Translate

Tuesday, 2 July 2013

बिना टेंडर के हुआ बड़ा खेल


उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा ने राजकीय निर्माण विभाग के पूर्व प्रबंध निदेशक सीपी सिंह को बिना निविदा (टेंडर) निकाले कार्य कराये जाने को लेकर दोषी ठहराया है। लोकायुक्त द्वारा जांच के बाद ये तथ्य सामने आये कि तत्कालीन एम डी सीपी सिंह ने निर्माण निगम के ज्यादातर कामो के टेंडर ही नहीं खुलवाये थे। 

लोकायुक्त द्वारा की गई इस जांच के बाद माया सरकार के दौरान और भी विभागों में बिना टेंडर के काम हुये। लोकनिर्माण विभाग, सिंचाई विभाग ऐसे विभाग थे जहाँ टेंडर का पता नहीं रहता था, ठेकेदार और अभियंता अपने में ही काम को बाँट कर कार्य को करते थे।

लोकायुक्त की जांच में जिस सीपी सिंह को बिना टेंडर के काम का दोषी ठहराया गया है| उस विभाग के पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के ऊपर लोकायुक्त की जांच के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वही लोक निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता टी राम आज विधायक बनकर सत्ता के गलियारों में बेख़ौफ़ घूम रहा है। 

बिना टेंडर के काम की जांच में जितना दोषी सीपी सिंह को ठहराया जा रहा है उतना ही दोषी तत्कालीन विभागीय मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी थे। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के करीबी और बसपा के मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सरपस्ती में ही सीपी सिंह ने बिना निविदा खोले राजकीय निर्माण निगम के कामों का आवंटन किया था। 

बसपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इशारे पर ही बिना टेंडर खुले काम बांटने का खेल बसपा सरकार के समय लगातार पांच सालों तक चलता रहा। लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा ने प्रदेश सरकार के पास 22 मई को मायावती सरकार के दौरान बनाये गये स्मारकों, पार्को में हुये घोटाले की जांच रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। 

इस रिपोर्ट में लोकायुक्त ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबु सिंह कुशवाहा सहित 19 लोगो के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने की संतुति की थी लेकिन कार्रवाई के नाम पर सरकार ने कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया। आज भी नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनकी सरपरस्ती में बड़े बड़े घोटालों को अंजाम देने वाले आराम से बाहर घूम रहे है। 

लोकायुक्त ने अपनी ताज़ा भेजी गई रिपोर्ट में सीपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में अभियोज़न चलाने व उनकी पांच साल के दौरान पैदा की गई सम्पतियों की जांच की भी सिफारिश की है। लोकायुक्त ने अपनी संतुति में उनके कार्यकाल के दौरान निर्माण हुई 16 योजनाओं के निर्माण लागत का 12.5 प्रतिशत धन राजकीय निर्माण निगम से वसूलने की भी संतुति की है। 

लोकायुक्त के यहाँ 2012 में लखनऊ निवासी अधिवक्ता अरुणेन्द्र मोहन शुक्ला ने शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें ये आरोप लगाया गया था कि सरकारी मेडिकल कालेजो , पी जी आई , किंग जार्ज मेडिकल कालेज के दन्त संकाय, नवी मुम्बई के गेस्ट हाउस समेत 16 ऐसे निर्माण कार्य हुये जिनका टेंडर नहीं खोला गया। 

ये सभी कार्य निर्माण निगम ने निजी कंपनियों को सौंप दिए, इनकी भू भाग के क्षेत्रफल के हिसाब से तय कर दी गई थी, जिसकी वजह से ठेकेदारों को ख़ासा मुनाफ़ा हुआ ये ,मुनाफा किन किन के बीच वितरित हुआ ये भी जांच का विषय है। 

इन सभी कार्यों में भवनो के नक़्शे और निर्माण कार्य की देख रेख के लिए निजी अभियंताओं की मदद ली गई इन सभी अभियंताओं और वास्तुविदों का चयन तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री के राय से किया गया। ऐसे 16 कार्यों पर 858 करोड़ 95 लाख 19 हज़ार रुपये खर्च किये गए। इन सभी कामो की टेंडर प्रक्रिया ठीक नहीं थी। 

लोकायुक्त ने इस मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने को लिखा है लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल ये है कि लोकायुक्त जस्टिस एन के मेहरोत्रा द्वारा 22 मई को भेजी गई रिपोर्ट का सरकार ने फिलहाल कोई पुर्साहाल नहीं लिया है। 

स्मारकों के निर्माण में 14.10 अरब के घोटाले के लिए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा सहित कुल 199 लोगों को दोषी ठहराते हुए उनसे रकम वसूलने की सिफारिश की है। इसके साथ ही उन्होंने 19 लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराकर मुकदमा चलाने की सिफारिश की है। लेकिन अखिलेश सरकार ने कुछ भी नहीं किया| लोकायुक्त नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि पूर्व मंत्रियों से जुडी सिफारिशों पर सरकार की ओर से समयबद्ध कार्रवाई न होना खेदजनक है। अब तो दोषी पाए लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। सरकार की कार्रवाई से मैं संतुष्ट नहीं हूं।

लोकायुक्त की एक और जांच रिपोर्ट की सिफारिश फिलहाल सरकार के पास भेजी गई है सवाल ये उठाता है की इस मामले में अकेले सीपी सिंह को ही दोषी क्यों ठहराया गया जबकि सीपी सिंह के ऊपर सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी का हाथ था, क्या इस मामले में जांच की सुई नसीमुद्दीन की तरफ नहीं घुमनी चाहिए ?

No comments:

Post a Comment