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Friday, 12 July 2013

मोदी का बयान 'एकदम सही काम', सियासत में बवाल

मोदी का बयान उन्होंने 2002 में जो किया, वह बिल्कुल सही था। जब उन्होंने कुछ गलत नहीं किया, तो वह खुद को कसूरवार क्यों मानें। साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने एक हिंदू परिवार में जन्म लिया है, इसलिए मैं हिंदू राष्ट्रवादी हूं। गुजरात में 2002 के दंगों पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की पिल्ले वाली टिप्पणी की सभी राजनीतिक दलों ने पुरजोर निंदा करते हुए उनसे माफी मांगने के लिए कहा है। 

एक साक्षात्कार में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि उन्होंने 'एकदम सही काम' किया था और यहां तक कि यदि कोई पिल्ला भी किसी कार के पहिए के नीचे आ जाए तो उन्हें दुख होता है।

कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने एक बयान में कहा है, हम ऐसी तुलना की भर्त्सना करते हैं। वे राष्ट्र से इसके लिए माफी मांगें। कांग्रेस के मुताबिक, किसी भी सभ्य देश में ऐसी तुलना के लिए कोई स्थान नहीं है और यह टिप्पणी भारत के सदाचार के विरुद्ध है। कांग्रेस ने गुजरात के मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें राजधर्म का पालन करने के लिए कहा था।

माकन ने कहा, चुनाव के पूर्व इस तरह की टिप्पणी क्यों की जा रही है, हम इसे समझने में विफल हैं। मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस महासचिव एवं गुजरात के प्रभारी गुरुदास कामत ने कहा, भाजपा के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा मोदी को दिया गया प्रमाणपत्र अब पूरे देश में वैध हो गया।

समाजवादी पार्टी के कमाल फारूकी ने कहा, यह अत्यंत दुखद, अपमानजनक और विचलित करने वाला बयान है। वे कह रहे हैं कि मुसलमान पिल्ले से भी गए बीते हैं। उन्हें तुरंत राष्ट्र की जनता से माफी मांगनी चाहिए। जनता दल (युनाइटेड) के नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, मैं नहीं समझता कि मोदी मानसिक रूप से स्थिर व्यक्ति हैं। उन्हें मानसिक चिकित्सा की जरूरत है। मोदी की टिप्पणी से ही जाहिर होता है कि उनका सम्मिलित राजनीति में विश्वास नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हालांकि मोदी का बचाव किया है और कहा है कि टिप्पणी की गलत व्याख्या की गई है। भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने कहा, यह कहना निंदनीय है कि मोदी ने एक समुदाय की तुलना कुत्ते से की है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और मैं केवल यही कहना चाहूंगी कि इससे पहले भी कई टिप्पणी की गई और उसकी व्याख्या की गई। लोग पहले साक्षात्कार को पढ़े और देखें कि किस परिप्रेक्ष्य में यह कहा गया है।

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