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Friday, 5 July 2013

देश की गरीब जनता को मिलेगा भरपेट भोजन

खाद्य सुरक्षा अध्यादेश (फ़ूड सिक्युरिटी आर्डिनेंस) को आखिर केंद्र में बैठी यूपीए-2 ने महामहिम के माध्यम से जनता के बीच ले जाने की कवायद को अंतिम चरण में पहुंचा दिया। केंद्र और कांग्रेस की राजनीति पर नज़र रखने वाले बड़े बड़े विश्लेषकों ने इसे कांग्रेस का चुनावों से पहले "मास्टर स्ट्रोक" माना है। कांग्रेस के इस मास्टर स्ट्रोक को जहां विपक्षी इसे चुनावों से पहले कांग्रेस की वोट पाने की चाल बता रहे है वहीँ, इस अध्यादेश से देश के करोड़ो गरीबों के पेट में रोजाना अन्न का दाना जाना सुनिश्चित हो गया है। 

खाद्य सुरक्षा अध्यादेश (फ़ूड सिक्युरिटी आर्डिनेंस) के माध्यम से कांग्रेस आगामी आम चुनावों को साधना चाहती है। कांग्रेस का 2014 के लोकसभा चुनावों में भला हो ना हो, इस अध्यादेश की वजह से देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली 75 % जनता और शहरी इलाकों में रहने वाली 50 % जनता को अब 6 रुपयें में भर पेट भोजन नसीब हो जायेगा वो भी रोजाना। एक आदमी के लिए भारत सरकार के नेशनल सैंपल सर्वे आर्गेनाईजेशन (NSSO) ने जब महज 17 रुपये में ग्रामीण और 23 रुपयों में शहरी क्षेत्र के लोगो के लिए खर्च का अनुमान लगाया था, तो उन जैसे गरीबों के लिए ये अध्यादेश जीवन के लिये अमृत जैसा साबित होने जा रहा है। 

आंकड़ों के अनुसार, सबसे कम खर्च करने वाली पांच फीसदी आबादी का प्रतिव्यक्ति मासिक खर्च गांवों में 521.44 रुपए है। जबकि शहरों में 700.50 रुपए है। वहीं, सबसे ज्यादा खर्च करने वाली पांच फीसदी आबादी का प्रतिव्यक्ति मासिक खर्च गांवों में 4,481 रुपए हो गया है जबकि शहरों में 10,282 रुपए। एनएसएसओ ने जुलाई 2011 से जून 2012 तक 7,496 गांवों और 5,263 शहरी विकासखंडों में सर्वेक्षण किया। अखिल भारतीय स्तर पर औसत प्रतिव्यक्ति मासिक खर्च ग्रामीण इलाकों 1,430 रुपए और शहरी इलाकों में 2,630 रुपए रहा। एक ग्रामीण के मुकाबले शहरी व्यक्ति औसतन 84 प्रतिशत ज्यादा खर्च करता है। 

हालांकि अलग-अलग प्रदेशों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के औसत खर्च का यह अंतर काफी विविधतापूर्ण रहा। ग्रामीण भारतीयों ने 2011-12 के दौरान खाद्य पर आय का औसतन 52.9 प्रतिशत खर्च किया, जिसमें मोटे अनाज पर 10.8 प्रतिशत, दूध और दूध से बने उत्पादों पर 8 प्रतिशत, पेय पर 7.9 प्रतिशत और सब्जियों पर 6.6 प्रतिशत हिस्सा शामिल है। गैर-खाद्य वस्तुओं के वर्ग में खर्च में घरेलू उद्देश्यों के लिए ईंधन और बिजली (परिवहन खर्च छोड़कर) पर खर्च आठ प्रतिशत, कपड़ा एवं जूता-चप्पल पर सात प्रतिशत, दवा इलाज पर 6.7 प्रतिशत, शिक्षा पर 3.5 प्रतिशत खर्च किया गया।

देश की दो-तिहाई जनता को सस्ते अनाज की गारंटी देने वाले खाद्य सुरक्षा बिल को अध्यादेश के जरिए लागू करने पर केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को मोहर लगा दी थी। यूपीए सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में 3 साल तक चावल 3 रुपये किलो, गेहूं 2 रुपये किलो और मोटा अनाज 1 रुपये किलो देने का प्रावधान है। योजना के लाभार्थी तय करने की जिम्मेदारी केंद्र ने राज्य सरकारों पर छोड़ी है। शर्त ये है कि लाभार्थी परिवार की मुखिया के तौर पर किसी महिला का नाम होना जरूरी होगा।

कांग्रेस जानती है कि विपक्ष के साथ-साथ उसके अपने सहयोगी भी अध्यादेश के राजनीतिक विरोध में हैं। फिर भी कांग्रेस ये खतरा मोल रही है। पार्टी को लगता है कि आम आदमी को हक देने वाली इस योजना का विरोध करना राजनीतिक पार्टियों को भारी पड़ेगा। और शायद भारी पड़ने लगा भी है, कैबिनेट से अपने ही सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की वजह से दो बार पास ना होना कांग्रेस को अखर गया था। कांग्रेस ने इस अध्यादेश को पास कराने के लिए कमर कस ली थी, जो उसने कर भी दिखाया। 

कांग्रेस ने देश के ग्रामीण इलाकों और शहरी इलाकों में रहने वाले गरीबों के थाली तक अन्न पहुंचाने के लिए भारी विरोध भी सहा आज भी उसको सहयोग कर रह पार्टियों के शीर्ष नेता कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोले हुये है। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव इस अध्यादेश के विरोध में खुलकर सामने आ गए है, सपाध्यक्ष का कहना है सरकार पहले के सरकारी अनाज की सुरक्षा कर नहीं पा रही है। उसने अनाज रखने के लिए गोदाम बनवाये नहीं है अब ये अध्यादेश लाकर उसने गरीबों को नया सपना दिखा दिया है। 

कांग्रेस ने इस अध्यादेश के माध्यम से एक साथ ही बहुत कुछ साध लिया, लेकिन इसके पीछे कांग्रेस क जो भी मंशा हो उस्सको किनारे करके अगर देश की शहरी और गरीब जनता को देखा जाए तो अब उनके थालियों तक निवाला पहुंचेगा जरुर। केंद्र सरकार ने योजना को लागू करने का जिम्मा राज्य सरकारों को दिया है, कांग्रेस ने करीब सभी पार्टियों को इस योजना में उनके न चाहते हुये शामिल कर लिया। राज्यों में सरकार चला रही पार्टिया अगर इस योजना को सही तरीके से मूर्त रूप नहीं देती और शिकायते आती है तो कांग्रेस चुनाव में इसको इस्तेमाल कर सकती है। 

कांग्रेस देश के करीब 80 करोड़ की जनता के सामने ये कह सकती है कि हमने आपके खाने का इंतजाम किया था राज्य में शासन कर रही पार्टी केंद्र की योजनाओं को आप तक पहुंचने में रोड़ा अटका रही है। कांग्रेस के इस मास्टर स्ट्रोक ने गरीबों की थाली और उनके पेट को सरकार द्वारा लागू की जाने वाली इस योजना के माध्यम से भरने की कोशिश शुरू कर दी है।

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