यादा को घोटाले करके कमाया।
लोकायुक्त की जांच रपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नसीमुद्दीन के खिलाफ जांच करने की जिम्मेदारी विजिलेंस को सौंपी थी, जांच के बाद ही नसीमुद्दीन पर मुक़दमा दर्ज हुआ।

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