कोई कह रहा है इशरत जहां बिहार की बेटी थी तो कोई अपनी राजनीति को चमकाने के लिए इशरत जहां को मुस्लिम बता गुजरात पुलिस और वहां की सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है| वहीँ, गुजरात पुलिस उसे आतंकवादी बता रही है तो देश क शीर्ष एजेंसियों की रिपोर्ट कुछ और कहानी बयान कर रही है| इशरत सही में थी क्या ये सच कभी सामने नहीं आयेगा लेकिन मुम्बई हमले के आरोप में पकड़े गए डेविड कोलमैन हेडली ने एक बेहद चौकाने वाला बयान दिया था वो भी अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी FBI को, जिससे बाद में NIA ने भी हेडली से पूछताछ में दर्ज किया|
देश की राजनीति में दो पार्टियों को आमने सामने खड़ा करने वाले इशरत जहां एन्काउन्टर मामले में नया मोड़ आ गया। मुम्बई अटैक में गिरफ्तार डेविड कोलमेन हेडली के एक बयान को सरकार और देश की शीर्ष जांच एजेंसी अपने आकाओं के आदेश सुने बिना मान ले तो इशरत जहां लश्कर ए तैयबा की फिदायीन थी जो महाराष्ट्र के शिरडी साईं मंदिर, सोमनाथ मंदिर, अक्षरधाम मंदिर को निशाना बनाने वाली थी।
हेडली की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकन जांच एजेंसी ने उससे लम्बी पूछताछ की थी। इसी पूछताछ के दौरान हेडली ने अपने कलमबद्ध बयान में कहा था कि लश्कर के एक शीर्ष कमांडर ने अपनी बातचीत में इस बात को बताया था कि इशरत लश्कर की कमांडर है और उसे भारत में मंदिरों पर हमले के लिए तैयार किया गया है।
भारत की राजनीति और सत्ता तक पहुँचने के लिए किस तरह के हथकंडे देश की शीर्ष राजनीतिक पार्टिया अपना रही है, इशरत जहां एन्काउन्टर से बड़ा उदहारण फिलहाल नहीं मिलेगा| कांग्रेस ने जिस तरह सीबीआई का इस्तेमाल मोदी के खिलाफ किया है उसने इस केस की प्रासंगिकता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। इशरत जहां आतंकवादी थी या नहीं ये जांच एजेंसियों को अपनी जांच के माध्यम से दुनिया के सामने लाना था।
इशरत जहां एन्काउन्टर केस ने केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई के इस्तेमाल करने की बात को सही साबित कर दिया साथ ये भी साबित हुआ केंद्र में बैठी कोई भी पार्टी सीबीआई का इस्तेमाल कर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को परेशान करने का काम भी करती है। इशरत जहां मामले में जिस तरह देश की दो शीर्ष एजेंसिया आमने सामने आई उसने इन एजेंसियों की जांच प्रक्रिया और उनके तालमेल को भी उजागर करके दिया।
इस पूरे मामले में फ़रवरी 2013 में ही इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने सीबीआई को चिट्ठी लिखकर ये सूचित किया था, कि हेडली से पूछताछ के आधार पर ये साबित हुआ है कि इशरत जहां लश्कर की फिदायीन थी। वहीं, NIA ने मुम्बई धमाको के आरोपी हेडली से 2010 में अमेरिका जाकर पूछताछ की थी और 134 पन्नो की अपनी रिपोर्ट तैयार की जिसमें करीब 3 पन्ने इशरत जहां के बारे में थे। बाद में इन तीनो पन्नो को हटा लिया गया।
इशरत जहां एनकाउंटर मामले में केंद्र सरकार का रवैया भी बदलता रहा है। इशरत की मां की सीबीआई जांच की याचिका पर 6 अगस्त 2009 को गृह मंत्रालय ने हलफनामा दिया था कि चारों के आतंकी होने के पुख्ता प्रमाण हैं, इसलिए इस मामले में सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। हालांकि, दो महीने बाद ही तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने नया हलफनामा दाखिल करवाया, जिसमें सीबीआई जांच की सिफारिश की गई।
देश की राजनीति में दो पार्टियों को आमने सामने खड़ा करने वाले इशरत जहां एन्काउन्टर मामले में नया मोड़ आ गया। मुम्बई अटैक में गिरफ्तार डेविड कोलमेन हेडली के एक बयान को सरकार और देश की शीर्ष जांच एजेंसी अपने आकाओं के आदेश सुने बिना मान ले तो इशरत जहां लश्कर ए तैयबा की फिदायीन थी जो महाराष्ट्र के शिरडी साईं मंदिर, सोमनाथ मंदिर, अक्षरधाम मंदिर को निशाना बनाने वाली थी।
हेडली की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकन जांच एजेंसी ने उससे लम्बी पूछताछ की थी। इसी पूछताछ के दौरान हेडली ने अपने कलमबद्ध बयान में कहा था कि लश्कर के एक शीर्ष कमांडर ने अपनी बातचीत में इस बात को बताया था कि इशरत लश्कर की कमांडर है और उसे भारत में मंदिरों पर हमले के लिए तैयार किया गया है।
भारत की राजनीति और सत्ता तक पहुँचने के लिए किस तरह के हथकंडे देश की शीर्ष राजनीतिक पार्टिया अपना रही है, इशरत जहां एन्काउन्टर से बड़ा उदहारण फिलहाल नहीं मिलेगा| कांग्रेस ने जिस तरह सीबीआई का इस्तेमाल मोदी के खिलाफ किया है उसने इस केस की प्रासंगिकता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। इशरत जहां आतंकवादी थी या नहीं ये जांच एजेंसियों को अपनी जांच के माध्यम से दुनिया के सामने लाना था।
इशरत जहां एन्काउन्टर केस ने केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई के इस्तेमाल करने की बात को सही साबित कर दिया साथ ये भी साबित हुआ केंद्र में बैठी कोई भी पार्टी सीबीआई का इस्तेमाल कर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को परेशान करने का काम भी करती है। इशरत जहां मामले में जिस तरह देश की दो शीर्ष एजेंसिया आमने सामने आई उसने इन एजेंसियों की जांच प्रक्रिया और उनके तालमेल को भी उजागर करके दिया।
इस पूरे मामले में फ़रवरी 2013 में ही इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने सीबीआई को चिट्ठी लिखकर ये सूचित किया था, कि हेडली से पूछताछ के आधार पर ये साबित हुआ है कि इशरत जहां लश्कर की फिदायीन थी। वहीं, NIA ने मुम्बई धमाको के आरोपी हेडली से 2010 में अमेरिका जाकर पूछताछ की थी और 134 पन्नो की अपनी रिपोर्ट तैयार की जिसमें करीब 3 पन्ने इशरत जहां के बारे में थे। बाद में इन तीनो पन्नो को हटा लिया गया।
इशरत जहां एनकाउंटर मामले में केंद्र सरकार का रवैया भी बदलता रहा है। इशरत की मां की सीबीआई जांच की याचिका पर 6 अगस्त 2009 को गृह मंत्रालय ने हलफनामा दिया था कि चारों के आतंकी होने के पुख्ता प्रमाण हैं, इसलिए इस मामले में सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। हालांकि, दो महीने बाद ही तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने नया हलफनामा दाखिल करवाया, जिसमें सीबीआई जांच की सिफारिश की गई।

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